MUSIC ALBUMS

Namaste
Ratnakar Narale 
Hindi, Sanslrit, Marathi and Bengali Tracks
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Prof. Ratnakar Narale.
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Lyrics or Ratnakar Narale's 48 Music Albums Glorification and Promotion of Indian Arts, Culture, History, Music, Languages, Philosophy, Gita, Ramayan and  Yoga.

Lyrics for Ratnakar Narale's

 48  Music Albums

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(001)

Bharat Mata, Janani Mata, Hindi

भारत माता

माता या सर्वजीवानां बलदा शुभप्रदा.

तां धेनुं शिरसा वन्दे पूज्याममृतदां सदा.

हमें जनम जो देती वो माता है, अरु दूध पिलाती वो माता है.

1

पेट में पाले, लोरी गा ले, प्यार उसी का भाता है.

2

गोद में ले ले, साथ में खेले, भार सहे भू माता है.

3

कामधेनु बन, मन की मुरादें, पूरी करे गौ माता है.

4

गौरी लछमी, सीता शारदा, जनम जनम का नाता है.

5

जनम की भूमि, धेनु जननी, स्वर्ग से ऊँची माता है.

6

कर्मभूमि जो, धर्मभूमि वो, प्यारी भारत माता है.

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(002)

Bharat, Marathi Bhasha-1, Marathi

मधुर भाषा मराठी

वाणी सरस्वती माता, विद्यादेवी ती तथा.

स्वरदा वरदा देवी, शारदा तीच भारती.

 

वाणी मराठी गोड ही, ज्ञानी कवि जन बोलतीं.

देवी सरस्वती ने दिली, उज्ज्वळ मराठी संस्कृति.

1

संस्कृत सुमंगल माउली, देवाधिकांची नागरी.

ज्ञानेश्वरी ची वैखरी, वरदान देतो गणपति.

2

शिवबा तुकोबा सुत जिचे, कन्या जानाबाई जिची.

रक्षक मराठे वीर हे, बोली मराठी धन्य ती.

2

शृंगारमय वाङ्मय जिचे, उच्चार अमृत-पय खरे.

भाषा मराठी आमुची, ही गौरवान्वित भारती.

3

मधुर वाचा आणखी, ऐसी जगी कीर्ति तुझी.

टेकोनि मस्तक भक्ति ने, अर्पण तुला ही आरती.

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(003)

Bharat Mata, Nari Jag ki Rakhavari, Hindi

नारी जग की रखवारी

नारी जग की रखवारी, कुल की मंगल फुलवारी.

1

माई बहिना बेटी प्यारी, पत्नी गोरी या न्यारी.

फिर भी स्वर्ग से है प्यारी.

2

देवी देवता जानो वनिता, कवि कोविद की कोमल कविता.

भूमि पर स्वर्ग उतारी.

3

सुमन सुगंधित रंगीन वाला, मंजुल मोहक संगीत माला.

मंगल सुंदर सारी,.

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(004)

Bharat Mata, Nari ki Mamata, Hindi

नारी की ममता

नारी ममता की फुलवारी, हर माँ बेटी प्यारी है.

1

क्षमा तितिक्षा, अमृत वाणी, मेधा कीर्ति, देवी भवानी,

हर माता विश्व दुलारी है.

2

तारा द्रौपदी, झाँसी रानी, राधा सीता, मीरा दीवानी,

हर कन्या राजकुमारी है.

3

गंगा जमुना, पावन पानी, सेवा नेहा, प्रेम कहानी,

हर नारी जन हितकारी है.

4

भाभी बहिना, बहू दरानी, मौसी दादी, नानी सयानी,

सुंदर हिरदय, सारी हैं.

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(005)

Bharat Mata, Operation Sindoor, Part-1, the Challenge.

ऑपरेशन सिंदूर-1, चुनौति

जाओ . . . . .

माता पुकारे, जाओ. जाओ, तुमको वतन बुलाए,

वीर जवान हमारे. जाओ माता पुकारे, जाओ.

1

आबरू देश की बैरी लीन्हो, स्वाभिमान को जागृत कीन्हो,

प्राणों को कर अर्पण प्यारे, जीतो या फिर स्वर्ग के द्वारे.

जाओ माता पुकारे, जाओ तुमको वतन बुलाए,

वीर जवान हमारे, जाओ माता पुकारे, जाओ.

2

शोले बारूद गोले खेलो, शस्त्र अस्त्र सब हँस कर झेलो,

विजय पताका हाथ में ले लो, जय जय माता भवानी बोलो.

जाओ माता पुकारे, जाओ तुमको वतन बुलाए,

वीर जवान हमारे, जाओ माता पुकारे, जाओ.

3

याद करो शहीदों की होली, खेली थी जिन्ह माता काली,

रणचंडी से आँख मिचौली, राणा शिवाजी झाँसी वाली.

जाओ माता पुकारे, जाओ तुमको वतन बुलाए,

वीर जवान हमारे, जाओ माता पुकारे, जाओ.

4

कार्य परायण आर्यों जागो, धर्म नीति से कर्म निभाओ,

त्याग इसी में याग मनाओ, भवानी का भगवा फहराओ.

जाओ माता पुकारे, जाओ तुमको वतन बुलाए,

वीर जवान हमारे, जाओ माता पुकारे, जाओ.

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(006)

Operation Sindoor, Part-2, the Strike.

धमाका

[Intro]

मारो - - -

मारो, तीर निशाने मारो, वीर सिपाह हमारे,

डारो, ब्रह्म अस्त्र शर ठीक ठिकाने डारो,

मारो, तीर निशाने मारो, वीर सिपाह हमारे.

1

जानो दुशमन कहाँ छुपे हैं, आतंकी किस बिल में रुके हैं,

अड्डे सभी उड़ाओ, जाओ,

डारो, ब्रह्म अस्त्र शर ठीक ठिकाने डारो,

मारो, तीर निशाने मारो, वीर सिपाह हमारे, जाओ.

2

प्रहार कोई चूक पाए, शत्रु कहीं भी भाग पाए,

सभी पड़ाव उजाड़ो, जाओ,

डारो, ब्रह्म अस्त्र शर ठीक ठिकाने डारो,

मारो, तीर निशाने मारो, वीर सिपाह हमारे, जाओ.

3

बेकसूर नर मरे कोई, न्याय नीति से परे कोई,

सब्र से कदम उठाओ, जाओ,

डारो, ब्रह्म अस्त्र शर ठीक ठिकाने डारो,

मारो, तीर निशाने मारो, वीर सिपाह हमारे, जाओ.

4

भारत माँ के आप पूत हों, यम के गोचर आप दूत हों,

भद्र जनों को तारो, अनहोनी को टारो, जाओ,

डारो, ब्रह्म अस्त्र शर ठीक ठिकाने डारो,

मारो, तीर निशाने मारो, वीर सिपाह हमारे, जाओ.

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(007)

Operation Sindoor, Part-3, the Victory.

विजय

[Intro]

जय हो - - -

जय हो, वीर शहीद हमारे, जय हो,

अर्पण करके प्राण पियारे, प्रण हैं पूर्ण तिहारे,

जय हो, वीर जवान हमारे, जय हो,

जय हो, वीर शहीद हमारे, जय हो.

1

जिन माता पत्नी भगिनी के, सिंदूर मिटे माथे के नीके,

कभी भूलेंगे दुख उनके, ना बलिदान तिहारे, जय हो.

जय हो, वीर जवान हमारे, जय हो,

जय हो, वीर शहीद हमारे, जय हो.

2

सुपुत्र तुम हों इस मेदिनी के, आशिष तुम पर शुभ वाणी के,

गौरव तुमरा करके जग में, गाएँ गीत नियारे, जय हो.

जय हो, वीर जवान हमारे, जय हो,

जय हो, वीर शहीद हमारे, जय हो.

3

वृष्टि सुमंगल तुम पर बरसे, अमृत की पावन अंबर से,

भारत माता तुम्हें सराहे, वीर शहीद पियारे, जय हो,

जय हो, वीर जवान हमारे, जय हो,

जय हो, वीर शहीद हमारे, जय हो.

जय हो- -, जय हो- -, जय हो- -, जय हो- -,

जय हो- -, जय हो- -, जय हो- - -.

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(008)

Bharat Mata, Rashtra Bhasha Hindi

राष्ट्रभाषा हिन्दी

वाणी सरस्वती की, है देन गणपति की.

उज्ज्वल ये संस्कृति की, हिन्दी है राज्यभाषा.

हिन्दी है राष्ट्रभाषा.

1

सुनने में है लुभानी, गाने में है सुहानी,

सबसे मधुर ये जानी, ब्रह्मा इसे तराशा.

हिन्दी है राज्यभाषा. हिन्दी है राष्ट्रभाषा.

2

संस्कृत की ये सुता है, ऊर्दू की ये मीता है,

मंगल सुसंगीता है, सुंदर ये हिन्दी भाषा.

हिन्दी है राज्यभाषा. हिन्दी है राष्ट्रभाषा.

3

हिन्दी ये वो जुबाँ है, जिस पर सभी लुभाँ हैं,

दुनिया का हर सूबा ही, हिन्दी का है निबासा.

हिन्दी है राज्यभाषा. हिन्दी है राष्ट्रभाषा.

4

मनहर गुलों की क्यारी, बोली सभी से न्यारी,

हिन्दी है सबको प्यारी, चाहे जो हो लिबासा.

हिन्दी है राज्यभाषा. हिन्दी है राष्ट्रभाषा.

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(009)

Bharat Rashtra Geet, Hindi

दादरा ताल

भारत राष्ट्रगीत

[Group Singing]

कर्मभूमि ये भारत हमारा, सारी दुनिया में हमको है पियारा.

इसका इतिहास सुंदर नियारा, दिव्य भारत हमारा जियारा.

कर्मभूमि ये भारत हमारा, सारी दुनिया में हमको है प्यारा.

1

इसकी धरती में गुण कोटिकोटि, इसके सिर पर हिमालय की चोटी.

इसकी नदियाँ हैं अमृत की धारा, इसके पग में समुंदर किनारा.

कर्मभूमि ये भारत हमारा, सारी दुनिया में हमको है प्यारा.

2

देवभूमि ये परमातमा की, दिव्य शांति यहाँ आतमा की.

वसुधैव कुटुंबं पुकारा, विश्वका अग्रणी देश हमारा.

कर्मभूमि ये भारत हमारा, सारी दुनिया में हमको है प्यारा.

3

इसकी आभा है अंबर की ज्योति, चाँद सूरज हैं कुंडल के मोती.

रम्य अनुपम है इसका दीदारा, विश्व का है ये उज्ज्वल सितारा.

4

इसकी वायु में सौरभ घनेरा, इसका मंगल है साँझ और सवेरा.

इसमें आनंद है अद्भुत अपारा, ये है कुदरत का मनहर नज़ारा.

5

मोर कोयल पपीहे हैं गाते, टेर कुहू हैं मंजुल सुनाते.

संग सावन का शीतल फुहारा, सारे वतनों में ये है दुलारा.

6

पर नारी यहाँ पर है माता, भाईचारे का सबमें है नाता.

यहाँ इंसानियत का बसेरा, शुभ शांति अहिंसा का नारा.

7

इसकी संतानें हैं वीर ज्ञानी, संत योगी कलाकार दानी.

स्नेह सेवा शराफ़त का डेरा, स्वर्ग से प्रिय है देश मेरा.

स्वर्ग से प्रिय है देश हमारा.

कर्मभूमि ये भारत हमारा, सारी दुनिया में हमको है प्यारा.

जय हो जय हो, तेरी जय हो जय हो,

जय हो जय हो, सदा जय हो जय हो.

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(010)

Bharat Rashtra Geet, Marathi

दादरा ताल

भारत-राष्ट्रगीत

[Group Singing]

भारतं सुंदरं स्वर्णभूमि, आम्हां सर्वांची ही सर्गभूमि.

कर्मवीरांची ही कर्मभूमि, हिला शतवार वन्दे नमामि.

1

राष्ट्र हे कीर्ति सम्पन्न भारी, टोप ह्याचा महत्तम हिमाद्रि.

शीत सरितांचे पावन पाणी, पूज्य संतांची ही पुण्यभूमि.

2

इथे वायूत सौरभ सुगंधी, इथे आकाशपाताळ संधि.

चंद्रसूर्याची कुडलें कानीं, पृथ्वीच्या पाठी ही स्वर्गभूमि.

3

मृग शार्दूल गज उंट प्राणी, मोर कोकीळ मिट्ठूची गाणीं.

हर्ष सौंदर्य श्रावण मासीं, अशी भूमि निसर्गाची राणी.

4

पर दारा इथे वन्द्य माता, पर दादा इथे बंधु तात्या.

सभ्यता नम्रता सर्व अंगी, सौख्य शांति अहिंसा ईमानी.

5

नर नारी इथे वीर ज्ञानी, भक्त योगी कलाकार दानी.

स्नेह सेवा इथे खानदानी, दिव्य तत्त्वांची ही हिंदुभूमि.

माते जय जय तुझी तन-मनानी,

मुलें मंगल तुझी सर्व आम्हीं.

जय हो जय हो, तुझी जय हो जय हो,

जय हो जय हो, सदा जय हो जय हो.

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(011)

Bharat Rashtra Geet, Sanskrit

दादरा ताल

भारत-राष्ट्रगीतम्

[Group Singing]

वामे दक्षिणे यस्या रत्नाकरोस्ति पादयोः,

हिमाद्रिर्मुकुटो शुभ्रो, वन्दे भारतमातरम्.

भारतं कर्मभूमिरस्माकं, भारतं स्वर्गभूमिरस्माकम्.

1

अस्ति राष्ट्रं समृद्धं सुवर्णं, यस्य तुङ्गो हिमाद्रिः किरीटम्,

पीयूषं हि नदीषु नीरम्, पावनं पादयोः सिन्धुतोयम्.

2

देवभूमिः शुचिरीश्वरस्य, दिव्यशांन्तेर्निधानं नरस्य,

वसुधैव कुटुंबं पवित्रम्, विश्वे अर्पयति पुण्यं निधानम्.

3

रविरश्मिः प्रभा यस्य उक्ता, कुण्डले तारका यस्य मुक्ता,

दर्शनम् अस्य देशस्य रम्यम्, वर्णनं सुन्दरं ज्ञानगम्यम्.

4

यत्र सिंहा हरिणा अटन्ति, शुकाः पिका मयूरा रटन्ति,

सर्वभूतेषु प्रीतिश्च सख्यम्, प्रकृतेः रक्षणं कर्म मुख्यम्.

5

परनारी मता यत्र माता, परपुमान् तथा स्वस्य भ्राता,

यत्र शांतिरहिंसा नरत्वम्, अनुकम्पा सदाचारतत्त्वम्.

6

यस्य पुत्राश्च कन्याश्च वीराः, ज्ञानक्षेत्रे रणे ये धीराः,

वेदवाक्यं मतं यत्र मन्त्रम्, वाङ्मये भारतं पञ्चतन्त्रम्.

भारतं कर्मभूमिरस्माकं, भारतं स्वर्गभूमिरस्माकम्.

 

नमो नमो नमो मातृभूमे, नमो नमो नमो दातृभूमे.

नमो नमो नमः पुण्यभूमे, नमो नमो नमः पूज्यभूमे.

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(012)

Bharat, Rashtra Geet, Bengali

কর্মভূমি আছি ভারত আমাদের, ধর্মভূমি এবাম এটা আমাদের,

ইতিহাস এর সুন্দর অনন্য, পৃথিবীতে এটা প্রিয় আমাদের.

1

দেশ সমৃদ্ধ গুণাবলীতে, হিমাচলের মুকুট পোরেছে,

নদী প্রবাহ অমৃতের আছে, সমুদ্র তীর পায়ের কাছে.

কর্মভূমি আছি ভারত আমাদের, ধর্মভূমি এবাম এটা আমাদের,

2

দেবভূমি এটা আচে ঈশ্বরে, আত্ম-শান্তি প্রচণ্ড এখানের,

বসুধৈব কুটুম্বম বাক্য দেশের, রাষ্ট্র সবছেয়ে সেরা আমাদের.

3

প্রভা শুভ্র এর জ্যোতি আকাশের, চন্দ্র সূর্য কানে ডুল প্রকাশের,

মনোহর দৃশ্যে এর প্রকৃতের, যেমন তারাকা এখানে আমোদের.

4

এর বাতাসে ফুলের সুগন্ধ, দেয় সন্ধ্যা-সকাল আনন্দ,

সীমাহীন প্রমোদ স্প্রিশ্য, প্রকৃতির অসাধারণ দৃশ্য.

5.

গায় ময়ূর কোকিল এখানে, সুর ​​মঞ্জুল কুহু যেখানে,

বৃষ্টি শীতল সুখের সঙ্গে, দেশ স্নান করে জ্ঞানগঙ্গাযে.

6

অন্য নারিরা মতো মায়েরা, এখানে সবাই ভাইয়েরা,

মানবতার সর্বত্র আবাস, সুখ শান্তি অহিংসার নিবাস.

7

এর বংশধর নির্ভীক গ্যাতা, সাধু যোগী শিল্পী ভাস্কর দাতা,

সেবা বিনয় আবরূ ভালোবাসা, দেশ দয়িত আমদের খাসা.

8

জয় হো, জয় হো, তোমার জয় হো, জয় হো,

জয় হো, জয় হো, সর্বদা জয় হো, জয় হো.

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(013)

Bharat Mata, Sanskrit Vani Ashtakam, Sanskrit

गीर्वाणभारती

श्लोक छंद

भाषा सुमधुरा दिव्या, रम्या गीर्वाणभारती,

सर्वोत्तमा श्रेष्ठा , देववाणी या मता.

भाषा सुमधुरा दिव्या, रम्या गीर्वाणभारती,

2

देशवैदेशिकानां भाषाणां जननी शुभा,

दोषविकारशून्या सा व्याकरणसुमंडिता.

3

गिरा समाधिमास्थाय साक्षात्कृता महर्षिभिः,

आशासिता गणेशेन गीर्देव्या विश्वकर्मणा.

4

ज्ञानविज्ञानसंयुक्ता छंदस्सङ्गीतसंयुता,

गेया ज्ञेया स्मर्तव्या, वन्द्या हृद्या मनोरमा.

5

कठिना क्लिष्टा ना न्यूना नानियंत्रिता,

सुरसा सुबोधा ललिता सरला तथा.

6

अमृता मञ्जुला पुण्या मनोज्ञा विश्ववन्दिता,

गीता वेदेषु शास्त्रेषु रामायणे भारते.

7

विरचिता गणेशेन सरस्वत्या निर्मिता,

वाल्मीकिना व्यासेन, कालिदासेन गुम्फिता.

8

संगीतगीतपद्यैश्च चरित्रं रामकृष्णयोः,

छन्दोरागेषु वृत्तेषु रत्नाकरेण प्रस्तुतम्.

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(014)

Bharat Mata, Satymeva Jayate, Hindi

आसावरी राग

सत्यमेव जयते

सत्यमेवो हि जयते, नानृतं, सत्यं ऋतम् अमृतम्,

सत्यं शिवं सुंदरम्.

सत्य ब्रह्म है, सत्य आत्म है.

1

सत्यं कर्म परम्, सत्यं शुभं मंगलम्.

सत्यं ऋतम् अमृतम्, सत्यं शिवं सुंदरम्.

2

सत्य अर्थ है, सत्य धर्म है, सत्य मोक्ष स्वयम्,

सत्यं परं भूषणम्.

सत्यं ऋतम् अमृतम्, सत्यं शिवं सुंदरम्.

3

सत्य नित्य है, सत्य प्रीत्य है, सत्य कृत्य वरम्,

सत्यं सदा वन्दितम्.

सत्यं ऋतम् अमृतम्, सत्यं शिवं सुंदरम्.

सत्यमेवो हि जयते, नानृतं,

सत्यं ऋतम् अमृतम्.

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(015)

Bharat Mata, Vande Bharat Mataram, Hindi

बिलावल राग

वन्दे मातरम्

वन्दे भारतं, वन्दे मातरम्.

वन्दे भारतमातरम्.

1

मुकुट हिमाचल शीर्ष में सोहे, दाएँ बाएँ पद में सागर,

ब्रह्म विष्णु शिव का नंदनवन, भूमि सनातन ऋषिमुनियन की.

वन्दामहे भारतमातरम्. वन्दे भारतं, वन्दे मातरम्.

वन्दे भारतमातरम्.

2

कन्या जिसकीं राधा सीता, गंगा जमुना सिंधु नर्मदा,

सुपुत्र जिसके राम कृष्ण हैं, व्यास वाल्मीकि भीम मारुति.

वन्दे भारतं, वन्दे मातरम्. वन्दे भारतमातरम्.

वन्दामहे भारतमातरम्.

3

वेद भागवत पुराण जिसकी, रामायण भारत है वाणी,

मातृवत् जहाँ है परपत्नी, आत्मवत् पर कन्या भगिनी.

वन्दामहे भारतमातरम्. वन्दे भारतं, वन्दे मातरम्.

वन्दे भारतमातरम्.

4

मिट्टी सोना, जल अमृत हैं, वायु में सौजन्य सचाई,

कर्मभूमि उस धर्मभूमि को, पुण्यभूमि रण मातृभूमि को.

वन्दामहे भारतमातरम्. वन्दे भारतं, वन्दे मातरम्.

वन्दे भारतमातरम्.

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(016)

Bharat Mata, Vande Bharat Mataram, Sanskrit

श्लोक छंद

वन्दे भारतमातरम्

वामे दक्षिणे यस्या, रत्नाकरोस्ति पादयोः,

हिमाद्रिर्मुकुटो शुभ्रो, वन्दे भारतमातरम्.

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्

1

राधा सीता सुकन्यासु कालीन्दिर्जाह्नवी तथा,

नर्मदा ब्रह्मपुत्रा , वन्दे भारतमातरम्.

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्

2

रामकृष्णौ सुपुत्रेषु भीमार्जुनौ मारुतिः,

वाल्मीकिः पाणिनिर्व्यासो, वन्दे भारतमातरम्.

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्

3

परस्त्री मातृवद्यत्र परकन्या स्वकन्यका,

आत्मवच्च परा जामिः, वन्दे भारतमातरम्.

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्

4

यत्र पत्नी महालक्ष्मी पतिश्च परमेश्वरः,

सुता रत्नं सुतः सिंहः, वन्दे भारतमातरम्.

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्.

5

वाङ्मये वेदवेदांगे रामायणं भारतम्,

पञ्चतन्त्रं निघण्टुश्च, वन्दे भारतमातरम्.

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्,

6

भूमिः स्वर्णमया यत्र जलममृतवत्तथा,

वायौ सौरभं यस्याः, वन्दे भारतमातरम्.

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्

7

कर्मभूमिं, धर्मभूमिं, रणभूमिं, तपोधराम्,

पुण्यभूमिं, मातृभूमिं, वन्दे भारतमातरम्.

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्

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(017)

Krishnayan, Vasudhaiva Kutumbakam-1, Hindi

वसुधैव कुटुंबकम्-1

सब लोग जहाँ के भाई हैं, सब एक ही पथ के राही हैं.

वसुधैव कुटुंब सचाई है.

सब एक जगत के वासी हैं, सब की ये वसुधा माई है.

सब एक ही कुल के सगाई हैं.

1

सब वेदों की ये वाणी है, सब शुभ वचनों की ये राणी है.

बस एक हमारी भूमि है, अरु एक हमारा स्वामी है.

बस एक सभी का साँई है.

2

सब जगत का एक ही ज्ञानी है, और एक ही अंतर्यामी है.

बस एक हमारा दाता है, अरु एक हमारा विधाता है.

बस एक सभी का सहाई है.

3

ऋषि मुनियों की ये बखानी है, और सबसे परम कहानी है.

बस एक हमारा कर्ता है, जिसने जग रीत बनाई है.

उसने भव प्रीत बसाई है.

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(018)

Krishnayan, Vasudhaiva Kutumbakam-2, Hindi

वसुधैव कुटुंबकम्-2

इस दुनिया में सारे हैं भाई, वसुधैव कुटुंब की नाई.

ये वसुधा सभी की है माई, ए क कुल के सभी हैं सगाई.

1

सब वेदों की अमृत की वाणी, शुभ वचनों की जानी है राणी.

सारी भूमि का है एक स्वामी, सारी दुनिया का है एक साईं.

2

एक सबका हमारा है दाता, एक सबका हमारा विधाता.

इस संसार का एक ज्ञाता, एक जानो सभी का सहाई.

3

ऋषिमुनियों की ये है बखानी, सबसे पावन यही है कहानी.

रीत दुनिया की जिसने बनाई, प्रीत भव में उसी ने बसाई.

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(019)

Krishnayan, Aatma aur Brahma, Hindi

आत्मा और ब्रह्म

इदं पूर्णं तत्पूर्णं, पूर्णे पूर्णं विलीयते.

पूर्णात्पूर्णमृणं कृत्वा, शेषं पूर्णैव विद्यते.

पूर्ण ये भी है, वो भी पूर्ण है, पूर्ण से मिलता सो पूर्ण है.

पूर्ण से निकला यदि पूर्ण तो, बाकी बचेगा सो पूर्ण है.

1

मूल शून्य ही ब्रह्म खर्व है, शून्य से निकला ये सर्व है.

शून्य नाम ही व्योम पूर्ण है, शून्य से मिल कर वो शून्य है.

2

भूत पाँच गुण तीन हैं कहे, अष्ट वर्ग से ये पूर्ण है.

पूर्ण ऊर्ध्व अरु मध्य पूर्ण है, अंत में जाकर वो शून्य है.

3

आत्म पूर्ण है परमात्म है वही, पूर्ण से मिल कर ये पूर्ण है.

ये भी पूर्ण और पूर्ण वही है, शून्य से मिल कर वो शून्य है.

4

प्राण प्राणियों में सब जिसने, डाली धड़कन हर दिल में.

साँस साँस में पूर्ण रहे वो, बिन जिसके सब अपूर्ण है.

5

कण कण में एक ईश सना है, शून्य से बढ़ कर विश्व बना.

जड़ चेतन सब भव्य सृष्टि में, अगम्य होकर भी गम्य है.

 

इदं शून्यं तच्छून्यं शून्याच्छुन्यं हि जायते.

शून्ये शून्यं समायुज्य पूर्णं शून्यं हि वर्तते.

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(020)

Krishnayan, Ahimsa Paramo Dharmah, Hindi. Ahimsa-1

बिलावल राग

अहिंसा

अहिंसा परमो धर्मः

अहिंसा परमो धर्मो हिंसा हीना कृतिर्मता,

अहिंसा कर्म भद्राणाम्, कर्म हिंसा तु पापिनाम्.

अहिंसा परमो धर्मः.

अहिंसा विधि का विधान है.

1

दया क्षमा शम, किरपा शान्ति, घन तन मन वाणी में प्रीति,

श्रद्धा निष्ठा भक्ति नीति, जानो ये ज्ञान है.

2

ईर्ष्या हठ शठ, कलि मल भ्राँति, दंभ दर्प मद छल बल भीति,

जोर जबर अवमान अनीति, हिंसा अज्ञान है.

3

अपना पराया जहाँ कोई, रामकृष्ण सबको सुखदाई,

वसुधा एक कुटुंब की भाँति, सारे समान हैं.

4

निशदिन मुख में जप ले हरि हरि, याद प्रभु की आवे घड़ी घड़ी,

समाधान नित सरबस तृप्ति, सुख का निधान है.

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(021)

Krishnayan, Bhaj Govindam, Sanskrit

बिलावल राग

भज गोविंदम्

ब्रह्मा त्वमेव, विष्णुस्त्वमेव, शम्भुस्त्वमेव, कृष्ण सखे!

सर्गस्त्वमेव, स्वर्गस्त्वमेव, सर्वं त्वमेव, कृष्ण हरे!

1

ब्रह्मस्वरूपम्, अव्यक्तरूपम्, अचिन्तनीयं, क्लिष्टतरम्.

कथनातीतं, स्मरणातीतं, सुगमं सुलभं कृष्ण ते.

2

विष्णुस्वरूपं, मानवरूपं, दृष्टिगोचरं, हर्षकरम्.

लोचनकमलं, निर्मलविमलं, सर्वसुन्दरं, लक्ष्मीपते.

3

देवकीनन्दं, नन्दनन्दनं, राधारमणं, करुणपरम्.

तिलकचन्दनं, जगद्वन्दनम्, भज गोविन्दं, हरे हरे.

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(022)

Krishnayan, Devaki Nandana Jai Ho, Hindi

यमन कल्याण राग

योगेश्वर वंदना

संतन वंदन करते हैं तुमको, देवकी नंदन जै जय जय हो.

देवकी नंदन जै जय जय हो.

1

नाथ जगत के तारक तुम हो, विघ्न विनाशक माधव जय हो.

2

भक्ति योग तुम दीना जग को, भगत सखा प्रभु मोहन जय हो.

3

कर्मयोग योगेश्वर तुमसे, पार्थ सारथि केशव जय हो.

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(023)

Krishnayan, Dukhi Jahan, Hindi

दुखी जहाँ

प्रभु बताओ,

प्रभु बताओ, दुखी जहाँ का, अजीब खेला क्यों है रचाया,

ये शोर दुखियों की आतमा का, प्रभु बताओ क्यों है मचाया.

1

यहाँ कोई किसी का भाई, दोसती में कहीं सचाई,

ये हाल जीने का इस जहाँ में, बताओ प्रभु जी क्यों है बनाया.

2

कहीं लड़ाई या बेवफाई, मगर भलाई दे दिखाई,

बेहाल आँसू पीना जहाँ में, बतादो प्रभु जी क्यों है सनाया.

3

कहीं बुराई कहीं दुहाई, कहीं जुदाई कहीं रुलाई,

ये साज रोने का इस जहाँ में, जाने प्रभु जी क्यों है बजाया.

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(024)

Krishnayan, Hari Ghanashyam, Hindi

हरि घनश्याम

गर मेरे घर आए, हरि घनश्याम, सब कुछ कर दूँ, कृष्ण के नाम.

देखूँ राह मैं चारों याम, आओ कनाई! मेरे धाम.

1

दधि-माखन मेरे द्वारे, खाओ जी भर कर प्यारे!.

गोप गोपिका मितर ललाम, लाओ सुदामा संग बलराम.

2

मन मंदिर में ज्योति जगे, भगती विनय का भोग लगे.

भजनन मेरे मुख, भगवान्! सुमिरन तेरा शुभ अभिराम.

3

चित्त हमारा तुमरे पासा, तुमरे पग की अभिलासा.

पूरण हों मेरे अरमान, नत हिरदय से परम प्रणाम.

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(025)

Krishnayan, Giridhari Shri Krishna, Hindi

यमन कल्याण राग

कुंज विहारी

हे गिरिधारी! कुंज विहारी! हरि बनवारी! तारो हमें.

1

कृपा से प्यारे, पाहि मुरारे! शरण तिहारी, लीजो हमें.

2

नैन के तारे! हिया पुकारे, चरण तिहारे, दीजो हमें.

3

दरस तुम्हारे परम सुखारे! पार किनारे, कीजो हमें.

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(026)

Krishnayan, Gita Chapter 10, Hindi

बिलावल राग

गीता अध्याय 10

प्रभु जी! किसमें रहते तुम, बताओ श्रवण प्यासे हम.

प्रभोः भोः! कुत्र निवससि त्वं, वदतु माम्, ज्ञातुमिच्छामि.

प्रभोः भोः! कुत्र निवससि त्वं, वदतु माम्, श्रोतुमिच्छामि.

1

जहाँ पर नाद ब्रह्मा का, जहाँ पर राग सरगम का.

वहाँ पर स्थान है मेरा, अरे हं तत्र तिष्ठामि.

प्रभोः भोः! कुत्र निवससि त्वं,

वदतु माम्, ज्ञातुमिच्छामि.

2

जहाँ पर है दिलों में गम, जहाँ पर बेदिली है कम.

वहाँ पर वास है मेरा, सुनो हं तत्र विष्ठामि.

प्रभोः भोः! कुत्र निवससि त्वं,

वदतु माम्, ज्ञातुमिच्छामि.

3

जहाँ पर पाप का नहीं दम, जहाँ पर पुण्य है हरदम.

वहाँ आधार है मेरा, सखे हं भद्ररक्षामि.

प्रभोः भोः! कुत्र निवससि त्वं,

वदतु माम्, ज्ञातुमिच्छामि.

4

कहीं ना धाम है ऐसा, कोई ना नाम है ऐसा.

जहाँ ना अंश है मेरा, सदा सर्वत्र गच्छामि.

प्रभोः भोः! कुत्र निवससि त्वं, वदतु माम्, ज्ञातुमिच्छामि.

प्रभु जी! किसमें रहते तुम, बताओ श्रवण प्यासे हम.

प्रभोः भोः! कुत्र निवससि त्वं, वदतु माम्, ज्ञातुमिच्छामि.

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(027)

Krishnayan, Govardhan, Hindi

भैरवी राग

गोवर्धन उठाए हरि

[Intro]

गोवर्धन उठाए हरि, देखो देखो जी लीला खरी.

उँगली पर धरे, वो समूचा गिरी, और बजाए मिठी बाँसुरी.

1

मथुरा के परे पास में, मधुबन की हरी घास में.

गोप गोपी सखे, खेल में जब लगे, साथ में थे सखा श्री हरि .

मूसला वर्षा अचानक गिरि, व्रज में चिंता भयानक पड़ी.

उँगली पर धरे, वो समूचा गिरी, और बजाए मिठी बाँसुरी.

2

व्रज वासी खड़े आस में, थे बड़े आज विश्वस में.

सब खड़े थे गिरि के तले, सब ने आशा थी मन में धरी .

चाहे जितनी भी बारिश गिरी, दुख से सबको

उँगली पर धरे, वो समूचा गिरी, और बजाए मिठी बाँसुरी.

3

इन्द्र भगवान् जब थक गये, बरसा कर बादल अक गये.

शक्र हार गये, शरमिंदा भये, झट से वर्षा फिर बंद करी.

बोले, तेरी हो जै जै हरि. तेरी लीला है जादू भरी.

उँगली पर धरे, तू समूचा गिरी, और बजाए मिठी बाँसुरी.

उँगली पर धरे, वो समूचा गिरी, और बजाए मिठी बाँसुरी.

गोवर्धन उठाए हरि, देखो देखो जी लीला खरी.

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(028)

Krishnayan, Gita, Gyan Yoga, Hindi

ज्ञानविज्ञान योग

जो काम सबका तुम्हें पियारा, जहाँ को वापस वो प्यार दो.

जो काम सबका तुम्हें पियारा, जगत को वापस वो प्यार दो.

1

विचार वाणी में हो अहिंसा, प्रयोग में हो कभी हिंसा.

जो दोष उनका तुम्हें चुभाता, वही तुझमें दीदार हो.

2

हो जियारा कभी उदासा, रहो प्रभु के चरण में दासा.

जो कर्म उनका तुम्हें गिराता, जगत में प्यारे! वो ना करो.

3

सदाचार की सदा हो भासा, भगत जनन को तुम्ही से आसा.

जो बोल उनका तुम्हें दुखारा, किसी को प्यारे! वो ना कहो.

4

अधर्म का जो करे विनासा, वो कार्य तेरा बने विलासा.

जो धर्म शाँति दया सिखाता, वो राह सत् की स्वीकार हो.

5

धरती अंबर तेरा निबासा, दिशाएँ चारों तेरा लिबासा.

जो जाप मुख में तुम्हें सुहाता, वो नाम हरि का सदा जपो.

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(029)

Krishnayan, Hari Pran Mere, Hindi

हरि प्राण मेरे

हरि प्राण मेरे, हरि आतमा हैं, हरि भूमि मेरी, हरि आसमाँ हैं.

1

हरि आस मेरी, हरि साँस मेरी, हरि लाज मेरी, हरि साधना हैं.

2

हरि आर मेरी, हरि पार मेरी, हरि भानु मेरे, हरि चंद्रमा हैं.

3

हरि मेरी पूजा, हरि अर्चना हैं, हरि साज मेरे, हरि वन्दना हैं.

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(030)

Krishnayan, Holi in Vrindavan, Hindi

काफी राग

वृंदावन में होली

सखी नंद होली का न्यारा, चले रंग रंग की धारा.

आनंद होली का प्यारा, करे अंग अंग मतवारा.

1

हरि आज होली की बेला, लो पिचकारी ब्रजबाला.

राधा के रंग में रंग रंग लो, नंद नंद गोविंदा.

2

जिस रंग में राधा रंगी, कान्हा है जीवन संगी.

होली के गीत हैं गात गोपिका, साथ बाँसुरी वाला.

3

सखी व्रज में मोद की वर्षा, और आज हर्ष की चर्चा.

कान्हा के रंग में रंगी राधिका, कंज कंज व्रज सारा.

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(031)

Krishnayan, Jane De Mujhko Maiya, Hindi

भीमपलासी राग

जाने दे मुझको मथुरा मैया

जाने दे मुझको मथुरा मैया, संग मेरे बलदाऊ भैया.

1

वृंदावन है स्वर्ग समाना, मथुरा मरघट बनी है दैया.

मत जा कंस के पास कन्हैया.

2

दही-माखन है वृंदावन में, गोप गोपिका ग्वाले गैया.

मत जा मत जा पडूँ मैं पैंया.

3

सत् चित् आनंद अपने मन में, मथुरा बनी है मौत की शैया.

जमुना के तू पार जैया.

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(032)

Krishnayan, Karma Yoga, Hindi

बिलावल राग

कर्म योग

बिन माँगे ही मोती मिलते, माँगे मिले ना भीख रे.

बिना कामना कर्म करना, अर्जुन प्यारे! सीख रे.

1

जो करणीयं सो करना है, सुकर्म करते ही मरना है.

सुख दुख दोनों एकसे धरे, सब कुछ सहना, ठीक रे.

2

कर्मभूमि ही धर्मभूमि है, समान करना लाभ हानि है.

पवित्र ऐसी भावना लिये, हार में भी, जीत रे.

3

रण में जब क्षत्रिय खड़ा हो, धर्म युद्ध जब आन पड़ा हो.

कोई शत्रु, ना ही मीत है, यही नीति की, रीत रे.

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(033)

Krishnayan, Krishna Balram Sudama, Hindi

आसावरी राग

नंद बलरामा

नंद, बलरामा, संग सुदामा, देवकी नंदन हरि घनश्यामा.

ग्वालिन राधा, मैया यशोदा, गोपी गोपाला, गोकुल धामा.

1

मेरी जीवन सागर नैया, कृष्ण कन्हैया, कहत सुदामा.

नंद के घर से माखन छुपके, लात दमोदर, खात सुदामा.

2

मधुबन में हरि धेनु चरावत, संग गवन के जात सुदामा.

जमुना तट पर फोरत मटकी, नंद लाल के, साथ सुदामा.

3

पनघट पर जब बांसुरी बाजे, सुध बुध खो कर, गात सुदामा.

जल क्रीडा से वस्त्र गोपी के, श्याम चुरावत, लजत सुदामा.

4

कंस मिलन जब जात मुकुंदा, राधा यशोदा रोत सुदामा.

द्वारिका नगरी राज महल में, कृष्ण से करता, बात सुदामा.

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(034)

Krishnayan, Krishna Janam-Din, Hindi

काफी राग

कृष्ण जनम दिन

झनन झनन झन्, रैना सारी बाजे,

पैंजन की झनकार री, सखी राधा के मन प्यार री.

1

जनम दिन है आज हरि का, वृंदावन त्यौहार री.

गल फूलन के हार हैं डारे, लाल पीले रंग दार री.

सारी कुंज गलिन में, हरि की जै जै कार री.

2

मोर मुकुट है शीश पे धारे, बंसीधर गोपाल री.

कर में मुरली नैन हैं कारे, तिलक चंदन लाल री.

आज राधा से मिलने, मनवा है बेकरार री.

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(035)

Krishnayan, Krishna Ka Nam Suhana, Hindi

अल्हैया बिलावल राग, दादरा ताल

कृष्ण का नाम सुहाना

कृष्ण का नाम मन का लुभाना, बड़ा मंगल है सुंदर सुहाना.

1

कृष्ण गोविंद गोपाल काला, विष्णु स्वानंद आनंद कान्हा.

नंद का नंद बाँसुरी वाला, देवकी और यशोदा का लाला.

2

श्रीहरि श्याम राधा का प्यारा, बलदाऊ सुदामा दुलारा.

गोप गोपी के नैनों का तारा, ब्रज वासी जनों का जियारा.

3

कंस चाणूर मर्दन मुरारी, कालिया धेनुका पूतनारि.

दीन बंधु पिता मित्र माता, पार्थ का सारथी योग दाता.

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(036)

Krishnayan, Krishna Kaho Ya Kanha, Hindi

बिलावल राग

कृष्णा कहो

कृष्णा कहो, कहो कान्हा, केशव कहो, कहो काला.

1

गोकुल का मुरली वाला, गल में गुलाब की माला.

मोर मुकुट सिर पर डाला, गोविंद नैन का तारा.

2

माखन की करता चोरी, गोपी की मटकी फोरी.

मैया कहती मैं हारी, मुख हरि का लगता भोला.

3

गिरिधर नागर गोपाला, देवकी नंदन है प्यारा.

राधा उसी की दीवानी, मोहन है नंद का लाला.

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(037)

Krishnayan, Krishna Kanhaiya Radheshyam, Hindi

बिलावल राग

कृष्ण कन्हैया

कृष्ण कन्हैया राधेश्याम, श्रीधर तेरे रूप ललाम,

सुंदर प्यारे, तेरे नाम्.

1

ईश्वर ब्रह्मा हरि घनश्याम, शंकर विष्णू तू ही राम,

गाओ मंगल कृष्ण के नाम, किशन कन्हैया राधेश्याम.

2

दे दे किरपा का वरदान, पूरे हमरे कर अरमान,

दीन दुखी का तू भगवान, किशन कन्हैया राधेश्याम.

3

गाऊँ सौ सौ तेरे नाम, ध्याऊँ तेरे रूप तमाम्,

अनुपम सारे तेरे काम,

कृष्ण कन्हैया राधेश्याम, सुंदर प्यारे, तेरे नाम.

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(038)

Krishnayan, Krishna Ke Mangal Nam

बिलावल राग के तीन ताल

मंगल नाम

सां- पमग मरे गम पग मरेसा-, सागम रे गपनिनि सां-रें सांनिधप-

साथ सभी हम मिल कर गाएँ,

किशन के मंगल नाम सुनाएँ.

1

माधव केशव भाते सबको, देवकीनंदन मन भरमाए.

2

पावन गायन गाते तुमरो, गिरिधर हमको सब मिल जाए.

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(039)

Krishnayan, Krishna Smaranashtakam, Sanskrit

श्लोक छंद, यमन कल्याण राग

कृष्णाष्टकं शुभम्

पठेद्यः प्रातरुत्थाय स्तोत्रं कृष्णाष्टकं शुभम्.

धौतः सर्वपापेभ्यो विष्णुलोको हि धाम तम्.

1

प्रभाते चिन्तयेत्कृष्णं मोहनं स्नानमार्जने.

प्रार्थनायां गोविन्दं पावनं करुणाकरम्.

2

अध्ययने स्मरेन्नित्यं योगेश्वरं जगद्गुरुम्.

क्रीडने बालगोपालं कार्यकाले जनार्दनम्.

3

विश्रामे द्वारिकानाथं चिन्तनं वन्दनं हरिम्.

शयने श्रीधरं ध्यायेत्निर्विकारं निरञ्जनम्.

4

प्रवासे सर्वज्ञातारं नृसिंहं सर्वव्यापिनम्.

पार्थसारथिनं युद्धे रक्षकं चतुराननम्.

5

उपनयनकाले पीताम्बरं मनोहरम्.

विवाहे भाग्यदातारं श्रीपतिं पुरुषोत्तमम्.

6

मोदे दामोदरं ध्यायेद्विष्णुं सकलमङ्गलम्.

दुःखे परमानन्दं मुरारिं परमेश्वरम्.

7

सङ्कटे चतुर्बाहुं नारायणं गदाधरम्.

चक्रपाणिं हृषीकेशं सर्वकाले सुदर्शनम्.

8

जन्मदिने स्मरेत्पूज्यं पूजयेद्विश्ववन्दितम्.

अन्तकाले स्मरेद्देवं देवदेवं सनातनम्.

 

स्मरणाष्टकमेतद्धि पठेद्रत्नाकरस्य यः.

सर्वकाले शुभं तस्य भवेत्कृष्णानुकम्पया.

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(040)

Krishnayan, Makhan Chor, Hindi

माखन चोर

आयो री सखी, श्याम सुंदर घर आयो.

1

माखन खावत, नेहा लगावत, कान्हा मोरे मन भायो.

2

छुप छुप कर सखी, जाने कब आयो, आपन खायो, खिलायो.

3

ऊँची लटकी, माखन मटकी, लकुटिया मार, गिरायो.

4

बोले माखन, मैं नहीं खायो, मुख म्हारे, लिपटायो.

5

भोली सूरतिया, खेलत लीला, मनवा मोरा, भरमायो.

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(041)

Krishnayan, Mata-Pita, Hindi

माता-पिता

माता पिता हैं भाग्य में जिसके, वो क्यों भागे तीरथ धाम.

माता पिता के आशीष जिस पर, पूरण होते उसके काम.

1

माता जैसा गुरु कोई, माता में ना गरूर कोई.

ना ही उसमें सरूर कोई, ब्रह्म विष्णु महेश नाम.

2

माता स्नेह की मूरत प्यारी, ईश्वर की है सूरत न्यारी.

त्रिभुवन की है कूवत सारी, निर्मल मंगल रूप ललाम.

माता पिता हैं भाग्य में जिसके, वो क्यों भागे तीरथ धाम.

3

जिसके मातापिता नहीं हैं, उसके मातंग चिता यहीं हैं.

उसको ममता नहीं कहीं है, उसे सहारा है भगवान.

4

माता दुर्गा लक्ष्मी सुनाम, माता को निशदिन हो प्रणाम.

जग में सुंदर तीन हैं नाम, मातु पिता अरु हरि घनश्याम.

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(042)

Krishnayan, Meera Pinhi Vish ka Pyala, Hindi

तोड़ी राग तीन ताल खयाल

भक्त मीरा

मीरा पीन्ही विष का प्याला, मीरा पीन्ही विष का प्याला.

केशव की सब लीला. मीरा पीन्ही विष का प्याला.

1

राणा जी से नाता तोरा, जग जन से मीरा मुख मोड़ा.

मोहन संग मन जोड़ा. मीरा पीन्ही विष का प्याला.

2

राधावर का नाम पियारा, गाई निश दिन हरि हरि मीरा.

हँस कर जीवन छोड़ा. मीरा पीन्ही विष का प्याला.

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(043)

Krishnayan, Murali Wala, Hindi Anupras

राग आसावरी, अद्भुत अनन्य अनूठा अनुप्रास

मुरली वाला

लाल गुलाली फूल की माला, डाल गले में मुरली वाला,

गोकुल वाला बालक ग्वाला, झूलत झूले पर ब्रिजबाला.

1

तिल काजल का वनमाली के, लाल गुलाबी गाल पे काला.

2

संदल तिलक है मंगल लगता, श्यामलहरि के भाल पे पीला.

3

जूहीचमेली कोमल कलिका, बालों में डाले बाल गोपाला.

4

जल केलि में ललिता ललना, नंद का लाला खेलत लीला.

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(044)

Krishnayan, Prabhu Teri Dua, Hindi

मालकंस राग

प्रभु तेरी दुआ

प्रभु, तेरी दुआ से जीना है, अरु तेरी दुआ से मरना है.

1

अब दे दे जो कुछ देना है, वापस ले जब लेना है.

2

मेरे सपने मेरे अपने, तेरी कृपा से सब शुभ हैं.

3

तेरी छाया तेरी माया, तेरी दया भी साथ में है.

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(045)

Krishnayan, Prabhu Teri Maya, Hindi

प्रभो! तेरी माया

प्रभो! तेरी माया, ग्रहण करने में गहन है.

मगर सच्चे मन से, स्मरण करके वो सुगम है.

1

कोई नमन से, कोई भजन से, तुझे पूजता.

कोई धन तथा, कोई सुख सदा, तुझे माँगता.

प्रभो! तेरी लीला, कथन करने में कठिन है.

2

सदा चरण में, रहो शरण तो हरि साथ है.

सभी जगत का, अनाथ जन का, वही नाथ है.

हरे! तेरी सेवा, सतत करना ही धरम है.

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(046)

Krishnayan, Prem Nata, Hindi

प्रेम नाता

सबसे मेरा रहे प्रेम नाता, दृष्टि, ऐसी मुझे देना दाता.

1

चाहे जाने वो हमको पराया, द्वेष उसके हो मन में समाया,

जानूँ उसको भी मैं बंधु भ्राता, बुद्धि, ऐसी मुझे देना दाता.

2

कोई कमजोर हो दीन दुखिया, जिसकी सुनसान बीरान दुनिया,

उसके कँधे से कँधा लगाना, शक्ति, इतनी मुझे देना दाता.

3

हर प्राणी से हो मेरी माया, हर भाई बने मेरा भाया,

हर माता लगे मेरी माता, प्रीति, ऐसी मुझे देना दाता.

4

तेरी किरपा की हो मुझ पर छाया, तेरी सेवा में हो मेरी काया,

मैं रहूँ तेरे गुन गुनगुनाता, भक्ति, ऐसी मुझे देना दाता.

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(047)

Krishnayan, Radha Nand Kishor, Hindi

राधा नंद किशोर

खेलत राधा नंद किशोर, नंद किशोर, सखि नंद किशोर.

गोकुल वाला माखन चोर, खेलत राधा नंद किशोर,

नंद किशोर सखि नंद किशोर.

1

ग्वालिन राधा, झूलत झूला, आनंद चारों ओर.

2

बाँसुरी की धुन, सुनत गोपिका, नाचत मन का मोर.

3

गोप सुदामा अरु बलरामा, गावत सुधबुध छोड़.

4

बांधत नटखट मात यशोदा, टूटी जावे डोर.

5

सावन बरखा, रिमझिम बरसत, काली घटा घन घोर.

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(048)

Krishnayan, Re Dukhi Man, Hindi

बिलावल राग

गोविंद गोविंद बोल

रे दुखी मन, गोविंद गोविंद बोल. अंदर, नाम का अमरित घोल.

1

सुखदुख जग में आतेजाते, शीत उष्ण संकेत लुभाते.

लालच, कर दे कौड़ी मोल. रे दुखी मन, गोविंद गोविंद बोल.

अंदर, नाम का अमरित घोल.

2

जग माया में क्यों तू डूबा, द्वंद्वभाव से क्यों नहीं ऊबा.

आखिर, अब तो आँखे खोल. रे दुखी मन, गोविंद गोविंद बोल.

अंदर, नाम का अमरित घोल.

3

जाको तारे कृष्ण कन्हैया, पार लगे उसकी भव नैया.

मत कर, बेड़ा डाँवाडोल. रे दुखी मन, गोविंद गोविंद बोल.

अंदर, नाम का अमरित घोल.

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(049)

Krishnayan, Tumhi Mere Mata Pita, Hindi

माता पिताश्री

मेरे माता पिताश्री तुम्हीं हो, मेरे भ्राता सखा भी तुम्हीं हो.

ज्ञान सोता सविता तुम्हीं हो, मेरे धाता विधाता तुम्हीं हो.

1

मेरे गानों की स्फूरत तुम्हीं हो, मेरे ध्यानों की सूरत तुम्हीं हो.

मेरे ख्वाबों की मूरत तुम्हीं हो, मेरी साँसों के दाता तुम्हीं हो.

2

मेरे जीवन की गाथा तुम्हीं से, सारे जन्मों का नाता तुम्हीं से.

मेरा जीना सुहाता तुम्हीं से, मेरे ताता और त्राता तुम्हीं हो.

3

मोहे भूमि पर लाया तुम्हीं ने, मोहे प्रीति से पाला तुम्हीं ने.

मोहे मुक्ति दिलाना तुम्हीं ने, मेरी गीता कविता तुम्हीं हो.

4

तेरे चरणों में मेरी जगह हो, मेरे मुख में हरि! तू बसा हो.

तेरी किरपा की छाया सदा हो, मेरे प्रारब्ध कर्ता तुम्हीं हो.

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(050)

Krishnayan, Vishva Deedar, Hindi

विश्व दीदार

सखी! मुख में जिसके विश्व दीदार, किशन विराजे मन में हमार.

हरि दरशन से आए खुमार, मेरो सब कुछ नंद कुमार.

1

जग कहता है कृष्ण साँवला, अंग भुलाए जग है बावला.

अंदर देखो, यदि एक बार, रंग हरि के हैं बेशुमार.

2

भद्र जनन को पास धराने, असुर जनन का नास कराने.

आया धरा पर फिर एक बार, सुन कर आर्त जनन की पुकार.

3

कृष्ण हमारा प्राण पियारा, नंद दुलारा जग उजियारा.

हरि को बिठाओ मन में तुमार, हरि उतारे सब दुखभार.

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 (051)

Krishnayan, Yad Me Ghanashyam Teri, Hindi Ghazal

यमन कल्याण राग

ओ घनश्याम, गज़ल

याद में घनश्याम तेरी, बैठे ज़माना हो गया.

राह में घनश्याम तेरी, बैठे ज़माना हो गया.

रास में तू है लगा ये, बस बहाना हो गया.

1

पी गयी वो ज़हर का प्याला, तू योग में था खो गया,

सुन चुके हम वो बहाना, अब पुराना हो गया,

अरे, मत बता तू वो बहाना, अब पुराना हो गया,

याद में घनश्याम तेरी, बैठे ज़माना हो गया.

2

बंसी तेरी है सुहानी, राधिका से है सुना,

एक सुर हमको सुना दे, बस लुभाना हो गया.

याद में घनश्याम तेरी, बैठे ज़माना हो गया.

3

माना तू भगवान है, मगर कहाँ तू सो गया,

सपने में दीदार दे दे, बस रुलाना हो गया.

याद में घनश्याम तेरी, बैठे ज़माना हो गया.

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(052)

Krishnayan, Sarita, Yamuna Rani, Hindi-6401

यमुनाराणी

जमुनारानी पवित्रपानी, राधाकृष्णविलासधरा,

पापहारिणी तापहारिणी, व्रजवासीजनचित्तहरा.

1

गिरिविहारिणी हृदयमोहिनी, गोकुलभीतिविनाशकरा,

शुभसुहासिनी मधुरभाषिणी, धेनुवत्समनमोदभरा.

2

विमलवारिणी कमलधारिणी, सीताराघववरग्रहिणी,

मंगलवदनी चंचलरमणी, पूज्यनीरगंगाभगिनी.

3

अघटनाशिनी अघनिषूदिनी, स्वर्गसेउतरी सुरतटिनी,

गोपमोहिनी गोपिमोदिनी, मधुबनदूबहरितकरिणी.

4

सुंदरललना मंजुलबैना, नरपशुतरुआह्लादखरा,

गहरापानी अनहदवाणी, कर्णमधुरसुरनादभरा.

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(053)

Prayer, Mother-Father Glory, Marathi

आई-बाबा गौरव गीत

जननी जन्मदा देवी सुखदा ज्ञानदा सा.

पिता शाश्वतो देवो सर्वकाले नमामि तौ.

[Intro]

गडे! आई अमुची गोड अति, तिची प्रीति तुजला सांगु किती.

अन्, बाबा अमुचे थोर मति, मी भाग्यवान बहु या जगती.

1

ती सरस्वती देवी माझी, अन् बाबा गणपति रूप खरे.

मी परमेशाचा आभारी, ज्याची मजवरि इतुकी प्रीति.

2

ती नामध्येय कीर्ति माझी, ती कला ज्ञान स्फूर्ति माझी.

ती मंगलमय मूर्ति माझी, तिने केली सुखकर ही धरती.

3

ते पथदर्शक पालक माझे, बाबांचे ऋण अनुपम साचे.

ते देउनि शुभ वरदान मला, सद्भाव सदा हृदयी भरती.

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(054)

Prayer, Darshan de do Ambe, Hindi

भैरवी राग

ओ अंबे देवी

दरशन देदो, हम को अंबे, देवी, चरण में लेलो,

मोहे, अपनी शरण में लेलो, देवी, दरशन देदो,

1

दुर्गे दुर्घट नाम तिहारो, सब के पाप निबारो.

भव सागर से ऊब गये हम, हमको आके उबारो.

2

आओ सपनन रूप निहारूँ, देवी मोहे निहारो.

तेरे द्वारे आन खड़ा हूँ, मोरे कष्ट उतारो.

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(055)

Prayer, Ambe Ma Vardan Do

अंबे माँ वरदान दो

अंबे माँ वरदान दो मैं तेरे दुआरे.

बिंती सुनो मैं आज, मैया! तेरे चरन में.

1

शंभु नंदिनी सिंह विराजे, शंख दुंदुभी डंका बाजे.

तेरा हि जय जय कार, मैया! तीनों भुवन में.

2

गंध पुष्प फल तुलसी दल से, पूजा तेरी मन निर्मल से.

माता पिता का प्यार, मैया! तेरे नयन में.

3

हाथ चक्र अरु वज्र विराजे, खड्ग पद्म और त्रिशूल साजे.

असुरन का संघार, मैया! तेरे वतन में.

4

भक्तन के तू काज सँवारे, आर्त जनन के कष्ट उबारे.

दीनन पर उपकार, मैया! तेरी शरण में.

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(056)

Prayer, Bhagya Lakshmi, Hindi

यमन कल्याण राग

भाग्य लक्ष्मी वंदना

भाग्य लक्ष्मी चंचल देवी, सिद्धि दायिनी ताप हारिणी.

सुंदर मंगल आरती तेरी. सुंदर मंगल आरती तेरी.

1

पावन मूरत सूरत प्यारी, धन की देवी मन को सुखारी.

भाग्य लक्ष्मी चंचल देवी, सुंदर मंगल आरती तेरी.

2

कंगन कुंडल कुंदन कंठी, पैंजन अंगद बिंदी मुंदरी.

भाग्य लक्ष्मी चंचल देवी, सुंदर मंगल आरती तेरी.

3

बाजत ढोलक घुँघरू घंटी, गात हैं संत महंत पुजारी.

भाग्य लक्ष्मी चंचल देवी, सुंदर मंगल आरती तेरी.

4

नारद शारद पुष्प की वृष्टि, कुबेर किन्नर शंकर गौरी.

भाग्य लक्ष्मी चंचल देवी, सुंदर मंगल आरती तेरी.

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(057)

Prayer, Brahma Vishnu Mahesh, Hindi

ज्ञान सविता गणेश वंदना

आदि ब्रह्म है, मध्य विष्णु है, अन्त सब का महेश है,

कर्म राम है, धर्म कृष्ण है, ज्ञान सब का गणेश है.

1

ब्रह्मा है लाता, विष्णु जगाता, सबको लेजाता महेश है,

राम रमाता, मन में समाता, ज्ञान का सोता गणेश है.

2

ब्रह्म विधाता, विष्णु है धाता, मुक्ति का दाता महेश है,

राम निभाता, श्याम है भाता, बुद्धि बढ़ाता गणेश है.

3

ब्रह्म अनंता, विष्णु नियंता, विश्व का अंता महेश है,

रघु बलवंता, हरि भगवंता, एकदंता गणेश है.

4

ब्रह्मा है मंडन, विष्णु है स्पंदन, जगत निकंदन महेश है,

राम रघुनंदन, हरि जगवंदन, सब स्वर व्यंजन गणेश है.

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(058)

Prayer, Dattatray, Hindi

दत्तात्रय वंदना

दत्त गुरु मेरा, जय जय हो.

दत्ता दिगंबर, शिव शिव ओम्, बोलो.

सद्गुरु मेरा, जय जय हो. दत्त गुरु मेरा, जय जय हो.

1

मुख माँगे दान देता, सब से न्यारा न्यारा.

जग में जिसका बोल बाला, हर हर ओम्.

आहा! तीन मुखी सत् नाम कहो. दत्त गुरु मेरा, जय जय हो.

2

दुख करे दूर सारे, सब से प्यारा प्यारा.

सबसे ऊँचे नाम वाला, हर हर ओम्.

आहा! दीन दुखी भगवान् कहो. दत्त गुरु मेरा, जय जय हो.

3

सुख देता ढेर सारे, दत्तात्रय मेरा.

हम पर उसने जादू डारा, हर हर ओम्.

आहा! एक सखा सियराम कहो. दत्त गुरु मेरा, जय जय हो.

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(059)

Prayer, Durge Ma, Hindi

दुर्गा राग

जै दुर्गे माँ

जै जै माँ, दुर्गे माँ, जै जै माँ, अंबे माँ.

मोहे, भव से तारो दुर्गे माँ, मोरे, विघ्न उतारो अंबे माँ.

राह नहीं है तुम बिन जग में, चाह नहीं भवसागर में.

1

माता तुम हो काली कराली, देवी भवानी शेरोंवाली.

लीला तुमरी सब जग जानत, नारद शारद बरनत माँ.

2

नाता तुमरा आदि जनम का, जय जगदंबे जोताँवाली.

दे दो दरशन सपनन आकर, सुंदर मंगल सज धज माँ.

3

माया तुमरी न्यारी निराली, जय जगवंदे लाटाँवाली.

जै जै करते महिमा गाकर, शंकर किन्नर भगतन माँ.

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(060)

Prayer, Ganapati Deva, Hindi

खमाज राग

गणपति देवा

गणपति गणपति गणपति देवा, कोई लाए मोदक कोई लाए मेवा.

गणपति गणपति गणपति देवा.

1

गणपति गणपति गणपति देवा, कोई करे भगति तो कोई करे सेवा.

गणपति गणपति गणपति देवा.

2

भजनन किरतन बहुविध देवा, लंबोदर लंबोदर लंबोदर देवा.

गणपति गणपति गणपति देवा.

3

मुनि जन करियत जप तप सेवा, गजमुख गजमुख गजमुख देवा.

गणपति गणपति गणपति देवा.

4

अर्पण सब तव चरणन देवा! गौरीसुत गौरीसुत गौरीसुत देवा.

गणपति गणपति गणपति देवा.

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(061)

Prayer, Adi Nath Ganesh, Hindi

रत्नाकर राग

आदि नाथ गणेश

साई, आदि नाथ, आदि नाथ, आदि नाथ मेरा.

सुख कारी, दुख हारी, शुभ बहुतेरा.

1

साधु संत, ज्ञानवंत, करे तेरी पूजा,

तेरे जैसा दाता कोई और नहीं दूजा.

करें ध्यान, करें मान, करें गान तेरा,

2

वक्र तुंड, एक दंत, छवि तेरी प्यारी,

देवे ऋद्धि, देवे सिद्धि, देवे बुद्धि न्यारी.

तुही राम, तूही श्याम, तूही प्राण मेरा,

3

तू अनंत, तू दिगंत, मूर्तिमंत धाता,

तू ही बंधु, तू ही ताता, तू ही मेरी माता.

तूही रम्य, तूही गम्य, तू अनन्य देवा,

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(062)

Prayer, Ganga Maiya, Hindi

दादरा ताल

गंगा मैया

गंगा मैया तू मंगल है माता, तेरा आँचल है कितना सुहाना.

तेरी लहरों में है गुनगुनाता, मैया! संगीत सरगम तराना.

1

निकली शंकर की काली जटा से, तुझको भगिरथ ने लाया धरा पे.

तुझको जन्हू की कन्या है माना, तेरा इतिहास पावन पुराना.

2

तेरे जल में हिमालय की माया, तुझमें जमुना का पानी समाया.

शरयु को भी गले से लगाया, तूने उनको भी दीनी गरिमा.

3

तेरा तीरथ है लीला जगाता, सारे पापों से मुक्ति दिलाता.

सारी नदियों में तू भागवाना, इसी कारण तू सबकी बड़ी माँ.

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(063)

Prayer, Guru Vandana, Hindi

भैरवी राग, कहरवा ताल

गुरु वंदना

गुरु ब्रह्म शिव, गुरु विष्णु है, गुरु चरणन में ज्ञान सही.

गुरु चरणन में ज्ञान सही.

गुरु ब्रह्म शिव, गुरु विष्णु है, गुरु चरणन में ज्ञान सही.

1

गुरु राम है, गुरु श्याम है, श्री गणपति का अवतार वही.

गुरु चरणन में ज्ञान सही.

गुरु ब्रह्म शिव, गुरु विष्णु है, गुरु चरणन में ज्ञान सही.

2

ज्ञान सिखावे, राह दिखावे, गुरु के तले अंधःकार नहीं.

गुरु चरणन में ज्ञान सही,

गुरु ब्रह्म शिव, गुरु विष्णु है, गुरु चरणन में ज्ञान सही.

3

भरम भगावे, भाग्य जगावे, गुरु से बड़ा अधिकार नहीं.

गुरु चरणन में ज्ञान सही.

गुरु ब्रह्म शिव, गुरु विष्णु है, गुरु चरणन में ज्ञान सही.

4

छाँव गुरु है, नाव गुरु है, गुरु से बड़ी पतवार नहीं.

गुरु चरणन में ज्ञान सही.

गुरु ब्रह्म शिव, गुरु विष्णु है, गुरु चरणन में ज्ञान सही.

5

गुरु गुण गावो, गुरु ऋण ध्यावो, गुरु किरपा का भार नहीं.

गुरु चरणन में ज्ञान सही.

गुरु ब्रह्म शिव, गुरु विष्णु है, गुरु चरणन में ज्ञान सही.

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(064)

Prayer, Ishaya Namah, Sanskrit

ईशाय नमः

ईशाय, विघ्नेश्वराय, जगदीश्वराय, सत् ओम्.

दैवाय, विश्वंकराय, भुवनेश्वराय, सत् ओम्.

1

रुद्राय, शिवशंकराय, दुखभंजनाय, हर ओम्.

भद्राय, गंगाधराय, श्री त्र्यंबकाय, हर ओम्.

2

रामाय, रघुनंदनाय, मधुचंदनाय, हरि ओम्.

रामाय, सीतावराय, पुरुषोत्तमाय, हरि ओम्.

3

श्यामाय, बंसीधराय, पीतांबराय, जय ओम्.

कृष्णाय, राधावराय, दामोदराय, जय ओम्.

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(065)

Prayer, Kumbha Mela, Hindi

भैरवी राग

कुंभ मेला

सामम ममपम मपम , पप पममम रे .

तीर्थ प्रयाग सजेला है, पुष्प समान तजेला है.

उत्सव शुभ अलबेला है, यहाँ कुम्भ का मेला है.

1

इंद्र स्वर्ग से आया है, घट अमरित का लाया है.

सुंदर मंगल बेला है. यहाँ कुम्भ का मेला है.

2

बूँदें चार गिरी भू पर, पावन धामों के ऊपर.

सब शिवजी का रचेला है. यहाँ कुम्भ का मेला है.

3

गंगा जल शुचि होता है, पाप जनम के धोता है.

यह कुदरत का खेला है. यहाँ कुम्भ का मेला है.

4

ऋषि मुनि गण गुणवंत भले, योगी संत महंत चले.

जन सागर उमड़ेला है. यहाँ कुम्भ का मेला है.

5

कोटिकोटि नर आए हैं, निर्मल श्रद्धा लाए हैं.

त्रिभुवन सर्व फबीला है, यहाँ कुम्भ का मेला है.

यहाँ कुम्भ का मेला है.

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(066)

Prayer, Lakshmi Devi Aarti, Hindi

मालकंस राग

लक्ष्मी देवी आरती

तेरी आरती करूँ लछमी देवी.

देवी, वर दान तेरा हमें भाता है.

वर दान तेरा हमें भाता है.

1

दरशन तेरा शुभ मंगल है. तू, धन दाती जग माता है.

देवी, वरदान तेरा हमें भाता है. वर दान तेरा हमें भाता है.

2

बालक हम हैं देवी तेरे. देवी, जनमजनम का नाता है.

देवी, वरदान तेरा हमें भाता है. वर दान तेरा हमें भाता है.

3

शेष शायी आसन तेरा है. जो, शीश हमारा नवाता है.

देवी, वरदान तेरा हमें भाता है. वर दान तेरा हमें भाता है.

4

मन से करता पूजा तेरी. देवी, सब कुछ वो नर पाता है.

देवी, वरदान तेरा हमें भाता है. वर दान तेरा हमें भाता है.

5

सुमिरन तेरा सुख देता है. मन, बारबार हमें आता है.

देवी, वरदान तेरा हमें भाता है. वर दान तेरा हमें भाता है.

6

धन की राशी कर में तिहारे. देवी, प्यार तेरा हमें भाता है.

देवी, वर दान तेरा हमें भाता है. वर दान तेरा हमें भाता है.

7

तेरी किरपा का जो प्यासा. देवी, तेरे दुआरे आता है.

देवी, वरदान तेरा हमें भाता है. वर दान तेरा हमें भाता है.

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(067)

Prayer, Lakshmi Devi ki Jai, Hindi

लक्ष्मी देवी की जय

लक्ष्मी देवी की जय बोलो, जय श्री विष्णू हरि हरि!.

प्रसाद खा लो, तीरथ पी लो, आरती गा लो घड़ीघड़ी.

1

पूजा पाठ को ध्यान से करना, रीत प्रभु की बड़ी कड़ी.

बंधु भाई सत् जन सारे, साथ स्नेह की लड़ी लड़ी.

2

पाठ पूजा का फल है मीठा, किस्मत करता हरी भरी.

निशदिन बोलो लक्ष्मी लक्ष्मी, गाँठ खुलेगी अड़ी अड़ी.

3

पाप जला लो, पुण्य कमा लो, जप में जादू खरी खरी.

यज्ञ मना लो, भाग्य जगा लो, बरसे अमृत झड़ी झड़ी.

4

नारायण का नाम सिमर लो, आवन जावन खड़ीखड़ी.

कृष्ण प्रभु का नाम ले रसना, मुख में निठल्ली पड़ी पड़ी,

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(068)

Prayer, Jai Lakshmi Dhana Dayini, Hindi

बिहाग राग

जय लक्ष्मी धनदायिनी

जय लक्ष्मी धनदायिनी जय हो, जन गण जीवन शुभ सुख कर हो.

जय जननी वर दायिनी वर दो, सत् चित से मम तन मन भर दो,

जय लक्ष्मी धनदायिनी जय हो.

1

कर कमलों में पद्म तिहारे, लाल कमल पर पद हैं तुम्हारे.

जय लक्ष्मी धनदायिनी जय हो, जय लक्ष्मी धनदायिनी जय हो.

2

केयूर कंठी मुंदरी माला, हार मुकुट नथ काजल काला.

जय लक्ष्मी धनदायिनी जय हो, जय लक्ष्मी धनदायिनी जय हो.

3

धन की राशी कर में तुम्हारे, भाग जगाती पल में हमारे.

जय लक्ष्मी धनदायिनी जय हो, जय लक्ष्मी धनदायिनी जय हो.

4

जय जय देवी जय जगदंबे, तेरी शरण में भगतन बंदे.

जय लक्ष्मी धनदायिनी जय हो, जय लक्ष्मी धनदायिनी जय हो.

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(069)

Prayer, Om Jai Sarasvati Mata, Hindi

खमाज राग

जै सरस्वती माता

जै जै स्वरदा माता, देवी स्मरण तेरा भाता.

दरशन तुमरे सुंदर, सुमिरन तुमरे मंगल.

चाहे सब ध्याता, जै सरस्वती माता.

जै सरस्वती माता.

1

जो आवे गुण पाने,

ध्यान लगाने का, देवी ज्ञान बढ़ाने का.

तेरे दर पर पावे, झोली भर कर जावे.

ध्येय सफल उसका, जै सरस्वती माता.

जै सरस्वती माता.

2

जो आवे सुर पाने, गान बजाने का.

देवी तान सजाने का, संगित नृत्य सिखाने,

नाट्य कला को दिखाने, मार्ग सरल उसका,

जै सरस्वती माता. जै सरस्वती माता.

3

जो प्यासा है कला का, चित्राकारी का.

देवी शिल्पाकारी का, चौंसठ सारी कलाएँ,

विद्या अष्ट लीलाएँ, साध्य सकल उसका,

जै सरस्वती माता, जै सरस्वती माता.

4

जो कवि गायक लेखक, वाङ्मय विरचेता.

देवी सरगम रचयेता, साहित्य साधन पावे,

बुद्धि का धन आवे, हेतु सबल उसका,

जै सरस्वती माता, जै सरस्वती माता.

5

शुभ्र वसन नथ माला, काजल का तिल काला.

देवी हाथ कमल नीला, केयुर कंठी छल्ला,

गजरा कुंदन ड़ाला, मुकुट है नग वाला,

जै सरस्वती माता, जै सरस्वती माता.

6

नारद किन्नर शंकर, तुमरे गुण गाते.

देवी तुमरे ऋण ध्याते, भगत जो शरण में आता,

भजन ये तुमरे गाता, मोक्ष अटल उसका,

जै जै सरस्वती माता, जै सरस्वती माता,

जै सरस्वती माता.

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(070)

Om Namah Shivaya, Hindi

भैरवी राग

ओम् नमः शिवाय

जै जै जै जै भक्तों बोलो, ओम् नमः शिवाय.

ओम् नमः शिवाय, ओम् नमः शिवाय.

1

शिव ललाट पे चंदा साजे, जटा काली में गंग विराजे.

डम डम डम डम डमरू बाजे, गूँजे नारा नमः शिवाय.

ओम् नमः शिवाय, ओम् नमः शिवाय, ओम् नमः शिवाय.

जै जै जै जै भक्तों बोलो, ओम् नमः शिवाय.

2

नटवर तांडव थैया नाचे, डम डम डम डम डंका बाजे.

त्रिशूल दाएँ हाथ विराजे, गूँजे नारा नमः शिवाय.

ओम् नमः शिवाय, ओम् नमः शिवाय, ओम् नमः शिवाय.

जै जै जै जै भक्तों बोलो, ओम् नमः शिवाय.

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(071)

Prayer, Parvati Nandan Ganesh, Hindi

रत्नाकर राग

पार्वती नंदन गणेश

पार्वती नंदन, हे जग वन्दन, दया निधान,

आरती चंदन, तुम्हें प्रणाम, हे जग वन्दन, दया निधान.

1

ज्ञान देवता, ध्यान विधाता, हे भव नाथा, मंगल दाता,

मोदक मेवा पुष्प गुलाब, हे मन रंजन, तुम्हें प्रणाम.

हे जग वन्दन, दया निधान.

2

नारद तुंबर, गात हैं शंकर, डोलत गूँजत, धरती अंबर,

बाँसुरी सुंदर कृष्ण कुमार, पुण्य गजानन! तुम्हें प्रणाम.

हे जग वन्दन, दया निधान.

3

कटि पीतांबर, पाँव में पैंजन, मुकुट शीश पर, कानन कुंडल,

गल में सुंदर मोतियन हार, हे दुख भंजन, तुम्हें प्रणाम.

हे जग वन्दन, दया निधान.

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(072)

Prayer, Pavan Putra Ganesh, Hindi

पिता महादेवा

पिता महादेवा, माता पार्वती, पावन पुत्र गणेशा.

1

शंभो शंकर, हे मन भावन, तेरा कीर्तन सब से पावन.

जय जय जय गण नाथा.

2

दुर्गे देवी, गौरी भवानी, तेरी माया है जग जानी.

जय जय जय जग माता.

3

बुद्धि दायक, सिद्धि विनायक, तेरी किरपा है सुख दायक.

जय जय जय गुण दाता.

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(073)

Prayer, Sarasvati Devi Vandana, Hindi

भैरवी राग के रूपक ताल

देवी सरस्वती वंदना

सा- रे सा-, निध प म प- म ग,

गप निप रे- रे रे- ग प- म-

देवी सरस्वती ज्ञान दो, हमको परम स्वर गान दो,

हमरा अमर अभिधान हो, माँ शारदे वरदान दो.

1.

तेरी करें हम आरती, तेरे ही सुत हम भारती,

सब विश्व का कल्याण हो, माँ शारदे वरदान दो.

2

मन में अमन सं चार हो, सारा सुखी संसार हो,

वसुधैव कुटुंब प्रमाण हो, माँ शारदे वरदान दो,

3

तुम ही हो बुद्धि दायिनी, तुम ही महा सुख कारिणी,

तुम ही गुणों की खान हो, माँ शारदे वरदान दो.

4

तेरी कृपा से काम हो, जग में हम नाकाम हों,

हमको कभी अभिमान हो, माँ शारदे वरदान दो.

5

तुम हो कला की देवता, देवी हमें दो योग्यता,

हमको हुनर परिधान हो, माँ शारदे वरदान दो.

माँ शारदे वरदान दो.

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(074)

Prayer, Sarasvati Mangal Smaran, Hindi

यमन कल्याण राग

सरस्वती संगल स्मरण

मंगल सुंदर सुमिरण प्यारे, सुखकर वंदन देवी तिहारे.

1

सुन कर वीणा तार सुखारे, भगतन सारे शरण तुम्हारे.

2

सरस्वती माँ ज्ञान की दाती, शुभ वर दे दे परम पियारे.

3

हम बालक हैं गोद में तेरी, ममता से तू हमें निहारे.

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(075)

Prayer, Sarasvati Sumiran, Hindi

रत्नाकर राग

सरस्वती सुमिरण

हम ध्यान धरें माँ का, स्वर गान करें माँ का.

अज्ञान परे करने, वर दान हमें दो माँ.

1

संगीत की तू देवी, काव्य कला रस सेवी.

हर कारीगर की माता, पावन सरगम सरिता.

सुर सुंदर की मूर्ति, कवि की तन्मय स्फूर्ति.

तुझसे चिन्मय धरती, कल्याण करो माता.

निस्तार करो माता, हम ध्यान धरें माँ का.

स्वर गान करें माँ का, हम ध्यान धरें माँ का.

हम ध्यान धरें माँ का.

2

वचनों की राणी तू, निर्मल अमृत वाणी.

ज्ञान की अक्षय दानी, कोई नहीं तव सानी.

देव देवता सारे, ऋषिमुनि कवि जन भारे.

कहते बाँह पसारे, आधार करो माता.

उद्धार करो माता, हम ध्यान धरें माँ का.

स्वर गान करें माँ का, हम ध्यान धरें माँ का.

स्वर गान करें माँ का, हम ध्यान धरें माँ का.

हम ध्यान धरें माँ का.

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(076)

Prayer, Satya-Narayan Pujan, Hindi

सत्य नारायण पूजा

तेरे पूजन से भगवान, होते पूरण सबके काम.

1

जिसने माया तेरी जानी, उसने छाया तेरी पानी.

तेरे गाते जो नित गान, उनके पूरण हैं सब काम.

2

हरि कथा को जिसने गाया, व्रत के फल को उसने पाया.

होकर सफल सभी अरमान, उसके पूरण हैं सब काम.

3

नाम को तेरे जिसने माना, तेरे मन को उसने जाना.

पाकर तेरा ही फरमान, उसके पूरण हैं सब काम.

4

पूजन तेरा जिसको भाया, उसने जानी तेरी माया.

फिर पाकर शुभ अंजाम, उसके पूरण हैं सब काम.

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(077)

Prayer, Satya-Narayan Vrat Puja, Hindi

मालकंस राग

सत्य नारायण व्रत पूजा

श्री सत्य नारायण साँई रे, तेरी आरती बड़ी सुखदायी, रे.

1

लक्ष्मीपति जग स्वामी हैं, मेरे माता पिता अरु भाई, रे.

लक्ष्मीपति जग स्वामी हैं, मेरे माता पिता अरु भाई, रे.

2

किरपावान गोसाईं हैं, अरु निश दिन मेरे सहाई, रे.

किरपावान गोसाईं हैं, अरु निश दिन मेरे सहाई, रे.

3

पूजा पाठ सजाओ रे, अजी! गान कथा भी सुनाओ, रे.

पूजा पाठ सजाओ रे, अजी! गान कथा भी सुनाओ, रे.

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(078)

Prayer, Satya Sai Baba, Hindi

भैरव राग

सत्य साँई बाबा

दाता मेरा सत्य साँई बाबा, पालन करता तू जग सारा.

1

साँई हमारा एक सहारा, निश दिन पाहि मम संसारा.

2

भाई हमारा अरु रखवारा, दूर करेगा सब अँधियारा.

3

साई हमारा एक किनारा, जा के अँधेरा जग उजियारा.

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(079)

Krishnayan, Shanti Path for Departed Soul, Hindi

मृतात्मा शांति पाठ

प्रभो शांति देना इस आतमा को, तुमको हमारी यह वंदना है.

1

मिले आतमा ये परमातमा से, लेना चरण में यह प्रार्थना है.

2

सारे जगत के आनंद दाता, गोविंद देना सुख आतमा को.

3

हे कृष दामोदर चक्रपाणि, इसे मोक्ष देना यह अर्चना है.

4

इसे पुण्य की तू घनी छाँव देना, तुझसे हमारी यह प्रार्थना है.

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(080)

Prayer for the Departed Solu, Sanakrit

मृतात्मा शांतिपाठ, संस्कृत

[Intro]

ददातु शान्तिम् एनमातमानम्, याचाम ईशम् परमातमानम्,

प्राप्तुम् धैर्यम् दुखिनम् कुटुंबम्, वयं प्रार्थयामो धर्मातमानम्.

1

लभेत स्वर्गे स्थानम् अखंडम्, प्रभोश्चरणयोश्च मोदं प्रचंडम्,

2

भवेदस्य क्रोडं ब्रह्मांडशून्यम्, प्राप्नुयादाशीर्वचनम् पुण्यम्,

3

प्रभो! दिवंगतम् ब्रह्मलीनम्, करोतु एनं पूर्णपापहीनम्,

4.

सर्वस्य प्रियम् एनं असीमितम्, गायाम एतद्विरहस्य गीतम

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(081)

Prayer, Sharada Devi Kripa, Hindi

शारदा कृपा

ये मंगल सुंदर, है किरपा तिहारी.

देवी! शारदे, देवी! शारदे.

1

मेरी माँ! मेरी माँ! द्वार पे तेरे, आके खड़ा हूँ, देवी! ज्ञान दे.

2

गरीमा गरीमा, अपारा तिहारी, भव में पड़ा हूँ, देवी! तार दे.

3

तेरे बिना मैं, बीच भँवर में, कबसे खड़ा हूँ, देवी! ध्यान दे.

4

सुनने को मंजुल, ये वीणा तिहारी, आतुर बड़ा हूँ, देवी! वागीशे.

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(082)

Prayer, Sharada Devi, Hindi

यमन कल्याण राग

शारदा वंदना

जगत शारदा कहता है तुमको, दान ज्ञान का करती तुम हो.

तन मन धन सब अर्पण तुमको, कला काव्य का दर्पण तुम हो,

1

हाथ में वीणा वाद्य विराजे, साम वेद की पुस्तक साजे.

श्वेत वसन करे धारण तुमने, नील कमल पर आसन तुमरे.

तनमन धन सब अर्पण तुमको, कला काव्य का दर्पण तुम हो.

2

कुंडल पायल मोती माला, हार मुकुट नथ काजल काला.

कंचन वाले कंगन झुमके, हंस मयूर गौ आंगन तुमरे.

तनमन धन सब अर्पण तुमको, कला काव्य का दर्पण तुम हो.

3

नारद किन्नर आन दुआरे, भगत करत स्तुति गान तुहारे.

मोर मुकुट को शीश पे धारे, माधव हरि जगदीश पधारे.

तनमन धन सब अर्पण तुमको, कला काव्य का दर्पण तुम हो.

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(083)

Prayer, Sharada Smaraniya, Sanskrit

शारदा स्मरणीया

शारदा सदा स्मरणीया, स्वरदा वरदा स्तवनीया,

1

अनुकम्पा हृदि धरणीया, सेवा मनसा करणीया,

भारतजननी नमनीया, संस्कृतवाणी स्तवनीया.

2

नहि सुखशय्या शयनीया, नीचचिन्ता चयनीया,

 रजःकामना शमनीया, तमोवासना दमनीया.

3

सततसुबुद्धिर्धरणीया, मानसशुद्धिर्वरणीया,

शुभा सरणिरनुसरणीया, सत्सङ्गतिरभिलषणीया.

4

जातिकुप्रथा त्यजनीया, बन्धुभावना भजनीया,

अखिलसङ्घता करणीया, विश्वे समता भरणीया.

5

प्रमत्तकुमतिर्दहनीया,       आगतहानिस्सहनीया,

प्रजाप्रतिष्ठा वहनीया, मया प्रतिज्ञा ग्रहणीया.

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(084)

Prayer, Shirdi Wale Saai Baba, Hindi

शिरडी वाले साँई बाबा

शिरडी वाले सलाम, साँई बाबा प्रणाम.

भजूँ मैं तेरे नाम, तू ही है राम और श्याम,

तू ही है राम और श्याम, शिर्डी.

1

तू ही है साँई राम, तुझ पे हम कुरबान,

तुझको लाख प्रणाम, हे मेरे भगवान.

2

जगत में एक महान, गाएँ तेरे गुण गान,

शिरडी परम धाम, हे मेरे भगवान्.

3

दे दो प्रभु वरदान, साँई तू भगवान,

गाऊँ श्री गुण गान, हे मेरे भगवान्.

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(085)

Prayer, Shiv ji Umapati, Hindi

अहीर भैरन राग

शिवजी उमापति वंदना

शशिधर हे अहिधारी, उमापति! दर्शन दो त्रिपुरारि.

नाथ हमारे भोले भाले, हम हैं तेरी बलिहारी.

1

आस लगाये साँझ सकारे, दया दिखा दो शेखर प्यारे.

शिव शंकर जी लीला दिखा दो, भाल चंद्र शशिधारी.

2

सांब सदाशिव खेवन हारे, तुम्हें मनाते भगतन सारे.

भव सागर को पार कराओ, गंगाधर हितकारी.

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(086)

Prayer, Shiva Parvati Ganesh, Hindi

काफी राग

शिव पार्वती गणेश

शिव पार्वती गणेश, जय जय शिव पार्वती गणेश.

ध्याऊँ तुमको, पाऊँ तुम को, वंदन करूँ महेश.

1

ज्यों हि तुमरे सुमिरण कीने, सपनन तुमने दर्शन दीने.

भवसागर से सुखसागर में, दूर हुए क्लेष.

2

जो भी तुमरे दर पर आवे, पल में उसके घर भर जावे.

दुःख जगत के वो तर जावे, तेरी कृपा उमेश.

3

कोई तुमसे अलख नहीं है, सारी तुमसे व्याप्त मही है.

तेरी कृपा से हसरत मेरी, पूर्ण हुई अशेष.

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(087)

Shiva Tandava Nritya, Hindi

दरबारी कान्हडा राग

तांडव नृत्य

छम् छम पैंजन घुंघरू बाजे, साथ में डम डम डमरू बोले.

गौरी शंकर तांडव नाचे.

1

गल में माला सर्प बिराजे, कटि पर हिरन की छाला साजे.

शंख फूँकते बम् बम् भोले, धरती अंबर संग में डोले.

2

सिर पे गंगा, चंद्र जटा में, तन पर भसम बिभूति शिवा के.

आँख तीसरी शंकर खोले, डम् डम डम् डम डमरू बोले.

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(088)

Prayer, Shri Ganeshaya Namah, Hindi

यमन कल्याण राग

गणपति बाप्पा

गजाननः कलादेवो नृत्यसंगीतशिल्पकः

ददाति कलाधीशः ज्ञानं बुद्धिं कौशलम्

सुंदर दर्शन सुमिरण प्यारे, सुखमय गान गणेश तुम्हारे.

1

गणपति बाप्पा परम पियारे, गण नायक विघ्नेश दुलारे.

2

निहार सुंदर काम सुखारे, भगतन आते चरण तिहारे.

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(089)

Prayer, Surya-Nava Graha, Sanskrit

बिलावन राग

सूर्य-नवग्रह वंदना

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं राहुं केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

1

आदित्यं भास्वरं भानुं रविं सूर्यं प्रभाकरम्.

अरुणं मिहिरं मित्रं पूर्णभक्त्या नमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं राहुं केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

2

तमोरिं तारकानाथं पापघ्नं रात्रिभूषणम्.

इन्दुं चन्द्रं विधुं सोमं दण्डवत्प्रणमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं राहुं केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

3

मङ्गलाङ्गं महाकायं ग्रहराजं ग्रहाधिपम्.

अङ्गारकं महाभागं साष्टाङ्गः प्रणमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं राहुं केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

4

बुद्धिमतां बुधं श्रेष्ठं नक्षत्रेशं मनोहरम्.

बुद्धिदं पुण्डरीकाक्षं कृताञ्जलिर्नमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं राहुं केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

5

सौम्यमूर्तिं ग्रहाधीशं पीताम्बरं बृहस्पतिम्.

तारापतिं सुराचार्यं प्रणिपातो नमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं राहुं केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

6

भार्गवं वृष्टिकर्तारं स्वभासाभासिताम्बरम्.

प्रकाशं शङ्करं शुक्रं सायं प्रातो नमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं राहुं केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

7

विघ्नराजं यमं रौद्रं सर्वपापविनाशकम्.

शनीश्वरं शिवं शुभ्रं शतशः प्रणमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं राहुं केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

8

विप्रचित्तिसुतं राहुं रक्ताक्षमर्धविग्रहम्.

सिंहिकानन्दनं दैत्यं पुनः पुनो नमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं राहुं केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

9

रुद्रप्रियग्रहं कालं धूम्रकेतुं विवर्णकम्.

लोककेतुं महाकेतुं मुहुर्मुहुर्नमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं राहुं केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

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(090)

Prayer, Vande Ganeshvaram, Sanskrit

श्लोक छंद

वन्दे गणेश्वरम्

शतवारमहं वन्दे लम्बतुण्डिं गणेश्वरम्.

एकदन्तं हेरम्बं चारुकर्णं गजाननम्.

1

गं गं गं गं गणेशं श्रीं चतुर्बाहुं महोदरम्.

विश्वमूर्तिं महाबुद्धिं वरेण्यं गिरिजासुतम्.

2.

गणपतिं परब्रह्म शूर्पकर्णं करीमुखम्.

पशुपतिमुमापुत्रं लम्बोदरं गणाधिपम्.

3.

हस्तिमुखं महाकायं ढुण्ढिं सिद्धिविनायकम्.

वक्रतुण्डं चिदानन्दम्आम्बिकेयं द्विमातृजम्.

4

.महाहनुं विरूपाक्षं ह्रस्वनेत्रं शशिप्रभम्.

पीताम्बरं शिवानन्दं देवदेवं शुभाननम्.

5

सर्वमङ्गलमाङ्गल्यं प्रभुं मूषकवाहनम्.

ऋद्धिसिद्धिप्रदातारं विघ्नहरं विनायकम्.

6

.जगदीशं शिवापुत्रम् आदिनाथं क्षमाकरम्.

अनन्तं निर्गुणं वन्द्यं यशस्करं परात्परम्.

7

गौरीपुत्रं गणाधीशं गजवक्त्रं कृपाकरम्.

भालचन्द्रं शिवानन्दं पार्वतीनन्दनं भजे.

8

आदिपूज्यं शुभारम्भं ज्ञानेशं मोदकप्रियम्.

प्रातः सायमहं वन्दे गणेशं सरस्वतीम्.

9

प्राप्तुं ज्ञानं युवाभ्याञ्च विद्यां भाग्यं शुभान्वरान्.

नमस्कृत्य कृताञ्जलिः रत्नाकरो भजाम्यहम्.

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(091)

Prayer, Veena Ki Jhankar, Hindi

वीणा वादिनी

झनक झनक वीणा झनकारी, मंजुल मंगल धुन है प्यारी.

1

छम् छम छम छम घुँघरू बोले, पायल रुम झुम पैंजन बाजे.

साथ मंजीरा धुन हिय हारी, झनक झनक वीणा झनकारी,

मंजुल मंगल धुन है प्यारी.

2

सर् सर सर सर घुँघटा सरके, कुंडल चमचम बिंदिया चमके.

नाचत चंचल राधा गोरी, झनक झनक वीणा झनकारी,

मंजुल मंगल धुन है प्यारी.

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(092)

Prayer, Veena Vadini Sarasvati, Hindi

देस राग

वीणा वादिनी

सुरीली वीणा की तव तार, हटाए भगतन का मन भार.

देवी वीणा की तव तार, सुरीली वीणा की तव तार.

1

मंगल सुंदर गान तिहारे, आकर दो दीदार.

नयनन प्यासे प्यास बुझावे, पावन रूप तिहार.

2

ज्ञान की देवी दान कला का, परम तेरा उपकार.

रूप सलोना हाथ में वीणा, शारद नाम तिहार.

3

जीवन ये संगीत सुहाना, गीत करो साकार.

माँ ममता का दीप जगाके, दूर करो अंधकार

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(093)

Prayer, Vishnu Bhagawan, Hindi

रत्नाकर राग

विष्णु भगवान्

विष्णु स्वाहा है, विष्णु स्वधा है, वषट् विष्णु ही स्वस्ति है.

विष्णु यज्ञ है, विष्णु हवि है, विष्णु ब्रह्म की हस्ती है.

1

विष्णु होम है, विष्णु सोम है, का स्तोम है.

विष्णु व्योम है, विष्णु भौम है, रोमरोम का जोम है.

2

विष्णु फूल हैं, विष्णु फल हैं, विष्णु जल की आहुति है.

विष्णु मनन है, विष्णु नमन है, विष्णु भजन और आरती है.

3

विष्णु गुरु है, विष्णु मनु है, विष्णु पुरुष और प्रकृति है.

विष्णु जिष्णु है, विष्णु सत्य है, विष्णु कृष्ण शिव प्रभृति है.

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(094)

Ramayan Chaupai, Raghav Lanka Se Chale, Hindi

रामायण चौपाई-2

दोहा

राघव लंका से चले, वापस अपने देस.

देत विदाई रोइके, विभीषण जी लंकेस.

चौपाई

1

सिया संग श्री राम सुहाते, देख युगल मम नैन लुभाते.

रामसिया राम, सिया राम, जै जै रामा.

2

शुभ्र वस्त्र में रघुवर साजे, पीत वसन सिय तन पे बिराजे.

रामसिया राम, सिया राम, जै जै रामा.

3

पुष्प पर्ण आभूषण धारी, शुद्ध सादगी लगती प्यारी.

रामसिया राम, सिया राम, जै जै रामा.

4

जटा खड़ाऊँ पिनाक धारी, रामचंद्र की मूरत न्यारी.

रामसिया राम, सिया राम, जै जै रामा.

5

रामसिया शुभ मंगलकरी, प्रभु चरणन में सब बलिहारी.

रामसिया राम, सिया राम, जै जै रामा.

6

राम लखन सीता हनुमंता, दर्शन पावन सुखद अनंता.

रामसिया राम, सिया राम, जै जै रामा.

7

सुरअसुर सब अमृत भीने, विभीषण को लंका पति कीन्हे.

रामसिया राम, सिया राम, जै जै रामा.

8

भरत मिलन की मन में आसा, रामलखनसिय हनुमत दासा.

रामसिया राम, सिया राम, जै जै रामा.

रामसिया राम, सिया राम, जै जै रामा.

दोहा

भरतमिलन की आस है, चाँद चकोर समान.

सीता को लेकर चले, राम लखन हनुमान.

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(095)

Ramayan Chaupai, Rama-Siya Van ko Chale, Hindi

रामायण चौपाई-1

दोहा    

रामसिया वन को चले, लखन लला है साथ.

मातु पिता गृह को तजे, धन्य धन्य रघुनाथ.

चौपाई

चंदन तिलक सुमंगल माथे, चंदन तिलक सुमंगल माथे.

दशरथ नंदन राम सुहाते.

श्री राम जय राम, जय जय रामा,

जय राम सिया राम, जय जय रामा.

जय राम सिया राम, जय राम सियाराम, जय जय रामा.

श्री राम जय राम, जय जय रामा,

जय राम सिया राम, जय जय रामा.

2

शीश जटा कटि वल्कल धारे, कानन कुंडल नयन लुभाते.

श्री राम जय राम, जय जय रामा,

जय राम सिया राम, जय जय रामा.

3

मुख मंडल पर हास्य बिराजे, विघ्न कष्ट कछु नाहि दुखाते.

श्री राम जय राम, जय जय रामा,

जय राम सिया राम, जय जय रामा.

4

वीर धनुर्धर धीरज धारी, संकट मोचन राम कहाते.

श्री राम जय राम, जय जय रामा,

जय राम सिया राम, जय जय रामा.

5

राम रमैया भव की नैया, राम नाम नर को हरसाते.

श्री राम जय राम, जय जय रामा,

जय राम सिया राम, जय जय रामा.

6

राम सहारे, राम किनारे, राम नाम सब दुख बिसराते.

श्री राम जय राम, जय जय रामा,

जय राम सिया राम, जय जय रामा.

7

भीषण पाप मनुष के जेते, राम नाम से सब छुट जाते.

श्री राम जय राम, जय जय रामा,

जय राम सिया राम, जय जय रामा.

8

रामसिया संग लछमन सोहे, लखन लला सब जन को भाते.

श्री राम जय राम, जय जय रामा,

जय राम सिया राम, जय जय रामा.

9

राज काज सुख तज कर सारे, मातुतात के बचन निभाते.

श्री राम जय राम, जय जय रामा,

जय राम सिया राम, जय जय रामा.

10

सिया संग प्रभु वन में बिराजे, भगतन राम चरित शुभ गाते.

श्री राम जय राम, जय जय रामा,

जय राम सिया राम, जय जय रामा.

11

वाह वाह रे दशरथ राजा! धन्य धन्य कौशल्या माते!.

श्री राम जय राम, जय जय रामा,

जय राम सिया राम, जय जय रामा.

दोहा

दीन दयाला आप हैं, करुण कृपालु राम!.

कौशल्या सुत, हे सखे! पाहि पाहि रे माम्.

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(096)

Ramayan ki Param Kahani, Hindi

रामायण की अमर कहानी

रामायण की परम कहानी, मुनिवर कह गये ध्यानी रे.

राम कथा की अमृत वाणी, सुन सुन जन भये ज्ञानी रे.

1

राम नाम का चल कर जादू, पाप ताप सब भागे रे.

पापी लुटेरा रतनाकर भी, बन गयो बाल्मीकि आगे रे.

2

वचन पिता का सिर पर धर के, त्यागा राज को हासी रे.

सौकन माँ की तृप्ति करने, बना राम वनवासी रे.

3

सुख दुख दोनों समान कर के, जस कहती है गीता रे.

साथ पति के बन को निकली, धर्मचारिणी सीता रे.

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(097)

Ramayan, Diwali Bhajan, Hindi

दीपावली गीत

घर घर दीप जलाओ, सखी री, आज दीवाली,

आतशबाज़ी जलाओ, रे भैया, आज दीवाली.

लक्ष्मी पूजा करो रे भैया, मृदंग ढोल बजाओ, सखी री.

घर घर दीप जलाओ, सखी री, आज दीवाली.

2

धन देवी की आरती मंगल, कीर्तन गान सुनाओ, सखी री.

घर घर दीप जलाओ, सखी री, आज दीवाली.

3

आज घर आयो दशरथ नंदन, अवध में आनंद छायो, सखी री.

4

आतशबाज़ी जलाओ, रे भैया, आज दीवाली.

बाल बालिका वनिता सुंदर, रंग रंगोली सजायो, सखी री.

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(098)

Ramayan, Jai Hanuman Sujan, Hindi

भैरवी राग

जै हनुमान्

जै हनुमान् जै जै जय हनुमान्.

जै हनुमान् महान्. जै हनुमान सुजान.

जै हनुमान् जै जै जय हनुमान्.

जै हनुमान् महान्. जै हनुमान तूफान.

1

सेतु बंधन जै हनुमान्, सागर लाँघन जै हनुमान्.

जानकी ढूँढन जै हनुमान्, प्रणाम तुमको श्री हनुमान्.

जै हनुमान् जै जै जय हनुमान्.

2

लंका दहनन जै हनुमान्, लखन संजीवन जै हनुमान्.

असुर निकंदन जै हनुमान्, प्रणाम तुमको श्री हनुमान्.

जै हनुमान् जै जै जय हनुमान्.

3

अंजनी नंदन जै हनुमान्, सब दुख भंजन जै हनुमान्.

हे जग वंदन जै हनुमान्, प्रणाम तुमको श्री हनुमान्.

जै हनुमान् जै जै जय हनुमान्.

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 (099)

Ramayan, Jai Shri Ram, Hindi

जै श्री राम

जै श्री राम भजो मन मेरे, नाम हरि के प्यारे.

जनम जनम के पाप उतारे, तन के ताप उबारे.

1

घेरेंगे जब घोर अंधेरे, मेघ घनेरे कारे.

या छेड़ेंगे भय दुस्तारे, मन वीणा की तारें.

छोड़ेंगे यदि साथ पियारे, भवसागर मझधारे.

2

बोलेंगे जब शबद दुखारे, निर्दय दुनियावारे.

या काटेंगे साँप विषारे, भूखे मुख को पसारे.

रोएँगे गर गम के मारे, तेरे प्राण बिचारे.

3

झेलेंगे तब रामजी प्यारे, दुख तन मन के सारे.

खेलेंगे हरि खेल सुखारे, हरने ताप तुम्हारे.

लेलेंगे प्रभु परम कृपारे, शरण में साँझ सकारे.

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(100)

Ramayan, Kaho Ram, Japo Ram, Hindi

कहो राम

कहो राम, जपो राम, भजो राम.

1

रामनाम है एक सहारा, एक किनारा, एक पियारा.

राम तिहारा एक उबारा, एक उद्धारा, एक गुजारा.

बोलो राम, गाओ राम.

2

राम तुम्हारे सदा पास है, राम आस में साँस-साँस में.

राम पवित्तर एक नाम है, राम ज्ञान है, राम ध्यान है.

बोलो राम, गाओ राम.

3

राम तुम्हारा एक ही चारा, एक ही यारा, एक ही प्यारा.

राम तुम्हारा है जग सारा, रटो राम का जय जय कारा.

बोलो राम, गाओ राम.

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(101)

Ramayan, Lanka Dahan, Hindi

मारुति बजायो युद्ध का डंका

बजायो रे, युद्ध का डंका, जरायो मारुति लंका.

1

रावण को कहे विभिषण भाई, काहे रखी तू दार पराई.

कपि को सौंप दे सीता, नहीं माना वो अडबंगा.

2

असुरन कपि की पूँछ जलाये, दावाग्नि को आप बुलाये.

जलायो सोने की लंका, राम का दास ये बाँका.

3

शिव जी का अवतार सजायो, तांडव थैया नाच रचायो.

डुबायो आग में लंका, बचाओ! एक है हाँका.

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(102)

Ramayan, Lav-Kush Katha Samundar, Hindi

रामायण कथा समुंदर

सुना रहे हैं लव कुश सुंदर, रामायण का कथा समुंदर.

                                                                       1                       

ब्रह्मा बोले, नारद धाये, बाल्मीक लेखा, शारद गाये,

मंगल पावन ये श्लोक सागर, आनंदित हैं भवानी शंकर.

2

अवध पुरी में रघुकुल साजा, दो वर दीना दशरथ राजा,

कैकयी कुब्जा रचा कुचक्कर, भेजा वन में राम सुमंगल.

3

हरिण सुनहरा, हरण सिया का, जटायु शबरी, वध बाली का,

लंका दाहन, सेतु बंधन, लखन संजीवन, रावण भंजन.

4

लव कुश बालक अश्व जीत कर, हारे हनुमत भरत लखन दल,

भूप अवध का बना है राघव, हर्ष भरे हैं धरती अंबर.

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(103)

Ramayan, Nam Japan Kar Le, Hindi

भूपाली राग

सा ध प ग रे सा रे प, ग रे ग प ध

नाम जपन

नाम जपन कर ले, सुंदर से,

सुख दुख घड़ी हरि हरि मन भज ले,

1

मन में भरले पूजन करले, अंदर राम का सुमिरन धर ले

2

जिसके मुखमें राम बसा है, जीवन मानो वही भला है,

3

जिसने सुखमें नाम लिया है, दीपक जानो वहीं जला है,

4

जहरी दुनिया लोग लुटेरे, राम तेरा रखवारा,

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(104)

Ramayan, O Ram ji, Hindi

ओ राम जी

द्वार पे तेरे हम आए हैं, आज राम जी तू वर दे.

हाथ में लेली हमने झोली, जो है खाली तू भर दे.

1

नहीं चाहिये हीरे मोती, चाँदी सोने के गहने.

प्यार से पाना सो है खाना, जो है देना तू दे दे.

2

नहीं चाहिये सुख के परबत, या नीले पीले शरबत.

चित्त में भक्ति, मन में सक्ति, तन में शक्ति तू दे दे.

3

नहीं चाहिये नौकर बंगले, हाथीघोड़े या गाड़ी.

सिर पर छाया, तेरी माया, मिली तो पाया सब हमने.

4

नहीं चाहिये आदर कीर्ति, ऊँची पदवी या ख्याति.

दिल का कोना, उसमें सोना, तेरे होना हम चाहें.

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(105)

Ramayan, O Sanvariya Rama, Hindi

सीता विरह गीत-3

जुड़ जुड़ जाती मैं तोहे साँवरिया.

1

जहाँ मैं होती रामा, जादू की गुड़िया.

छुपछुप आती मैं, लाँघ सागरिया.

2

जहाँ मैं होती रामा, पर वाली चिड़िया.

उड़ उड़ आती मैं, तोहरी अटरिया.

3

जहाँ मैं होती रामा, सपनों की परिया.

निंदिया में तोहरी मैं, तकती सुरतिया.

4

जहाँ मैं होती रामा, रावनमाँ बुढ़िया.

गिन गिन लगाती मैं, कनवा पकड़िया.

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(106)

Ramayan, Om Jay Bajarang Bali, Hindi

खमाज राग

जै बजरंग बली

ओम् जै बजरंग बली, कपि जय बजरंग बली.

भगतन प्राण पिहारे, आस में द्वार तिहारे.

सुंदर दर्शन की, ओम् जै बजरंग बली,

1

राम दास तुम पावन, शंकर अवतारी.

प्रभु शंकर अवतारी.

महावीर परमेश्वर, लोक नाथ सत् ईश्वर.

विक्रम वज्रांगी.

2

तुमने सुग्रीव कपि से, राम को मिलवाया.

प्रभु राम को मिलवाया.

बाली पतन कराके, तुमने मुक्त कराई.

दारा सुग्रीव की.

3

सिय की खोज लगाके, खबरिया राम को दी.

खुश खबरिया राम को दी.

रावन पतन कराके, तुमने मुक्त कराई.

सीता रघुवर की.

4

जल पर अश्म तराये, राम नाम लिखके.

शुभ राम नाम लिखके.

सागर सेतु बनाके, सेना पार कराके.

लंका तुम जारी.

5

वायु गति से उड़ के, परबत ले आये.

प्रभु परबत ले आये.

संजीवन बुटी लाके, तुमने जान बचाई.

भ्राता लछिमन की.

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(107)

Ramayan, Prabhu Ram Bano Ya Shyam, Hindi

राम बनो या श्याम

प्रभु! राम बनो या श्याम बनो, अवतार तुम्हारा प्यारा है.

संग सिया हो या राधा हो, हरि! काम तुम्हारा न्यारा है.

1

भव दुस्तर के हर दुष्कर में, प्रभु! तुमरा एक सहारा है.

जब नांव भँवर में डगमग हो, हरि! तू ही एक किनारा है.

2

संग किसी का हो या ना हो, प्रभु! तुमरा प्यार अपारा है.

जिसके मन में शुभ नाम बसा, हरि! तुमने उसे उबारा है.

3

किरपा राघव या कृष्ण करे, प्रभु! भाग्य महान हमारा है.

मुख राम कहे या श्याम कहे, हरि! हर विध नाम तुम्हारा है.

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(108)

Ramayan, Pushpak Viman, Hindi

पुष्पक विमान

पुष्पक विमान पर सियाराम, संग में लछमन अरु हनुमान.

धरती पर जन गाते गान, जै जै सीता, जै जै राम.

1

आसमान में यान वो भला, पवन वेग से अवध को चला.

नारद शंकर करत प्रणाम, जै जै सीता, जै जै राम.

2

नील गगन के चाँद सितारे, हिरदय हारी नयनन प्यारे.

चाँदनी में सागर अभिराम, जै जै सीता, जै जय राम.

3

पूर्व क्षितिज पर जब रवि उभरा, रंग गगन का हुआ सुनहरा.

नदियाँ पर्वत विपिन ललाम, जै जै सीता, जै जय राम.

4

लोग अवध के भगत हैं बड़े, आतुर मन से राह में खड़े.

हर लब पर हैं दो शुभ नाम, जै जै सीता, जै जय राम.

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(109)

Ramayan, Rama Krishna Shiva Gao, Hindi

राम कृष्ण शिव गाओ

निश दिन राम कृष्ण शिव गाओ.

राम कृष्ण शिव शिव, राम कृष्ण शिव गाओ.

राम कृष्ण शिव, राम कृष्ण शिव, राम कृष्ण शिव गाओ.

1

रघुपति राघव राजाराम, जानकी जीवन सीताराम.

हरे राम हरे राम, हरे कृष्ण हरे राम.

2

भजु मन मेरे, राधे श्याम, अह निश गा रे, राधेश्याम.

राधे श्याम राधे श्याम, हरे कृष्ण हरे राम.

3

भोले शंकर हरि घनश्याम, सांब सदाशिव भज सियाराम.

शिव नाम शिव नाम, हरे कृष्ण हरे राम.

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(110)

Ramayan, Setu Bandhan, Hindi

भैरवी राग, तीव्र ताल

सेतु बंधन

श्री राम, श्री राम.

श्री राम का शुभ नाम लिख कर, सलिल पर शिला तरै.

जल सेतु बंधन, सिंधु तारण, कपीश दल सेवा करै.

श्री राम, श्री राम, श्री राम.

1

जांबुवंत सुग्रीव हनुमत, राम काज करन खटै.

नल नील अंगद ऋष मरुत कपि, राम का शुभ नाम रटै.

श्री राम, श्री राम, श्री राम.

2

भानु आतप तनु तपा कर, स्वेद बिंदु जल में गिरै.

उस पूज्य पावन नीर में, शिलासेतु तारन काज करै.

श्री राम, श्री राम, श्री राम.

3

लंका दहन, रावण हनन, सिंधु योजन दूर उड़ै.

कपि वायुपुत्र वानर दल, सब राम जाप का मोद लुटै.

श्री राम, श्री राम, श्री राम.

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(111)

Ramayan, Shabari Ardas

बहार राग

प्रभु दरशन की आस

मोहे प्रभु दरशन की आस लगी, मोहे चातक जैसी प्यास लगी.

1

राम चंद्र मोहे दरस दिलादो, किरपा का मोहे पयस पिलादो.

राघव जी मोसे नैन मिलादो, पल भर ही सही, कोई बात नहीं.

2

नंद लाल हरि राह दिखादो, जीवन की मोहे चाह दिलादो.

माधव मोहे चैन दिलादो, छन भर ही सही, कोई बात नहीं.

मोहे प्रभु दरशन की आस लगी, मोहे चातक जैसी प्यास लगी.

3

नाम मनोहर मन में बसादो, प्रीय सखे मोरा काज करादो.

बाँसुरी की मोहे बैन सुनादो, एक सुर ही सही, कोई बात नहीं.

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(112)

Ramayan, Shabari’s Sweet Plums, Hindi

शबरी के मीठे बेर

[Intro]

शबरी हरि को बेर खिलाती.

चख-चख उनमें नेह मिलाती, शबरी हरि को बेर खिलाती.

1

भक्ति भाव रस भीने मीठे, राघव खाते बेर वे जूठे.

भोली भीलनी प्रेम रसीले, फल में माँ की याद दिलाती.

2

बात लखनवा समझ पाए, राघव जूठे फल क्यों खाए.

वन में बेर के ढेर पड़े हैं, मगर राम को ममता भाती.

3

बैठी राघव के चरणन में, आज प्रमोदित है वह मन में.

शबरी पति का शाप सिमर कर, पूर्व जनम का पाप मिटाती.

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(113)

Ramayan, Shabari Ki Kutiya, Hindi

यमन कल्याण राग

शबरी की कुटिया

[Intro]

पंपा सर है महा सुखदाई, नीर है नीला देत दिखाई.

पर्ण कुटी उस वन में रचाई, शबरी निशदिन हरि हरी गाई.

शीतल मंद पवन पुरबाई, पश्चिम तीर चले रघुराई.

पर्ण कुटी उस वन में रचाई, शबरी निशदिन हरि हरी गाई.

1

फूल कमल के झील में नीले, जल लहरों पर डग मग डोले.

भँवरे उन पर गूँजर बोले, यहाँ सृष्टि हरषाई.

पर्ण कुटी उस वन में रचाई, शबरी निशदिन हरि हरी गाई.

2

दूर किनारे शबरी की नीकी, पर्ण कुटी दिखती भीलनी की.

शबरी बेर है तोड़के लाई, निश-दिन राम दुहाई.

पर्ण कुटी उस वन में रचाई, शबरी निशदिन हरि हरी गाई.

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(114)

Ramayan, Shabari’s Divine Love, Hindi

आसावरी राग

शबरी की अमृत प्रीति

[Intro]

नाम हरि का डगरी डगरी, पंपा वन में शबरी.

1

कर में धर चंगेरी नीकी, दरसन प्यासी राघव जी की.

लौटी जब कुटिया में शबरी, राम आरहे उसे खबरी.

2

देख श्रीराम को, हरसाई, आशिष मंगल वह बरसाई.

गिरी चरण में भीलनी शबरी, आज उबारे उसे नरहरि.

3

चख कर बेर निजी मुख सेती, मीठे राघव जी को देती.

जूठे बेर खिलाई शबरी, अमृत प्रीति जिनमें गहरी.

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(115)

Ramayan, Shabari’s Deliverance, Hindi

रत्नाकर राग

शबरी उद्धार
[Intro]

छू कर तेरे पग, रघुनाथ! मनोरथ सिद्ध भए.

1

निश-दिन हरि की ध्याई मूरत, कभी देखी जिसकी सूरत.

आज, तेरे दरस भए, मेरे सारे ताप गए.

2

झूठे बेर हरि खाए मीठे, चखे लखनवा, सुच्चे खट्टे.

आज, मोहे ध्यान भए, मेरे सारे पाप गए.

3

गत जनम के मूढ़ मति के, काम मेरे अरु श्राप पति के.

आज, राम उबार दिये, मेरे सारे शाप गए.

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(116)

Ramayan, Shabari Rama Dialogue, Hindi

शबरी राम संवाद

[Intro]

सीता बिन घर कैसे जाऊँ, माता को मैं क्या बतलाऊँ.

1

बिना सिया के अवध को जाना, मुझको लगता मरण समाना.

बिन पत्नी क्या मुख दिखलाऊँ.

2

पूछेंगे जन माता मेरी, कहाँ गयी है सीता तेरी.

उन सबको मैं क्या समझाऊँ.

3

जीवन सूना बिन सीता के, हाल क्या मेरी मन मीता के.

निश-दिन व्याकुल मैं अकुलाऊँ.

4

घोर पाप है पत्नी खोना, मुझे शाप ये किसने दीन्हा.

बिरहा मन कैसे बहलाऊँ.

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(117)

Ramayan, Shabari Meets Rama, Hindi

शबरी-श्रीराम मिलन

[Intro]

आए श्रीहरी, आज मेरे घर आए.

1

छोड़ के घर, सखी! वन में पधारे, लछिमन को संग लाए- - -.

आए श्रीहरी, आज मेरे घर आए.

2

आकर कुटिया में, राम प्रभु ने, मेरे भाग्य जगाए- - -.

3

बेर जो चख-चख, दीन्हे मैंने, जूठे मेरे फल खाए- - -.

4

पंपा के वन रम्य बहुत हैं, उनके मन को भाए- - -.

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(118)

Ramayan, Sita Abducted, Hindi

तिलक कामोद राग

गई कहाँ सखी सीता

गई कहाँ सखी सीता प्यारी, ढूँढ ढूँढ कर अखियाँ हारी.

1

बोलो लछिमन मोरे भाई, कहाँ है तोरी भौजाई.

श्वापद कोई उसको खाई, छुपी तो नहीं वो बैठी.

या है उसको असुरी उठाई, गई कहाँ सखी सीता प्यारी,

ढूँढ ढूँढ कर अखियाँ हारी.

गई कहाँ सखी सीता प्यारी

2

कमल कुसुम सम कोमल काया, कहाँ गयी मोरी जाया.

ठगी असुरों ने रच कर माया, कहाँ से संकट आया.

खो गयी रे मोरी सीता प्यारी, गई कहाँ सखी सीता प्यारी,

ढूँढ ढूँढ कर अखियाँ हारी.

गई कहाँ सखी सीता प्यारी

3

सुंदरतर रमणी अभिरामा, अनूप शुभ रूप ललामा.

कहाँ गयी है तू बिन रामा, तज अपनी कुटिया धामा.

खोजी हमने भूमि सारी, गई कहाँ सखी सीता प्यारी,

ढूँढ ढूँढ कर अखियाँ हारी.

गई कहाँ सखी सीता प्यारी

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(119)

Ramayan, Sita Abhushan Pahichan, Hindi

रत्नाकर राग

लक्ष्मण उवाच

ना जानूँ मैं, केयुर कंगन, ना बिंदिया ना हार.

हरि! मोहे, पैंजन की पहिचान.

1

पग पूजे मैं साँझ सकारे, मोहे, पायल का है ज्ञान.

2

अंग सिया के नहीं लखूँ में, मोहे, मातु सम सम्मान.

3

ना मैं जानूँ, कंठी कुंडल, मोरा, चरणन पर ही ध्यान.

4

मम भौजाई, हे रघुराई! नित पुण्य करे परिधान.

हरि! मोहे, पैंजन की पहिचान.

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(120)

Ramayan, Sita Apaharan, Hindi

सीता विरह गीत-2

कब होगा मधुर मिलाप.

करते राम विलाप, करती सिया विलाप.

कब होगा मधुर मिलाप.

1

सीता मेरी प्राण पियारी, बोलो किसने है वो निहारी.

निकल कहाँ वो गयी है घर से, पूछे राघव खग तरुवर से.

मोहे, कौन दिया है शाप. कब होगा मधुर मिलाप.

2

लक्ष्मणरेखा पार करी मैं, भूल बहुत ये घोर करी मैं.

कहाँ फँसी मैं, मुझे छुड़ाओ, रघुपति आकर मुझे बचाओ.

मैंने, किया कौनसा पाप. कब होगा मधुर मिलाप.

3

रावण मारीच जाल बिछा कर, मृगमाया का स्वाँग सजाया.

सिया राम के मन को रिझा कर, एक नया इतिहास रचाया.

है, रामसिया मन ताप. कब होगा मधुर मिलाप.

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(121)

Ramayan, Sita Biraha Geet, Hindi

काफी राग

सीता विरह गीत-1

कहो मिलोगे अब कबहूँ, दोगे दरशन अब कबहूँ.

बिरहन अँसुअन कैसे सहूँ.

1

निश दिन तरसत बरसत नैना, हाल मैं मन का कासे कहूँ.

कहो मिलोगे अब कबहूँ, दोगे दरशन अब कबहूँ.

बिरहन अँसुअन कैसे सहूँ.

2

मन बेचैना मुश्किल रैना, तुम बिन सजना कैसे रहूँ.

कहो मिलोगे अब कबहूँ, दोगे दरशन अब कबहूँ.

बिरहन अँसुअन कैसे सहूँ.

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(122)

Ramayan, Sita Mai Bhiksham Dehi, Hindi

सीता माई भिक्षां देहि

सीता माई भिक्षां देहि. सीता माई भिक्षां देहि.

1

वस्त्र गेरुए, सिर पर चोटी, हाथ कमंडलु, दाढ़ी खोटी.

निकला लछमन कुटि से ज्यों ही, आया जोगी रावण द्रोही,

2

राम गये हैं मृग के पीछे, लखन है निकला रेखा खींचे.

सिया अकेली कुटिया माही, जैसी थी रावण ने चाही.

3

भिक्षा देने सीता आयी, रावन उसकी धरी कलाई.

शोर मचा रही है वैदेही, इत उसका रघु तारक नाही.

4

लाया सीता को हरजाई, जोर जबरिया, सीता रोई.

मुझे बचाओ रे साँवरिया, पड़ी विपत में, मैं रघुराई.

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(123)

Ramayan, Sita Svayamvar, Hindi

सीता स्वयंवर

आज मौसम बड़ा है सुहाना, प्यार के रंग में दिल दीवाना.

1

आज दो दिल अमन में मिले हैं, आज दो गुल चमन में खिले हैं.

माता रानी की उन पर दुआ है, राधे रानी की उन पर कृपा है.

सोने में सुहागा मिलाया, सोने में है सुहागा मिलाया.

2

आज शंकर ने डमरु बजाया, परियों ने है मंडप सजाया.

हे प्रभो! लाख तेरा शुकर है, शिवा! लाख तेरा शुकर है,

तूने सूरज से चंदा मिलाया. तूने चंदा से सूरज मिलाया.

3

आज बंधु सखा सब हैं आए, ढेर आशीष उपहार लाए.

गीत मंगल सुमंगल हैं गाए, आज धरती पे आनंद बिछा है.

प्रीति में सुधा रस मिलाया, प्रीति में है सुधा रस मिलाया.

4

राम राजा और सीता है रानी, इनकी मंगल है प्रैम कहानी.

प्यार की ये अमर है कहानी. जीये जुगजुग ये हंसों का जोड़ा,

सबसे प्रीति और नेहा लगाया. सबसे नेहा और प्रीति लगाया.

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(124)

Ramayan, Sita Vilap, Hindi

पीलू राग

सीता विरह गीत

रो रो मैं तो बाँवरिया, मो हे बचाओ साँवरिया.

रो रो मैं तो बाँवरिया,

1

भोली झूठा कर पापी नज़रिया, मोहे उठा कर जोर जबरिया.

लाया उड़ा कर, पार सागरिया.

2

रावन की ये सुवन नगरिया, महल ये गलियाँ, सुंदर बगिया.

लागत मोहे प्रभू, सब कुछ घटिया.

3

मोहे लुभावत असुरों की मुखिया, ताने चुभावत दसमुख सखियाँ.

हाय! रुलावत, लाज रखियाँ.

4

खात है दिन डसे नागिन रतिया, काटत मन अरु काँपत छतिया.

नाथ विना अब, कासे कहूँ बतिया.

5

सिय को पुकारत रामजी दुखिया, रोत है लछमन व्याकुल अँखियाँ.

आया है हनुमत, लेके मुँदरिया.

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(125)

Ramayan, Veer Jatayu, Hindi

हे वीर जटायु

हे वीर जटायु प्यारे! अभिनंदन लाखों तेरे.

तूने, नारी की रक्षा करने, प्राण गवाँए अपने.

बलिदान जो तूने कीन्हा, भारत की मिट्टी सोना.

जय हो भारत भूमि, जय जय भारत माता.

हे वीर जटायु प्यारे! अभिनंदन जनगण गाता,

जय हो भारत भूमि, जय जय भारत माता.

1

तेरी, भारत भक्ति सच्ची, तेरी कुरबानी है ऊँची.

तुने सुन वेदों की वाणी, पर दारा माता जानी.

आदर्श है तेरा ऊँचा, सद्भाव है तेरा सच्चा.

जय वेदों की भूमि, जय जय भाग्य विधाता.

2

हे रामचंद्र रघुराई! हे जानकी सीता माई!.

हे लखन लला सुखदाई! हे भारत सुत मम भाई!.

तेरी आँख में आँसू केसे, जब वीर जटायु जैसै.

जय हो कर्म की भूमि, जय जय सीता माता.

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(126)

Ratnakar, Hindi Ghazal

यमन कल्याण राग

मैं रत्नाकर, गज़ल

बेद पुरान दस पढ़े, हमें ज्ञान आया नहीं.

तकरीर प्रवचन सब सुने, मगर ध्यान पाया नहीं.

हमें ज्ञान आया नहीं.

1

इल्म था जब बँट रहा, हमरे तक आया नहीं.

सिलसिला तो आगया, मगर ऐलान आया नहीं.

इल्म था जब बँट रहा, हमरे तक आया नहीं.

सिलसिला तो आगया, मगर ऐलान आया नहीं.

2

अक्ल पर ताले पड़े, हमें जेहन आया नहीं.

उस्ताद बजा कर थक गए, हमें गान आया नहीं.

अक्ल पर ताले पड़े, हमें जेहन आया नहीं.

उस्ताद बजा कर थक गए, हमें गान आया नहीं.

3

मुकद्दर का सिकंदर, नसीब पाया है वही.

फरिश्ता बगल से निकल गया, हमें जान पाया नहीं.

अक्ल पर ताले पड़े, हमें जेहन आया नहीं.

उस्ताद बजा कर थक गए, हमें गान आया नहीं.

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(127)

मालकंस राग

संगीत प्रेमी रत्नाकर

सुर मधु तेरी वेणु का, जबसे सुना अनूप.

आस दरस की है लगी, सपनन सुर भूप.

प्यार हुआ है मुझको सुर से.

1

प्यार हुआ है मुझको जब से, मुरली मनोहर दामोदर से.

ग्रीष्म गया है मेरे चित से, बसंत बरखा नित बरसे.

2

रात सूनीं अब अँधियारी, तरसाये चिंता घनेरी.

प्रीत मेरी धनुधर से जिगरी, बंसीधर से, श्रीधर से.

3

मीरा राधा जस बलिहारी, पार्थ सुदामा की जस यारी.

चाह मेरी यदुवर से गहरी, बनवारी से, गिरिधर से.

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(128)

Trinidad-Tobaggo Patriotic Song, Hindi

 

ट्रिनिडाड-टोबागो राष्ट्रभक्ति गीत

 

ट्रिनिडाड एन् टोबागो हमारा, इस दुनिया में सबसे है प्यारा,

इसका पानी है अमृत की धारा, सबसे न्यारा वतन है हमारा,

1.

करिबीयन के सागर का मोती, ये उज्ज्वल है अंबर की ज्योति,

ये कुदरत का दौलत भँडारा, स्वर्ग भूमि का सुंदर नज़ारा,

2.

यहाँ धर्मों को बंधन नहीं है, आनाकानी यहाँ ना कहीं है,

सारे वतनों से है ये नियारा, धरती पर है ये सबसे दुलारा,

3.

कोई हिंदु मुस्लिम इसाई, सारे इन्सान हैं भाई भाई,

गीतसंगीत का ये सितारा, देश ये है हमारा जियारा,

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(129)

Yoga, Atha Yoganu-Shasanam, Sanskrit

योगानुशासनम्

चित्तवृत्तिनिरोधो हि, ज्ञातं योगानुसाधनम्,

स्वरूपसमवस्थानम्, अथ योगानुशासनम्,

1

निर्ममता निष्कामो, निग्रहश्च तटस्थता,

क्लेशो क्लिष्टकार्येषु, प्रीतिः प्रियकर्मसु,

इति योगस्य पालनम्, मतं योगानुशासनम्.

2

समं सुखञ्च दुःखञ्च, लाभालाभौ जयाजयौ,

समत्वं शत्रुमित्रेषु, तथा मानापमानयोः,

इति योगस्य लक्षणम्, मतं योगानुशासनम्.

3

प्रीतिदयाक्षमायुक्तः, क्रोधलोभविवर्जितः,

यस्मान्नोद्विजते कोपि, किञ्चिन्नोद्विजते यम्,

इति योगस्य धारणम्, मतं योगानुशासनम्.

4

निस्स्पृहो निर्ममो युक्तो, निर्विषादो निरामयः,

विहीनः कर्तृभावेन, निष्ठो भक्तो विना रजः,

इति योगस्य साधनम्, मतं योगानुशासनम्.

5

निर्मलो निरहङ्कारः, शोकदोषविवर्जितः,

आत्मयुक्तो घृणामुक्तः, स्थिरमतिर्मनोबलः,

इति योगस्य चालनम्, मतं योगानुशासनम्.

6

अनिकेतो ब्रह्मचारी, निरासक्तो निरङ्कुशः,

संयतात्मा मिताहारी, निर्दुःखः शान्तमानसः,

इति योगस्य वाहनम्, मतं योगानुशासनम्.

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(130)

योग

है नाम इसी का योग,

है नाम इसी का योग, है नाम इसी का योग,

तू जान इसी को योग.

1

तन निर्मल हो, मन निश्चल हो,

दूर हों सुख के भोग, है नाम इसी का योग,

2

नर निर्भय हो, दृढ़ निश्चय हो,

संयम का उपयोग, है नाम इसी का योग,

3

स्थल प्रशांत हो, चित नितांत हो,

सत् जन का संजोग, है नाम इसी का योग,

4

कोई अपना, ना ही पराया,

सम जाने सब लोग, है नाम इसी का योग,

5

पूर्ण अहिंसा, तन मन वच से,

कोह रहे ना सोग, है नाम इसी का योग,

6

फल की कामना, विषय वासना,

ना हों ये सब रोग, है नाम इसी का योग,

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(131)

This is Yoga, Sanskrit

योग

योग, संस्कृत

[Intro]

विद्धि त्वम्, एवं खलु योगम्, त्वम् जा निहि यो गम् ।

विद्धि त्वम्, एवं खलु योगम्, त्वम् जा निहि यो गम् ।

1

निर्मलतनुषा, निश्चलमनसा ।

विग्रहनिग्रहणम्, त्वम् जानीहि योगम्।

विद्धि त्वम्, एवं खलु योगम्, त्वम् जा निहि यो गम् ।

2

निर्भयभवनं, निश्चयकरणम् ।

सुखबन्धनत्यजनम्, त्वम् जानीहि योगम्।

विद्धि त्वम्, एवं खलु योगम्, त्वम् जा निहि यो गम् ।

3

प्रशान्तस्थानं, नितान्तध्यानम् ।

सज्जनसंयोगम्, त्वम् जानीहि योगम्।

विद्धि त्वम्, एवं खलु योगम्, त्वम् जा निहि यो गम् ।

4

परजनभजनं, यद्वत् स्वजनम् ।

जनगणपरिचरणम्, त्वम् जानीहि योगम्।

विद्धि त्वम्, एवं खलु योगम्, त्वम् जा निहि यो गम् ।

5

न विषयग्रहणं, धनसंग्रहणम् ।

न क्रोधरागमदम्, त्वम् जानीहि योगम्।

विद्धि त्वम्, एवं खलु योगम्, त्वम् जा निहि यो गम् ।

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(132)

Yoga, Marathi

जाण तू, ह्यास म्हणावे योग

तू, जाण ह्यास रे, योग. तू, जाण ह्यास ग, योग.

जाण तू, ह्यास म्हणावे योग. तू, जाण ह्यास रे, योग

तू, जाण ह्यास ग, योग.

1

तन निर्मळ , मन निश्चळ हो,

दूर असों सुख भोग. तू, जाण ह्यास रे, योग्

तू, जाण ह्यास ग, योग.

2

नर निर्भय व, दृढ़ निश्चय हो,

संयमाचा उपयोग,

तू, जाण ह्यास रे, योग. तू, जाण ह्यास ग, योग.

3

स्थळ प्रशांत व, मन नितांत हो,

सज्जनांचा संयोग,

तू, जाण ह्यास रे, योग. तू, जाण ह्यास ग, योग.

4

कुणी न आपला, कुणी न मापला,

समान सगळे लोक,

तू, जाण ह्यास रे, योग तू, जाण ह्यास ग, योग.

5

पूर्ण अहिंसा, तन मन वाणी,

क्रोध नसो, न च शोक,

तू, जाण ह्यास रे, योग. तू, जाण ह्यास ग, योग.

6

फळद कामना, विषय वासना,

नसोत असले रोग,

तू, जाण ह्यास रे, योग, तू, जाण ह्यास ग, योग.

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(133)

Prayer, Pranav Ashram, Hindi

[Intro]

दरबारी कान्हड़ा राग

गुरुदेव, गुरुदेव, गुरुदेव

मेरे प्रभु श्री प्रणवानंदा, कृपा तेरी शुभ सच्चिदानंदा.

उबारियो, बचाइयो, दुआ दीजो, गुरु सुखदानंदा.

1

रूप सुमंगल त्रिशूल धारी, छवि निरंजन सुंदर सारी.

उबारियो, बचाइयो, दुआ दीजो, शिव जगदानंदा.

2

अरुण वसन तव शुचि नारंगी, गल माला रुद्राक्ष की लंबी.

उबारियो, बचाइयो, दुआ दीजो, गुरु परमानंदा.

3

मृग छाला पर बैठा जोगी, राह दिखावे जग उपयोगी.

उबारियो, बचाइयो, दुआ दीजो, प्रभु आनंदकंदा.

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(134)

जनम दिन मुबारक

[Intro]

जनम दिवस शुभ आया है, ढेर बधाई लाया है,

बंधु भगिनी परिवार सभी, स्नेह लड़ी बरसाया है.

1

कोई हिंदी में बोला, कोई अंग्रेज़ी वाला,

हैपी-बर्थ-डे दुहराया है.

जनम दिवस शुभ आया है, ढेर बधाई लाया है,

बंधु भगिनी परिवार सभी, स्नेह लड़ी बरसाया है.

हैपी-बर्थ-डे दुहराया है.

2

कोई लाया गुलदस्ता, कोई मिठाई का बस्ता,

जिसके मन जो भाया है.

जनम दिवस शुभ आया है, ढेर बधाई लाया है,

बंधु भगिनी परिवार सभी, स्नेह लड़ी बरसाया है.

हैपी-बर्थ-डे दुहराया है.

3

जुग-जुग जीओ तुम प्यारे, सुख मय हो तुमरे सारे,

गीत सुमंगल गाया है.

जनम दिवस शुभ आया है, ढेर बधाई लाया है,

बंधु भगिनी परिवार सभी, स्नेह लड़ी बरसाया है.

हैपी-बर्थ-डे दुहराया है.

4

तुम सब विश्व दुलारे हो, सब नैनन के तारे हो,

तुम पर प्रभु का साया है.

जनम दिवस शुभ आया है, ढेर बधाई लाया है,

बंधु भगिनी परिवार सभी, स्नेह लड़ी बरसाया है.

हैपी-बर्थ-डे दुहराया है.

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(135)

Prayer: Guru Nanak Vani, Hindi

आसावरी राग

गुरुवाणी

अमृत वाणी, देन सबद की, आदिगुरु को, वाहेगुरु की.

1

दीपा मेरा एकु नामु,” सीख ले बंदे, बात शुरु की.

2

ऐहु मेरा एकु आधारु,” पीयुश बानी, बाबेगुरु की.

3

अंजन माही निरंजन रहिये, ऐहु योगु,” बोले गुरु जी.

4

नानक दुखिया सब संसारु,” सुनो भई साधो, बात गुरु.

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(136)

नर-नारायण

मालकंस राग

जग अलग-अलग कहता दोनों, जिसे जो कहना सो कहने दो,

जो अलग कहता उसे रहने दो

1

बचपन के हैं दोनों साथी, भव सागर में, बिछुड़ हैं

कृष्ण सुदामा रूप अलग हैं, नर नारायण, एक हि हैं ।।

2

आर है गोकुल पार मथुरा, दोनों जमुना तीर पे हैं

राधा सखी है सखा सुदामा, सखी सखा सब, एक हि हैं ।।

3

रंक सुदामा राजा हरि हैं, केवल मौखिक, अंतर है

अंतर तन का, नहीं है मन का, दो तन दो मन, एक ही हैं ।।

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(200)

Shivaji, Bharat Mata Vandana, Marathi 2001

भारत माता वंदना, मराठी

भाग्य लक्ष्मी भारत माते, प्रिय आमुची गोड माउली.

थोर तुझा सुत वीर शिवाजी.

1

तूच भावानी, सिंह वाहिनी, पावन भगवा केतु धारिणी.

भाग्य लक्ष्मी भारत माते, प्रिय आमुची गोड माउली.

थोर तुझा सुत वीर शिवाजी.

2

देवी तुजला, सर्व भारती, वंदन करिती हस्त जोडुनी.

भाग्य लक्ष्मी भारत माते, प्रिय आमुची गोड माउली.

थोर तुझा सुत वीर शिवाजी.

3

पुत्र तुझे रणवीर मराठे, झाशीची राणी मर्दानी.

भाग्य लक्ष्मी भारत माते, प्रिय आमुची गोड माउली.

थोर तुझा सुत वीर शिवाजी.

4

पुण्य अहिल्याबाई राणी, तान्हाजी, येसाजी, बाजी.

भाग्य लक्ष्मी भारत माते, प्रिय आमुची गोड माउली.

थोर तुझा सुत वीर शिवाजी.

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(201)

Bharat Gaurav, Jhansi ki Rani, Hindi 2011

वीरांगना लक्ष्मीबाई, झाँसी की रानी

जै जै बोल जै जै बोल, जै जै बोल जै जै बोल.

जै जै बोल जै जै बोल, जै जै बो- - - - .

जै जै बोल जै जै बोल, जै जै बोल जै जै बोल.

1

मर्दानी वह झाँसी वाली, वीर मराठा रानी.

कूद पड़ी वो गढ़ के तट से, पराक्रमी तूफानी.

शत्रु देखता सुन्न रह गया,

दीन्हा पीछा छो- - ड़. जै जै बो- - - .

जै जै बोल जै जै बोल, जै जै बोल जै जै बोल.

2

बोली झाँसी मैं ना दूँगी, प्राण भले ही जाए.

अँगैरज़ों की एक ना चली, कुछ भी कर ना पाए.

रणचंडी बन टूट पड़ी वो,

विद्यु गति को जो- - ड़. जै जै बो- - - .

जै जै बोल जै जै बोल, जै जै बोल जै जै बोल.

3

दुश्मन उसको पकड़ पाते, भौचक सब रह जाते.

कभी यहाँ पर, कभी वहाँ वो, लीला समझ पाते.

पवन वेग से घोड़ा उसका,

दौड़े मन की तौ- - . जै जै बो- - - .

जै जै बोल जै जै बोल, जै जै बोल जै जै बोल.

4

जो भी उससे लड़ने आता, उसे चटाती धूल.

अँगेज़ों की गोली बरसे, भारतियों के फूल.

वंदन वंदन देवी! तुझको,

तन मन कर को जो- - - ड़.

जै जै बोल जै जै बोल, जै जै बोल जै जै बोल.

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(202)

Bharat, Maharashtra Vandana, Marathi 2021

मातृभूमि महाराष्ट्र वंदना, मराठी

जन्मभूमिर्मता माता स्वर्गभूमिश्च सा मता.

दण्डवत्तामहं वन्दे साष्टागं नमामि ताम्.

 

जै महाराष्ट्र! जै मातृभूमि! तुला अष्टांग वन्दे नमामि.

पुण्यभूमि माझी कर्मभूमि, तुला साष्टांग वन्दे नमामि.

जै महाराष्ट्र! जै मातृभूमि! तुला अष्टांग वन्दे नमामि.

1

शिवरायांची ही राष्ट्रभूमि, जिथे तान्हाजी बाजी सेनानी.

तुको ज्ञानोबा रामदास स्वामी, अशा राष्ट्राला नमो नमामि.

जै महाराष्ट्र! जै मातृभूमि! तुला अष्टांग वन्दे नमामि.

2

हिची समृद्ध सुपीक माती, ऊस कापूस संत्र्यांची शेती.

इथे कोकीळ पोपट गाती, अशा मातेला नमो नमामि.

जै महाराष्ट्र! जै मातृभूमि! तुला अष्टांग वन्दे नमामि.

3

सुख संपन्न ही स्वर्णभूमि, सार्या जगामध्ये स्वर्गभूमि.

शेर वीरांची ही शौर्यभूमि, अशा देशाला नमो नमामि.

जै महाराष्ट्र! जै मातृभूमि! तुला अष्टांग वन्दे नमामि.

4

संत योगी इथे वेद गाती, इथे वीरांची पोलादी छाती.

महावीरांची ही रंगभूमि, हिला शतवार नमो नमामि.

जै महाराष्ट्र! जै मातृभूमि! तुला अष्टांग वन्दे नमामि.

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(203)

Bharat, Sweet Marathi Vani-1, Marathi 2031

गोड मराठी भाषा, मराठी

गोड मराठी ही अमुची, मधुतम ह्या वाणीत रुचि.

गोड मराठी ही अमुची, मधुतम ह्या वाणीत रुचि.

1

कन्या संस्कृत ची प्यारी, सुता भारती ची न्यारी.

मौक्तिक-आगर, अमृत-सागर.

सुंदर काया नव-वधु ची, मंगल माया शिव प्रभु ची.

गोड मराठी ही अमुची, मधुतम ह्या वाणीत रुचि.

2

गीत लावण्या पोवाडे, अभंग ओव्या भारूडे.

श्लाकांचे स्वर, शास्त्रांचे सुर.

कल्पित कवनें कवितांची, भूपाळ्यांचे भाव शुचि.

गोड मराठी ही अमुची, मधुतम ह्या वाणीत रुचि.

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(204)

Bharat Gaurav, Maha Rani Padmavati 2041

महारानी पद्मावती

राजस्थान की पावन देवी, रानी पद्मावती.

वो तो, नारी जगत महान थी. जिसे, सानी कोई थी.

राजस्थान की पावन देवी, रानी पद्मावती.

वो तो, नारी जगत महान थी. जिसे, सानी कोई थी.

1

जग मेसुंदर, नारी अनुपम, नैतिक उसकी बुद्धि.

धर्मचारिणी वह तो नारी, सीता जैसी सती.

राजस्थान की पावन देवी, रानी पद्मावती.

वो तो, नारी जगत महान थी. जिसे, सानी कोई थी.

2

पतिव्रता वह, नीति निपुण थी, राजस्थान की शान थी.

लक्ष्मी का अवतार धरा पर, मेवाड़ की जान थी.

राजस्थान की पावन देवी, रानी पद्मावती.

वो तो, नारी जगत महान थी. जिसे, सानी कोई थी.

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(205)

Krishnayan, Agile Mind, Hindi 2051

चंचल मन

मन चंचल जस जल की धारा, बही बही जावे जिधर उतारा.

तैर सके ना नीर अपारा, गोते खावे बिन आधारा.

मन चंचल जस जल की धारा, बही बही जावे जिधर उतारा.

1

पहल करे ना उचित विचारा, फिर पछतावे सतत बिचारा.

मन चंचल जस जल की धारा, बही बही जावे जिधर उतारा.

2

रोका तिन जितना बहुतेरा, अड़ियल सा उतना हि बतेरा.

मन चंचल जस जल की धारा, बही बही जावे जिधर उतारा.

3

पवन समाना अधीर अपारा, भटके यूँ जस मेघ अवारा.

मन चंचल जस जल की धारा, बही बही जावे जिधर उतारा.

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(206)

Krishnayan, Akrur-Yashoda Dialogue, 2061

गोविंद हमारा प्यारा

अजि क्रू जी, गोविंद हमारा प्यारा.

मत भेजो उसको मथुरा.

अजि क्रू जी, गोविंद हमारा प्यारा.

मत भेजो उसको मथुरा.

1

ग्वाल बाल का बनवारी, गोपियन का चितहारी.

व्रज वालों का गिरिधारी, हमरे नैनन का तारा.

अजि क्रू जी, गोविंद हमारा प्यारा.

मत भेजो उसको मथुरा.

2

गलियन में रास रचावे, मनहारी बंसी बजावे.

हरि सबसे नेहा लगावे, वृंदावन उसका यारा.

अजि क्रू जी, गोविंद हमारा प्यारा.

मत भेजो उसको मथुरा.

3

राधा के मन में समाया, निश-दिन मन को भाया.

कण-कण में रंग जमाया, राधिका का वो है जियारा.

अजि क्रू जी, गोविंद हमारा प्यारा.

मत भेजो उसको मथुरा.

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(207)

Krishnayan, As You Sow, Hindi 2071

बोले सतनाम

ज्याहि विध होवे काम, ताहि विध धाम.

ज्याहि विध होवे काम, ताहि विध धाम.

1

सद्गुण देता मन की शुद्धि, पुण्य करन की सात्त्विक बुद्धि.

ऋद्धि सिद्धि दे, बोले सतनाम.

ज्याहि विध होवे काम, ताहि विध धाम.

2

गुण राजस में शान सुहानी, अहंकार हठ मान खुमारी.

दंभ दर्प अरु, आत्मगुमान.

ज्याहि विध होवे काम, ताहि विध धाम.

3

तामस गुण में भरा अंधेरा, काम क्रो मद मत्सर माया.

अज्ञानी को, नरक में स्थान.

ज्याहि विध होवे काम, ताहि विध धाम.

4

पाप ताप सब भार हराने, भवसागर दुख पार कराने.

निश-दिन जपियो, हरि! हरि! नाम.

ज्याहि विध होवे काम, ताहि विध धाम.

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(208)

Krishnayan, As You Think so you see, 2081

नैनन नाही रोशनी

नैनन नाही रोशनी, क्या दरपण का काम.

बंजर कृषि की जोतनी, मेहनत सब बेकाम.

जाहि विध बुद्धि, ताहि विध काम.

जाहि विध बुद्धि, ताहि विध काम.

1

द्यू मंडल बिच जाको डेरो, ताको करत प्रनाम.

जाहि विध बुद्धि, ताहि विध काम.

2

धरती पर जब मारे फेरो, कोई हेरो नाम.

जाहि विध बुद्धि, ताहि विध काम.

3

हिरदय जाके बिखरो नेरो, का रावन का राम.

जाहि विध बुद्धि, ताहि विध काम.

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(209)

Krishnayan, At Krishna’s Feet, Sanskrit

देहि मां शरणम्, संस्कृत

केशव माधव देहि शरणं, निरन्तरं मे हृदि तव स्मरणम्.

केशव माधव देहि शरणं, निरन्तरं मे हृदि तव स्मरणम्.

1

अमलं विमलं ते मुखकमलं, याचयामि ते स्पर्ष्टुं चरणम्.

केशव माधव देहि शरणं, निरन्तरं मे हृदि तव स्मरणम्.

2

त्वत्तो कोपि नह्युपकरणम्, अस्माकं भवसागरतरणम्.

केशव माधव देहि शरणं, निरन्तरं मे हृदि तव स्मरणम्.

3

त्वमेव मे खलु भवभयहरणं, प्रभो सुखं मे भवतु मरणम्.

केशव माधव देहि शरणं, निरन्तरं मे हृदि तव स्मरणम्.

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(210)

Krishnayan, Atma is Brahma-2, Hindi 2101

आत्मा ही ब्रह्म

आतमा ही, सखे! ब्रह्म जानो, जो निराकार निर्गुण अमर है.

आतमा ही, सखे! ब्रह्म जानो, जो निराकार निर्गुण अमर है.

1

कटे ना किसी शस्त्र से ये, मिटे ना किसी अस्त्र से ये.

जले ना किसी आग से ये, न मारे कोई भी जहर है.

आतमा ही, सखे! ब्रह्म जाना, जो निराकार निर्गुण अमर है.

2

देह देही का है गूढ़ नाता, आतमा ये आता जाता.

जन्म यौवन जरा देह पाता, आतमा है ये जाना अजर है.

आतमा ही, सखे! ब्रह्म जाना, जो निराकार निर्गुण अमर है.

3

वर्णनातीत जाना है देही, मौन साक्षी है नौ द्वार गेही.

सब दिलों मे बसा ये सनेही, ये है इधर ना उधर है.

आतमा ही, सखे! ब्रह्म जाना, जो निराकार निर्गुण अमर है.

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(211)

Krishnayan, Atma is Brahma-3, Hindi 2111

आत्मा ही ब्रह्म

अरे! ब्रह्म ही अव्ययी आतमा है.

1

किसी शस्त्र से ना कटे आतमा ये, कभी आयु से ना घटे आतमा ये.

सनातन अनादि, कहा आतमा ये.

अरे! ब्रह्म ही अव्ययी आतमा है.

2

किसी आग से ना जले आतमा ये, कभी पानी से ना गले आतमा ये.

अनश्वर अजन्मा, अजर आतमा ये.

अरे! ब्रह्म ही अव्ययी आतमा है.

3

किसी दर्द से ना दुखे आतमा ये, कभी वायु से ना सूखे आतमा ये.

करे ना मरे ये, अमर आतमा है.

अरे! ब्रह्म ही अव्ययी आतमा है.

4

किसी से नहीं है जुड़ा आतमा ये, किसी से नहीं है जुदा आतमा ये.

तेरा मेरा, सर्वदम आतमा है.

अरे! ब्रह्म ही अव्ययी आतमा है.

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(212)

Krishnayan, Avatar-1, Hindi 2121

धर्म रक्षक

यदा यदा हि धर्म की, हानि होती है यहाँ.

हरि धरा पे आन कर, जहाँ बसाते है नया.

1

हिरणकशिपु को नृसिंह विष्णु ने, गोद में अपनी लिटा लिया.

भक्त प्रलाद के पापी बाप को, मार्ग स्वर्ग का दिखा दिया.

यदा यदा हि धर्म की, हानि होती है यहाँ.

हरि धरा पे आन कर, जहाँ बसाते है नया.

2

बाल कृष्ण ने, पापी कंस को, एक चुटकी में गिरा दिया.

अग्रसेन के, दुष्ट पुत्र को, भवसागर से उठा लिया.

यदा यदा हि धर्म की, हानि होती है यहाँ.

हरि धरा पे आन कर, जहाँ बसाते है नया.

3

योगेश्वर ने, कुरुक्षेत्र पर, धर्म-कर्म का ज्ञान दिया.

भगत पार्थ को, योग सिखा कर, दुर्योधन को मिटा दिया.

यदा यदा हि धर्म की, हानि होती है यहाँ.

हरि धरा पे आन कर, जहाँ बसाते है नया.

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(213)

Krishnayan, Beautiful Krishna, Hindi 2131

प्रभु दर्शन

बरनन सुंदर जाको इतनौ, रूप परम होहौ कितनौ.

बरनन सुंदर जाको इतनौ, रूप परम होहौ कितनौ.

1

किरती जाकी जग तीनि माहीं, प्रीति बिखरी दुखी दीनि माहीं.

बरतन जाको मंगल इतनौ, दरसन सुभ होहौ कितनौ.

बरनन सुंदर जाको इतनौ, रूप परम होहौ कितनौ.

2

सुमिरन जाको पुन्य लगावै, सान्ति दैके पाप भगावै.

सपनन में निर्मल इतनौ, अपनन में होहौ कितनौ.

बरनन सुंदर जाको इतनौ, रूप परम होहौ कितनौ.

3

निराकार निर्गुन सुभ काया, कन कन में जाकी है माया.

रूप अलख न्यारो इतनौ, गोचर प्यारो होहौ कितनौ.

बरनन सुंदर जाको इतनौ, रूप परम होहौ कितनौ.

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(214)

Krishnayan, Ignorance-2, Hindi 2141

नासमझ

इन लोगों को ये क्या हुआ है, इन्हें क्यों लगी ये बद दुआ है.

इन लोगों को, ये क्या हुआ है.

1

ईश्वर से भी नहीं ये डरते, मन में आया वही हैं करते.

आस्तिक नास्तिक एक हुए हैं, इन्हें जिंदगी ये बस जूआ है.

इन लोगों को, ये क्या हुआ है.

2

पत्थर से लेते टक्कर हैं, खच्चर से ज्यादा कट्टर हैं.

धर्म-कर्म सब नष्ट हुआ है, प्यास लगे खोदे कूँआ हैं.

इन लोगों को, ये क्या हुआ है.

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(216)

Krishnayan, Ignorance-3, Hindi 2061

कहाँ से दुष्ट आते हैं

कहाँ से लोग आते हैं, जहाँ में दुष्ट ये सारे.

करें तो क्या करें इनका, यहाँ के लोग बेचारे.

कहाँ से लोग आते हैं, जहाँ में दुष्ट ये सारे.

1

सताने साधु जन गण को, सयाने लोग पावन को.

दीवाने कंस रावण से, असुर ये कुमति के मारे.

जहाँ में क्यों कर आते हैं, ये पापी हृदय के कारे.

कहाँ से लोग आते हैं, जहाँ में दुष्ट ये सारे.

2

चुराने अनघ सीता को, भगाने जगत माता को.

सभा में आर्त द्रौपदी की, लुटाने लाज भाभी की.

जाने क्यों ये आते हैं, कलंकी कुल के ये सारे.

कहाँ से लोग आते हैं, जहाँ में दुष्ट ये सारे.

3

लड़ाने भाई-भाई से, लुटाने घर तबाही से.

शकुनि की फरेबी से, मिटाने कुल खराबी से.

बचा रे, हरि प्यारे! हमारे नैन के तारे!

कहाँ से लोग आते हैं, जहाँ में दुष्ट ये सारे.

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(217)

Krishnayan, Bhagat Pralhad, Hindi 2171

भगत परलाद

हरि हरि! रटिया भगत परलादा, नरसिंघ बना, जग रखवारा.

हरि हरि! रटिया भगत परलादा, नरसिंघ बना, जग रखवारा.

1

हिरणकशप ने खंबा रचाया, बाल प्रलाद कु उसमें दबाया.

बोला, दिखा दे मोहे अब, को है सहारा.

हरि हरि! रटिया भगत परलादा, नरसिंघ बना, जग रखवारा.

2

हाथ जोड़ कर खड़ा भगत था, श्रीधर व्यापा तीन जगत था.

छन मा प्रकट भया सुन कर, आरत पुकारा.

हरि हरि! रटिया भगत परलादा, नरसिंघ बना, जग रखवारा.

3

श्रीहरि केसरी रूप धराया, हिरणकशप कु अंक लिटाया.

चीरा नख से उदर असुर का, हरि सुर पियारा.

हरि हरि! रटिया भगत परलादा, नरसिंघ बना, जग रखवारा.

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(218)

Krishnayan, Worldly Lifecycle, Hindi 2181

भवचक्र

भवसागर के क्र से, कुल चौरासी लाख.

बचने की तू फिक्र से, तन-मन बंधन राख.

भवसागर के क्र से, कुल चौरासी लाख.

बचने की तू फिक्र से, तन-मन बंधन राख.1

राम! राम! नित नाम जपाए, प्यास बुझत बिनु कूप खुदाए.

कर्म छुटत नित हरि गुन गाए, पंथ कटत बिनु पाँव थकाये.

मन के अंदर झाँक.

भवसागर के क्र से, कुल चौरासी लाख.

बचने की तू फिक्र से, तन-मन बंधन राख.

2

नाम जपन बिनु मन सुखावे, राम रतन बिनु तन सुहावे.

ध्यान मनन से चित हरषावे, ज्ञान परम यह, सुख बरसावे.

जप का फल तू चाख.

भवसागर के क्र से, कुल चौरासी लाख.

बचने की तू फिक्र से, तन-मन बंधन राख.

3

कर्म किया बिनु आस लगाए, आप डूबे ना और डुबावे.

उतार कलमष, पुण्य चढ़ावे, जनम-जनम के दुख बिसरावे.

सुन ले बात मनाक्.

भवसागर के क्र से, कुल चौरासी लाख.

बचने की तू फिक्र से, तन-मन बंधन राख.

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(219)

Krishnayan, Cowmaid Radha, Hindi 2191

राधा ग्वालिन

राधा ग्वालिन, कर रही मंथन.

साथ हरि का घड़ी घड़ी चिंतन.

1

वृंदावन में, गोप गोपिका, खेलत हैं मतवाले.

व्रज के ग्वाले, बंसी बजा कर, खेलत खेल निराले.

नटखट नागर, नंद का नंदन. मुकुन्द टटका खात है माखन.

राधा ग्वालिन, कर रही मंथन. साथ हरि का घड़ी घड़ी चिंतन.

2

गोकुल वाला, बालक ग्वाला, मुरली मधुर बजावे.

वृंदावन की कुंज गलिन में, सुंदर रास रचावे.

खोये सुध-बुध, सारे व्रज जन. सबके मन का, होत है रंजन.

राधा ग्वालिन, कर रही मंथन. साथ हरि का घड़ी घड़ी चिंतन.

3

राधा ढूँढत, गली गलिन में, मन में छुपा जो कान्हा.

प्रेम दीवानी, भोली राधिका, सखियाँ मारत ताना.

प्यारा मोहन, असुरनिकंदन. सबके दुखों का, करता भंजन.

राधा ग्वालिन, कर रही मंथन. साथ हरि का घड़ी घड़ी चिंतन.

4

तीर पे भावन, नीर है पावन, जमुना जल है कारा.

सिरजनहारा, आँख का तारा, राधा यशोदा दुलारा.

पयस है प्यारा, अमुत धारा. पीत है श्यामा, देवकी नंदन.

राधा ग्वालिन, कर रही मंथन. साथ हरि का घड़ी घड़ी चिंतन.

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(220)

Krishnayan, Delusion-1, Hindi 2201

माया-1

कण-कण में जो भरी है माया, जग जिसमें भरमाया.

जानो उसको कौन है करता, श्रीधर नाम है उसका.

1

सूरज में जो भरी रोशनी, चाँद में जो चाँदनी.

ओम् प्रणव का ध्वनि अंबर में, बना तरल है पानी.

बोलो ये सब काम है किसका, श्रीधर नाम है उसका.

2

जाप ताप से बने तपस्वी, बल वाले बलशाली.

तेज चमक से जलती अग्नी, बने ज्ञान से ज्ञानी.

बोलो ये सब काम है किसका, श्रीधर नाम है उसका.

3

बने धर्म से नर धर्मात्मा, कर्म योग से योगी.

सदाचार से बने सयाना, नर जग में उपयोगी.

बोलो ये सब देन है किसकी, श्रीधर नाम है उसका,

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(221)

Krishnayan, Delusion-2, Hindi 2211

माया-2

जानिये, इस दुनिया की माया,

जग पर जिसकी छाया.

जानिये, इस दुनिया की माया,

जग पर जिसकी छाया.

1

जैसा जिसने दर पाया है, वैसी उसकी काया.

तीन गुणन का खेल ये सारा, देख के मन भरमाया.

जानिये, इस दुनिया की माया,

जग पर जिसकी छाया.

2

मोर पंख से रंग सजाता, सूरज दिन चमकाता.

पंछी कोयल कुहू गाता, अश्व घास है खाता.

जानिये, इस दुनिया की माया,

जग पर जिसकी छाया.

3

फूल कमल का जल में खिलता, चाँद गगन में सुहाता.

मीन अंभ में, खग अंबर में, वन में शेर है राजा.

जानिये, इस दुनिया की माया,

जग पर जिसकी छाया.

4

ममता माँ को, राम जुबाँ को, शिशु है गोद सुखाता.

ऊँट रेत में, शस्य खेत में, बीज विश्व उगाया.

जानिये, इस दुनिया की माया,

जग पर जिसकी छाया.

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(222)

Krishnayan, Dwarka Nagari, Hindi 2221

कृष्ण की द्वारका नगरी, हिंदी

हरि चरणन की अमृत गगरी.

धाम द्वारिका पावन नगरी, मथुरा कांची अवध पुरी.

हरि चरणन की अमृत गगरी.

1

राज महल माधव का सुनहरा, यादव का भगवा ध्वज फहरा.

सागर तट पर लावण्य खड़ी, स्वागत करती जल की परी.

हरि चरणन की अमृत गगरी.

2

पँच धाम पावन जग जाने, हरि दरशन के जो हैं दीवाने.

भगत जनन की भीड़ बड़ी, पावन नगरी जादू भरी.

हरि चरणन की अमृत गगरी.

3

मथुरा से हरि गोकुल आयो, राधा मिलन वृंदावन लायो.

मधुबन से द्वारिका नगरी, आयो सुदामा मिलन हरि.

हरि चरणन की अमृत गगरी.

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(223)

Krishnayan, Dwarkadhish, Hindi 2231

द्वारकाधीश, हिंदी

स्वर्गद्वार ये द्वारिका नगरी, पंच धाम में अमृत गगरी.

स्वर्गद्वार ये द्वारिका नगरी, पंच धाम में अमृत गगरी.

1

वृंदावन का कृष्ण कन्हैया, इस नगरी का बना है राजा.

राज महल जिसका सोने का, हरिहर है सबका हितकारी.

स्वर्गद्वार ये द्वारिका नगरी, पंच धाम में अमृत गगरी.

2

सिंधु तट पर बसी पुरानी, सोमनाथ शिव रची सुहानी.

विप्र सुदाम की यहाँ कहानी, भगत हरि पर हैं बलिहारी.

स्वर्गद्वार ये द्वारिका नगरी, पंच धाम में अमृत गगरी.

3

एक दिन आया द्वारिका, गरीब सुदामा सखा हरि का.

सिंहासन पर साथ बिठाया, प्रेम से उसे बोले बनवारी.

स्वर्गद्वार ये द्वारिका नगरी, पंच धाम में अमृत गगरी.

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(224)

Krishnayan, Ego, Hindi 2241

अहंकार

अहंकार का यह पाप मेरा, मेरी, साँस-साँस से, झरने दे.

प्रभु! मेरी सभ्यता, खोगई है, अभिमान को मेरे, गिरने दे.

अहंकार का यह पाप मेरा, मेरी, साँस-साँस से, झरने दे.

1

भगत प्रलाद ने, तोहे पुकारा, भागा-भागा तू आया.

दंभ असुर का तूने गिराया, हिरनकशप का घात कराया.

गुमान मेरा जो है, क्रो भरा, उसे, अंदर घुटकर, मरने दे.

अहंकार का यह पाप मेरा, मेरी, साँस-साँस से, झरने दे.

2

पतिव्रता ने, नाम तिहारा, रो-रो कर प्रभु, जभी बुलाया.

लंकेसर संहार कराया, सीता को बंदी से छुड़ाया.

नस-नस में भरा ये, गर्व मेरा, हर, स्वेद बिंदु से ढहने दे.

अहंकार का यह पाप मेरा, मेरी, साँस-साँस से, झरने दे.

3

मथुरा व्रज का, वो हत्यारा, पापी कंस भी, तूने हराया.

रात आधी में, गोकुल आया, व्रज के जनन को, तूने उबारा.

हरि! आज मेरा दुख, कहने दे, हर, आँसू आँसू में, बहने दे.

अहंकार का यह पाप मेरा, मेरी, साँस-साँस से, झरने दे.

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(225)

Krishnayan, Eternal Krishna, Hindi 2251

अक्षर हरि

अजर अमर अविनाशी, अक्षर हरि व्रजवासी.

अवगत परिक्रमा से, योनि लख-चौरासी.

अजर अमर अविनाशी, अक्षर हरि व्रजवासी.

1

अचरज सेती निहारत, सुंदर जग नर नारी.

भव भग क्र चलावत, श्रीधर घट-घट वासी.

अजर अमर अविनाशी, अक्षर हरि व्रजवासी.

2

भगतन भीड़ लगावत, दरसन के अभिलासी.

गिरिधर पावन कीन्हे, गोकुल मथुरा कासी.

अजर अमर अविनाशी, अक्षर हरि व्रजवासी.

3

छम् छम् पायल बाजत, ग्वालिन रधिया दासी.

छर छर मंथन लावत, माखन दधि घट रासी.

अजर अमर अविनाशी, अक्षर हरि व्रजवासी.

4

घूम फिर कर जग आए, जनम लाख चौरासी.

कहीं ऐसा मीत मिला, भव चक्कर जो नासी.

अजर अमर अविनाशी, अक्षर हरि व्रजवासी.

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(226)

Krishnayan, Eternal Soul, Hindi 2261

अमर आत्मा

अक्षर ये आतमा है, देही अमर है जाना,

अक्षय अनादि अजर है, पावन ये आतमा है.

अक्षर ये आतमा है, देही अमर है जाना,

अक्षय अनादि अजर है, पावन ये आतमा है.

1

वस्त्रों को त्याज्य नित जैसे, मानव ये त्यागता है,

देही भी देह नित वैसे, जर्जर को छोड़ता है,

इसमें भला क्यों रोना, जीवन की भंगिमा है.

अक्षर ये आतमा है, देही अमर है जाना,

अक्षय अनादि अजर है, पावन ये आतमा है.

2

शस्त्रों से नहीं ये कटता, अग्नि से नहीं है जलता,

पानी में नहीं ये गलता, वायु से नहीं है सूखता,

अविनाशी सही है जाना, जैसे ये आसमाँ है.

अक्षर ये आतमा है, देही अमर है जाना,

अक्षय अनादि अजर है, पावन ये आतमा है.

3

हिरदय सभी में बसता, कण कण है इसीसे बनता,

जीवन की ये है ज्योति, चेतन हैं इसीसे प्राणी,

इसीको ब्रह्म है जाना, ये ही परम परमात्मा.

अक्षर ये आतमा है, देही अमर है जाना,

अक्षय अनादि अजर है, पावन ये आतमा है.

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(227)

Krishnayan, Existence Non-existence, 2271

अस्तित्व अनस्तित्व

तुम नहीं थे, मैं नहीं था, ये जन थे, पहले भी.

तुम होगे, मैं हूँगा, ये होंगे, आगे भी.

तुम नहीं थे, मैं नहीं था, ये जन थे, पहले भी.

तुम होगे, मैं हूँगा, ये होंगे, आगे भी.

1

हुआ तू भी था, हुआ मैं भी था, ये लोग सारे हो गए.

होगा तू भी, हूँगा मैं भी, ये सर्व होंगे, आगे भी.

तुम नहीं थे, मैं नहीं था, ये जन थे, पहले भी.

तुम होगे, मैं हूँगा, ये होंगे, आगे भी.

2

सांख्य ज्ञान का योग यही है, वही कर्म का भोग है.

अमर आतमा कहत लोग हैं, जनम-मरण के धागे भी.

तुम नहीं थे, मैं नहीं था, ये जन थे, पहले भी.

तुम होगे, मैं हूँगा, ये होंगे, आगे भी.

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(228)

Krishnayan, Faith-1, Hindi 2281

श्रद्धा-1

प्रभु, श्रद्धा- से- मिल जा-वे- - -.

प्रभु, श्रद्धा- से- मिल जा-वे- - -.

1

कोना-कोना जब हिरदय का, कण-कण अंकुर बने विनय कां

सत् चित, आनंद आनंद पावे.

प्रभु, श्रद्धा- से- मिल जा-वे- - -.

2

गंगा धारा निर्मल मन की, स्नेह सरिता शुभ सद् गुन की.

भव-जल, जब अम्रित बन जावे.

प्रभु, श्रद्धा- से- मिल जा-वे- - -.

3

भक्ति-भावना ज्योति जगा के, एक चित्त मन, कछु सतावे.

तन में, मन मंदिर बन जावे.

प्रभु, श्रद्धा- से- मिल जा-वे- - -.

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(229)

Krishnayan, Faith-2, Hindi 2291

श्रद्धा-2

सुख-दुख में हरि बोल, रे! तोहे हरि उबारे.

सुख-दुख में हरि बोल, रे! तोहे हरि उबारे.

1

बीच भँवर में, नैया तोरी, जल कारो है, नदिया गहरी.

मत कर डाँवाडोल, रे! तोहे हरि सँभारे.

सुख-दुख में हरि बोल, रे! तोहे हरि उबारे.

2

चार दिनों की, जीवन फेरी, दिन डरावत, रात अँधेरी.

निश-दिन हरि हरि बोल, रे! तोहे हरि सहारे.

सुख-दुख में हरि बोल, रे! तोहे हरि उबारे.

3

चंचल गुण की, काया तेरी, विषय वासना, माया फेरी.

तन मन से हरि बोल, रे! तोहे हरि उधारे.

सुख-दुख में हरि बोल, रे! तोहे हरि उबारे.

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(230)

Krishnayan, The Four Varnas, Hindi 2031

वर्ण व्यवस्था

व्यवस्था गुण पर, की करतार, बिना कछु ऊँच नीच विचार.

सत् रज तम इति तीन कहे हैं, गुण के मात्र प्रकार.

व्यवस्था गुण पर, की करतार, बिना कछु ऊँच नीच विचार.

1

गुण कमों से वर्ण चार हैं, हेतु जाति का है बेकार.

स्वभाव पर ही सब निर्भर है, यहाँ पर कोई नहीं लाचार.

व्यवस्था गुण पर, की करतार, बिना कछु ऊँच नीच विचार.

2

रथ के रश्मि अश्व सारथी, क्र अंग हैं अभिन्न चार.

एक देह के अंग चार हैं, एक को तीन का आधार.

व्यवस्था गुण पर, की करतार, बिना कछु ऊँच नीच विचार.

3

जाति पाती में नर भरमाया, वर्ण जनम का फल फरमाया.

जाति है स्वार्थ्य का आविष्कार, वर्ण पर गुण का हि अधिकार.

व्यवस्था गुण पर, की करतार, बिना कछु ऊँच नीच विचार.

4

वर्ण चार से जग उजियारा, भूत प्राणी में भाईचारा.

मिटाय जाति का अंधकार, करिए आपस में सब प्यार.

व्यवस्था गुण पर, की करतार, बिना कछु ऊँच नीच विचार.

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(231)

Krishnayan, From Darkness to Light, Hindi 2311

असतो मा सद्गमय

असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय.

यहि हमारी प्रार्थना, प्रभो! हमारी याचना.

1

मन नियमित हो, क्रो रहित हो, शाँति सहित हो, आतमा - - -.

अघ विरहित हो, राग विवर्जित, रहे हमारी साधना - - - -.

असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय.

यहि हमारी प्रार्थना, प्रभो! हमारी याचना.

2

ज्ञानार्जित हो, ध्यानांकित हो, प्रिय परम परमातमा.

जन हित रत हो, द्वंद्व विवर्जित, रहे हमारी भावना.

असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय.

यहि हमारी प्रार्थना, प्रभो! हमारी याचना.

3

मल निर्गत हो, मन निर्मल हो, सर्व दुखों का खातमा.

सम मति युत हो, पाप विवर्जित, रहे हमारी कामना.

असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय.

यहि हमारी प्रार्थना, प्रभो! हमारी याचना.

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(232)

Krishnayan, Fruit of Karma, Hindi 2321

कर्म फल

जैसा जो करता है, भरता है.

कोई हँस के, कोई रोते, रोते मरता है.

जैसा जो करता है, भरता है.

कोई हँस के, कोई रोते, रोते मरता है.

1

नौ द्वारों का महल मिला है, बिन भाड़े से काम चला है.

कोई निंदें भरता है, कोई सेवा करता है.

जैसा जो करता है, भरता है.

कोई हँस के, कोई रोते, रोते मरता है.

2

उच्च योनि में जनम मिला है, पहना नर नारी चोला है.

कोई तस्करी करता है, कोई पाप से डरता है.

जैसा जो करता है, भरता है.

कोई हँस के, कोई रोते, रोते मरता है.

3

काम क्रो मद मत्सर माया, पाप-पुण्य सब देह ने पाया.

कोई नास्तिक मरता है, कोई नाम सिमरता है.

जैसा जो करता है, भरता है.

कोई हँस के, कोई रोते, रोते मरता है.

जैसा जो करता है, भरता है.

कोई हँस के, कोई रोते, रोते मरता है.

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(233)

Krishnayan, Love for Hari, Hindi 2331

हरि प्रेम

हरि के प्यार में अंधा है, अमर वो मर के बंदा है.

हरि पर सौंप दें सारा, वो, कच्चे धागे बंधा है.

हरि के प्यार में अंधा है, अमर वो मर के बंदा है.

1

प्यार हरि का जो पाता है, आप ही खींचा जाता है.

हरि नयनन का बन कर तारा, वो, गुलशन में मकरंदा है.

हरि के प्यार में अंधा है, अमर वो मर के बंदा है.

2

नाम हरि का जो गाता है, भगत हरि को भाता है.

रस मय उसकी जीवन धारा, वो, अमृत पी कर जिंदा है.

हरि के प्यार में अंधा है, अमर वो मर के बंदा है.

3

हरि चरणन में जो आता है, भव तारण का ज्ञाता है.

सुख मय उसका है जग सारा, वो, हर जन गण का नंदा है.

हरि के प्यार में अंधा है, अमर वो मर के बंदा है.

4

साबुन मल मल खूब नहाया, तीरथ चारों फिर कर आया.

हरि शरणन में जो नहीं आया, वो, गंगा नहाय गंदा है.

हरि के प्यार में अंधा है, अमर वो मर के बंदा है.

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(234)

Krishnayan, Duty, Hindi 2341

आर्यमति कार्यमति

यत् करणीयम् तत् करणीयम्, कार्यपथे जागरणीयम्.

यत् करणीयम् सत् करणीयम्, इति आर्यमते! आदरणीयम्.

जो करना है काम हमें वो, तेरे नाम से करना है.

साथ हमारे नाथ सदा हैं, मन में धीरज धरना है.

जो करना है काम हमें वो, तेरे नाम से करना है.

1

जब से तेरा नाम साथ है, सूनी कोई रात है.

जब से डोरी तेरे हाथ है, डर की कोई बात है.

जो करना है काम हमें वो, तेरे नाम से करना है.

2

आज कल का भी गम सताये, कल की चिन्ता कोई है.

चिंतामणी सब कहते जिसको, प्रभु की माया सो ही है.

जो करना है काम हमें वो, तेरे नाम से करना है.

3

भवसागर के दुख आगर से, हँस मुख हमको तरना है.

परमादर से नेहा करके, जीवन में सुख भरना है.

जो करना है काम हमें वो, तेरे नाम से करना है.

4

नूतन दम से कदम कदम से, आगे आगे बढ़ना है.

बिना वहम से धरम करम से, जागे जागे चलना है.

जो करना है काम हमें वो, तेरे नाम से करना है.

5

घर आँगन से हर साजन से, आज हमें ये कहना है.

सखे! कसम से, प्रेम परम से, कुटुंब वसुधा करना है.

जो करना है काम हमें वो, तेरे नाम से करना है.

जो करना है काम हमें वो, तेरे नाम से करना है.

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(236)

Krishnayan, Giridhari Krishna-3, Hindi 2361

गिरिधारी कृष्ण-3

तुम संकट मोचक गिरिधारी.

तुम संकट मोचक गिरिधारी.

1

मन चंचल पर तुम निगरानी, जग सागर तुम पानी.

घट-घट वासी विश्व विहारी, सुख कारी दुख हारी.

तुम संकट मोचक गिरिधारी.

2

दीनन के रक्षक प्रतिहारी, राधा रमण बनवारी.

मुरलीधर हरि कुंज बिहारी, लीला गजब तिहारी.

तुम संकट मोचक गिरिधारी.

3

तुम ही नैया खेवन हारे, तुम हमरे रखवारे.

गोवर्धन प्रभु कृष्ण मुरारे, हम तुमरे बलिहारी.

तुम संकट मोचक गिरिधारी.

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(237)

Krishnayan, Divinity-1, Hindi 2371

प्रभु के काम

अद्भुत जितने काम जगत के, मंगल उतने नाम तिहारे.

अद्भुत जितने काम जगत के, मंगल उतने नाम तिहारे.

1

कोई कहे गोविंद, कंस निकंदन, कोई कहे मोहन, कालियामर्दन.

दीन दयाला, हे जगपाला! पाहि हमको, हरे मुरारे!

अद्भुत जितने काम जगत के, मंगल उतने नाम तिहारे.

2

मुकुंद माधव, मुरली मनोहर, कोई कहे यादव, गोवर्धन-धर.

श्यामल सुंदर, हे योगेश्वर, भगत जन भये शरण तिहारे.

अद्भुत जितने काम जगत के, मंगल उतने नाम तिहारे.

3

देवकी नंदन, कृष्ण दमोदर, मीरा के प्रभु, गिरिधर नागर.

कोई कहे केशव, हे दुख भंजन! निश-दिन करना काज हमारे.

अद्भुत जितने काम जगत के, मंगल उतने नाम तिहारे.

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(238)

Krishnayan, Hari’s Abode, Hindi 2381

हरिधाम

हरि, जिसमें रहते हैं, वो तेरे हृदय का कोना है.

हरि, जिसमें रहते हैं, वो तेरे हृदय का कोना है.

1

मंदिर मंदिर बसी है मूर्ति, धाम तीरथ की बनी है कीर्ति.

फिरता क्यों मारा, मारा, दुनिया में.

हरि, जिसमें मिलते हैं, वो ये, एक ठिकाना है.

हरि, जिसमें रहते हैं, वो तेरे हृदय का कोना है.

2

वेद पुराण में लिखी है माया, रात दिन पढ़ी कुछ नहीं पाया.

फिर, भी क्यों भागा, भागा, फिरता दुनिया में.

अरे समय बिताने का, ये तो, एक बहाना है.

हरि, जिसमें रहते हैं, वो तेरे हृदय का कोना है.

3

साधु संतन दिखा गए हैं, मार्ग मुक्ति का सिखा गए हैं.

तू! अंदर झाँक जरा, बैठा, बैठा चिंतन में.

जीवन जीने का, ये ही, नेक निशाना है.

हरि, जिसमें रहते हैं, वो तेरे हृदय का कोना है.

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(240)

Krishnayan, The Nature, Hindi 2401

चराचर

जानता जो चराचर विभूति मेरी, सच्चिदानंद निष्ठा उसी की खरी.

जानता जो चराचर विभूति मेरी, सच्चिदानंद निष्ठा उसी की खरी.

1

यज्ञ की आहुति मैं स्वधा अर्चना, चार वेदों में गायी प्रणव मंत्रणा.

योगीभिर्ध्यानगम्या मैं आराधना, क्रधारी कनाई मुरारी हरि.

जानता जो चराचर विभूति मेरी, सच्चिदानंद निष्ठा उसी की खरी.

2

बंधु भाई सखा स्नेही माता-पिता, जन्म-मृत्यु अमरता का मैं देवता.

चाँद सूरज सितारों में तेजस्विता, चेतना प्रकृति में है मैंने भरी.

जानता जो चराचर विभूति मेरी, सच्चिदानंद निष्ठा उसी की खरी.

3

आसमाँ से धरा तक भुवन तीन में, जो भी दैवी है शक्ति मेरी देन है.

जो भी मेरे धरम का रजामंद है, मेरे बिभूति की परखन उसी ने करी.

जानता जो चराचर विभूति मेरी, सच्चिदानंद निष्ठा उसी की खरी.

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(239) 240

Krishnayan, The Life Cycle, Hindi 2391

जन्म-मरण 239

क्र

ऐसी ये दासताँ है, जो ना कभी रुकी है.

जानी जहाँ खतम है, होती शुरू वहीं है.

ऐसी ये दासताँ है, जो ना कभी रुकी है.

जानी जहाँ खतम है, होती शुरू वहीं है.

1

लंबी सहस्र जुग की, ब्रह्म की रात जानी.

उतनी ही दिन की लंबी, यात्रा पुनः कही है.

ऐसी ये दासताँ है, जो ना कभी रुकी है.

जानी जहाँ खतम है, होती शुरू वहीं है.

2

दिन में ये भूत प्यारे, होते हैं व्यक्त सारे.

अव्यक्त फिर निशा में, जीवन मरण यही है.

ऐसी ये दासताँ है, जो ना कभी रुकी है.

जानी जहाँ खतम है, होती शुरू वहीं है.

3

ब्रह्म है प्राण दाता, वो ही है मुक्ति देता.

भगवन्! तू हमको पाहि,” ये प्रार्थना सही है.

ऐसी ये दासताँ है, जो ना कभी रुकी है.

जानी जहाँ खतम है, होती शुरू वहीं है.

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(241)

Krishnayan, The Creation, Hindi 2411

विभूतियोग

भँवर ये, तेरी विभूति ने घेरा, जहाँ भी जो अमर है, वो तेरा.

भँवर ये, तेरी विभूति ने घेरा, जहाँ भी जो अमर है, वो तेरा.

1

सब हृदयों में बसा आतमा, आदि अंत और मध्य जीवों कां

आदित्यों में महाविष्णु तू, चाँद गगन में सूर्य सितारा.

जगत में, जो भी अजब है, वो तेरा.

भँवर ये, तेरी विभूति ने घेरा, जहाँ भी जो अमर है, वो तेरा.

2

तू रुद्रो में शिव शंकर है, यक्ष गणों में धन कुबेर है.

सेनापति तू स्कंद सुरों का, बृहस्पति तू बैद अपारा.

भुवन में, जो भी अलग है, वो तेरा.

भँवर ये, तेरी विभूति ने घेरा, जहाँ भी जो अमर है, वो तेरा.

3

व्यास मनीषी मुनिजनों में, महर्षियों में भृगु तुझे कहा.

तपस्वी नारद देवर्षि तू, अर्जुन तू है पांडव प्यारा.

भगतों में, जो भी परम है, वो तेरा.

भँवर ये, तेरी विभूति ने घेरा, जहाँ भी जो अमर है, वो तेरा.

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(243)

Krishnayan, Universal Form-1, Hindi 2431

विराट रूप दर्शन-1

दिव्य रूप प्रभु! आपका, विस्मय पूर्ण अपार.

दै के दरसन कीजिए, जीवन सफल हमार.

दिव्य रूप प्रभु! आपका, विस्मय पूर्ण अपार.

1

गल में माला दिव्य हैं, कंचन मोती हार.

रवि शशि कुंडल कान में, सिर पर मुकुट तिहार.

दिव्य रूप प्रभु! आपका, विस्मय पूर्ण अपार.

2

नाना कर पद नेत्र हैं, मुख में दाँत विशाल.

गदा क्र धनु हाथ में, शंख पद्म तलवार.

दिव्य रूप प्रभु! आपका, विस्मय पूर्ण अपार.

3

अंग वस्त्र जरी तार के, जिनमें रंग हजार.

कटि पीतांबर से सजा, सोहे रूप निखार.

दिव्य रूप प्रभु! आपका, विस्मय पूर्ण अपार.

4

प्रभा आपकी की प्रखर है, सूर्य सहस्र समान.

दिव्य देव के देह में, त्रिभुवन का दीदार.

दिव्य रूप प्रभु! आपका, विस्मय पूर्ण अपार.

5

आदि मध्य अंत है, अद्भुत सुर करतार.

हरि को लाख प्रणाम हैं, नत सिर बारंबार.

दिव्य रूप प्रभु! आपका, विस्मय पूर्ण अपार.

6

ऋषि-मुनि सुर सब नेह में, विस्मित दृश्य निहार.

ब्रह्म विष्णु शिव काय में, रूप विराट तिहार.

दिव्य रूप प्रभु! आपका, विस्मय पूर्ण अपार.

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(244)

Krishnayan, Krishna’s Aura, Hindi 2441

आभा प्रभु की

यदि, चमके गगन में सूर्य हजार, हरि! उज्ज्वल उनसे, रूप तिहार.

यदि, चमके गगन में सूर्य हजार, हरि! उज्ज्वल उनसे, रूप तिहार.

1

प्राण प्राण में ज्योत तिहारी, तेज भरी है सृष्टि सारी.

बचा कोई जग अंधियार, हरि! अनुपम तेरा रूप निखार.

यदि, चमके गगन में सूर्य हजार, हरि! उज्ज्वल उनसे, रूप तिहार.

2

विश्वरूप ये देह तिहारा, अद्भुत दैवी साक्षात्कारा.

देख के उसका परम दीदार, हरि! चकाचौंध हैं नयन हमार.

यदि, चमके गगन में सूर्य हजार, हरि! उज्ज्वल उनसे, रूप तिहार.

3

आभा तेरी गजब निराली, शोभा तेरी जग उजियाली.

चाँद सितारे शरण तिहार, हरि! गदगद दुनिया दृश्य निहार.

यदि, चमके गगन में सूर्य हजार, हरि! उज्ज्वल उनसे, रूप तिहार.

4

किरपा हो प्रभु, हे बनवारी, राधा रमण हरि, कुंज बिहारी!

कृष्ण मुरारि, सुख करतार! हरि! हम तुमरे भगतन बलिहार.

यदि, चमके गगन में सूर्य हजार, हरि! उज्ज्वल उनसे, रूप तिहार.

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(245)

Krishnayan, Conflagration, Hindi 2451

महाकाल प्रलय

महाकाल की, लगी है आग.

महाकाल की, लगी है आग.

1

रूप भयानक, धरा हुआ है, उग्र गुणों से, भरा हुआ है.

विशाल आँखे, लंबे हाथ, असुर कोई जावे भाग.

महाकाल की, लगी है आग.

2

महाचंडी का, ये अवतारा, अरियन का, करने संहारा.

यम का फंदा, यहाँ गिरा है, आज डसें जहरीले नाग.

महाकाल की, लगी है आग.

3

रुद्र रूप ये, शिव शंकर का, तांडव नाचे, ध्वनि अंबर कां

प्रचंड गर्जन, हिरदय भंजक, प्रलय काल का, छिड़ा है राग.

महाकाल की, लगी है आग.

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(246)

Krishnayan, Universal Form-2,  Hindi 2461

विराट रूप दर्शन-2

प्रभु! रूप विराट अनंत किया, किस कारण से यह धारण है.

यह रूप लखे सब विश्व डरा, अति विस्मय का यह दर्शन है.

प्रभु! रूप विराट अनंत किया, किस कारण से यह धारण है.

1

तुमने गल में मणि कांचन के, पहने शुभ हार सुगंध भरे.

तुमने वस्त्र पितांबर पहने, कर क्र गदा असि शंख धरे.

प्रभु! रूप विराट अनंत किया, किस कारण से यह धारण है.

2

तव आग भरा यह देह सखे! जिसमें बहु आनन दंत दिखे.

कर पाद अनेक विशाल जिसे, हरि! रूप बड़े विकराल दिसे.

प्रभु! रूप विराट अनंत किया, किस कारण से यह धारण है.

3

तुमरे मुख में कटते नर हैं, कुछ दंतन में अटके सर हैं.

सब वीरों को तुम काट रहे, उनका तुम शोणित चाट रहे.

प्रभु! रूप विराट अनंत किया, किस कारण से यह धारण है.

4

भगवान! मुझे तव रूप बड़ा, लगता धरती नभ तेज भरा.

तुमने रतनाकर! आज धरा, महिमा मय विष्वक् रूप खरा.

प्रभु! रूप विराट अनंत किया, किस कारण से यह धारण है.

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(247)

Krishnayan, Fierce Form, Hindi 2471

विराट रूप दर्शन-3

आज गजब हरि! तूने करा, उग्र रूप ये, क्यों है धरा.

आज गजब हरि! तूने करा, उग्र रूप ये, क्यों है धरा.

1

दुनिया से न्यारा हरि! तेरा ये हिसाब.

मायावी है काम तेरा, लीला बेहिसाब.

आज इरादा हरि! क्या है तेरा, विश्व रूप ये, क्यों है धरा.

आज गजब हरि! तूने करा, उग्र रूप ये, क्यों है धरा.

2

दैवी ये दीदार प्रभु! तेरा लाजवाब.

जादू का ये तेरी कोई, नहीं है जवाब.

आज जगत हरि! तूने भरा, विराट तन ये, क्यों है धरा.

आज गजब हरि! तूने करा, उग्र रूप ये, क्यों है धरा.

3

जो भी तेरा हेतु हरि! तू है कामयाब.

पापियों का काम तूने, किया है खराब.

आज कहर हरि! तूने करा, घोर रूप ये, क्यों है धरा.

आज गजब हरि! तूने करा, उग्र रूप ये, क्यों है धरा.

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(248)

Krishnayan, Vishva Vriksha, Hindi 2481

विश्ववृक्ष विश्वरूप दर्शन

विश्ववृक्ष ये ब्रह्मरूप है, मायावी अवतारी.

मोह जाल सी जड़ में उसकी, अटके जन संसारी.

विश्ववृक्ष ये ब्रह्मरूप है, मायावी अवतारी.

1

जड़ ऊपर है, डारें नीचे, पत्ते वेद की वाणी.

अविनाशी इस विश्वतरु का, भेद जानते ज्ञानी.

गुह्य वृक्ष का तुम ये जानो, कहते गहन विचारी.

इस बरगद के अंग-अंग में, विषय विविध अविकारी.

विश्ववृक्ष ये ब्रह्मरूप है, मायावी अवतारी.

2

मूल में इसके आदि पुरुष है, पुरुषोत्तम गिरिधारी.

शाखाओं के योनि रूप से, जनी है जनता सारी.

तीन गुणों के माया जल से, बढ़ती दल लवारी.

सांसारिक ये पेड़ अव्ययी, देता फल भवकारी.

विश्ववृक्ष ये ब्रह्मरूप है, मायावी अवतारी.

3

कर्म के लिए कारण जानो, द्रुम है बिखरा भारी.

फल मोहक में मन ललचाता, रस मादक भ्रमकारी.

काटो बंधन, मन में लेकर, अनासक्ति की आरी.

असंग से भव पार करोगे,” बोले कृष्ण मुरारी.

विश्ववृक्ष ये ब्रह्मरूप है, मायावी अवतारी.

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(250)

Krishnayan, Hari Smaran, Hindi 2501

हरि सुमिरन

हरि सुमिरन दे, मन को धीर.

हरि सुमिरन दे, मन को धीर.

1

कार्य भार जब, तन को सतावे, मन उलझन की भीर.

कार्य भार जब, तन को सतावे, मन उलझन की भीर.

हरि सुमिरन दे, मन को धीर.

2

हाथ में बेड़ी, भाग्य रुलावे, पाँव पड़े जंजीर.

हाथ में बेड़ी, भाग्य रुलावे, पाँव पड़े जंजीर.

हरि सुमिरन दे, मन को धीर.

3

कपट जगत का, समझ आवे, रोये मन का कीर.

कपट जगत का, समझ आवे, रोये मन का कीर.

हरि सुमिरन दे, मन को धीर.

4

राम नाम की, नाव तरावे, भव सागर का तीर.

राम नाम की, नाव तरावे, भव सागर का तीर.

हरि सुमिरन दे, मन को धीर.

हरि सुमिरन दे, मन को धीर.

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(251)

Krishnayan, Hari’s Grace, Hindi 2511

हरि कृपा

कृपा कृष्ण की चाही जिसने, जीवन हरि के सहारे है.

नैया उसकी भवसागर में, लगती पार किनारे है.

कृपा कृष्ण की चाही जिसने, जीवन हरि के सहारे है.

1

छोड़े जिसने क्रो खेद सब, सुख-दुख एक बनाये हैं.

भोग लोभ रज सब कुछ त्यागे, आता हरि के दुआरे है.

कृपा कृष्ण की चाही जिसने, जीवन हरि के सहारे है.

2

जोड़ ले मन में भाव भक्ति का, हरि नयनन के तारे हैं.

पाप ताप सब उसके भागे, श्रीधर कष्ट उबारे हैं.

कृपा कृष्ण की चाही जिसने, जीवन हरि के सहारे है.

3

हाथ हरि के जिसकी डोरी, हरि उसके रखवारे हैं.

ऋद्धि सिद्धि नित चमर डुलावे, उस पर साँझ सकारे हैं.

कृपा कृष्ण की चाही जिसने, जीवन हरि के सहारे है.

कृपा कृष्ण की चाही जिसने, जीवन हरि के सहारे है.

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(252)

Krishnayan, Hari’s Love, Hindi 2521

हरि भगत

हर दम जो नाम जपता, प्यारा वो है हरि का.

निष्काम काम करता, उसका हरि पियारा, पियारा.

निष्काम काम करता, उसका हरि पियारा, पियारा.

1

मन में विरक्ति जागी, सब वासनाएँ त्यागी.

जिसको दुख है जग से, किसी को दुख है उससे.

ऐसा भगत निराला, प्यारा हरि को सबसे.

निश-दिन जो याद रखता, उसका हरि किनारा, किनारा.

निष्काम काम करता, उसका हरि पियारा, पियारा.

2

हरि ओम्-ओम् माला, दर्शनकी दिल में ज्वाला.

जिसने वहम भगाया, विश्वस है जगाया.

ऐसा भला पुजारी, पावन खरा है सबसे.

जिसको भजन सुखाता, उसका हरि जियारा, जियारा.

निष्काम काम करता, उसका हरि पियारा, पियारा.

3

सुंदर स्वभाव जिसका, निर्मल हृदय है गहरा.

जिसको क्रो कोई, ईर्ष्या है जिसने खोई.

ऐसा मनुष महाना, मंगल वही है सबसे.

दूसरों का दुख दुखाता, उसका सही विचारा, विचारा.

निष्काम काम करता, उसका हरि पियारा, पियारा.

4

तन मन से तम हटाया, दूसरों से गम बँटाया.

सद्भाव है तरीका, आधार है हरि का.

ऐसा भगत सयाना, न्यारा जगत में सबसे.

दुनिया का जो दुलारा, उसका हरि सहारा, सहारा.

निष्काम काम करता, उसका हरि पियारा, पियारा.

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(254)

Krishnayan, Hari’s Love-2, Hindi 2541

प्रिय भगत

भगत सदा संतुष्ट वो, जिसका निश्चय ढीठ.

तन मन से मुझमें लगा, वो है मेरा मीत.

भगत सदा संतुष्ट वो, जिसका निश्चय ढीठ.

1

किसी को जिससे व्यथा, जो किसी से व्यथित.

हर्ष दुखों से जो परे, उससे मुझको प्रीत.

भगत सदा संतुष्ट वो, जिसका निश्चय ढीठ.

2

जिसे धन की चाह है, और स्पृहा तनिक.

शुद्ध उदासी भक्त वो, करता मुझसे प्रीत.

भगत सदा संतुष्ट वो, जिसका निश्चय ढीठ.

3

जो सुखों का लालची, राग-क्रो अतीत.

सम सुख-दुख में भक्त जो, उसकी सच्ची प्रीत.

भगत सदा संतुष्ट वो, जिसका निश्चय ढीठ.

4

शत्रु मित्र कोई कहे, अपमान किया अगणीत.

रंज नहीं कोई जिसे, न्यारी उसकी रीत.

भगत सदा संतुष्ट वो, जिसका निश्चय ढीठ.

5

जो किसी का शत्रु है, सबको कहता मीत.

जो उसको बैरी कहे, उससे भी है प्रीत.

भगत सदा संतुष्ट वो, जिसका निश्चय ढीठ.

6

दुख देते जो काम हैं, उनसे रहे अतीत.

लाभ-हानि सब एक हों, सदा उसी की जीत.

भगत सदा संतुष्ट वो, जिसका निश्चय ढीठ.

7

हर दम जपता नाम जो, गाता मेरे गीत.

गान भजन मेरे जिसे, कर्ण मधुर संगीत.

भगत सदा संतुष्ट वो, जिसका निश्चय ढीठ.

8

अमृत मय इस धर्म की, जिसके मन में आस.

श्रद्धा वाला भक्त वो, मेरा है प्रिय खास.

भगत सदा संतुष्ट वो, जिसका निश्चय ढीठ.

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(255)

Ramayan, Without Hari, Hindi 2551

हरि भक्ति

यस्मात्प्रमोदते लोको लोकात्प्रमोदते यः.

प्रीतिशान्तिर्धृतिर्युक्तो हि हरेः प्रियो नरः

 

हरि के बिना बिरथा जनम रे, निज बल भव-जल कौन तरे.

हरि के बिना बिरथा जनम रे, निज बल भव-जल कौन तरे.

1

काम क्रो मद काम आवे, जौबन रौनक साथ जावे.

नौका अध बिच टूट पड़े.

हरि के बिना बिरथा जनम रे, निज बल भव-जल कौन तरे.

2

राम नाम बिन जीवन सूना, नास्तिक-भाव लगावे चूना.

भाग करम सब रूठ खड़े.

हरि के बिना बिरथा जनम रे, निज बल भव-जल कौन तरे.

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(258)

Krishnayan, The Attributes-1, Hindi 2581

गुण लीला

जगत ये, लीला गुणों की सारी, माया कण-कण पर जिन डारी.

गुण हैं चीज जनम से भारी, भजु मन नारायण अवतारी.

1

जन्म स्थान हैं मेघ घनेरे, गर्जन शोर बतेरे.

बादर कारे, घोर अंधेरे, मेचक भय दुस्तारे.

फिर भी बिजुरी चम चम गोरी, जय जय, माधव कृष्ण मुरारि.

जगत ये, लीला गुणों की सारी, माया कण-कण पर जिन डारी.

2

गगन मंडल में टिमटिम तारे, लाख हजार बिखेरे.

दाग लगा है चाँद के मुखड़े, सुंदर शकल बिगाड़े.

फिर भी प्यारी चाँद चकोरी, जय जय, दामोदर गिरिधारि.

जगत ये, लीला गुणों की सारी, माया कण-कण पर जिन डारी.

3

जन्म गेह है कीचड़ गारा, कर्दम झील किनारा.

पद्म पुष्प की पंकज क्यारी, दुर्गम दलदल भारी.

फिर भी शोभा कमल की न्यारी, जय जय, पद्मनाभ मनहारी.

जगत ये, लीला गुणों की सारी, माया कण-कण पर जिन डारी.

4

ग्वाल बाल कान्हा व्रज वासी, नटखट विपिन विहारी.

रंग साँवला, माखन चोरी, हाथ रंग पिचकारी.

फिर भी राधा श्याम दीवानी, जय जय, राधेश्याम! तिहारी.

जगत ये, लीला गुणों की सारी, माया कण-कण पर जिन डारी.

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(258)

Krishnayan, Sadguru, Hindi 2581

सद्गुण

सद्गुरु, सद्गुण से मिल जावे.

सद्गुरु, सद्गुण से मिल जावे.

1

शुद्ध शुभ्र शुचि सुंदर सद्गुण, सुख साधन कहलावे.

शाश्वत शीतल शाँत शुगुन शुभ, सत्य शिवं दिखलावे.

अरे सुनो, सद्गुण तन को सुहावे.

सद्गुरु, सद्गुण से मिल जावे.

2

संत समागम स्वर्ग समाना, सावन के सम जाना.

सदाचार सत्धर्म सनातन, सुंदर सुख सोपाना.

सद्गुण, सत्त्व शील दरसावे.

सद्गुरु, सद्गुण से मिल जावे.

3

सद्गुण जन गण मन को भावे, भव के पाप छुड़ावे.

आओ सद्गुणी के गुण गाएँ, सद्गुण के ऋण ध्याएँ.

सद्गुण, जनम-जनम को सुखावे.

सद्गुरु, सद्गुण से मिल जावे.

4

राम नाम सत्नाम कहावे, नेह लगावे सुभागा.

राधे के संग श्यामा आवे, सोने में है सुहागा.

निश-दिन, राम-कृष्ण मन गावे.

सद्गुरु, सद्गुण से मिल जावे.

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(259)

Krishnayan, Attributes-3, Hindi 2591

प्रकृति-3

तीन गुणों की माया सारी, नाम उसीका प्रकृति है- - -.

तीन गुणों की माया सारी, नाम उसीका प्रकृति है- - -.

1

चाँद सा मुखड़ा, मृग सी आँखें, इन्द्रियाँ दस, सुंदर हैं.

पाँच भूतों का खेल ये सारा, नाम उसीका विकृति है- - -.

तीन गुणों की माया सारी, नाम उसीका प्रकृति है- - -.

2

कृष्ण है काला, गोरी राधा, प्रेम की मूर्ति, मंगल है.

दो द्वंद्वो का मेल है न्यारा, मुरली मनोहर आकृति है.

तीन गुणों की माया सारी, नाम उसीका प्रकृति है- - -.

3

आदि ब्रह्म है, मध्य विष्णु है, अंत करैया, शंकर है.

सृष्टिचक्र का शाश्वत फेरा, ब्रह्म-विष्णु-शिव प्रभृति है.

तीन गुणों की माया सारी, नाम उसीका प्रकृति है- - -.

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(260)

Krishnayan, The Unreal Form, Hindi 2601

निर्गुण ब्रह्म

रे हरि तेरा निर्गुण ब्रह्म बसेरा.

रे हरि तेरा निर्गुण ब्रह्म बसेरा.

1

तीन रंग के पँच अंग में, चलाचली के द्वंद्व-भाव से.

भरमाया जग सारा, रे हरि सखे! झेल बखेड़ा मेरा.

रे हरि तेरा निर्गुण ब्रह्म बसेरा.

2

सुख दुःखन के राग-द्वेष में, जरा यवन के नित्य दोष से.

भगत तेरा नहीं हारा, रे हरि, तूही आज अकेला मेरा.

रे हरि तेरा निर्गुण ब्रह्म बसेरा.

3

पाप-पुण्य के महा युद्ध में, हिरस हवस के घोर भँवर से.

तूने जगत उबारा, रे हरि, तूही एक सहारा मेरा.

रे हरि तेरा निर्गुण ब्रह्म बसेरा.

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(261)

Krishnayan, Attaining The Lord, Hindi 2611

भगवत् प्राप्ति

तू स्वामी त्रिभुवन का - - - - -.

तू स्वामी त्रिभुवन का - - - - -.

1

मिलेगा तू वेदार्जन से, दानार्पण से, पूजार्चन से.

तू प्यासा चिंतन का - - - -.

तू स्वामी त्रिभुवन का - - - - -.

तू स्वामी त्रिभुवन का - - - - -.

2

करे पार तू भवसागर से, सब संकट से, हर मुश्किल से.

अरदासा जीवन का - - - -.

तू स्वामी त्रिभुवन का - - - - -.

तू स्वामी त्रिभुवन का - - - - -.

3

हमें ध्येय तू तनसा-मनसा, ईश्वर प्यारा मन मंदिर कां

तू प्यासा सुमिरन का - - - -.

तू स्वामी त्रिभुवन का - - - - -.

तू स्वामी त्रिभुवन का - - - - -.

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(262)

Krishnayan, One Destination, Hindi 2621

एक ध्येय

आसमान से पानी बरसे, भिन्न पथों से बहता जावे,

धार नदी की आखिर बन कर, सागर में हि समाए.

आसमान से बरसा पानी, भिन्न पथों से बहता जावे,

धार नदी की आखिर बन कर, सागर में हि समाए.

ध्येय एक  सधावे. ध्येय समान सधावे.

1

ज्ञान मार्ग से, कर्म योग से, भक्ति मार्ग से, बुद्धि योग से.

समान श्रेय कमाए, आखिर, एक ही ध्येय सधाए.

आसमान से बरसा पानी, भिन्न पथों से बहता जावे,

धार नदी की आखिर बन कर, सागर में हि समाए.

ध्येय एक  सधावे. ध्येय समान सधावे.

2

नाम राम का, जाप श्याम का, जाना सुमिरन परम काम कां

राह परम मिल जाए, आखिर, हरि चरणन में आए.

आसमान से बरसा पानी, भिन्न पथों से बहता जावे,

धार नदी की आखिर बन कर, सागर में हि समाए.

ध्येय एक  सधावे. ध्येय समान सधावे.

3

नाम कमाया, मान मिलाया, दान धरम कर पाप घटाया.

राजा रंक भिकारी, आखिर, गोद भूमि की पाए.

आसमान से बरसा पानी, भिन्न पथों से बहता जावे,

धार नदी की आखिर बन कर, सागर में हि समाए.

ध्येय एक  सधावे. ध्येय समान सधावे.

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(263)

Krishnayan, Gita Message, Hindi 2631

गीता सार

क्या लाया तू साथ अपने, क्या ले जाना साथ है.

नाम हरि का जप ले बंदे, चार दिनों की बात है.

1

नाम रस का पी ले प्याला, मन को तेरे भाएगा.

रस में उसके डूब जा फिर, क्या है दिन क्या रात है.

क्या लाया तू साथ अपने, क्या ले जाना साथ है.

नाम हरि का जप ले बंदे, चार दिनों की बात है.

2

आसमाँ से इस धरा तक, सब हरि का राज है.

शरण उसकी चरण में, वो दयालु मात है.

क्या लाया तू साथ अपने, क्या ले जाना साथ है.

नाम हरि का जप ले बंदे, चार दिनों की बात है.

3

त्याग सारा ये झमेला, छोड़ जाना विवश है.

हाथ उसका थाम ले रे, तू अकेला, तात! है.

क्या लाया तू साथ अपने, क्या ले जाना साथ है.

नाम हरि का जप ले बंदे, चार दिनों की बात है.

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(264)

Krishnayan, Nandlal Gopal, Hindi 2641

नंदलाल गोपाल

आज, नंदलाल भयो गोपाल.

सखी, ग्वाल भयो मेरो लाल.

1

पाँच वर्ष का किशोर कान्हा, हर्ष मोद ये व्रज सब जाना.

सखी! हाल मेरो बेहा - - - .

आज, नंदलाल भयो गोपाल. सखी, ग्वाल भयो मेरो लाल.

2

आज पठायो गौवन पीछे, कियो विदा मैं आँखे मीचे.

हरि, आज भयो गोपा - - - .

आज, नंदलाल भयो गोपाल. सखी, ग्वाल भयो मेरो लाल.

3

खेलत वत्सन संग वन माहीं, लागत मोरा घर मन नाही.

गोपाल भयो, नंद ला - - - .

आज, नंदलाल भयो गोपाल. सखी, ग्वाल भयो मेरो लाल.

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(265)

Krishnayan, Govindashtak, Hindi 2651

गोविंद अष्टक, हिंदी

गौ-धन की रक्षा करे, “गोविंद उसे है नाम.

व्रज जन प्यारे हैं उसे, सबका प्यारा श्याम.

गौ-धन की रक्षा करे, “गोविंद उसे है नाम.

गौ-धन की रक्षा करे, उसे नाम गोविंद.

1.

सब नयनन गोविंद है, सपनन में गोविंद.

दरशन में गोविंद है, सिमरण में गोविंद.

गौ-धन की रक्षा करे, उसे नाम गोविंद.

2.

आँसू में गोविंद ही, विवेक में गोविंद.

मुख में शुभ गोविंद है, हिरदय में गोविंद.

गौ-धन की रक्षा करे, उसे नाम गोविंद.

3.

पूजन में गोविंद है, वन्दन में गोविंद.

गायन में गोविंद है, भजनन में गोविंद.

गौ-धन की रक्षा करे, उसे नाम गोविंद.

4.

कीर्तन में गोविंद है, अर्चन में गोविंद.

अर्जन में गोविंद है, चर्चा में गोविंद.

गौ-धन की रक्षा करे, उसे नाम गोविंद.

5.

घर-घर में गोविंद है, आँगन में गोविंद.

गली-गली गोविंद है, कानन में गोविंद.

गौ-धन की रक्षा करे, उसे नाम गोविंद.

6.

जन गण में गोविंद है, खग पशु में गोविंद.

हर ध्वनि में गोविंद है, धड़कन में गोविंद.

गौ-धन की रक्षा करे, उसे नाम गोविंद.

7

.भव प्रकृति गोविंद है, पँच भूत गोविंद.

त्रिभुवन में गोविंद है, कण-कण में गोविंद.

गौ-धन की रक्षा करे, उसे नाम गोविंद.

8

सब हृद् में गोविंद है, हृद् सबका गोविंद.

शरण सभी गोविंद को, सब सबका गोविंद.

गौ-धन की रक्षा करे, उसे नाम गोविंद.

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(266)

Krishnayan, Sanskrit, Govindashtakam-2661

गोविंद अष्टकम्, संस्कृत

गोविन्द इति यो ज्ञातः कृष्णो विन्दति गोधनम्.

व्रजजनाश्च गावश्च कृष्णं स्निह्यन्ति सर्वथा.

1

गोविन्दो दर्शने तेषां स्वप्नेषु हरिस्तथा.

लोचनेषु हरिस्तेषां गोविन्दश्च स्मृतौ सदा.

2.

श्रीकृष्णोश्रूणि नेत्रेषु बुद्धौ श्यामः सदा हि सः.

गोविन्दो हृदि सर्वेषां कृष्णो वचसि कर्मणि.

3

.गोविन्दो वन्दने तेषां केशवः पूजने सः

आलापेषु सर्वेषां मुखेषु सर्वदा हरिः

4

भजनेषु श्रीकृष्णः कृष्णो देवश्च कीर्तने.

अर्चनमपि कृष्णाय गायने हरेः स्तुतिः

5.

गृहे गृहे हरेर्मूर्तिः-हरेः कीर्तिः पदे पदे.

प्राङÐणे मोहनस्तेषां गोविन्दश्च वने वने.

6.

जनगणेषु गोविन्दः केशवः पशुपक्षिषु.

शब्दे शब्दे गोविन्दो ध्वनौ ध्वनौ केशवः

7

.पंचभूतेषु गोविन्दो माधवस्त्रिगुणेषु .

त्रिभुवने गोविन्दः कृष्ण एव कणे कणे.

8.

सर्वेपि हृदि कृष्णस्य भक्त्या संपूरिता जनाः

क्षणे क्षणे दिवानक्तं सर्वे शरणागताः

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(267)

Krishnayan, Hari Ghanashyam, 2671

मोहन माधव

मोहन हरि घनश्याम

प्रभु के सुंदर नाम हैं उतने, जितने जग में मंगल काम.

मोहन हरि घनश्याम.

1

कृष्ण कन्हैया बाल गोपाला, मुकुंद माधव नंद का लाला.

पावन शुभ सुख धाम. मोहन हरि घनश्याम

मोहन हरि घनश्याम.

2

गोकुल वाला श्यामल काला, गल बनमाला हरि ब्रज बाला.

अमृत मय सत् नाम. मोहन हरि घनश्याम

मोहन हरि घनश्याम.

3

सब दुख हारी सब सुख कारी, मोर मुकुट धर कुंज बिहारी.

सच्चिदानंद अभिराम. मोहन हरि घनश्याम

मोहन हरि घनश्याम.

4

गोविंद केशव बंसी बजैया, मुरली मनोहर भव खेवैया.

अगणित शत शत नाम. मोहन हरि घनश्याम

मोहन हरि घनश्याम.

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(268)

Krishnayan, Hari Nam Jap, Hindi 2681

हरि नाम जाप

जब जावेगा छोड़ बखेड़ा, साथ होगा हाथी घोड़ा.

जब जावेगा छोड़ बखेड़ा, साथ होगा हाथी घोड़ा.

1

चल तू लुटाता प्रेम खजाना, रटता चल तू माधव नामा.

जग को कहने दे दीवाना, राम नाम तू जप ले थोड़ा.

जब जावेगा छोड़ बखेड़ा, साथ होगा हाथी घोड़ा.

2

जन सेवा का उठाय बीड़ा, मिट जावेगी तेरी पीड़ा.

हरि किरपालु नाथ हमारा, आएगा वो, भागा दौड़ा.

जब जावेगा छोड़ बखेड़ा, साथ होगा हाथी घोड़ा.

3

फेर ले तू, अपना मुखड़ा, मत कर तू मुख, उखड़ा उखड़ा.

हरि हर लेंगे तेरा दुखड़ा, मिट जाएगा, सारा झगड़ा.

जब जावेगा छोड़ बखेड़ा, साथ होगा हाथी घोड़ा.

4

भज ले तू श्री राम रमैया, जप ले निश-दिन कृष्ण कन्हैया.

भव से पार करेंगे नैया, विश्वस रहे, मन में जोड़ा.

जब जावेगा छोड़ बखेड़ा, साथ होगा हाथी घोड़ा.

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(269)

Krishnayan, Hari Nam, Hindi 2691

हरि नाम

कहो हरि का नाम, जीवन बीते रे,

जपो हरि का नाम, जीवन बीते रे.

1

कृष्ण चक्रधर जहाँ कहीं हैं,

वहाँ दुखों का नाम नहीं है,

छोड़ हरि पर भार, रक्षक हैं तेरे.

जपो हरि का नाम, जीवन बीते रे.

2

जिस कण में रोशनी भरी है,

उस कण की चेतना हरि हैं,

जोड़ हरि से प्यार, ईश्वर हैं तेरे.

जपो हरि का नाम, जीवन बीते रे.

3

भव सागर के बीच खड़ा है,

घिर घिर संकट आन पड़ा है,

सौंप हरि को नाव, केवट हैं तेरे.

जपो हरि का नाम, जीवन बीते रे.

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(270)

Krishnayan, I am Him, Hindi 2701

सोहं सोहम्

सोहं सोहं शंभु शिवोहम्, सचिदानन्द घन ब्रह्म अहम्.

सोहं सोहं शंभु शिवोहम्, सचिदानन्द घन ब्रह्म अहम्.

1

एक मुझे बस हरि मिल जाये, तन मन धन कछु, मम इदम्.

सोहं सोहं शंभु शिवोहम्, सचिदानन्द घन ब्रह्म अहम्.

2

प्रकृति-पुरुष हैं जगत पसारा, हरि इक मेरा, मम इदम्.

सोहं सोहं शंभु शिवोहम्, सचिदानन्द घन ब्रह्म अहम्.

3

पँच भूत अरु तीन गुणों का, खेल है सारा, मम इदम्.

सोहं सोहं शंभु शिवोहम्, सचिदानन्द घन ब्रह्म अहम्.

4

माता-पिता सुत भाई दारा, छोड़ के जाना, मम इदम्.

सोहं सोहं शंभु शिवोहम्, सचिदानन्द घन ब्रह्म अहम्.

5

निस दिन भजलेहरि मन मेरे, “इदं मम!” भज, मम इदम्.

सोहं सोहं शंभु शिवोहम्, सचिदानन्द घन ब्रह्म अहम्.

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(271)

Krishnayan, Incarnation, Hindi 2711

अवतार

अधर्म का संहार करने, प्रभु लेते अवतार हैं.

अधर्म का संहार करने, प्रभु लेते अवतार हैं.

1

एक तरफ ये पांडव सेना, हाथ नियम से बंधे हैं.

ओर दूसरी कौरव बंदे, नीति नियम के अंधे हैं.

सत् असत् के घोर समर में, असत् की निश्चित हार है.

अधर्म का संहार करने, प्रभु लेते अवतार हैं.

2

दया क्षमा का कार्य इधर है, साथ किशन भगवान हैं.

भोग हवस अधिकार उधर है, धरम नाम बदनाम है.

छल कलि-मल के दोष दंश से, व्याकुल जब संसार है.

अधर्म का संहार करने, प्रभु लेते अवतार हैं.

3

सागर किरपा का इस बाजू, सूरज ज्ञान प्रकाश है.

मृत्यु भरा सागर उस बाजू, सदाचार का नाश है.

दुराचार जब छाता जग में, तमस् मय अंधःकार है.

अधर्म का संहार करने, प्रभु लेते अवतार हैं.

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(272)

Krishnayan, Jamuna Kinare, Hindi 2721

भैरवी राग

मार कंकरिया फोरी गगरिया,

भीग गई रे कान्हा, मोरी चुनरिया.

1

जमुना से मैं सखी, अपनी डगरिया,

मार कंकरिया फोरी गगरिया,

नीर नयन की , लीन्ही खबरिया.

भीग गई रे कान्हा, मोरी चुनरिया.

2

जमुना का नीर , मोरी गगरिया,

कैसी अब जाऊँ सखी, अपनी अटरिया.

मार कंकरिया फोरी गगरिया,

भीग गई रे कान्हा, मोरी चुनरिया.

मार कंकरिया फोरी गगरिया,

भीग गई रे कान्हा, मोरी चुनरिया.

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(273)

Krishnayan, Kaliya Mardan-1, Hindi 2731

कालिया मर्दन-1

मत जा, मत जा, जमुना के तीर,

कान्हा! कारो, जमुना को नीर.

1

विष बाधा से बछड़े गैया, प्राण खो रहे, का करें दैया.

देखो रोये जमुना मैया, उत मत जा तू किशन कन्हैया.

सब हिरदय में उठती है पीर.

मत जा, मत जा, जमुना के तीर,

कान्हा! कारो, जमुना को नीर.

2

सुंदर अपना ब्रिंदाबन है, प्राण पियारे व्रज के जन हैं.

साफ सनेहल सबके मन हैं, कालिया दीन्हा दुख घन है.

रोये सबके मन का कीर.

मत जा, मत जा, जमुना के तीर,

कान्हा! कारो, जमुना को नीर.

3

व्रज को अब भगवान् बचाये, नर पशु पक्षी सब तरसाये.

व्रज पर हैं अब संकट छाये, मोरा जी निश-दिन घबराये.

मोरे मन, उलझन की भीर.

मत जा, मत जा, जमुना के तीर,

कान्हा! कारो, जमुना को नीर.

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(276)

Krishnayan, Knowledge of Self-2, Hindi 2761

ज्ञान की प्यास

ब्रह्म ज्ञान की है जहाँ, अंतरंग में चाव.

वही ज्ञान की प्यास है, अज्ञान से बचाव.

1

जिसे अहिंसा परम धर्म है, सुशीलता का लगाव है.

गुरु सेवा है, पवित्रता है, तन मन पर भी दबाव है.

वही ज्ञान की प्यास है, अज्ञान से बचाव.

2

विषय वासना जिसे परे हैं, दंभ दर्प का घाव है.

जन्म-मृत्यु में, जरा रोग में, दुःख दोष का सुझाव है.

वही ज्ञान की प्यास है, अज्ञान से बचाव.

3

पुत्र पत्नी में, धन-दौलत में, ममत्वता का भाव है.

पाया प्रिय हो या अप्रिय हो, समत्वता का ही ठाँव है.

वही ज्ञान की प्यास है, अज्ञान से बचाव.

4

अनम्रता का नशा जिसमें, अनन्य हरि में सुभाव है.

भीड़ भाड़ में अनासक्ति है, असंगति में खिंचाव है.

वही ज्ञान की प्यास है, अज्ञान से बचाव.

5

तत्त्वज्ञान से अर्थ देख कर, आत्मज्ञान का प्रभाव है.

ज्ञान यही है, जिसके होते, अज्ञान का फिर अभाव है.

वही ज्ञान की प्यास है, अज्ञान से बचाव.

वही ज्ञान की प्यास है, अज्ञान से बचाव.

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(277)

Krishnayan, Knowledge of Self-1, Sanskrit-2771

अध्यात्म ज्ञान अष्टकम् संस्कृत

आत्मा परमात्मा को जन्म किं मरणं किम्.

प्राग्जन्म का गतिः कृष्ण गतिः का मरणोत्तरा.

1

आत्मा देहे तथा ज्ञेयो यथा बिम्बं हि दर्पणे.

चुम्बके चुम्बकत्वं यन्त्रे विद्युत्प्रवाहवत्.

आत्मा परमात्मा को जन्म किं मरणं किम्.

2

गुरुत्वाकर्षणं भूमौ द्रवत्वं जले यथा.

सात्त्विकेषु सदाचार उपाधिर्व्यवसायिनाम्.

आत्मा परमात्मा को जन्म किं मरणं किम्.

3

ब्रह्मैव परमात्मा ईश्वरः परमेश्वरः.

ईशः प्रभुर्जगद्धर्ता येन सृष्टमिदं जगत्.

आत्मा परमात्मा को जन्म किं मरणं किम्.

4

देही ब्रह्मैव देहस्थः चिदात्मा पुरुषस्तथा.

आत्मा एव क्षेत्रज्ञो जीवः प्राणश्च चेतना.

आत्मा परमात्मा को जन्म किं मरणं किम्.

5

देहेन देहिनो योगो भूतस्य जन्म कथ्यते.

वियोगो देहिनस्तस्मात्-उच्यते मरणं तथा.

आत्मा परमात्मा को जन्म किं मरणं किम्.

6

मृत्योरेकस्य भूतस्य जायते जन्म नूतनम्.

देहाद्देहं सदा देही नूनं भ्रम्यति क्रवत्.

आत्मा परमात्मा को जन्म किं मरणं किम्.

7

मृत्युर्नास्ति विना जन्म विना मृत्युं जन्म .

जन्ममृत्यू पृथक् ना हि द्वंद्वमेकं मतं बुधैः.

आत्मा परमात्मा को जन्म किं मरणं किम्.

8

जन्ममरणयोर्द्वद्वं पृष्ठद्वयस्य नाणकम्.

रहस्यमात्मनः स्पष्टं यो जानाति पण्डितः.

आत्मा परमात्मा को जन्म किं मरणं किम्.

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(278)

Krishnayan, Krishna Kahani, Hindi 2781

किशन चरित

किशन चरित की रम्य कहानी, आँखों देखी सत्य बखानी,

नारद मुनि की वाणी.

मंगल पावन मन हर्षाणी, आओ सुनिये गाएँ ज्ञानी.

किशन चरित की रम्य कहानी, आँखों देखी सत्य बखानी,

नारद मुनि की वाणी.

1

आधी अँधियारी रात में आयो, बहती सरिता पार करायो,

जमुना जी का पानी.

किशन चरित की रम्य कहानी, आँखों देखी सत्य बखानी,

नारद मुनि की वाणी.

2

घर-घर गोकुल माखन चोरी, गोपन के संग खोलत होरी,

गोपी कृष्ण दीवानी.

किशन चरित की रम्य कहानी, आँखों देखी सत्य बखानी,

नारद मुनि की वाणी.

3

मोर मुकुट तिल काजल काला, पग में पायल गल वन माला,

मुरली धुन मस्तानी.

किशन चरित की रम्य कहानी, आँखों देखी सत्य बखानी,

नारद मुनि की वाणी.

4

विजय भद्र की जब अभद्र पर, होती सत्य सुहानी,

तब टलती अनहोनी.

किशन चरित की रम्य कहानी, आँखों देखी सत्य बखानी,

नारद मुनि की वाणी.

4

कंस को नारद मुनि बतलायो, बार-बार उस को समझायो,

एक उसने मानी.

किशन चरित की रम्य कहानी, आँखों देखी सत्य बखानी,

नारद मुनि की वाणी.

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(280)

Krishnayan, Krishna’s Birth-1, Hindi 2801

कृष्ण जन्म

कान्हा, तेरी अचंभे की लीला रे, तुने जादू अनूठा है कीन्हा रे,

तुने जादू अनूठा है कीन्हा रे.

1

अँधियारी तू रात में आया, कोई भी ये जान पाया,

अगम परम तेरी माया रे, तुने जादू अनोखा है कीन्हा रे.

2

सोये कंस के पहरे वाले, खुल गए बंदीगृह के ताले,

छाये मेघ हैं काले रे, तुने जादू गजब सा है कीन्हा रे.

3

जमुना ने है मार्ग दीन्हा, शेष नाग ने छाता है कीन्हा,

मथुरा से गोकुल आया रे, तुने जादू अजब सा है कीन्हा रे.

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(284)

Krishnayan, Krishna’s Birthday-3, Hindi 2841

जुग-जुग जियो हरि

तुम जुग-जुग जीयो मेरे लाल, यशोदा नंद के नंद गोपाल.

धरती से गगन पाताल, करे तेरे सुमिरन साँझ सकाल.

तुम जुग-जुग जीयो मेरे लाल, यशोदा नंद के नंद गोपाल.

1

नंद दुलारा, नैनों का तारा, मन मंदिर उजियारा.

जीवन तेरा, लीला से घेरा, रंग भरा है घनेरा.

सर्व जगत के तुम दिगपाल, पियारे नंद के नंद गोपाल.

तुम जुग-जुग जीयो मेरे लाल, यशोदा नंद के नंद गोपाल.

2

दुनिया से न्यारा, प्रेम की धारा, प्रेमी जनन का प्यारा.

कारज तेरा माया से घेरा, जादू का जस फेरा.

सत्य जनन के तुम सत्पाल, नियारे विश्व के विश्वक पाल.

तुम जुग-जुग जीयो मेरे लाल, यशोदा नंद के नंद गोपाल.

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(285)

Krishnayan, Krishna’s Flute, Hindi 2851

मुरली धुन मनहारी

ना बजाओ, ना बजाओ, बांसुरी कान्हा.

मुरली धुन मनहारी, ना बजाओ.

1

चंदा सूरज थम जाते हैं, धरती थमती मोई.

बादल से निकली जल धारें, रुकती सुधबुध खोई.

ना बजाओ, ना बजाओ, ना बजाओ.

2

जीव जगत के प्राणी मोहे, राजा रंक भिखारी.

गोकुल वासी गोप गोपिका, मोहत शिशु नर नारी.

ना बजाओ, ना बजाओ, ना बजाओ.

3

कुंभकरन की निंदिया तोड़ी, मोड़ी शिव की समाधी.

मुनि जनन के मौन बिगाड़े, मीरा हुई दीवानी.

ना बजाओ, ना बजाओ, ना बजाओ.

4

देव-देवता ब्रह्म सनका, इन्द्रजगत के वासी.

आपा खो कर मगन धुनी में, सृष्टि क्र क्र नासी.

ना बजाओ, ना बजाओ, ना बजाओ.

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(286)

Krishnayan, Sanskrit, Krishna’s Forms-2861

कृष्ण-रूपाणि, संस्कृत

1

कृष्णः माता पिता बन्धुर्गुरुर्ज्ञातः सखा तथा.

कृष्णं योगेश्वरं पुण्यं पूज्यं वन्दे जगद्गुरुम्.

कृष्णः माता पिता बन्धुर्गुरुर्ज्ञातः सखा तथा.

कृष्णं योगेश्वरं पुण्यं पूज्यं वन्दे जगद्गुरुम्.

2

कृष्णेन ना समो दाता भूतो भविष्यति.

कृष्णाय वासुदेवाय राधावराय वन्दना.

कृष्णेन ना समो दाता भूतो भविष्यति.

कृष्णाय वासुदेवाय राधावराय वन्दना.

3

कृष्णात्-हि जायते सर्वं कृष्णात्सर्वं समाप्यते.

कृष्णस्य करुणां प्राप्य श्रद्धालुर्न निमज्जति.

कृष्णात्-हि जायते सर्वं कृष्णात्सर्वं समाप्यते.

कृष्णस्य करुणां प्राप्य श्रद्धालुर्न निमज्जति.

4

कृष्णे मनश्च चित्तञ्च बुद्धिर्निवेशिता हि स्यात्.

कृष्ण! कृष्ण! नु कृष्णेति तस्माद्भज मनः सदा.

कृष्णे मनश्च चित्तञ्च बुद्धिर्निवेशिता हि स्यात्.

कृष्ण! कृष्ण! नु कृष्णेति तस्माद्भज मनः सदा.

5

जपतात्कृष्ण कृष्णेति वचसा मनसा तथा.

एकाग्रेण हरिं ध्यात्वा तरसि भवसागरम्.

जपतात्कृष्ण कृष्णेति वचसा मनसा तथा.

एकाग्रेण हरिं ध्यात्वा तरसि भवसागरम्.

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(287)

Krishnayan, Krishna’s Maya, Hindi 2871

प्रभु! तेरी लीला

रे प्रभु! तूने, लीला है जग में भरी.

रे प्रभु! तूने, लीला है जग में भरी.

1

सत्य अहिंसा मन वाणी में, दया क्षमा शाँति प्राणी में.

जगत पर, तेरी है किरपा बड़ी.

रे प्रभु! तूने, लीला है जग में भरी.

2

कीर्ति मेधा ह्री नारी में, आग चमक चिनगारी में.

जगत का, कण-कण तू है, हरि!

रे प्रभु! तूने, लीला है जग में भरी.

3

सदाचार का मार्ग दिखायो, निर्ममता निर्मोह सिखायो.

तेरे ही, पग में मुक्ति खरी.

रे प्रभु! तूने, लीला है जग में भरी.

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(289)

krishnayan, Shri Krishnaramayan, Hindi 2891

दादरा ताल

संगीत श्रीकृष्णरामयण महाकाव्य, हिंदी

1

कविता होगी ऐसी हुई है,

राग छंदों भरी ये नदी है

तुलसी ने कथा जो कही है,

व्यास वाल्मीक वाणी यहीं है

कविता होगी ऐसी हुई है,

राग छंदों भरी ये नदी है

2

इसमें वो है जो करने सही है,

अवगुणों की प्रशंसा नहीं हैं

वेद शास्त्रों का आशय यही है,

ऋषि-मुनियों ने गाया वही है

कविता होगी ऐसी हुई है,

राग छंदों भरी ये नदी है

3

ज्ञान गंगा ये मंगल बही है,

धन्य जिससे हुई ये मही है

बातॆ युग युग से जो रहीं हैं,

मैंने संगीत में वो गही है

छंद रागों में मैंने कहीं हैं.

कविता होगी ऐसी हुई है,

राग छंदों भरी ये नदी है

कविता होगी नऍ ऐसी हुई है.

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(290)

Krishnayan, Love all, Hindi 2901

प्रेम से काम लो

प्रेम से लोगे काम अगर तुम, नाम अमर जग में होगा.

छल कपटों से बात चले ना, फल देगा तुमको सोगा.

1

ऋषि-मुनि गुरु कह रहे हैं ज्ञानी, सब वेदों की यही है बानी.

प्रेम से होगे नम्र अगर तुम, स्थान परम जग में होगा.

नाम अमर जग में होगा.

2

जो करना है सो भरना है, इस भव सागर से तरना है.

प्रेम का दोगे दान अगर तुम, साध्य सकल सुख में होगा.

नाम अमर जग में होगा.

3

पाप-पुण्य से धो लो, प्यारे! मधुर वचन को मन में धारे.

प्रेम से लोगे नाम अगर तुम, काम सकल पल में होगा.

नाम अमर जग में होगा.

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(291)

Krishnayan, Makhan Chor-6, Hindi 2911

भीमपलासी राग

माखन चोर-6

मैं नहीं मैया माखन खायो, गोप हमारे मुख लिपटायो.

मैं नहीं मैया माखन खायो. मैं नहीं मैया माखन खायो.

1

दहि माखन की हमें थोड़ी, मैं क्यों करता माखन चोरी,

तोरे मन में ये, क्योंकर आयो. मैं नहीं मैया माखन खायो.

2

मैया तू है कितनी भोरी, दिन मैं चरावत गौवन तोरी,

मोहे वन मा, तू हि पठायो. मैं नहीं मैया माखन खायो.

3

माखन मटकी भरी की भरी, मैं क्या कीन्ही माखन चोरी.

गोपी काहे कहे मैं, माखन खायो. मैं नहीं मैया माखन खायो.

4

मैं बालक छोटी कद मोरी, माखन छींको ऊँची डोरी.

भेद मेरो जग, जान पायो. मैं नहीं मैया माखन खायो.

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(292)

Krishnayan, Makhan Chor-7, Hindi 2921

माखन चोर-7

मैं नहीं मैया माखन चोर, दोष लगाए काहे को.

मैं नहीं मैया माखन चोर, दोष लगाए काहे को.

1

देखा नहीं है, किसी ने मुझको, फिर भी शिकायत है क्यों तुझको.

ऊँगली उठा मत मेरी ओर, आँखें दिखावे काहे को.

मैं नहीं मैया माखन चोर, दोष लगाए काहे को.

2

गोपी आवे देखन मोहे, मोर मुकुट मेरे सिर सोहे.

गोपी सब हैं चुगली खोर, ताने मारे काहे को.

मैं नहीं मैया माखन चोर, दोष लगाए काहे को.

3

माखन उनका ज्यों का त्यों है, नाम लगावत मोरा क्यों हैं.

बाँध मैया मुझको डोर, कान पकड़ती काहे को.

मैं नहीं मैया माखन चोर, दोष लगाए काहे को.

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(293)

Krishnayan, Makhan Chor-8, Hindi 2931

माखन चोर-8

मुख में बसा बस एक ही नाम, गोपी कहे कान्हा का ये काम.

मुख में बसा बस एक ही नाम, गोपी कहे कान्हा का ये काम.

1

निश-दिन मन में एक मुरतिया, ध्यान भुलावे भोली सुरतिया.

मन में बसा जो हरि घनश्याम, मुख में आए, नाम ललाम.

मुख में बसा बस एक ही नाम,

गोपी कहे कान्हा का ये काम.

2

नजर आवे माखन खावे, कब आवे कब जावे श्याम.

बार-बार वो मन भरमावे, सुध-बुध खोवे गोपी तमाम.

मुख में बसा बस एक ही नाम,

गोपी कहे कान्हा का ये काम.

3

कान्हा कीन्ही माखन चोरी, मैया! मोरी मटकी फोरी.

कान्हा दिखावे फिर है कमाल, ज्यों का त्यों ही सब सामान.

मुख में बसा बस एक ही नाम,

गोपी कहे कान्हा का ये काम.

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(294)

Krishnayan, Makhan Chori, Hindi 2941

माखन चोरी

माखन चोरी किसका है काम, गोपी के मुख में कृष्ण का नाम.

देखे बिना, हरि पर इलजाम, कान्हा को करती बदनाम.

माखन चोरी किसका है काम, गोपी के मुख में कृष्ण का नाम.

देखे बिना, हरि पर इलजाम, कान्हा को करती बदनाम.

1

कान्हा गोपन को संग लायो, आँख बचा कर चुप-चुप आयो.

दूध दही मेरो माखन खायो, सपनन में मेरो घनश्याम.

माखन चोरी किसका है काम, गोपी के मुख में कृष्ण का नाम.

देखे बिना, हरि पर इलजाम, कान्हा को करती बदनाम.

2

ऊँची छींके पर थी लटकी, कान्हा फोड़ी माखन मटकी.

आपन खायो सबन खिलायो, नजर आयो मोहे श्याम.

माखन चोरी किसका है काम, गोपी के मुख में कृष्ण का नाम.

देखे बिना, हरि पर इलजाम, कान्हा को करती बदनाम.

3

गोपी गई मैया को बताने, नटखट की चोरी को जताने.

वापस घर आई तो जाने, सब ज्यों का त्यों ही सामान.

माखन चोरी किसका है काम, गोपी के मुख में कृष्ण का नाम.

देखे बिना, हरि पर इलजाम, कान्हा को करती बदनाम.

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(295)

Krishnayan, Merciful Krishna, 2951

दीन दयाल

प्रभु जी तुम, दीनन पर किरपाल.

प्रभु जी तुम, दीनन पर किरपाल.

1

भवसागर जल गहन घनेरो, बेड़ा पार निकाल.

प्रभु जी तुम, दीनन पर किरपाल.

प्रभु जी तुम, दीनन पर किरपाल.

2

शबरी द्रुपदी ध्रुव परलादा, अर्जुन जब बेहाल.

प्रभु जी तुम, दीनन पर किरपाल.

प्रभु जी तुम, दीनन पर किरपाल.

3

जहँ जहँ संकट तहँ अवतारो, हिरदय परम विशाल.

प्रभु जी तुम, दीनन पर किरपाल.

प्रभु जी तुम, दीनन पर किरपाल.

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(296)

Krishnayan, Nache Mora Kanha, 2961

नाचे मोरा कान्हा

नाचे मोरा कान्हा, घुँघरू बाजे, छुम्मा छुम्मा.

उत नाचे श्यामा, हो इत राधा, घुम्मा घुम्मा.

नाचे मोरा कान्हा, घुँघरू बाजे, छुम्मा छुम्मा.

उत नाचे श्यामा, हो इत राधा, घुम्मा घुम्मा.

1

कालिया के शीश पे कान्हा, लीला देखे सारा जमाना.

बाजे मुरलिया.

हो कान्हा मन भावे, रे देदो प्यारा, चुम्मा चुम्मा.

नाचे मोरा कान्हा, घुँघरू बाजे, छुम्मा छुम्मा.

उत नाचे श्यामा, हो इत राधा, घुम्मा घुम्मा.

2

झन् झन छेड़े नारद वीणा, डम् डम डमरू शंकर कीन्हा.

बोले पायलिया.

हो राधा गीत गावे, रे नाचे व्रज, झुम्मा झुम्मा.

नाचे मोरा कान्हा, घुँघरू बाजे, छुम्मा छुम्मा.

उत नाचे श्यामा, हो इत राधा, घुम्मा घुम्मा.

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(297)

Krishnayan, Nand Kishor-1, Hindi 2971

राग यमन कल्याण

नंदकिशोर सुमिरण

नंद किशोर को याद करले, सुख दुख चिंता उस पर छोड़ दे.

नंद किशोर को याद करले, सुख दुख चिंता उस पर छोड़ दे.

1

प्रभु बिन अब तेरा, कौन है कौन है,

जरा दिल की सुन, हरि बिन दुखियारा.

नंद किशोर को याद करले, सुख दुख चिंता उस पर छोड़ दे.

नंद किशोर को याद करले, सुख दुख चिंता उस पर छोड़ दे.

2

अरज बिना प्रभु, मौन है मौन है,

याद करे तो, जीवन उजियारा.

नंद किशोर को याद करले, सुख दुख चिंता उस पर छोड़ दे.

नंद किशोर को याद करले, सुख दुख चिंता उस पर छोड़ दे.

3

हरि बिन क्या कुछ, और है और है,

अरु कछु हो हो, उस बिन नहीं चारा.

नंद किशोर को याआद करले, सुख दुख चिंता उस पर छोड़ दे.

नंद किशोर को याद करले, सुख दुख चिंता उस पर छोड़ दे.

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(298)

Krishnayan, Devaki Nandlal, 2981

देवकी नंद

माँ मुझे देवकी का ही, नंद ना कहो.

मैं नंद दुलारा माँ, तुम्हारा भी हूँ.

मैं नंद दुलारा माँ, तुम्हारा भी हूँ.

1

देवकी माता मुझको है, जनम दिया.

तुमने प्रेम से मुझको, बड़ा है किया.

मुझे नंद गोपाला, नंद लाला कहो.

अँखियन का तारा मैं, तुम्हारा भी हूँ.

मैं नंद दुलारा माँ, तुम्हारा भी हूँ.

2

माँ तुम्हीं ने है मुझको, सहारा दिया.

जो कुछ भी हूँ माँ मैं, तुम्हारी कृपा.

मुझे मुरली वाला तुम, नंद ग्वाला कहो.

ममता का मारा मैं, तुम्हारा भी हूँ.

मैं नंद दुलारा माँ, तुम्हारा भी हूँ.

3

मथुरा से मैं आया हूँ, तुम्हारे यहाँ.

गोकुल से फिर वृंदावन, तुम्हारा कहा.

मुझे मथुरा जाने दो, ना मत कहो.

प्यारा बेटा मैं माते! तुम्हारा भी हूँ.

मैं नंद दुलारा माँ, तुम्हारा भी हूँ.

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(299)

Krishnayan, Naughty Krishna, 2991

नटखट श्याम

री रधिया नटखट तोरा शाम.

री रधिया नटखट तोरा शाम.

1

राहें रोकत टोकत कान्हा, डारत डोरे मारत ताना.

व्रज सारा मोहे कियो बदनाम.

री रधिया नटखट तोरा शाम.

2

बाँह पकड़ मोरी कीन्ही बरजोरी, कंकर मारी गगरिया फोरी.

हार गई मैं तो का करूँ राम.

री रधिया नटखट तोरा शाम.

3

बाजे बाँसुरी मीठी कटारी, चीरत निरदई छतिया हमारी.

पनघट पर सखी सु- ललाम.

री रधिया नटखट तोरा शाम.

4

पीत पितांबर कमरिया कारी, मंगल रूप की लीला सारी.

चार चाँद लगे नंद के धाम.

री रधिया नटखट तोरा शाम.

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(300)

Krishnayan, O Lord! Please Help, 3001

आर्त जन विलाप, हिंदी

हे प्रभो! अब तो बता, दुख हरन कब आएगा.

1

सामने विपदा खड़ी है, देह पर छाले पड़े.

तेरी माया के बिना, मन चयन नहीं पाएगा.

हे प्रभो! अब तो बता, दुख हरन कब आएगा.

2

आस तुझ पर ही लगी है, हाथ हतबल हैं पड़े.

तेरे दरशन के बिना, अब सबर नहीं आएगा.

हे प्रभो! अब तो बता, दुख हरन कब आएगा.

3

भाग्य सब रूठे पड़े हैं, ख्वाब सब टूटे पड़े.

तेरी छाया के बिना, कोई क्या कर पाएगा.

हे प्रभो! अब तो बता, दुख हरन कब आएगा.

4

प्राण की बाज़ी लगी है, जान के लाले पड़े.

तेरी किरपा के बिना, सुख से मरण आएगा.

हे प्रभो! अब तो बता, दुख हरन कब आएगा.

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(301)

Krishnayan, O Merciful Hari, 3011

रे हरि! पाहि माम्

रे हरि तुम, सबसे करुण जग माँही.

रे हरि तुम, सबसे करुण जग माँही.

1

ना कोई अपना, ना ही पराया, सभी जगत पर तेरा साया.

साधु संतन, अरु दुखी दीनन, तेरे चरणन माँही.

रे हरि हम, तेरे भगत, पाहि! पाहि!

रे हरि तुम, सबसे करुण जग माँही.

2

नारी नर हम बालक बूढ़े, सामने खड़े हाथ को जोड़े.

आस लगाए, प्यास बुझाने, तेरा दरशन चाही.

रे हरि अब, कोई हमें डर नाही.

रे हरि तुम, सबसे करुण जग माँही.

3

नैया भव-जल पार करायो, दासन की तू इक छन माँही.

लीला तेरी, सबसे न्यारी, तूने जग को दिखायी.

रे हरि हम, तेरी डगर के राही.

रे हरि तुम, सबसे करुण जग माँही.

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(302)

Krishnayan, O Radha, 3021

रि रधिया

री रधिया, बै के मेरे कोल, बोल तू, मीठे मीठे बोल.

री रधिया, बै के मेरे कोल, बोल तू, मीठे मीठे बोल.

1

बंद बंद क्यों, मुख मंडल है, ओढ़ा क्यों तूने आंचल है.

मुख से परदा खोल, राधिके, बोल तू मीठे बोल.

री रधिया, बै के मेरे कोल, बोल तू, मीठे मीठे बोल.

2

मंद मंद शीतल पुरबाई, अरज करत हैं कृष्ण कनाई.

नीर अँखियन डोल, राधिके, बोल तू मीठे मीठे बोल.

री रधिया, बै के मेरे कोल, बोल तू, मीठे मीठे बोल.

3

नंद नंद वृंदावन जन हैं, कुंज गलिन में नंदनवन है.

बाजे मन का ढोल, राधिके, बोल तू मीठे मीठे बोल.

री रधिया, बै के मेरे कोल, बोल तू, मीठे मीठे बोल.

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(303)

Krishnayan, Open Youe Eyes, 3031

आँखे खोल

बंद आँखे खोल, रे बंदे! मत हो डाँवाडोल.

बंद आँखे खोल, रे बंदे! मत हो डाँवाडोल.

1

कार्य कर्म का मेरु खड़ा है, बीच राह में ध्येय अड़ा है.

कर्दम में मत रोल, रे बंदे! सुनले प्यारे बोल.

बंद आँखे खोल, रे बंदे! मत हो डाँवाडोल.

2

पंडित बन कर ज्ञान दे रहा, गलत बात पर ध्यान दे रहा.

तेरी नाव है डाँवाडोल, रे बंदे! सुनियो न्यारे बोल.

बंद आँखे खोल, रे बंदे! मत हो डाँवाडोल.

3

सूरज नूतन देख चढ़ा है, आतप चारों ओर बढ़ा है.

ये है घड़ी अनमोल, रे बंदे! सुनियो म्हारे बोल.

बंद आँखे खोल, रे बंदे! मत हो डाँवाडोल.

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(305)

Krishnayan, Prabhu Prem, 3053

प्रभु प्रेम

प्रभु से प्रेम पाने का, तरीका ये सुहाना है,

हरि से प्रीत का सलीका, विनय से सिर झुकाना है.

प्रभु से प्रेम पाने का, तरीका ये सुहाना है,

हरि से प्रीत का सलीका, विनय से सिर झुकाना है.

1

दुखे ना जिससे नर कोई, सुखी हो जिससे हर कोई,

सभी को यार करना ही, हरि से प्यार करना है.

प्रभु से प्रेम पाने का, तरीका ये सुहाना है,

हरि से प्रीत का सलीका, विनय से सिर झुकाना है.

2

अगर चंगा कहे कोई, बहुत निंदा करे कोई,

सदा उपकार करना ही, हरि से प्यार करना है.

प्रभु से प्रेम पाने का, तरीका ये सुहाना है,

हरि से प्रीत का सलीका, विनय से सिर झुकाना है.

3

जिसमें बैर है कोई, जिसको गैर है कोई,

सदा सुविचार करना ही, हरि से प्यार करना है.

प्रभु से प्रेम पाने का, तरीका ये सुहाना है,

हरि से प्रीत का सलीका, विनय से सिर झुकाना है.

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(306)

Krishnayan, Avatar-2, Hindi 3061

अवतार-2

जब-जब ग्लानि हुई धरम की, युग-युग हानि हुई करम की.

प्रभु जी लेते तब अवतारा, फिर सुख मय करने संसारा.

प्रभु जी लेते तब अवतारा, फिर सुख मय करने संसारा.

1

अंत दुष्ट जनों का कीन्हा, संत जनन को रक्षण दीन्हा.

स्थापन कीन्हा सत् आचारा, जब त्राहि! त्राहि! था जग सारा.

लीन्हा प्रभु ने तब अवतारा, फिर सुख मय करने संसारा.

2

ध्रुव बालक अनुनय कीन्हे, बाल प्रलाद सतायो असुर ने.

द्रौपदी ने जब हरि पुकारा, दुखी भगत जब हाथ पसारा.

लीन्हा प्रभु ने तब अवतारा, फिर सुख मय करने संसारा.

3

देव जनों को अमृत दीन्हे, विष हलाहल शिवजी पीने.

रावण ने कीन्हा अविचारा, संकट से हरि जगत उबारा.

लीन्हा प्रभु ने तब अवतारा, फिर सुख मय करने संसारा.

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(307)

Krishnayan, Purusha Prakriti-1, Hindi 3071

पुरुष-प्रकृति-1

हरि पुरुष है, हरि प्रकृति, हरि परमेश्वर, हरि की जै - - -.

हरि ब्रह्म है, हरि आत्म है, धर्म सनातन, हरि ही है - - -.

1

राम हरि है, धाम परम है, राधे श्यामा, हरि की जै - - -.

हरि है सावन, हरि मन भावन, कर्म जो पावन, हरि ही है - - -.

हरि पुरुष है, हरि प्रकृति, हरि परमेश्वर, हरि की जै - - -.

हरि ब्रह्म है, हरि आत्म है, धर्म सनातन, हरि ही है - - -.

2

अमृत धारा, हरि पियारा, हरि जियारा, हरि की जै - - -.

हरि सहारा, हरि किनारा, स्वर्ग महत्तम, हरि ही है - - -.

हरि पुरुष है, हरि प्रकृति, हरि परमेश्वर, हरि की जै - - -.

हरि ब्रह्म है, हरि आत्म है, धर्म सनातन, हरि ही है - - -.

3

हरि है नैया, हरि खेवैया, हरि कन्हैया, हरि की जै - - -.

हरि है मैया, हरि रमैया, सत् चित आनंद, हरि ही है - - -.

हरि पुरुष है, हरि प्रकृति, हरि परमेश्वर, हरि की जै - - -.

हरि ब्रह्म है, हरि आत्म है, धर्म सनातन, हरि ही है - - -.

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(308)

Krishnayan, Purusha Prakriti-2, Hindi 3081

पुरुष प्रकृति-2

चला चली का ये जग मेला, पुरुष-प्रकृति का है खेला.

यथा भाग्य हो झेला.

चला चली का ये जग मेला, पुरुष-प्रकृति का है खेला.

1

नौ द्वारों का देह रचाया, प्रकृति की ये है सब माया.

चालक उसका भूत चेतना, पुरुष बना है अकेला.

चला चली का ये जग मेला, पुरुष-प्रकृति का है खेला.

2

पाँच तत्त्व में तीन गुणों से, हाड माँस का खड़ा है पुतला.

रंग रूप ऊपर से सुंदर, जीवन उसमें डाला.

चला चली का ये जग मेला, पुरुष-प्रकृति का है खेला.

3

चार दिनों का समय जहाँ में, बाद बुलावा मिले वहाँ से.

पुरुष नगर को छोड़ेगा जब, आए अंतिम बेला.

चला चली का ये जग मेला, पुरुष-प्रकृति का है खेला.

4

क्या तू लाया साथ वहाँ से, जावेगा क्या साथ यहाँ से.

आया वैसा जावेगा जब, होगा अंत झमेला.

चला चली का ये जग मेला, पुरुष-प्रकृति का है खेला.

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(309)

Krishnayan, Putana’s Demise, 3091

पूतना राक्षसी

यशोदा माँ का स्वरूप लेके, आई मायावी पूतना.

बाल कृष्ण को दूध पिलाके, आप मरी कुछ करे बिना.

यशोदा माँ का स्वरूप लेके, आई मायावी पूतना.

1

मातु यशोदा, गई जब जमुना, झूले में सोया था कान्हा.

यशोदा माँ का स्वरूप लेके, आई मायावी पूतना.

2

विष उसका था उसी को चढ़ा, बाल किशन को छूए बिना.

यशोदा माँ का स्वरूप लेके, आई मायावी पूतना.

3

कोई हँसे या, कोई रोए, तू करता कछु कहे बिना.

यशोदा माँ का स्वरूप लेके, आई मायावी पूतना.

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(310)

Krishnayan, Radha at Panghat, 3101

पनिया भरन

कैसे पनिया भरूँ मैं नन्दलाल, तोरे, पैंया परूँ मैं, गोपाल!

कैसे पनिया भरूँ मैं नन्दलाल, तोरे, पैंया परूँ मैं, गोपाल!

1

पनघट पर धरी मोरी कलाई, हाथ छुराऊँ कान्हा करत लराई.

मैं तो, रो-रो कर बेहाल.

कैसे पनिया भरूँ मैं नन्दलाल, तोरे, पैंया परूँ मैं, गोपाल!

2

राह में मोरी मटकी फोरी, कहे मैं काला तू काहे गोरी.

सखी! चूम लियो मेरो गाल.

कैसे पनिया भरूँ मैं नन्दलाल, तोरे, पैंया परूँ मैं, गोपाल!

3

मैया कहे हरि आँख का तारा, काहे लगावे शिकवे ब्रज सारा.

राधे! लीला दिखावे मेरो लाल.

कैसे पनिया भरूँ मैं नन्दलाल, तोरे, पैंया परूँ मैं, गोपाल!

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(311)

Krishnayan, Radha Diwani-1, Hindi 3111

राग खमाज

राधा दीवानी-1

मुरलीधर की मुरली है राधा, श्याम मनोहर राधारमण की.

मुरलीधर की मुरली है राधा, श्याम मनोहर राधारमण की.

1

वृंदावन की कुंज गलिन में, कान्हा की मूरत राधा के मन में.

मुरलीधर की मुरली है राधा, श्याम मनोहर राधारमण की.

2

नंद याशेदा गोप सुगमा, नाचत राधा संग बलरामा.

मुरलीधर की मुरली है राधा, श्याम मनोहर राधारमण की.

3

व्रज भूमि में धुन मुरली की, अनहद मंगल जादू फेरी.

मुरलीधर की मुरली है राधा, श्याम मनोहर राधारमण की.

4

राधा मुरली की बलिहारी, बंसीधर की बंसी प्यारी.

मुरलीधर की मुरली है राधा, श्याम मनोहर राधारमण की.

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(312)

Krishnayan, Radha Diwani-2, Hindi 3121

राधा दीवानी-2

बजावे बंसी कान्हा, रे ताली दे सुदामा.

देखो जी गोपी राधा, दीवानी होगई.

बजावे बंसी कान्हा, रे ताली दे सुदामा.

देखो जी गोपी राधा, दीवानी होगई.

1

बोले नंद बाबा, री सुनो जसो मैया.

देखो री तोरी राधा, सयानी होगई.

बजावे बंसी कान्हा, रे ताली दे सुदामा.

देखो जी गोपी राधा, दीवानी होगई.

2

बलदाऊ भैया, हो संग में कन्हैया.

हो गोपियों की रैना, सुहानी होगई.

3

देखे कृष्ण लीला, हो व्रज वो रंगीला.

हरि-बलीहारी, भवानी होगई.

बजावे बंसी कान्हा, रे ताली दे सुदामा.

देखो जी गोपी राधा, दीवानी होगई.

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(313)

Krishnayan, Radha Geet Sunaye 3131

राधा गीत सुनाए

राधा गीत सुनाए री, सखी! कान्हा कहाँ है.

गोपी ढूँढत बंसीधर को, साथ गोप भी घर आँगन में.

गोपी ढूँढत बंसीधर को, साथ गोप भी घर आँगन में.

1

नूपुर घुँघरू पाँव में डाले, हाथ में कंगन पाए.

बादल बरखा सावन वाले, गीत सुहाने गाए.

ढूँढत नंद कुमार को, राधा कुंज गलिन में.

गोपी ढूँढत बंसीधर को, साथ गोप भी घर आँगन में.

2

मोर पपीहा नाचे डोले, राधा ताल मिलाए.

कोयल अंबुआ कूहु बोले, राधा हरि को बुलाए.

ढूँढो री नंदलाल को, सखी कान्हा को वन में.

गोपी ढूँढत बंसीधर को, साथ गोप भी घर आँगन में.

3

ग्वाल बाल सारे व्रज वाले, ताली साथ बजाए.

गोपी ग्वालिन सब ब्रिजबाला, राधा को समझाए.

हरि बिन है बेकरार री, हरि राधा के मन में.

गोपी ढूँढत बंसीधर को, साथ गोप भी घर आँगन में.

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(314)

Krishnayan, Radha’s Birthday 3141

राधा जनम-दिन

जनम दिन की राधा को देने बधाई, गोकुल से आए हैं कृष्ण कनाई.

जनम दिन की राधा को देने बधाई, गोकुल से आए हैं कृष्ण कनाई.

1

शंकर-किन्नर, तुंबर आए, आशीष मंगल, गुल बरसाये.

कान्हा ने मुरली कमाल बजाई, जरा हँस के राधा, अदा शरमाई.

जनम दिन की राधा को देने बधाई, गोकुल से आए हैं कृष्ण कनाई.

2

वृंदावन में, खुशी की लड़ी है, मची सबके मन में, पुलक हड़बड़ी है.

कान्हा की सबने, मेहर मनाई, राधा की जै जै से, रौनक जमाई.

जनम दिन की राधा को देने बधाई, गोकुल से आए हैं कृष्ण कनाई.

3

ऋद्धि और सिद्धि, डुलावत चामर, खा पी रहे हैं, धनी और पामर.

लड्डू जलेबी, पुए रस मलाई, कण-कण में देखो है, प्रीत समाई.

जनम दिन की राधा को देने बधाई, गोकुल से आए हैं कृष्ण कनाई.

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(315)

Krishnayan, Radha-Kishan 3151

आसावरी राग

राधा किशन

बाल किशन के बालों में काले, राधा डाले बल घुँघराले.

बाल किशन के बालों में काले, राधा डाले बल घुँघराले.

1

तैल सुगंधित केश सुमंडित, फूल सुरंगित सुंदर वाले.

बाल किशन के बालों में काले, राधा डाले बल घुँघराले.

2

लाल चमेली कोमल कलिका, गुल गुलाब के हार में डाले.

बाल किशन के बालों में काले, राधा डाले बल घुँघराले.

3

मोर मुकुट में मोहन शोभे, राधा के मुख हास उजाले.

बाल किशन के बालों में काले, राधा डाले बल घुँघराले.

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(316)

Krishnayan, Radha-Mohan 3161

राधा मोहन

राधा मोहन के संग नाचे, श्यामा की मुरली मधु बाजे.

गोपी मोद विराजे.

राधा मोहन के संग नाचे, श्यामा की मुरली मधु बाजे.

1

चंद्र देवता, रस बरसाए, ललिता ललना रास रचाए.

कोयल पपीहा बुलबुल गाए, कोयल गीत सुनाए.

राधा मोहन के संग नाचे, श्यामा की मुरली मधु बाजे.

2

इन्द्र देवता, नभ अंबर से, व्रज की रौनक देखन तरसे.

राधा कृष्ण की बाहों में साजे, स्वर्ग की परियाँ शरम से लाजे.

राधा मोहन के संग नाचे, श्यामा की मुरली मधु बाजे.

3

रुद्र देवता, बोले गौरी! राधा कृष्ण की देखो जोड़ी.

सिया राम अवतार अवध के, राधा रमण बन व्रज में बिराजे.

राधा मोहन के संग नाचे, श्यामा की मुरली मधु बाजे.

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(317)

Krishnayan, Righteousness-1, Hindi 3171

सत् धर्म

आदि सनातन, धर्म चिरंतन, सब दुनिया में, सच्चा है.

परधर्मों में, भरी खामियाँ, एक हमारा, अच्छा है.

आदि सनातन, धर्म चिरंतन, सब दुनिया में, सच्चा है.

परधर्मों में, भरी खामियाँ, एक हमारा, अच्छा है.

1

अधूरा सही, जो पाया है, वही सहारा, अच्छा है.

साथ जनम के, जो आया है, वही हमारा, सच्चा है.

आदि सनातन, धर्म चिरंतन, सब दुनिया में, सच्चा है.

परधर्मों में, भरी खामियाँ, एक हमारा, अच्छा है.

2

कोई कह दे, धर्म आपका, फलाँ फलाँ से, नीचा है.

प्रभु ने दिया, जो है प्रेम से, वही तो असली, ऊँचा है.

आदि सनातन, धर्म चिरंतन, सब दुनिया में, सच्चा है.

परधर्मों में, भरी खामियाँ, एक हमारा, अच्छा है.

3

चाहे न्यून हो, धर्म हमारा, पर धर्मों से, बढ़िया है.

स्वधर्म में तो, मौत भी भली, धर्म पराया, नीचा है.

आदि सनातन, धर्म चिरंतन, सब दुनिया में, सच्चा है.

परधर्मों में, भरी खामियाँ, एक हमारा, अच्छा है.

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(318)

Krishnayan, Righteousness-2, Hindi 3181

सद्गुण-2

काहे रिझावत नाहक तन मन, जहाँ सद् गुण नहीं.

काहे रिझावत नाहक तन मन, जहाँ सद् गुण नहीं.

1

काम आवे दौलत शौकत, रजस् तमस् गुण तोहे सतावत.

काहे भटकत निश-दिन इत उत, जहाँ सत् जन नहीं.

काहे रिझावत नाहक तन मन, जहाँ सद् गुण नहीं.

2

तेरा कछु नहीं जो तू समझत, साथ जावे जो भी कमावत.

काहे वहाँ पर धन की चाहत, जहाँ सद् धन नहीं.

काहे रिझावत नाहक तन मन, जहाँ सद् गुण नहीं.

3

नाम प्रभु के कभी लीन्हे, काम हरि के नाम कीन्हे.

काहे जीवन व्यर्थ बितावत, जहाँ सत् चित् नहीं.

काहे रिझावत नाहक तन मन, जहाँ सद् गुण नहीं.

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(319)

Krishnayan, Salute to Him 3191

तस्मै नमः

हर सुख लमहा, हर दुख लमहा, नाम प्रभु का लीजिये.

तस्मै नमः, तस्मै नमः, गान हरि का गाइये.

1

निस दिन तनहा, पल-छिन तनहा, ध्यान प्रभु का कीजिए.

तस्मै नमः, तस्मै नमः, गान हरि का गाइये.

हर सुख लमहा, हर दुख लमहा, नाम प्रभु का लीजिये.

तस्मै नमः, तस्मै नमः, गान हरि का गाइये.

2

हर पल पनहा, जोड़ के मनवा, याद प्रभु को कीजिए.

तस्मै नमः, तस्मै नमः, गान हरि का गाइये.

हर सुख लमहा, हर दुख लमहा, नाम प्रभु का लीजिये.

तस्मै नमः, तस्मै नमः, गान हरि का गाइये.

3

सुबहो सुबहो, पुनः पुनः, नाम प्रभु के गाइये.

तस्मै नमः, तस्मै नमः, गान हरि का गाइये.

हर सुख लमहा, हर दुख लमहा, नाम प्रभु का लीजिये.

तस्मै नमः, तस्मै नमः, गान हरि का गाइये.

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(320)

Krishnayan, Self Control 3201

आत्म निग्रह

रोक कर मन को किया, सोहि करम निष्काम का,

फल की कामना से किया, काम, काम न आयगा.

फल की कामना से किया, काम, काम न आयगा.

1

वासना मन से हटा कर, त्याग दे अभिमान को.

त्याग बुद्धि के बिना, कृष्ण को नहीं भाएगा.

फल की कामना से किया, काम, काम न आयगा.

2

मैल तन मन से सफा कर, सादगी से काम ले.

मन का दर्पण साफ हो, तो प्रभु दिख जाएगा.

फल की कामना से किया, काम, काम न आयगा.

3

स्वार्थ को कर के परे, कार्य कर परमार्थ का,

कर्म यदि निष्काम हो, तो प्रभु मिल पाएगा.

फल की कामना से किया, काम, काम न आयगा.

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(321)

Krishnayan, Self Pride 3211

पूर्वी राग

आत्मश्लाघ

मधुर बैन तू बोल, बजा मत झूठ अहम के ढोल.

मधुर बैन तू बोल, बजा मत झूठ अहम के ढोल.

1

ऋषि-मुनि संतन राह दिखावत, रे बंदे बंद नैन तू खोल.

मधुर बैन तू बोल, बजा मत झूठ अहम के ढोल.

2

सद् गुरु बचनन ज्ञान सिखावत, कर मत टालम टोल.

मधुर बैन तू बोल, बजा मत झूठ अहम के ढोल.

3

कोह मोह छल दंभ बनावत, जीवन मिट्टी मोल.

मधुर बैन तू बोल, बजा मत झूठ अहम के ढोल.

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(323)

Krishnayan, Selfless Act-2, Hindi 3231

निष्कामना

फल की आशा तज कर करना, कर्म वही निष्काम सही.

फल की आशा तज कर करना, कर्म वही निष्काम सही.

1

मीन धरन बक ध्यान जतावे, स्वाँग वो जाना योग नहीं.

फल की आशा तज कर करना, कर्म वही निष्काम सही.

2

खून चूसने धुन साज सुनावे, मच्छर भिन् भिन् राग नहीं.

फल की आशा तज कर करना, कर्म वही निष्काम सही.

3

प्यास बुझावन आस लगावे, पपीहे का तप त्याग नहीं.

फल की आशा तज कर करना, कर्म वही निष्काम सही.

4

मीत लभन को ज्योत जगावे, जुगनूँ चमक सच आग नहीं.

फल की आशा तज कर करना, कर्म वही निष्काम सही.

5

दूध दुहन को दाना देवे, ग्वाले का वो दान नहीं.

फल की आशा तज कर करना, कर्म वही निष्काम सही.

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(324)

Krishnayan, Selfless Act-3, Hindi 3241

निष्काम कर्म-3

करले, काम सखे! निष्काम, बोले, राधावर घनश्याम.

करले, काम सखे! निष्काम, बोले, राधावर घनश्याम.

.1

दान धरम तू नाना कीन्हे, कीन्हे यज्ञ तमाम.

आस फलों की तजी तूने, कारज सकल सकाम.

करले, काम सखे! निष्काम, बोले, राधावर घनश्याम.

2

वस्त्र गेरुए तन पर डारे, मन कोयले समान.

माथे चंदन, जटा पसारी, मस्तक में अज्ञान.

करले, काम सखे! निष्काम, बोले, राधावर घनश्याम.

3

कृष्ण बतायो सदाचार का, मार्ग योग महान.

आस छोड़ कर, रहे सदा तू, परमार्थ सत्यकाम.

करले, काम सखे! निष्काम, बोले, राधावर घनश्याम.

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(325)

Krishnayan, Selfless Person 3251

निष्काम योगी

बं-दा - - -, योगी वही है जाना- - -

अरे! ज्ञानी वही है माना- - -

1

तैल समाना जब संसारी, अलिप्त भव-जल से, मझधारी.

उसने, भव तर जाना.

बं-दा - - -, योगी वही है जाना- - -

अरु ज्ञानी वही है माना- - -

2

इच्छा फल की जिसने त्यागी, काम वासना मन से भागी.

उसने, योग है जाना.

बं-दा - - -, योगी वही है जाना- - -

अरु ज्ञानी वही है माना- - -

3

कर्म में जिसने अकर्म देखा, अकर्म से ही कर्म को सीखा.

उसने, जग पहिचा-ना . . .

बं-दा - - -, योगी वही है जाना- - -

अरु ज्ञानी वही है माना- - -

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(326)

Krishnayan, Selfless Service 3261

पर हित

अगर पथ ये तू अपना ले, तो ऋण अपने चुका देगा.

अहम अपना रुका दे तो, तू दुनिया को झुका देगा.

1

पर हित में हि भलाई है, सेवा धर्म कहाई है.

करम तेरा अमर होगा, जगत में तू सुहावेगा.

अगर पथ ये तू अपना ले, तो ऋण अपने चुका देगा.

अहम अपना रुका दे तो, तू दुनिया को झुका देगा.

2

जग माया का मेला है, तीन गुणों का खेला है.

अगर मन को तू रोक सका, तो अघ सारे रुका देगा.

अगर पथ ये तू अपना ले, तो ऋण अपने चुका देगा.

अहम अपना रुका दे तो, तू दुनिया को झुका देगा.

3

प्रभु चरणों में सहारा ले, सहज भव का किनारा है.

अगर दुख यों मिटा देगा, तो सुख सारे लुटावेगा.

अगर पथ ये तू अपना ले, तो ऋण अपने चुका देगा.

अहम अपना रुका दे तो, तू दुनिया को झुका देगा.

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(328)

Krishnayan, Sanskrit, Shanti Path, Ved Vani-3281

शान्तिपाठ-4, संस्कृत

शान्तिर्विधिविधानञ्च वेदवाक्यं सनातनम्.

यत्साक्षात्काररूपेण सुश्रुतं ब्रह्मणो मुखात्.

शान्तिर्विधिविधानञ्च वेदवाक्यं सनातनम्.

1

वदन्ति वेदशास्त्राणि गीतोपनिषदस्तथा.

वदतो रामकृष्णौ वदन्ति महर्षयः.

शान्तिर्विधिविधानञ्च वेदवाक्यं सनातनम्.

2

व्यभिचारञ्च लोलुप्त्वं स्तेयं पापञ्च वर्जयेत्.

योगं त्यागं परार्थञ्च व्रतं पुण्यं समाचरेत्.

शान्तिर्विधिविधानञ्च वेदवाक्यं सनातनम्.

3

सर्वविश्वे भवेच्छान्तिः सर्वभूतेषु सर्वदा.

सर्वत्र प्राणिमात्रेषु पादपेषु पक्षिषु.

शान्तिर्विधिविधानञ्च वेदवाक्यं सनातनम्.

4

अहिंसा परमो धर्मो वचसा मनसा तथा.

कृत्वा कर्माणि शान्त्या हि विश्वं स्वर्गः सुखं भवेत्.

शान्तिर्विधिविधानञ्च वेदवाक्यं सनातनम्.

5

शान्तिर्विधिविधानञ्च वेदवाक्यं सनातनम्.

यत्साक्षात्काररूपेण सुश्रुतं ब्रह्मणो मुखात्.

शान्तिर्विधिविधानञ्च वेदवाक्यं सनातनम्.

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(330)

Krishnayan, Shanti Path-6, Hindi 3301

शाँति पाठ-6

निश-दिन तन में शाँति हो, लड़ने का नहिँ काम.

जन गण मन में क्रांति हो, शाँति जगत कल्याण.

जन गण मन में क्रांति हो, शाँति जगत कल्याण.

1

ऋषि गुरु ज्ञानी लाए हैं, शाँति का पैगाम.

शाँति ब्रह्म अरु सत्य है, शाँति है भगवान.

जन गण मन में क्रांति हो, शाँति जगत कल्याण.

2

शाँति प्रेम है प्यार भी, शाँति पुण्य का नाम.

शाँति स्नेह की सादगी, शाँति है वरदान.

जन गण मन में क्रांति हो, शाँति जगत कल्याण.

3

शाँति कला अनिवार्य है, शाँति चैन का धाम.

शाँति गुणों में श्रेष्ठ है, शाँति आत्म का ज्ञान.

जन गण मन में क्रांति हो, शाँति जगत कल्याण.

4

शाँति धर्म का कर्म है, शाँति है सत् नाम.

शाँति ध्येय का श्रेय है, शाँति है अभियान.

जन गण मन में क्रांति हो, शाँति जगत कल्याण.

5

शाँति लाभ का बीज है, शाँति सीताराम.

शाँति त्राण की चीज है, शाँति राधेश्याम.

जन गण मन में क्रांति हो, शाँति जगत कल्याण.

6

शाँति शाँति शाँति हो, शाँति चारों याम.

शाँति सर्वगम् शाँति हो, शाँति स्वर्ग का यान.

जन गण मन में क्रांति हो, शाँति जगत कल्याण.

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(331)

Krishnayan, Shanti Path-7, Hindi 3311

शाँति पाठ-7

शाँति सर्वदा, शाँति सर्वथा, शाँति सर्वगा, शाँति ओम्.

जन गण शाँति, त्रिभुवन शाँति, भूत चराचर, शाँति ओम्.

शाँति शाँति, शाँति ओम्.

मेरे मन में, तेरे मन में, सबके मन में, शाँति हो.

जग में शाँति, नभ में शाँति, शाँति शाँति, शाँति ओम्.

शाँति शाँति, शाँति ओम्.

1

जो मिला है उसमें तृप्ति, मान लेना कर्म है.

जिस किसी को ना मिला हो, बाँट लेना धर्म है.

जो भी दिन हो वो खुशी से, काट लेना वृत्ति हो.

तन में शाँति, मन में शाँति, लब पे शाँति, शाँति हो.

शाँति शाँति, शाँति ओम्.

2

स्त्री पुरुष या मूक प्राणी, पेड़ पत्ते फूल हों.

जीव सारे, लिंग सारे, एक सभी का मूल है.

भूत सबके पँच ही हैं, गुण सभी के तीन ही.

एक सबका ईश, चाहे, रूप भाँति-भाँति हों.

शाँति शाँति, शाँति ओम्.

3

भिन्न भाषा अगर जानी, मधुर मुख में वाणी हो.

भीन्न चाहे वेश उसका, या अलादा देश हो.

एक दाना, एक पानी, एक धरती सबकी है.

अखिल जग में एकता की, क्रांति क्रांति क्रांति हो.

शाँति शाँति शाँति ओम्.

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(333)

Krishnayan, Shyam Ki Radha, 3331

केदार राग

श्याम की राधा

मुरली सुनत है श्याम की राधा, मोर पपीहा नाचत थैया.

नील गगन में चाँद है आधा.

मुरली सुनत है श्याम की राधा, नील गगन में चाँद है आधा.

1

कोयल कुहू कुहू सुंदर बाँधा, सौरभ चंपक रजनी गंधा,

वृंदावन में दंग है वसुधा.मुरली सुनत है श्याम की राधा,

 नील गगन में चाँद है आधा.

2

हिंदोले पर झूलत झूला, मोहन गोपियन गोपी बाला,

बंसी बजावत देवकी नंदा. मुरली सुनत है श्याम की राधा,

नील गगन में चाँद है आधा.

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(334)

Krishnayan, Raas Leela, 3341

रास लीला

श्याम सलोना नंद गोपाला, रंग साँवला हरि ब्रज बाला.

गल में सुगंधित गुलाब माला, रंग साँवला हरि ब्रज बाला.

श्याम सलोना नंद गोपाला, रंग साँवला हरि ब्रज बाला.

1

सिर पर मोर मुकुट है डाला, गिरिधर काली कमली वाला,

पग में पायल, गल बन माला.

श्याम सलोना नंद गोपाला, रंग साँवला हरि ब्रज बाला.

2

गौवन पाला गोकुल ग्वाला, मोहन प्यारा है मतवाला,

दधि माखन को चुराने वाला.

श्याम सलोना नंद गोपाला, रंग साँवला हरि ब्रज बाला.

3

राधे गोविंदा मुरली वाला, नंद का नंदन श्यामल काला,

गोप गोपी का प्रिय मतवाला.

श्याम सलोना नंद गोपाला, रंग साँवला हरि ब्रज बाला.

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(335)

Krishnayan, Success, 3351

सिद्धि

अनुकूलबुद्धिर्ददाति सिद्धिम्, विनाशसमये विपरीतबुद्धिम्.

ये तो जुग-जुग की है रीति.

1

भाग जगेगा, उसे सुबद्धि, विनाश काले विपरीत बुद्धि.

बंदे! करले हरि से प्रीति.

ये तो जुग-जुग की है रीति.

2

उसे किसी से नहीं है भीति, जिसकी हरि चलावे किश्ती.

बंदे! प्रीत हरि को भाती.

ये तो जुग-जुग की है रीति.

3

जिसके मति में नहीं है भ्रांति, उसके मन में सदा है शाँति.

बंदे! बाजी उसी ने जीती.

ये तो जुग-जुग की है रीति.

4

खोज हरि किरपा की कुंजी, तुझे मिलेगी अपार पूँजी.

बंदे! राम नाम के मोती.

ये तो जुग-जुग की है रीति.

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(336)

Krishnayan, Sundarashtak, Hindi 3361

सुंदराष्टक

आरती सुंदर, कथा है सुंदर, भजन है सुंदर, पूजन सुंदर.

प्रसाद सुंदर, स्मरण है सुंदर, लक्ष्मीपति का व्रत है सुंदर.

प्रसाद सुंदर, स्मरण है सुंदर, लक्ष्मीपति का व्रत है सुंदर.

1

सूरत सुंदर, मूरत सुंदर, वदन है सुंदर, बदन है सुंदर.

कान हैं सुंदर, नाक है सुंदर, लक्ष्मीपति का तन मन सुंदर.

प्रसाद सुंदर, स्मरण है सुंदर, लक्ष्मीपति का व्रत है सुंदर.

2

कुण्डल सुंदर, कुन्तल सुंदर, मुकुट है सुंदर, भृकुटी है सुंदर.

केश हैं सुंदर, वेश है सुंदर, लक्ष्मीपति का रूप है सुंदर.

प्रसाद सुंदर, स्मरण है सुंदर, लक्ष्मीपति का व्रत है सुंदर.

3

क्र है सुंदर, गदा है सुंदर, पद्म है सुंदर, शंख है सुंदर.

वस्त्र हैं सुंदर, शस्त्र हैं सुंदर, लक्ष्मीपति के भूषण सुंदर.

प्रसाद सुंदर, स्मरण है सुंदर, लक्ष्मीपति का व्रत है सुंदर.

4

प्रभाव सुंदर, स्वभाव सुंदर, दर्श है सुंदर, स्पर्श है सुंदर.

गेह है सुंदर, नेह है सुंदर, लक्ष्मीपति का देह है सुंदर.

प्रसाद सुंदर, स्मरण है सुंदर, लक्ष्मीपति का व्रत है सुंदर.

5

अंबर सुंदर, धरती सुंदर, चन्द्र है सुंदर, सूर्य है सुंदर.

नदियाँ सुंदर, पर्वत सुंदर, लक्ष्मीपति का जगत है सुंदर.

प्रसाद सुंदर, स्मरण है सुंदर, लक्ष्मीपति का व्रत है सुंदर.

6

नारद सुंदर, किन्नर सुंदर, तुंबर सुंदर, गरुड़ है सुंदर.

गोप हैं सुंदर, दास हैं सुंदर, लक्ष्मीपति के भगत हैं सुंदर.

प्रसाद सुंदर, स्मरण है सुंदर, लक्ष्मीपति का व्रत है सुंदर.

7

विष्णु है सुंदर, विभु है सुंदर, हरि है सुंदर, प्रभु है सुंदर.

राम है सुंदर, श्याम है सुंदर, लक्ष्मीपति के नाम हैं सुंदर.

प्रसाद सुंदर, स्मरण है सुंदर, लक्ष्मीपति का व्रत है सुंदर.

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(339)

Krishnayan, The Wail of Dharma, 3391

राग देस

धर्म विलाप

सुनो रे प्रभु, धरम का आर्त विलाप.

सुनो रे प्रभु, धरम का आर्त विलाप.

1

फूट-फूट कर रुदन ये इसका, दम घुटने का सुनो रे सिसका,

पुण्य के सिर पर पाप चढ़ा है, दंभ से, अनीति का है मिलाप.

सुनो रे प्रभु, धरम का आर्त विलाप.

2

अपमानित सम्मान झुका है, सदाचार का काम रुका है.

अनाचार सब ओर बढ़ा है, जन गण तन-मन में संताप.

            सुनो रे प्रभु, धरम का आर्त विलाप.

            3

सत् के माथे दाग लगा है, पग-पग पर दिन-रात दगा है.

प्रश्न गहन अब आन पड़ा है, कैसे नष्ट करें ये पाप.

सुनो रे प्रभु, धरम का आर्त विलाप.

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(340)

Krishnayan, The Worldly Play, 3401

दुनिया का खेला

झूठा है दुनिया का खेला, रे! जग चार दिनों का मेला.

झूठा है दुनिया का खेला, रे! जग चार दिनों का मेला.

1

आवा गमन चुरासी फेरा, पँच भूत ने जग है घेरा.

बंधु भाई कोई तेरा, तू, चार जनों में अकेला.

झूठा है दुनिया का खेला, रे! जग चार दिनों का मेला.

2

सत् रज तम नौ द्वार के अंदर, पवन अनल जल धरती अंबर.

चमड़ी काली गोरी ऊपर, ये, चार छनों का झमेला.

झूठा है दुनिया का खेला, रे! जग चार दिनों का मेला.

3

सुनो भई साधो! सद्गुरु वाणी, नित्य गति है आनी-जानी.

सुमिर हरि को निश-दिन प्राणी! तू, चारों याम की बेला.

झूठा है दुनिया का खेला, रे! जग चार दिनों का मेला.

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(344)

Krishnayan, Kanha Mati Khayo, 3441

कान्हा माटी खायो

नंद जी! आज कान्हा माटी खायो.

मोहे, मुख में विश्व दिखायो.

नंद जी! आज कान्हा माटी खायो.

1

मैं बोली, अपने घर लटके, दूध दधि-माखन के मटके.

फिर क्यों माटी चखायो.

नंद जी! आज कान्हा माटी खायो.

2

बोला, माटी से ही सब आवे, माटी में ही सब मिल जावे.

मोहे, कान्हा ज्ञान सिखायो.

नंद जी! आज कान्हा माटी खायो.

3

देखा मैंने उसके मुख में, विश्व समाया सब है सुख में.

मोहे, कान्हा नेहा लगायो.

नंद जी! आज कान्हा माटी खायो.

4

कान्हा मोरा विश्वरूप है, शिशु गोपन का बाल भूप है.

मोहे, दैवी दरस लखायो.

नंद जी! आज कान्हा माटी खायो.

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(345)

Krishnayan, Vrindavan, 3451

वृंदावन सुभागा है, हिंदी

चरण हरि के छुए आज, वृंदावन ये सुभागा है.

जनम-दिवस है राधे का, अजी! सोने में सुहागा है.

चरण हरि के छुए आज, वृंदावन ये सुभागा है.

1

बरसाने की कली पचरंगी, गोकुलपति के हार में लगी.

नजारा स्वर्ग समाना है.

चरण हरि के छुए आज, वृंदावन ये सुभागा है.

2

आए नारद शारद शंकर, आशिष बरसाने को मंगल.

व्रज में मोद अपारा है.

चरण हरि के छुए आज, वृंदावन ये सुभागा है.

3

वृंदावन में नई उमंगें, इन्द्र धनु का सप्त रंग हैं.

दिन कितना ये सुहाना है.

चरण हरि के छुए आज, वृंदावन ये सुभागा है.

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(346)

Krishnayan, Wail of the Kine, 3461

मूक पशु की पुकार

सुनो रे प्रभु! मूक पशु की पुकार.

बेजुबान का दुखिया है संसार.

सुनो रे प्रभु! मूसुनो रे प्रभु पशु की पुकार.

बेजुबान का दुखिया है संसार.

1

पापी नर के मगज़ में विष है.

दिन-रात करत अपकार, सुनो रे प्रभु!

सुनो रे प्रभु! मूक पशु की पुकार.

बेजुबान का दुखिया है संसार.

2

बोझ वहावत तेज़ भगावत,

कोड़ों की बौछार, सुनो रे प्रभु!

सुनो रे प्रभु! मूक पशु की पुकार.

बेजुबान का दुखिया है संसार.

3

क्रू कसाई रुधिर बहावत,

कतल करत बेशुमार, सुनो रे प्रभु!

सुनो रे प्रभु! मूक पशु की पुकार.

बेजुबान का दुखिया है संसार.

4

छल बल खल से अधम सतावत,

मारात्मक अविचार, सुनो रे प्रभु!

सुनो रे प्रभु! मूक पशु की पुकार.

बेजुबान का दुखिया है संसार.

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(347)

Krishnayan, Walk Alone, Hindi

चल अकेला

दूर डगर, पग चलना है, भव पार करन नहीं बेड़ा रे.

दूर डगर, पग चलना है, भव पार करन नहीं बेड़ा रे.

1

आया अकेला, राही अकेला, बाद अकेला जाना है.

आर अकेला, पार अकेला, चल अकेला फेरा रे.

दूर डगर, पग चलना है, भव पार करन नहीं बेड़ा रे.

2

पथ में अंधेरा, डर बहुतेरा, मोह माय से घेरा है.

नश्वर जग में जब डेरा है, हरि सहारा तेरा रे.

दूर डगर, पग चलना है, भव पार करन नहीं बेड़ा रे.

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(348)

Krishnayan, Without Faith, 3481

धरम के बिना

धरम बिन जीवन है बेकाम.

धरम बिन जीवन है बेकाम.

1

सदाचार है जीवन जिसका, धर्मपुत्र कहलाता है.

आदर्श चरित उस धर्मवीर का, इतिहास निरंतर गाता है.

करम बिन जीवन है नाकाम.

धरम बिन जीवन है बेकाम.

2

धर्मक्षेत्र है जीवन जिसका, धर्मराज कहलाता है.

धर्म दान उस धर्मशील का, याद चिरंतन आता है.

परम इति जीवन है निष्काम.धरम बिन जीवन है बेकाम.3

दुराचार है जीवन जिसका, धर्मभ्रष्ट कहलाता है.

बदनाम नाम उस धर्महीन का, इतिहास हमेशा रोता है.

शरम बिन जीवन है बदनाम.

धरम बिन जीवन है बेकाम.

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(349)

Ramayan, Without Rama, 3491

हरि के बिना

जगत माही, हरि के बिना सुख नाही,

हरि ही भगत के, पितु और माई, और दाता कोई.

1

राम पिता अरु राम ही माता, राम ही है सुखदाई,

जगत माही, हरि के बिना सुख नाही,

हरि ही भगत के, पितु और माई, और दाता कोई.

2

राम हमारा एक सहारा, राम! हमें तू त्राहि,

जगत माही, हरि के बिना सुख नाही,

हरि ही भगत के, पितु और माई, और दाता कोई.

3

राम नियारा, राम पियारा, राम! हमे पाहि पाही!

जगत माही, हरि के बिना सुख नाही,

हरि ही भगत के, पितु और माई, और दाता कोई.

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(350)

Krishnayan, Worldly Cycle, 3501

भव क्र

किसी का जीवन सुखों से भरा, किसी को गम तड़पाता है.

कोई चैन की निंदिया सोता, कोई रात भर रोता है.

सब, तीन गुणों की माया है.

ये भव चक्कर का फेरा है, सब, जो कर्म फलों ने घेरा है.

1

बीज बबूल के जब हों बोये, उगे आम केले.

सब, तीन गुणों की माया है.

2

नींद चैन की कोई सोता, कहीं चिंता का डेरा.

सब, तीन गुणों की माया है.

3

किसी का जीवन सुखों से भरा, कहीं दुखन का बसेरा.

सब, तीन गुणों की माया है.

4

जो करता है, सो भरता है, ये कर्म फलों का खेला.

सब, तीन गुणों की माया है.

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(637)

Krishnayan, Ignorance, Hindi

अज्ञान

मैं ही एक सयाना, बाकी, दुनिया उल्लू की पट्ठी.

मैं ही एक सयाना, बाकी, दुनिया उल्लू की पट्ठी.

1

मैं बलशाली, सबसे जाली, मैं हूँ ज्ञानी, बड़ा तूफानी.

दुनिया वालों की सत्ती पर, होगी मेरी अट्ठी.

मैं ही एक सयाना, बाकी, दुनिया उल्लू की पट्ठी.

2

मुझमें बुद्धि, मुझमें सिद्धि, होगी मेरी, निश-दिन वृद्धि.

चोर फरेबों की है टोली, करली मैंने कट्ठी.

मैं ही एक सयाना, बाकी, दुनिया उल्लू की पट्ठी.

3

मैं हूँ नास्तिक, मन का मालिक, मुझको कुछ भी नहीं अनैतिक.

कोई मेरा भेद जाने, बंधी मेरी मुट्ठी.

मैं ही एक सयाना, बाकी, दुनिया उल्लू की पट्ठी.

4

दुष्ट बुद्धि ये क्यों हैं आते, भद्र जनों को जो तरसाते.

या प्रभु! इसको दो सद्बुद्धि, या हो इनकी छुट्टी.

मैं ही एक सयाना, बाकी, दुनिया उल्लू की पट्ठी.

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(351)

Krishnayan, Zindagi, 3511

जिंदगी

तू बखेड़े में ना दिल लगाना, जिंदगी का अकेला सफर है.

तू बखेड़े में ना दिल लगाना, जिंदगी का अकेला सफर है.

1

रात दिन वो तेरा है सहारा, एक वो ही तेरा है किनारा.

ये जीवन सफर है सुहाना, तू हरि का दीवाना अगर है.

तू बखेड़े में ना दिल लगाना, जिंदगी का अकेला सफर है.

2

नाम, तेरे पापों को जलाता, पुण्य तेरे भागों में लगाता.

ये तरीका सदियों पुराना, हरि ने बताया अमर है.

तू बखेड़े में ना दिल लगाना, जिंदगी का अकेला सफर है.

3

लोग सारे हैं मतलब के भाई, प्रीत में है कोई सचाई.

ये जहर से भरा है जमाना, किसी को कोई कदर है.

तू बखेड़े में ना दिल लगाना, जिंदगी का अकेला सफर है.

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(352)

Prayer, Adi Ganesh, 3521

आदिदेव श्रीगणेश वंदना

श्री गणेश आदि ईश, लंबोदर पूजिये,

एकदंत के सहस्र, शुभ नाम जपिये.

श्री गणेश आदि ईश, लंबोदर पूजिये,

एकदंत के सहस्र, शुभ नाम जपिये.

1

पुष्प पत्र धूप तोय, मोदकों का भोग हो,

भक्ति भाव नाम जाप, साधु संत योग जो,

ढोल तंबूरा मृदंग, घूँघरू का साज हो,

जय महेश, जय सुरेश, जय गणेश बोलिये.

श्री गणेश आदि ईश, लंबोदर पूजिये,

एकदंत के सहस्र, शुभ नाम जपिये.

2

मुख में हो एक नाम, वक्रतुं गम्य हो,

मन में वो सुभो-शाम, दयावंत रम्य हो,

ज्ञान का जो एक दाता, ध्यान से है प्राप्त जो,

अज्ञान को पूर्ण धोता, उसी के हम हो लिये.

श्री गणेश आदि ईश, लंबोदर पूजिये,

एकदंत के सहस्र, शुभ नाम जपिये.

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(353)

Prayer, Amba Devi-1, Hindi 3531

जै जै अंबे!

जै जै अंबे कृपा कारिणी, जगदंबे दया दायिनी.

जै महा जोगिनी, हे स्वधा भोगिनी, दे दे दे दे दुआ नंदिनी.

1

भव पीड़ा घनी हारिणी, जग चिंता शनि सारिणी.

काली कराली माँ, देवी भवानी माँ, महारानी जगत् वंदिनी.

जै महा जोगिनी, हे स्वधा भोगिनी, दे दे दे दे दुआ नंदिनी.

2

शिवकांता उमा पार्वती, जै रमा अंबिका भगवती.

महामाया सती, गौरी इरावती, महादेवी असुर मर्दिनी.

जै महा जोगिनी, हे स्वधा भोगिनी, दे दे दे दे दुआ नंदिनी.

3

शेराँवाली दया दायिनी, जोताँवाली क्षमा कारिणी.

शुभ हित कारिणी, जग उद्धारिणी, जै शिवानी व्यथा भंजनी.

जै महा जोगिनी, हे स्वधा भोगिनी, दे दे दे दे दुआ नंदिनी.

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(354)

Prayer, Amba Devi-2, Hindi 3541

अंबे मैया

अंबे मैया, तेरी माया, का- - - - -.

बोल बाला, सभी जगत में, सदा रहे.

1

पाप हारिणी! ताप हारिणी! तेरी किरपा, का- - - - -.

जय जय कारा, सभी दिलों में, सदा बहे.

अंबे मैया, तेरी माया, का- - - - -.

बोल बाला, सभी जगत में, सदा रहे.

2

ज्योताँ वाली! पहाड़ा वाली! मेहराँ वाली, माँ- - -.

तेरा नारा, सभी घरों में, सदा चले.

अंबे मैया, तेरी माया, का- - - - -.

बोल बाला, सभी जगत में, सदा रहे.

3

भाग्य दायिनी! सिद्धि दायिनी! सिंहवहिनी, का- - -.

दैवी डंका, सभी समय में, सदा बजे.

अंबे मैया, तेरी माया, का- - - - -.

बोल बाला, सभी जगत में, सदा रहे.

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(355)

Prayer, Amba Devi-3, Hindi 3551

त्राहि जगदंबे

हमें तारो! तारो!, जननी जगदंबे भँवर से.

कृपा तेरी पाने, भगत जन गाते भजन हैं.

हमें तारो! तारो!, जननी जगदंबे भँवर से.

कृपा तेरी पाने, भगत जन गाते भजन हैं.

1

कोई ज्ञान से, कोई ध्यान से, तुझे पूजता.

कोई दान है, कोई मान है, तुम्हें माँगता.

सभी, दुर्गे माते! भगत जन तेरी शरण में.

हमें तारो! तारो!, जननी जगदंबे भँवर से.

कृपा तेरी पाने, भगत जन गाते भजन हैं.

2

कोई नमन से, कोई भजन से, तेरी चाह में.

कोई करम से, कोई धर्म से, तेरी बाँह में.

सभी, अंबे देवी! भगत जन तेरे चरण में.

हमें तारो! तारो!, जननी जगदंबे भँवर से.

कृपा तेरी पाने, भगत जन गाते भजन हैं.

3

हमें भक्ति दे, हमें शक्ति दे, हमें तार माँ.

हमें बुद्धि दे, हमें प्रीति दे, सदा प्यार माँ.

सभी, गौरी माते! भगत करते अध्ययन हैं.

हमें तारो! तारो!, जननी जगदंबे भँवर से.

कृपा तेरी पाने, भगत जन गाते भजन हैं.

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(356)

Prayer, Maharaja Bappa Raval, Hindi 3561

महाराजा बप्पा रावल, हिंदी

तूने स्वातंत्र्य का बीज बोया, और चलाई प्रणाली अमर है.

तूने स्वातंत्र्य का बीज बोया, और चलाई प्रणाली अमर है.

1

तेरे पथ पर चला संग-राणा, उसने तुझको ही आदर्श माना.

तूने सीनों में गौरव पिरोया, तेरे कर्मों का अद्भुत असर है.

तूने स्वातंत्र्य का बीज बोया, और चलाई प्रणाली अमर है.

2

राणा परताप ने तुझको पूजा, तुमसे आदर्श ना कोई दूजा.

तू ही अर्जुन यथा पांडवों का, तेरी कीर्ति धरा पर अजर है.

तूने स्वातंत्र्य का बीज बोया, और चलाई प्रणाली अमर है.

3

फिर शिवाजी ने तीनों को माना, तुमको वीरों का भी वीर जाना.

तुमको भूलें कभी ना जमाना, एहसानों की जिसको कदर है.

तूने स्वातंत्र्य का बीज बोया, और चलाई प्रणाली अमर है.

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(357)

Prayer, Bhaj Ram Nam, 3571

भज ले नाम

भज ले रे नाम हरि का बंदे!

टूटें सब भव बंधन फँदे, छुट जावेंगे पातक गंदे.

भज ले रे नाम हरि का बंदे!

टूटें सब भव बंधन फँदे, छुट जावेंगे पातक गंदे.

1

लख चौरासी जग के फेरे, मिट जावेंगे आप ही तेरे.

देख ले, आँखें खोल के, अंधे!

भज ले रे नाम हरि का बंदे!

टूटें सब भव बंधन फँदे, छुट जावेंगे पातक गंदे.

2

पाप पुण्य का क्र अनूठा, फल उनका है कडुआ मीठा.

छोड़ दे सारे, नकली धंदे.

भज ले रे नाम हरि का बंदे!

टूटें सब भव बंधन फँदे, छुट जावेंगे पातक गंदे.

3

मन ये तेरा है कलुषित काला, राम-नाम का देख उजाला.

बोल तू, हर दमहरि हरि! वन्दे

भज ले रे नाम हरि का बंदे!

टूटें सब भव बंधन फँदे, छुट जावेंगे पातक गंदे.

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(358)

Prayer, Bhaj Samb Ahivam, 3581

तिलंग राग

भज सांब शिवम्

भज सांब शिवम्, मन भज तू सांब शिवम्,

मनवा मंगल गान तू गा रे, वंदे शिवं सुंदरम्.

1

गा कर प्यारा नाम शिवा का, करले तरास तू कम,

साँस साँस में गौरीनाथ को, निश दिन अरु हर दम.

भज सांब शिवम्, मन भज तू सांब शिवम्,

मनवा मंगल गान तू गा रे, वंदे शिवं सुंदरम्.

2

पा कर न्यारा प्यार शिवा का, हरले दरद सितम,

बार बार नित वंदना करो, भोले नाथ शुभम्.

भज सांब शिवम्, मन भज तू सांब शिवम्,

मनवा मंगल गान तू गा रे, वंदे शिवं सुंदरम्.

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(359)

Prayer, Bhavani Devi, Marathi 3591

हे भवानी! मराठी

आज भवानी, तुला मागतो, छान मला वरदान दे.

स्वातंत्र्याची ज्योत जन-मनीं, जागविण्याचे ज्ञान दे.

हाच भवानी, तुला मागतो ! एक मला वरदान दे.

1

बाप्पा रावळ, चितोड राणा, प्रसंग त्यांचे ज्वलंत नाना.

अमर करू, अवधान दे. स्वातंत्र्याचे भान दे.

हाच भवानी, तुला मागतो ! एक मला वरदान दे.

2

वीर मराठे धृष्ट करू मी, परदेशी अरि नष्ट करू मी.

देवी! मला अभिधान दे! स्वातंत्र्याचे गान दे.

हाच भवानी, तुला मागतो ! एक मला वरदान दे.

3

नर नारी जन भ्रष्ट होत हे, मूर्ति-मंदिर ध्वस्त होत हे.

रक्षण करण्या, भान दे! स्वातंत्र्याची शान दे.

हाच भवानी, तुला मागतो ! एक मला वरदान दे.

4

प्रति दिन अत्याचार हे इथे, धर्मातर व्यभिचार हे दिसें.

असुरांना अवसान दे! स्वातंत्र्याचा मान दे.

हाच भवानी, तुला मागतो ! एक मला वरदान दे.

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(360)

Prayer, Durga Devi, 3601

दुर्गा देवी

दुर्गा देवी! दुर्गा देवी! दुर्गा देवी वर दे.

किरपा तेरी, किरपा तेरी, किरपा तेरी कर दे.

1

झोली मेरी, कबसे खाली, भरदे झोली, माता काली.

झोली मेरी, झोली मेरी, झोली मेरी देवी भरदे.

दुर्गा देवी! दुर्गा देवी! दुर्गा देवी वर दे.

किरपा तेरी, किरपा तेरी, किरपा तेरी कर दे.

2

नैया मेरी, टूटी डोरी, तूही तारे, माता गौरी.

नैया मेरी, नैया मेरी, नैया मेरी देवी तरदे.

दुर्गा देवी! दुर्गा देवी! दुर्गा देवी वर दे.

किरपा तेरी, किरपा तेरी, किरपा तेरी कर दे.

3

गोदी मेरी, मैया खाली, भरदे गोदी, मैया काली.

गोदी मेरी, गोदी मेरी, गोदी मेरी देवी भरदे.

दुर्गा देवी! दुर्गा देवी! दुर्गा देवी वर दे.

किरपा तेरी, किरपा तेरी, किरपा तेरी कर दे.

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(363)

Prayer, Shri Satya Saai, 3631

श्रीसत्य साँई

गोविंद नारायण वासुदेव, श्रीकृष्ण श्रीराम श्रीसत्य साँई.

किसी को पुकारो सब नाम एक, भजलो या गाओ, मेरे भाई!

गोविंद नारायण वासुदेव, श्रीकृष्ण श्रीराम श्रीसत्य साँई.

1

आनंद दाता जग के विधाता, तू भाग्य देता, सुदर्शन कन्हाई.

किसी को पुकारो सब नाम एक, भजलो या गालो, मेरे भाई!

गोविंद नारायण वासुदेव, श्रीकृष्ण श्रीराम श्रीसत्य साँई.

2

हे विघ्न हारी, हे क्रधारी, हे ब्रह्म विष्णु शंकर गोसाई.

प्रभु रूप दरसाता है अनेक, भजलो या गा लो, मेरे भाई!

गोविंद नारायण वासुदेव, श्रीकृष्ण श्रीराम श्रीसत्य साँई.

3

श्री लक्ष्मी माता सीता राधा, काली भवानी गायत्री माई.

जपलो या तपलो सब काम नेक, भजलो या गालो, मेरे भाई!

गोविंद नारायण वासुदेव, श्रीकृष्ण श्रीराम श्रीसत्य साँई.

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(364)

Prayer, Guru Vandana, 3641

गुरु वंदना

ब्रह्म गुरु अरु विष्णु गुरु, शंभु सदाशिव गुरु ही हैं.

आत्म गुरु परमात्म गुरु, बिना गुरु भव अपार है.

ब्रह्म गुरु अरु विष्णु गुरु, शंभु सदाशिव गुरु ही हैं.

आत्म गुरु परमात्म गुरु, बिना गुरु भव अपार है.

1

राम गुरु है, श्याम गुरु है, गुरु सरस्वती माता.

निर्विकार गुरु, निरंकार गुरु, गुरु ज्ञान का दाता.

गाओ गुरु गुण, ध्याओ गुरु ऋण, पार भँवर का गुरु ही है.

ब्रह्म गुरु अरु विष्णु गुरु, शंभु सदाशिव गुरु ही हैं.

आत्म गुरु परमात्म गुरु, बिना गुरु भव अपार है.

2

ज्ञान सिखाए, राह दिखाए, गुरु मन का उजियाला.

भाग्य जगाए, पुण्य लगाए, गुरु सत् का प्रतिपाला.

छाँव गुरु है, नाव गुरु है, तार भँवर का गुरु ही है.

ब्रह्म गुरु अरु विष्णु गुरु, शंभु सदाशिव गुरु ही हैं.

आत्म गुरु परमात्म गुरु, बिना गुरु भव अपार है.

3

तन सब गुरु का, मन सब गुरु का, कण-कण अर्पण काया.

भान गुरु से, मान गुरु से, गुरु चरणों की माया.

भाई गुरु है, माई गुरु है, सार भव का गुरु ही है.

ब्रह्म गुरु अरु विष्णु गुरु, शंभु सदाशिव गुरु ही हैं.

आत्म गुरु परमात्म गुरु, बिना गुरु भव अपार है.

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(365)

Prayer, Happy Birthday Geet, Hindi 3651

जनम दिन मुबारक

मंगल आशिष पाकर प्यारे, जुग-जुग जीते रहो.

जनम-दिन तुम्हें मुबारक हो - -, हृदय से तुम्हें बधाई हो- -.

1

दर्शन तुमरे शुभ कहलाते, काम सुमंगल सबको भाते.

सुमिरण जिनके चिर रह जाते, बीते समय की याद दिलाते.

आज भद्र जन सब आए हैं, उनको नमन करो.

तुम्हें सब सदा हि सुख मय हो.

मंगल आशिष पाकर प्यारे, जुग-जुग जीते रहो.

जनम-दिन तुम्हें मुबारक हो - -, हृदय से तुम्हें बधाई हो- -.

2

लड्डु समोसे पेढ़े पतीसे, खाएँ-गाएँ आज खुशी से.

पुष्प प्रेम के तुम पर बरसे, उन्हें देखने इन्द्र भी तरसे.

आज सुहाना दिन आया है, प्रभु के स्मरण करो.

सब को सदा हि तुम सुख दो.

मंगल आशिष पाकर प्यारे, जुग-जुग जीते रहो.

जनम-दिन तुम्हें मुबारक हो - -, हृदय से तुम्हें बधाई हो- -.

3

माता-पिता के आँख के तारे, बंधु सखा गुरु जन के प्यारे.

किरपा मय तुम सबके दुलारे, हास्य तुम्हारे सदा सुखारे.

आज हमारा मन गाता है, तुम जग में अमर रहो.

विपदा कभी तुम पर हो.

मंगल आशिष पाकर प्यारे, जुग-जुग जीते रहो.

जनम-दिन तुम्हें मुबारक हो - -, हृदय से तुम्हें बधाई हो- -.

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(366)

Prayer, Hari Charan, 3661

हरि चरण

हरि चरणन के पूज्य स्पर्श से, मिल जाए अनुदान.

रे मनवा, ले ले हरि का नाम.

रे मनवा, ले ले हरि का नाम.

1

हिरदय में हरि साँझ सकारे, जनम-जनम के पाप उबारे.

सुमिरन करले पल-छिन प्यारे, खो कर अपने भान.

रे मनवा, ले ले हरि का नाम.

2

पल दो पल का वास है जग में, उसमें विपदा है पग-पग में.

गर मुक्ति की आस है मन में, गा ले हरि के गान.

रे मनवा, ले ले हरि का नाम.

रे मनवा, ले ले हरि का नाम.

3

पास आवें भय दुस्तारे, संकट भागे दूर दुखारे.

हरि किरपा से सकल तुम्हारे, होंगे पूरण काम.

रे मनवा, ले ले हरि का नाम.

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(368)

Prayer, Hari’s Magic, 3681

हरि की लीला

रे हरि तेरी, लीला है जादू भरी.

रे हरि तेरी, माया है जादू भरी.

            1         

नंदलाल की बाल लीलाएँ, सबको मुग्ध करी.

अनुपम प्यारी रम्य कथाएँ, सचमुच जादूगरी.

रे हरि तेरी, लीला है जादू भरी.

रे हरि तेरी, माया है जादू भरी.

2

जहर पिलाने आई पूतना, अपने विष से मरी.

गिरा तृणावर्त आसमान से, नभ तक धूल उड़ी.

रे हरि तेरी, लीला है जादू भरी.

रे हरि तेरी, माया है जादू भरी.

3

कालीया जमुना से भगायो, शीश पे नाचे हरि.

गोवर्धन उँगली पे उठायो, लीला है जादू खरी.

रे हरि तेरी, लीला है जादू भरी.

रे हरि तेरी, माया है जादू भरी.

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(369)

Prayer, He Shiva Shambho, 3691

हे शिव शंभो

हे शिव शंभो! भवानी शंकर! सब संकट हारो,

भवसागर के दुख मय जग से, प्रभु हमको तारो.

हे शिव शंभो! भवानी शंकर! सब संकट हारो.

1

आन पड़े हम भव मझ धारे, हे डमरूधर हमें बचा रे!

प्रभु हमको तारो,

हे शिव शंभो! भवानी शंकर! सब संकट हारो.

2

भगत खड़े हैं तेरे दुआरे, तव करुणा की आशा धारे,

अब मंगल कारो,

हे शिव शंभो! भवानी शंकर! सब संकट हारो.

3

दान कृपा का कीजो प्रभु जी, प्रेम की छाया हमको दीजो,

दुख हमरे टारो,

हे शिव शंभो! भवानी शंकर! सब संकट हारो.

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(370)

Prayer, Jai Siya Rama, 3701

जय सिया राम

छवि सुमंगल रूप ललाम, जै जै राघव जय सिया राम.

दशरथनंदन हैं सुखधाम, जपले निश-दीन पावन नाम.

छवि सुमंगल रूप ललाम, जै जै राघव जय सिया राम.

दशरथनंदन हैं सुखधाम, जपले निश-दीन पावन नाम.

1

कमल वदन शुभ लोचन सुंदर, संकट मोचन स्नेह समुंदर.

भागा आए भगत के काम, जै जै रघुपति, जय सिया राम.

छवि सुमंगल रूप ललाम, जै जै राघव जय सिया राम.

दशरथनंदन हैं सुखधाम, जपले निश-दीन पावन नाम.

2

मुख मंडल पर दीर्घ हनु है, हाथ विराजत इन्द्र धनु है.

राम से ऊँचा राम का नाम, जै जै रघुपति, जय सिया राम.

छवि सुमंगल रूप ललाम, जै जै राघव जय सिया राम.

दशरथनंदन हैं सुखधाम, जपले निश-दीन पावन नाम.

3

पीत पीतांबर कटि पर सोहे, आस दरस की निश-दिन मोहे.

सपनन जाऊँ मैं राम के धाम, जै जै रघुपति, जय सिया राम.

छवि सुमंगल रूप ललाम, जै जै राघव जय सिया राम.

दशरथनंदन हैं सुखधाम, जपले निश-दीन पावन नाम.

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(371)

Prayer, Krishna is Friend, 3711

सखा कन्हैया

पिता आप हो, आप हो मैया, आप हो बंधु, सखा कन्हैया.

आप ज्ञान धन अर्थ संपदा, धर्म काम भव मोक्ष रचैया.

आप ज्ञान धन अर्थ संपदा, धर्म काम भव मोक्ष रचैया.

1

आप हमारे एक सहारे, भव सागर के निकट किनारे.

हरे मुरारे सखे दुलारे, बीच भँवर से तुम्हें पुकारें.

आप हो नैया तुम्ही खेवैया, पाहि सभी को सखा कन्हैया.

आप ज्ञान धन अर्थ संपदा, धर्म काम भव मोक्ष रचैया.

2

आज हमारे भाग्य हैं जागे, भव तारक प्रभु खड़े हैं आगे.

आप सहारे, तुम्ही सुखारे, अरज हमारी सुनो पियारे.

नंद छैया, मेरे रमैया, त्राहि जगत को सखा कन्हैया.

आप ज्ञान धन अर्थ संपदा, धर्म काम भव मोक्ष रचैया.

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(372)

Prayer, Krishna is helper, 3721

कन्हैया!

मोहे, आवाज देके बुलाना, मेरी नैया कन्हैया चलाना.

मोहे, आवाज देके बुलाना, मेरी नैया कन्हैया चलाना.

1

रथ अर्जुन का तूने चलाया, पार रेड़ा वो तूने कराया.

मेरा बेड़ा फँसा है भँवर में, साथ मेरा है तूने निभाना.

मोहे, आवाज देके बुलाना, मेरी नैया कन्हैया चलाना.

2

पथ में तूफान आए या आँधी, द्रौपदी शाटिका तूने बाँधी.

मेरी लोगों में उड़ती हँसी है, लाज मेरी है तूने बचाना.

मोहे, आवाज देके बुलाना, मेरी नैया कन्हैया चलाना.

3

काम दीनों के तूने कराये, गर्व हीनों के तूने गिराये.

साँस मेरी गले में अड़ी है, नाथ! मुझको गले से लगाना.

मोहे, आवाज देके बुलाना, मेरी नैया कन्हैया चलाना.

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(373)

Prayer, Krishna is Savior, 3731

कन्हैया, तूही बचैया

अब तेरे सिवा कौन हमारा है कन्हैया.

तूही सहारा है हमें, तूही बचैया.

अब तेरे सिवा कौन हमारा है कन्हैया.

तूही सहारा है हमें, तूही बचैया.

1

हिरणकशिपु जब खंबा रचाया, नरसी बन परलाद बचाया.

ध्रुव भगत को विपद से तारा, नील गगन का तारा करैया.

अब तेरे सिवा कौन हमारा है कन्हैया.

तूही सहारा है हमें, तूही बचैया.

2

दसमुख जब वैदेही भगाया, राक्षस से सीता को बचाया.

जब कुंजर को मकर धराया, तूही जल से उसे बचैया.

अब तेरे सिवा कौन हमारा है कन्हैया.

तूही सहारा है हमें, तूही बचैया.

3

तिरणाव्रत जब आग लगाया, गोकुल पुर को तूने बचाया.

कालिया विष जल में मिलाया, जमुना से तू उसे भगैया.

अब तेरे सिवा कौन हमारा है कन्हैया.

तूही सहारा है हमें, तूही बचैया.

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(377)

Prayer, Krishna’s Grace-3, 3771

प्रभु! तेरे उपकार

हरि रे तेरे, मंगल हैं उपकार.

हरि रे तेरे, मंगल हैं उपकार.

1

सबसे पावन, मन के भावन, पुण्य लगावन आप हैं.

सुख के आवन, दुख के जावन, तुम ही हो आधार.

हरि रे तेरे, मंगल हैं उपकार.

2

ब्रह्म परम हैं, धाम चरम हैं, पूज्य सनातन आप हैं.

निर्मल पायस, प्रेम सुधारस, गंगा की तुम धार.

हरि रे तेरे, मंगल हैं उपकार.

3

नारद शारद, गान स्तुति के, गाते मुनिवर व्यास हैं.

भजत जनन सब, सिमरत निश-दिन, तेरे ही आभार.

हरि रे तेरे, मंगल हैं उपकार.

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(379)

Prayer, Lullaby, Hindi 3781

लोरी गीत         

तू सोजा रे, कृष्ण! नंद के लाला!

तू सुख से सो, गोपाला!

1

सपनों के जग में सुख है, उसमें किसी को दुख है.

उस दुनिया में, साथ मुझे भी लेजा, मैं संग तेरे, ब्रिजबाला!

तू सोजा रे, कृष्ण! नंद के लाला!

तू सुख से सो, गोपाला!

2

तू सबका मीत पियारा, सबके नैनन का तारा.

ब्रज भूमि में, स्वर्ग बसाने, कान्हा! तूने है जादू डाला.

तू सोजा रे, कृष्ण! नंद के लाला!

तू सुख से सो, गोपाला!

3

लोरी ये गाकर माता, कहती है तुझको, ताता!

तू सोजा रे, बिना किसी भी चिंता, राघव तुझको रखवाला.

तू सोजा रे, कृष्ण! नंद के लाला!

तू सुख से सो, गोपाला!

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(380)

Bharat Gaurav, Maharana Pratap Simha, 3801

महाराणा प्रताप सिंह, हिंदी

प्रताप राणा, राजस्थानी, जय जय एकलिंगजी बोले.

गौरी शंकर नटवर भोले! डम डम डम डम डमरू बोले.

प्रताप राणा, राजस्थानी, जय जय एकलिंगजी बोले.

गौरी शंकर नटवर भोले! डम डम डम डम डमरू बोले.

            1         

गंगा बहती काली जटा से, नाग गले में तुमरे डोले.

प्रताप राणा, राजस्थानी, जय जय एकलिंगजी बोले.

2

तांडव नाचत प्रलय कराने, नैन तीसरे तुमने खोले.

प्रताप राणा, राजस्थानी, जय जय एकलिंगजी बोले.

3

त्रिशूलधारी! की मरजी से, कभी शोले कभी पड़ते ओले.

प्रताप राणा, राजस्थानी, जय जय एकलिंगजी बोले.

प्रताप राणा, राजस्थानी, जय जय एकलिंगजी बोले.

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(381)

Bharat Gaurav, Maharaja Chach, 3811

हिंदुभूमि संरक्षक महान राजा चाच

जय! जय! हिंदभूमि की गाएँ.

जन्मभूमि की, मातृभूमि की.

सब मिल जय जय गाएँ, जय! जय! हिंदभूमि की गाएँ.

1

शूर वीर सुत भारत माँ के, रण भूमि पर योद्धा बाँके.

गाथा उनकी आज सुनाएँ.

जय! जय! हिंदभूमि की गाएँ.

2

मर्द बहादुर पुत्र सिंध के, रक्षण कर्ता परम हिंद के.

सद्गुण उनके, आओ गाएँ.

जय! जय! हिंदभूमि की गाएँ.

3

हिंदुभूमि पर हमले आए, रणधीरों ने वे लौटाए.

उनके माथे, तिलक लगाएँ.

जय! जय! हिंदभूमि की गाएँ.

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(382)

Prayer, Mangal Nam Hari Ka, 3821

मंगल नाम हरि का

कहो कहो, मंगल नाम हरि का,

देखो देखो, मंगल काम हरि का.

कहो कहो, मंगल नाम हरि का,

देखो देखो, मंगल काम हरि का.

1

ताड़का मर्दन राम हरि का, कंस निकंदन श्याम हरि का,

भजो भजो, सुंदर नाम हरि का, जपो जपो, सुंदर नाम हरि का.

कहो कहो, मंगल नाम हरि का,

देखो देखो, मंगल काम हरि का.

2

सिया पति हैं सब सुख दाता, राधा रमण हरि विश्व विधाता.

गाओ गाओ, सुंदर नाम हरि का, ध्याओ ध्याओ, सुंदर नाम हरि का.

कहो कहो, मंगल नाम हरि का,

देखो देखो, मंगल काम हरि का.

3

पाप विमोचक राघव जी का, ताप विमोचक माधव जी का,

बोलो बोलो, सुंदर नाम हरि का, लेलो लेलो, सुंदर नाम हरि का.

कहो कहो, मंगल नाम हरि का,

देखो देखो, मंगल काम हरि का.

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(383)

Prayer, Merciful Krishna, 3831

दयालु कन्हैया

नाशयति हरिस्तापं विघ्नं दुःखं पातकम्.

तं माधवमहं वन्दे बधुं मित्रं मातरम्.

श्रीकृष्ण कन्हैया दयालु है, वो स्नेही सखा किरपालु है.

1

इतनी बेदरदी किस बारे, होश में तू आजा प्यारे.

चरण में शरण तू आजा उनके, हो जा तू शरधालु रे.

श्रीकृष्ण कन्हैया दयालु है, वो स्नेही सखा किरपालु है.

2

सरबस पाप हरेंगे तेरे, दुख हरि नास करेंगे तेरे.

मंगल भजन तू गा उनके, हो जा तू निष्ठालु रे.

श्रीकृष्ण कन्हैया दयालु है, वो स्नेही सखा किरपालु है.

3

रट ले नाम तू साँझ सकारे, झट से काम बनेंगे तेरे.

अवगुन कछु छुपा उनसे, हो जा तू धरमालु रे.

श्रीकृष्ण कन्हैया दयालु है, वो स्नेही सखा किरपालु है.

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(384)

Prayer, Nam Jap, 3841

जप ले नाम

जप ले नाम तू निशदिन बंदे, छोड़ बखेड़ा जाना है.

अरे, बुलावा कब आजावे, कल को किसने जाना है.

अरे, बुलावा कब आजावे, कल को किसने जाना है.

1

हर दम नाम है जिसके मुख में, अंत उसका होगा दुख में.

जीवन उसका सदा हि सुख में, बंदा वो ही सयाना है.

अरे, बुलावा कब आजावे, कल को किसने जाना है.

2

अंतकाल जिसका सुमिरण में, जीता उसने स्वर्ग मरण में.

हरि चरणों में, वो जीता है, योगी वो ही महाना है.

अरे, बुलावा कब आजावे, कल को किसने जाना है.

3

काम करे जा राम नाम से, निष्काम कर्म करो तन मन से.

योग सदीयों पुराना है, राग अमर का तराना है.

अरे, बुलावा कब आजावे, कल को किसने जाना है.

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(385)

Prayer, O Hari, Hindi 3851

जोगीया राग

हरि दर्शन

दरशन दीजो हरि मेरे सपनन में.

चरणों की दासी मैं उदासी मेरे मन में.

दरशन प्यासी मेरी अँखियाँ.

दरशन प्यासी मेरी अँखियाँ.

1

आकर कान्हा बंसी सुनाना, जौनसा सुर कहेगी बासुरिया.

आन पडू मैं तुमरी शरणा, तन मन अरपण तुझे सावरिया.

दरशन प्यासी मेरी अँखियाँ.

2

ना तुम श्यामा देर लगाना, मैं तुमरे दरस बिन बावरिया.

जाऊ जब मैं जल को जमुना, आना फोड मेरी गगरिया.

दरशन प्यासी मेरी अँखियाँ.

3

पाकर तेरा नेह ललामा, गोपी करे तेरी चाकरिया.

गाते सुनते तुमरे भजना, भगतन चाहत तेरी चदरिया.

दरशन प्यासी मेरी अँखियाँ.

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(386)

Prayer, O Mahesh, Hindi 3861

महेश

महेश! दुर्गम तेरी माया, तू लीला से जग भरमाया,

धूप कहीं पर है कहीं छाया.

महेश! दुर्गम तेरी माया, तू लीला से जग भरमाया,

धूप कहीं पर है कहीं छाया.

1

साँप गले में डाला तूने, गंगा मैया तेरी जटा में,

आँख तीसरी विनाश लाने, नारी नटेश्वर अनुपम काया.

महेश! दुर्गम तेरी माया, तू लीला से जग भरमाया,

धूप कहीं पर है कहीं छाया.

2

हिरन की छाला तेरी कटी पे, चंदा साजे तेरी जटा में,

पाहि पाहि रे कृपालु प्यारे, दास तुम्हारी शरण में आया.

महेश! दुर्गम तेरी माया, तू लीला से जग भरमाया,

धूप कहीं पर है कहीं छाया.

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(387)

Prayer, Protector Rama, 3871

राम हमारे रक्षक

इस दुनिया में, राम हमारे, कोई फिकर ही नहीं.

अब तो, कोई फिकर ही नहीं.

अब तो, कोई फिकर ही नहीं.

1

राघव प्यारे, विश्व दुलारे, जब हमारे साईं.

तब तो, डर किसी से नहीं.

अब तो, कोई फिकर ही नहीं.

2

कोई आँधी, कोई हानि, खामी किसी की नहीं.

अब तो, खामी किसी की नहीं.

अब तो, कोई फिकर ही नहीं.

3

कोई धोखा, कोई रोका, बाधा किसी से नहीं.

अब तो, बाधा किसी से नहीं.

अब तो, कोई फिकर ही नहीं.

4

कोई रोना, कोई धोना, खुशियों की है लड़ी.

अब तो, खुशियों की है लड़ी.

अब तो, कोई फिकर ही नहीं.

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(388)

Prayer, Raghav Raghav Bol-1, Hindi 3881

राघव राघव बोल

घड़ी-घड़ी, राघव! राघव! बोल, रे,

घड़ी-घड़ी, राघव! राघव! बोल.

हरि बिन, जीवन मिट्टी मोल.

घड़ी-घड़ी, राघव! राघव! बोल.

हरि बिन, जीवन मिट्टी मोल.

1

घर आँगन में, बजे विपिन में, राम-नाम का ढोल.

घड़ी-घड़ी, राघव! राघव! बोल.

हरि बिन, जीवन मिट्टी मोल.

2

नया उजाला पड़े हृदय में, बंद खिड़की खोल.

घड़ी-घड़ी, राघव! राघव! बोल.

हरि बिन, जीवन मिट्टी मोल.

3

जीवन बिता बिना भजन के, मत कर टालम टोल.

घड़ी-घड़ी, राघव! राघव! बोल.

हरि बिन, जीवन मिट्टी मोल.

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(389)

Prayer, Raghupati Raghav-1, Hindi 3891

मारवा राग

रघुपति राघव-1

रघुपति राघव राम दुलारे, सदा दुखों को हरना हमारे.

बिनति करत हम भगतन, सारे.

रघुपति राघव राम दुलारे, सदा दुखों को हरना हमारे.

बिनति करत हम भगतन, सारे.

1

हाथ जोड के शरण में तेरी, तन-मन अर्पण चरण में लीजो.

सुफल सुभग शुभ गान तिहारे.

रघुपति राघव राम दुलारे, सदा दुखों को हरना हमारे.

बिनति करत हम भगतन, सारे.

2

प्रिय जानकी पास सदा ही, पवन तनय प्रभु दास तुम्हारे.

सपनन में प्रभु आओ हमारे.

रघुपति राघव राम दुलारे, सदा दुखों को हरना हमारे.

बिनति करत हम भगतन, सारे.

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(390)

Prayer, Raghupati Raghav-2, Hindi 3901

अगम हरि के काम

रघुपति! अगम है काम तिहारे.

रघुपति! परम है काम तिहारे.

रघुपति! अगम है काम तिहारे.

1

जगत जनों के भय दुस्तारे, संकट सारे राम उतारे.

विघ्न घोर जब राम को घेरे, तब कौन उसे दे सहारे.

रघुपति! अगम है काम तिहारे.

2

निश-दिन पाहि राम सखा रे, भगत जनों को साँझ सकारे.

जब हो अपने पिता दुखारे, तब दूर से राम निहारे.

रघुपति! अगम है काम तिहारे.

3

नई दुल्हनिया आई घर में, पति उसका भेजा हो वन में.

सीता पर जब कष्ट घनेरे, तब कौन है उनको उबारे.

रघुपति! अगम है काम तिहारे.

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(391)

Prayer, Ram Nam Jap-2, Hindi 3911

राम नाम जाप

जप जप राम नाम शत बारी, पार सरत भव सागर तोय.

रट रट राम नाम जून चारी, मिले परम पद, जाने कोय.

जप जप राम नाम शत बारी, पार सरत भव सागर तोय.

1

काम विषय मल धोय के, राम राम कहि कोय.

मन सुमिरन में खोय के, नाम काम का होय.

जप जप राम नाम शत बारी, पार सरत भव सागर तोय.

2

दान दिया दिल खोल के, बिन भीतर से रोय.

सद् बुद्धि का दान वो, काम ज्ञान का होय.

जप जप राम नाम शत बारी, पार सरत भव सागर तोय.

3

जपन तपन मन मोड़ के, सर्व दिशा से तोड़.

एक चित्त को जोड़ के, जाप ध्यान का होय.

जप जप राम नाम शत बारी, पार सरत भव सागर तोय.

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(392)

Prayer, Ram Nam-3, Hindi 3921

हरि नाम

कहो हरि का नाम, जीवन बीते रे.

बिना हरि के जाप, सब पल तीते रे.

कहो हरि का नाम, जीवन बीते रे.

1

शस्त्रधारी जब राम हरि हैं, वहाँ दुखों का नाम नहीं है.

छोड़ हरि पर भार, रक्षक हैं तेरे.

कहो हरि का नाम, जीवन बीते रे.

2

जिस कण में रोशनी भरी है, उस कण की चेतना हरि हैं.

जोड़ हरि से प्यार, ईश्वर हैं तेरे.

कहो हरि का नाम, जीवन बीते रे.

3

भव सागर के बीच खड़ा है, घिर घिर संकट आन पड़ा है.

सौंप हरि को नाव, केवट हैं तेरे.

कहो हरि का नाम, जीवन बीते रे.

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(393)

Prayer, Rama Avatar-1, Hindi 3931

राम विष्णु का अवतार

राम विष्णु का है अवतारा, असुर निकंदन सिरजनहारा.

राम विष्णु का है अवतारा, सज्जन रक्षक हरि रघुबीरा.

राम विष्णु का है अवतारा, असुर निकंदन सिरजनहारा.

1

अधम धरा पर जब-जब छाते, प्रभु नर रूप में तब तब आते.

काम ये उनको लगे पियारा, भव सागर का वही किनारा.

राम विष्णु का है अवतारा, असुर निकंदन सिरजनहारा.

2

शिव शंकर है प्रलय को लाता, ब्रह्म विधाता, विष्णु चलाता.

राम रमैया परम सुखारा, हरि! हरि! जिसने आर्त पुकारा.

राम विष्णु का है अवतारा, असुर निकंदन सिरजनहारा.

3

राम रतन सुंदर अभिरामा, चारु चरित सिमरूँ सियरामा.

भजले नाम राम का प्यारा, नर योनि नहीं मिलै दुबारा.

राम विष्णु का है अवतारा, असुर निकंदन सिरजनहारा.

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(394)

Prayer, Ram Nam Jap-3, Hindi 3941

नामजपो भवतु, हिंदी

नामजपो भवतु, तन-मन से,

नाम सदा वसतु, स्मरणन में.

1

दशरथनंदम्, जानकी छंदम्,

रघुकुलकुंतम्, भज रे अनंतम्.

देह तेरा पततु, चरणन में.

नामजपो भवतु, तन-मन से,

नाम सदा वसतु, स्मरणन में.

2

अमृत अमलम्, मंगल कमलम्,

जन-गण रमणम्, भज हरि सुमनम्.

चित्त तेरा भवतु, दरशन में.

नामजपो भवतु, तन-मन से,

नाम सदा वसतु, स्मरणन में.

3

पावन स्वामिम्, शुभफल दायिम्,

सागर तरणम्, भव भय हरणम्.

समय तेरा वहतु, भजनन में.

नामजपो भवतु, तन-मन से,

नाम सदा वसतु, स्मरणन में.

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(395)

Prayer, Rama Nam-3, Hindi 3951

राम तन-मन में

राम बसा है तन-मन मेरे, साँस वही और प्राण वही.

राम बने हैं रक्षक मेरे, हर दम जपूँ में नाम वही.

राम बसा है तन-मन मेरे, साँस वही और प्राण वही.

राम बने हैं रक्षक मेरे, हर दम जपूँ में नाम वही.

1

नाम है मुख में साँझ सकारे, राम हैं दुख में पास हमारे.

दूर हुए जो गम थे घेरे, अब जान वही, वरदान वही.

राम बसा है तन-मन मेरे, साँस वही और प्राण वही.

राम बने हैं रक्षक मेरे, हर दम जपूँ में नाम वही.

2

राघव मेरी डोर सँभारे, नाव लगे भव पार किनारे.

दूर हुए हैं जनम के फेरे, अभिमान वही, अभिधान वही.

राम बसा है तन-मन मेरे, साँस वही और प्राण वही.

राम बने हैं रक्षक मेरे, हर दम जपूँ में नाम वही.

3

काम मेरे सब नाम उचारे, ज्ञान ध्यान सब उसी विचारे.

राम बसा है तन-मन मेरे, साँस वही और प्राण वही.

राम बने हैं रक्षक मेरे, हर दम जपूँ में नाम वही.

दूर हुए अब तम के अँधेरे, खान वही और, पान वही.

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(396)

Prayer, Rama’s Abode, 3961

राम का धाम

हरि रे तेरो, धाम परम सत् नाम.

हरि रे तेरो, धाम परम सत् नाम.

1

शाँति निकेतन वही जहाँ से, लौटन का नहीं काम.

हरि रे तेरो, धाम परम सत् नाम.

2

बिन गल माला शीश तिलक के, पैदल घटत पर्याण.

हरि रे तेरो, धाम परम सत् नाम.

3

बैठ मजे से रथ में यम के, बिना दिये कछु दाम.

हरि रे तेरो, धाम परम सत् नाम.

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(397)

Prayer, Rama-Krishna-2, Hindi 3971

एक देह दो नाम

राम मनोहर दशरथ नंदन, गोकुल वाला हरि घनश्याम.

एक देह के दो-दो नाम.

एक देह के दो-दो नाम.

1

नर अवतारी देवकी नंदन, साधु रक्षक, दुष्ट निकंदन.

नर-नारायण वो भगवान, एक रूप में दो-दो काम.

एक देह के दो-दो नाम.

2

कर्म योग जो कहे जमाना, सांख्य योग उसको ही माना.

राह वही दो हैं अंजाम, एक योग में दो-दो ज्ञान.

एक देह के दो-दो नाम.

3

बेटी किसी की कही है माता, किसी का बेटा किसी का पिता.

उसी धूप से बनती छाँव, एक द्वंद्व में दो-दो भाव.

एक देह के दो-दो नाम.

4

राम रमैया कृष्ण कन्हैया, उभय उबारे भव से नैया.

श्याम कहो हरि बोलो राम, एक शब्द में दो-दो नाम.

एक देह के दो-दो नाम.

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(398)

Prayer, Rama-Sita-2, Hindi 3981

राम-सिया

आओ संतन, आओ भगतन, राम-सिया के करिए कीर्तन.

आओ संतन, आओ भगतन, राम-सिया के करिए कीर्तन.

1

जपा कमल के फूल चढ़ाओ, ज्योत जलाओ, भोग लगाओ.

प्रसाद पाओ मंगल वाला, राम-सिया को करके वन्दन.

आओ संतन, आओ भगतन, राम-सिया के करिए कीर्तन.

2

राम पिता हैं, सीता माता, राम-सिया हैं शुभ वर दाता.

आओ सत् जन, राम-सिया के, पावन आशिष करिए अर्जन.

आओ संतन, आओ भगतन, राम-सिया के करिए कीर्तन.

3

नाम राम के और सिया के, परम प्रेम से करिए सुमिरण.

दीन दयाला राम-सिया के, ध्यान लगा कर करिए चिंतन.

आओ संतन, आओ भगतन, राम-सिया के करिए कीर्तन.

4

हाथ जोड़ कर, शीश झुका कर, जय जय बोलो राम-सिया की.

निर्मल हिरदय, तन मन अपना, राम-सिया को करिए अर्पण.

आओ संतन, आओ भगतन, राम-सिया के करिए कीर्तन.

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(399)

Bharat Gaurav, Maha Rana Sanga, 3991

महावीर राणा सांगा, हिंदी

महावीर मेरा, महा सांगा राणा.

महावीर मेरा, महा सांगा राणा.

1

किसी शस्त्र से ना, गिरा सूरमा ये.

किसी दुक्ख से ना, दुखा आतमा ये.

खुशी से इसी के, स्तुति गीत गाना.

महावीर मेरा, महा सांगा राणा.

2

इसे देह पर घाव अस्सी हुए थे.

अगर पाँव, कर, आँख आहत भए थे.

तभी जंग में जीतता ये शहाणा.

महावीर मेरा, महा सांगा राणा.

3

इसे धर्मवीरों का है वीर माना.

इसे कर्मवीरों का भी वीर माना.

महा शूर योद्धा यही एक जाना.

महावीर मेरा, महा सांगा राणा.

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(400)

Prayer, Satyanarayan-4, Hindi 4001

सत्यनारायण प्रसाद

सत्य प्रसाद के एक कण में, ऐसा जादू होता है.

हर नारी नर एक छण में, पाप अपने धोता है.

सत्य प्रसाद के एक कण में, ऐसा जादू होता है.

1

सत्य कथा के नित्य श्रवण में, ऐसी ऊर्जा शक्ति होती है.

कोई भी व्यक्ति, जिसमें भक्ति, भव से मुक्ति पाता है.

सत्य प्रसाद के एक कण में, ऐसा जादू होता है.

2

सत्य व्रत के पूजा पाठ में, ऐसा यशबल होता है.

पूजक अपने पाप विनश कर, बीज पुण्य के बोता है.

सत्य प्रसाद के एक कण में, ऐसा जादू होता है.

3

सत्य देव का नाम सुमिरन, ऐसा प्रभाव रखता है.

पापी नर भी पाप छोड़ कर, पुण्य फलों को चखता है.

सत्य प्रसाद के एक कण में, ऐसा जादू होता है.

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(401)

Prayer, Selflessnes-2, Hindi 4011

भद्रता

भद्रं श्रुणोमि कर्णाभ्यां भद्रं वाक्यं मुखेन .

भद्रं पश्यामि चक्षुर्भ्यां भद्रेच्छां मनसा सदा.

भद्र सुनूँ मैं, भद्र देखूँ मैं, भद्र गहूँ मैं, भद्र कहूँ.

भद्र सुनूँ मैं, भद्र देखूँ मैं, भद्र गहूँ मैं, भद्र कहूँ.

1

संत जनन का, दुखी दीनन का, अकिंचनों का, हाथ धरूँ, मैं.

धरती माँ का, जन्म दाती का, ज्ञान देवी! आभारी रहूँ.

भद्र सुनूँ मैं, भद्र देखूँ मैं, भद्र गहूँ मैं, भद्र कहूँ.

2

प्रभु चरणन में, शुभ सुमिरण में, सदा शरण में, दास रहूँ, मैं.

नित्य करम से, सत्य धरम से, नम्र हृदय से, क्लेश सहूँ.

भद्र सुनूँ मैं, भद्र देखूँ मैं, भद्र गहूँ मैं, भद्र कहूँ.

3

तन निर्मल से, मन निर्मम से, धन निर्धन को, दान करूँ, मैं.

नाम प्रभु के, काम प्रभु के, अर्पण मम मैं, प्राण करूँ.

भद्र सुनूँ मैं, भद्र देखूँ मैं, भद्र गहूँ मैं, भद्र कहूँ.

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(402)

Prayer, Shankar Shankar, 4021

शंकर शंकर, हिंदी

शंकर शंकर गाता जा रे, नाम शिवा के, प्यारे.

जनम जनम के पाप उबारे, तन के ताप उतारे.

1

घेरेंगे जब मेघ घनेरे, घोर अंधेरे कारे.

या छेड़ेंगे भय दुस्तारे, मन वीणा की तारें.

छोड़ेंगे यदि साथ पियारे, भवसागर मझधारे.

शंकर शंकर गाता जा रे, नाम शिवा के, प्यारे.

2

बोलेंगे जब दुनियावारे, निर्दय शबद दुखारे.

या काटेंगे साँप विषारे, भूखे मुख को पसारे.

रोएँगे गर गम के मारे, तेरे प्राण बिचारे.

शंकर शंकर गाता जा रे, नाम शिवा के, प्यारे.

3

झेलेंगे तब शिवजी प्यारे, दुख तन मन के सारे.

खेलेंगे प्रभु खेल सुखारे, हरने ताप तिहारे.

लेलेंगे शिव परम कृपारे, शरण में साँझ सकारे.

शंकर शंकर गाता जा रे, नाम शिवा के, प्यारे.

शंकर शंकर गाता जा रे, नाम शिवा के, प्यारे.

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(403)

Prayer, Sharanam Rama, 4031

शरणं रामा

शरणं रामा, शरणं नाथा, पाहि प्रभु रे! शरणं देवा.

शरणं रामा, शरणं नाथा, पाहि प्रभु रे! शरणं देवा.

1

सुंदर रूपा, वन्दन भूपा, शरणं शरणं, सद् गुरु देवा.

शरणं रामा, शरणं नाथा, पाहि प्रभु रे! शरणं देवा.

2

शुभ वर दाता, हरि रघुनाथा, त्राहि त्राहि भोः! सद् गुरु देवा.

शरणं रामा, शरणं नाथा, पाहि प्रभु रे! शरणं देवा.

3

मंगल छाया, तेरी माया, स्वस्ति स्वस्ति ओम्! सद् गुरु देवा.

शरणं रामा, शरणं नाथा, पाहि प्रभु रे! शरणं देवा.

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(404)

Prayer, Shirdi Sai, 4041

जाको राखे साँई

जाको राखे शिरड़ी साँई, ताको मार सके ना कोई.

जाको राखे शिरड़ी साँई, ताको मार सके ना कोई.

1

काहे प्रभु से, करे लड़ाई, कृष्ण जगत के एक हैं साँई.

जाको राखे शिरड़ी साँई, ताको मार सके ना कोई.

2

छल बल तज के, संयम धर के, सोच जरा मन में हरजाई!

जाको राखे शिरड़ी साँई, ताको मार सके ना कोई.

3

निर्मल मन से, निश्चल तन से, बात सुनो रे मेरे भाई!

जाको राखे शिरड़ी साँई, ताको मार सके ना कोई.

4

भला देख ले, कहाँ है प्यारे! श्रीधर हैं सबके सुखदाई.

जाको राखे शिरड़ी साँई, ताको मार सके ना कोई.

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(405)

Prayer, Krishna’s Birth-3, Hindi 4051

हरि ओम् हरि ओम्

हरि ओम, ओम, ओम, ओम, बोलो भगतों, बोलो भगतों.

जोर से बजाओ रे मृदंग डमरू.

हरि ओम, ओम, ओम, ओम, बोलो भगतों, बोलो भगतों.

जोर से बजाओ रे मृदंग डमरू.

1

आज है हरि के जनम की लड़ी, जनम की लड़ी.

गोपी के मन में है भीड़ बड़ी.

बाजे गोपी के पायल, बाजे घुँघरू, हो! बाजे घुँघरू.

जोर से बजाओ रे मृदंग डमरू.

हरि ओम, ओम, ओम, ओम, बोलो भगतों, बोलो भगतों.

जोर से बजाओ रे मृदंग डमरू.

2

आज किशन के जनम की घड़ी, जनम की घड़ी.

भगतों के मन में उमंग चढ़ी.

बाजे ढोलक मंजिरा, बाजे तुबरू, हो! बाजे तुबरू.

जोर से बजाओ रे मृदंग डमरू.

हरि ओम, ओम, ओम, ओम, बोलो भगतों, बोलो भगतों.

जोर से बजाओ रे मृदंग डमरू.

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(406)

Prayer, Shiva Chandadhari-2, Hindi 4061

मालकंस गाग

चंदाधारी

भला करो प्रभु चंदाधारी, व्यथा हरो शिव भव भंडारी.

भला करो प्रभु चंदाधारी, व्यथा हरो शिव भव भंडारी.

1

रूप परम शिव शंकर गौरी, छवि निरंजन सुंदर सारी.

दया करो, कृपा करो, रक्षा करो, प्रभु सब सुख कारी.

भला करो प्रभु चंदाधारी, व्यथा हरो शिव भव भंडारी.

2

काम अथक दुख भंजन कारी, धाम अजब तव रंजन कारी.

दया करो, कृपा करो, रक्षा करो, प्रभु भव भय हारी.

भला करो प्रभु चंदाधारी, व्यथा हरो शिव भव भंडारी.

3

माया अगम तव, बंबं भोले! छाया गजब तव अंबर डोले.

दया करो, कृपा करो, रक्षा करो, प्रभु जग अवतारी.

भला करो प्रभु चंदाधारी, व्यथा हरो शिव भव भंडारी.

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(407)

Prayer, Shiva Om, 4071

शिव ओम्

शिव ओ-म् हरि ओम् शिव, बोलो सदा,

शिव ओ-म् हरि ओम् शिव, गाओ सदा.

1

नमो नमो नमो नमो गजानना,

जन गण तारो महेश्वरा,

नमो नमो नमो नमो नारायणा.

शिव ओ-म् हरि ओम् शिव, बोलो सदा,

शिव ओ-म् हरि ओम् शिव, गाओ सदा.

2

शिव शिव शंकर दिगंबरा, हमको वर दो सदाशिवा,

शिव शिव मंगल निरंजना.

शिव ओ-म् हरि ओम् शिव, बोलो सदा,

शिव ओ-म् हरि ओम् शिव, गाओ सदा.

3

जय जय जय जय जटाधरा,

तुम जग सुंदर सुदर्शना, जय जय जय जय जनार्दना.

शिव ओ-म् हरि ओम् शिव, बोलो सदा,

शिव ओम् हरि ओम् शिव, गाओ सदा.

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(409)

Prayer, Shiva Tilana Tarana, 4091

शिव तिलाना तराना

तूम तन नन नन दीम्, तदारे दानी.

नित देरे ना, तदारे तदारे दानी.

तूम तन नन नन दीम्, तदारे दानी.

तूम तन नन नन दीम्, तदारे दानी.

1

शंख नाद कराहिं शिव, अनहद छंद तरंग.

भोले शंकर नाचिबे, बाजे डमरू संग.

तदारे दानी, तूम तन नन नन दीम्, तदारे दानी.

तूम तन नन नन दीम्, तदारे दानी.

नित देरे ना, तदारे तदारे दानी.

तूम तन नन नन दीम्, तदारे दानी.

2

कित्, कित्, तकित् तका कित्.

तांडव नृत्य दिखावै, ता दीम् दीम् दीम्.

दीम् तन नन नन, भूमंडल सब दंग, तदारे दानी.

तूम तन नन नन दीम्, तदारे दानी.

नित देरे ना, तदारे तदारे दानी.

तूम तन नन नन दीम्, तदारे दानी.

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(410)

Prayer, Shiva Nam 4101

भज ले शिव का नाम

भज ले प्यारे शिव का नाम, हो जावेंगे तेरे काम.

रटता जा जप सुबहो-शाम, पाएगा तू बैकुठ धाम.

भज ले प्यारे शिव का नाम, हो जावेंगे तेरे काम.

1

जब-जब संकट घिर कर आवे, बीते दिनों की याद सतावे.

मन में जपियो शिव का नाम, मिट जावेंगे दुःख तमाम.

भज ले प्यारे शिव का नाम, हो जावेंगे तेरे काम.

2

भक्त प्रलादा बालक ज्ञानी, माया हरि की उसने जानी.

आपत में थे उसके प्राण, नरसिंह बचायो उसकी जान.

भज ले प्यारे शिव का नाम, हो जावेंगे तेरे काम.

3

द्रौपदी को हरि चीर बढ़ायो, उस अबला की लाज बचायो.

जब मुश्किल में हो इन्सान, एक सहारा शिव भगवान.

भज ले प्यारे शिव का नाम, हो जावेंगे तेरे काम.

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(411)

Prayer, Shri Rama Naman, 4111

श्री राम नमन

नमन करूँ जगदीश को, झुक कर बारंबार.

लगन धरूँ अवनीश की, राम नाम सुखकार.

नमन करूँ जगदीश को, झुक कर बारंबार.

लगन धरूँ अवनीश की, राम नाम सुखकार.

1

मनन मगन मन जोड़ के, विनय भक्ति के साथ.

चरण शरण प्रभु रामजी, वन्दन शत शत बार.

नमन करूँ जगदीश को, झुक कर बारंबार.

लगन धरूँ अवनीश की, राम नाम सुखकार.

2

भजन रटन नित आपका, मन में हो रघुवीर.

धो डालेगा पाप को, भव सागर हो पार.

नमन करूँ जगदीश को, झुक कर बारंबार.

लगन धरूँ अवनीश की, राम नाम सुखकार.

3

पर जन तन धन देख के, हिरदय हो अधीर.

सफल सकल मम हो सदा, राघवजी! करतार!.

नमन करूँ जगदीश को, झुक कर बारंबार.

लगन धरूँ अवनीश की, राम नाम सुखकार.

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(412)

Prayer, Shri Somanath-2, Marathi-4121

जय श्री सोमनाथ! मराठी

जय एकलिंग जी भोले- -! जय सोमनाथ जी भोले- -!

1

दैवी तुमची सुंदर काया, मंगल तुमची माया.

शुभ शुभ आम्हां तू वर दे रे! बं बं बं बं बं बं भोले!

डम डम डम डम डमरू बोले.

जय एकलिंग जी भोले- -! जय सोमनाथ जी भोले- -!

2

हे शंकर! तू ज्योतिर्लिंगा! गंगाधर तू शिवअंगा!

तव द्वारावरी पूजक आले, बं बं बं बं बं बं भोले!

डम डम डम डम डमरू बोले.

जय एकलिंग जी भोले- -! जय सोमनाथ जी भोले- -!

3

सांब सदाशिव शंभु महेशा, त्रिपुरारी जगदीशा!

जय जय घोष तुझा हा चाले, बं बं बं बं बं बं भोले!

डम डम डम डम डमरू बोले.

जय एकलिंग जी भोले- -! जय सोमनाथ जी भोले- -!

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(413)

Prayer, Shri Somanath, Hindi 4131

सोमनाथ जी

सोमनाथ का पावन धाम, ज्योतिर्लिंग श्री शिव भगवान.

एकलिंग जी! शुभ दो वरदान, शंकर भोले किरपावान.

1

तुमरा मंदिर स्वर्ग समाना, तुमरी मूरत स्वर्ण ललामा.

पूजन कीर्तन तुमरे, भोले! भगतन को देता सुखदान.

सोमनाथ का पावन धाम, ज्योतिर्लिंग श्री शिव भगवान.

एकलिंग जी! शुभ दो वरदान, शंकर भोले किरपावान.

2

शिव का मंदिर सर्वसनातन, ऋषि मुनियों ने कीन्हा स्थापन.

नंदीश्वर! तुम भाते मोहे, सबसे मंगल तुमरा नाम.

सोमनाथ का पावन धाम, ज्योतिर्लिंग श्री शिव भगवान.

एकलिंग जी! शुभ दो वरदान, शंकर भोले किरपावान.

3

त्रिशूलधारी तुम त्रिपुरारी! डमरूधर तुम जय गंगाधर!

विघ्नविनाशक तुमको माना, भव में ऊँचे तुमरे काम.

सोमनाथ का पावन धाम, ज्योतिर्लिंग श्री शिव भगवान.

एकलिंग जी! शुभ दो वरदान, शंकर भोले किरपावान.

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(414)

Prayer, Sarita, Sindhu River, 4141

सिंधु सरिता

सात नदियों में रानी है सिंधु, सात नदियों में दीदी है सिंधु.

सात नदियों में वायव्य सिंधु, सारी नदियों की सिंधु है इंदु.

सात नदियों में रानी है सिंधु, सात नदियों में दीदी है सिंधु.

1

निकली कैलाश पर्बत शिखा से, शिव शंकर के चरणों को छू के.

होके पावन तू आयी धरा पे, तू ही आर्यों का है मान बिंदु.

सात नदियों में रानी है सिंधु, सात नदियों में दीदी है सिंधु.

2

तुझको आकर वो सतलज मिली है, तुझको बियास रानी मिली है.

तुझको चीनाब, झेलम मिलीं हैं, पाँच नदियों का तू नीरसिंधु.

सात नदियों में रानी है सिंधु, सात नदियों में दीदी है सिंधु.

3

तेरे तीरथ की मंगल है माया, तेरे जल में जो देही समाया.

उसने साक्षात है स्वर्ग पाया, तू है भारत के माथे का सिंदूर.

सात नदियों में रानी है सिंधु, सात नदियों में दीदी है सिंधु.

4

तेरे तट पर सिकंदर खड़ा था, उससे पोरस घमासाँ लड़ा था.

हार कर शत्रु लौट पड़ा था, तेरी किरपा से जीते थे हिंदू.

सात नदियों में रानी है सिंधु, सात नदियों में दीदी है सिंधु.

5

तेरे जल की सुमंगल वो धारा, आज हमरा करेगी उद्धारा.

राणा हमारा है राजा दुलारा, प्रिय भारत का जो भारतेंदु.

सात नदियों में रानी है सिंधु, सात नदियों में दीदी है सिंधु.

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(415)

Prayer, Sun God-1, Hindi 4151

सूर्य देवता

अंशु प्रभा सूरज की प्यारी.

अंशु प्रभा सूरज की प्यारी.

1

सागर अंबर नदिया सुंदर, पर्वत तरु उजलाती.

भूमंडल की शोभा न्यारी, चमचम धरती सारी.

अंशु प्रभा सूरज की प्यारी.

2

नारद किन्नर अंबा शंकर, अष्ट मैं रदेव अवतारी.

अंशुमाली आरती तेरी, गात हैं सब नर नारी.

अंशु प्रभा सूरज की प्यारी.

अंशु प्रभा सूरज की प्यारी.

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(416)

Prayer, Sun God-2, Hindi 4161

सूरज प्रभु!

सूरज प्रभु! तू है दिन का मणि, रात चंदा में तूने भरी रोशनी.

सूरज प्रभु! तू है दिन का मणि, रात चंदा में तूने भरी रोशनी.

1

अग्नि का तू देवता, रश्मि से तू देखता.

तेरा हि है, विश्व को आसरा, शीत चंदा में तेरी हि है चाँदनी.

सूरज प्रभु! तू है दिन का मणि, रात चंदा में तूने भरी रोशनी.

2

पूजा तेरी हम करें, तेरा हि व्रत हम धरें.

पावन तेरी, प्रातः आराधना, तेरी भक्ति करें भावना से सनी.

सूरज प्रभु! तू है दिन का मणि, रात चंदा में तूने भरी रोशनी.

3

तारों का तू है पति, तू ही ग्रहों की गति.

रथ को तेरे, सात घोड़े लगे, आसमाँ में तेरी है सवारी बनी.

सूरज प्रभु! तू है दिन का मणि, रात चंदा में तूने भरी रोशनी.

4

तूही विवस्वान है, आदि मनु तू हि है.

अवधेश तू, तू हि श्री राम है, सूर्यवंशी घराने का तू है धनी.

सूरज प्रभु! तू है दिन का मणि, रात चंदा में तूने भरी रोशनी.

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(417)

Prayer, Sun God-3, Hindi 4171

सूर्य देवता

जय अग्नि रथ सूर्य विधाता, नवग्रह भूमंडल के धाता.

पावन पूनित अंशु दाता, कृषि ऋषि-मुनि गुण तुमरे गाता.

जय अग्नि रथ सूर्य विधाता, नवग्रह भूमंडल के धाता.

1

पुष्प बिल्व जल गंध चंदना, धूप दुग्ध मधुपर्क वन्दना.

पूजा पाठ तव अर्चन ध्याना, देत शील संतति सुख नाना.

जय अग्नि रथ सूर्य विधाता, नवग्रह भूमंडल के धाता.

2

स्वर्ण कांति शुचि सवितुर भानु, शाश्वत अक्षर पवित्र जानूँ.

अष्ट अश्व रथ अद्भुत माया, अग्नि देव रवि विशाल काया.

जय अग्नि रथ सूर्य विधाता, नवग्रह भूमंडल के धाता.

3

परम पुण्य गुण तुमरे जेते, चार वेद उनको नित गाते.

तुमरी महती पार पावें, ऋण तुमरे सब प्राणी ध्यावें.

जय अग्नि रथ सूर्य विधाता, नवग्रह भूमंडल के धाता.

4

सृष्टि बीज तुम अंबरतारे, जलत तमस् अंधकार घनेरे.

पारस परिस कुधातु सुहावे, तुमरी शक्ति दिपै सब ठावे.

जय अग्नि रथ सूर्य विधाता, नवग्रह भूमंडल के धाता.

5

स्वास्थ्य बुद्धि बल सुख के दाता, आधि व्याधि आमय के त्राता.

आरत अर्थी तपस्वी योगी, सूर्य नमत दीर्घायु भोगी.

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(418)

Prayer, Sanskrit, Surya Saptakam-4181

सूर्यसप्तकम्

1

सूर्यस्य परमं दानं शृणुध्वं खलु सज्जनाः,

भास्वरः पद्मिनीनाथो दिनमणिर्दिवाकरः,

सूर्यस्य परमं दानं शृणुध्वं खलु सज्जनाः.

2

आदित्यस्तारकानाथो मिहिरः प्रभाकरः,

भानुर्दहति नः पीडाम्-अहस्करोऽरुणो रविः,

सूर्यस्य परमं दानं शृणुध्वं खलु सज्जनाः.

3

ग्रहाणामादिरर्कः ध्वान्तं हरति भास्करः,

सौभाग्यदायकः पूर्णः शरीरारोग्यवर्धकः,

सूर्यस्य परमं दानं शृणुध्वं खलु सज्जनाः.

4

दृष्टिं ददाति दिव्यं प्राणं दिवसेश्वरः,

सिद्धिं करोति भक्ताय कृत्वा तं स्वस्थमानसम्,

सूर्यस्य परमं दानं शृणुध्वं खलु सज्जनाः.

5

तेजो ददाति गात्रे आधिव्याधिविनाशकः,

सुर्यो वह्निसमायुक्तो भूतप्रेतनिवारकः,

सूर्यस्य परमं दानं शृणुध्वं खलु सज्जनाः.

6

पुष्णाति हृदये स्थीं मार्तण्डो भुवनेश्वरः,

अतः सूर्यदेवो हि सर्वदेवनमस्कृतः,

सूर्यस्य परमं दानं शृणुध्वं खलु सज्जनाः.

7

निर्विकल्पं विवस्वन्तं दीप्तांतांशुं प्रणमाम्यहम्,

अर्घ्यं चन्दनं पुष्पं बिल्वं समर्पयामि तम्,

सूर्यस्य परमं दानं शृणुध्वं खलु सज्जनाः.

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(419)

Prayer, Valmik Vandana, Hindi 4191

वाल्मीकि स्तवन

हे हरि चरित ग्रंथ दाता, स्तवन हमरे लीजियो.

लीजियो वन्दन हमारे, ज्ञान हमको दीजियो.

उद्धार हमरा किजियो.

हे हरि चरित ग्रंथ दाता, स्तवन हमरे लीजियो.

1

कविता का अवतार तुम्हीं हो, राम-कथा करतार तुम्हीं हो.

तुलसी का सुविचार तुम्हीं हो, ज्ञान का भँडार हो.

हे हरि चरित ग्रंथ दाता, स्तवन हमरे लीजियो.

2

द्य द्य पद शरण तिहारे, कवि कोकिल गण चरण तिहारे.

शारद का वरदान तुम्हीं हो, कुदरत का अनुदान हो.

हे हरि चरित ग्रंथ दाता, स्तवन हमरे लीजियो.

3

ऋषि-मुनि को अनुराग है तुमसे, विद्या अमर चिराग है तुमसे.

तुमरे तप से राग हमारे, मुनि! तुम्हें आभार हो.

हे हरि चरित ग्रंथ दाता, स्तवन हमरे लीजियो.

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(420)

Prayer, Vitthal-Rukmini, Marathi 4201

विठ्ठल रुक्मिणी वंदना, मराठी

विठ्ठलरुक्मिणीस्तोत्रं पठेद्यो भक्तिना नरः

कृत्वा मुक्तिं स पापेभ्यः शाश्वतं धाम तं सुखम्.

सखे, विठ्ठल अपुला दाता रे, गडे, रुक्मिणी अपुली, माता रे.

सखे, विठ्ठल अपुला, दाता रे, गडे, रुक्मिणी अपुली, माता रे.

1

उभे विटेवरी, हात कटेवरी, विठ्ठल रुक्मिणी, देव खरे.

अरे, तेच आपुले, त्राता रे. सखे, विठ्ठल अपुला, दाता रे,

गडे, रुक्मिणी अपुली, माता रे.

2

गळा तुळशी माळा, पायात चाळा, सावळा काळा, दुःखांस आळा.

अरे, तेचि सृष्टि चे, ज्ञाता रे. सखे, विठ्ठल, अपुला दाता, रे,

गडे, रुक्मिणी अपुली, माता रे.

3

गंध पुष्प मेवा, नैवेद्य ठेवा, करा भजन सेवा, नमस्कार देवा.

अरे, धन्य धन्य भगवंता, रे. सखे, विठ्ठल अपुला, दाता रे,

गडे, रुक्मिणी, अपुली माता रे.

4

म्हणे चंद्रभागा, शुभ वर मागा, मीच रखुमाई, माता रे.

अरे, अमृत हे जळ, आता रे. सखे, विठ्ठल अपुला, दाता रे,

गडे, रुक्मिणी, अपुली माता रे.

5

इथे तुकोबा, अभंग गातो, विठ्ठल-विठ्ठल, गरजत जातो.

तोच आमुचा, भ्राता रे, अरे, भजन सुमंगल, स्रोता रे.

सखे, विठ्ठल अपुला, दाता रे, गडे, रुक्मिणी अपुली, माता रे.

6

शुभ वर द्यावा, पंढरीनाथा, तुला दंडवत, टेकोनि माथा.

अरे, तूच महान विधाता रे. सखे, विठ्ठल अपुला, दाता रे,

गडे, रुक्मिणी अपुली, माता रे.

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(421)

Prayer, Sanskrit, Vyas Vandana-4211

व्यास मुनि वंदना, संस्कृत

महाकविवरो रविर्मतिमयो मुने व्यास त्वम्.

त्वया विरचितं गुरो सुललितं बृहद्वाङ्मयम्.

तथा लिखितं सनातनकृतं महाभारतम्.

करोमि नमनं प्रभुं परमव्यासद्वैपायनम्.

1

कृष्णद्वैपायनः कृष्णो वेदव्यासेति संज्ञितः

ज्ञानी विशालबुद्धिश्च व्यासो ज्ञातो महामुनिः

महाकविवरो रविर्मतिमयो मुने व्यास त्वम्.

त्वया विरचितं गुरो सुललितं बृहद्वाङ्मयम्.

2.

पाराशरश्च कालेयो व्यासः सूतगुरुस्तथा.

सङ्कलितानि व्यासेन शास्त्राणि दर्शनानि .

महाकविवरो रविर्मतिमयो मुने व्यास त्वम्.

त्वया विरचितं गुरो सुललितं बृहद्वाङ्मयम्.

3

ऋतं कृतं हि व्यासेन वाङ्मयं सार्वभौमिकम्.

वेदपुराणवेदाङ्गसाहित्यममरं ध्रुवम्.

महाकविवरो रविर्मतिमयो मुने व्यास त्वम्.

त्वया विरचितं गुरो सुललितं बृहद्वाङ्मयम्.

4

मुनिना लिखितं विश्वं यद्विश्वे समुपस्थितम्.

व्यासज्ञातं जगत्कृत्स्नं कृतं सार्वलौकिकम्.

महाकविवरो रविर्मतिमयो मुने व्यास त्वम्.

त्वया विरचितं गुरो सुललितं बृहद्वाङ्मयम्.

5

भारतं भारते गीता व्यासेन लिखिता पुरा.

गीतायामद्भुतः पुण्यः संवादः कृष्णपार्थयोः

महाकविवरो रविर्मतिमयो मुने व्यास त्वम्.

त्वया विरचितं गुरो सुललितं बृहद्वाङ्मयम्.

6

गीताया यः सदाचारम्-अनुसरति मानवः

कृष्णभक्तश्च विद्वान्स सर्वपापाद्विमुच्यते.

महाकविवरो रविर्मतिमयो मुने व्यास त्वम्.

त्वया विरचितं गुरो सुललितं बृहद्वाङ्मयम्.

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(424)

Ramayan, Amar Hanuman, 4241

अमर हनुमान

अमर तेरा हनुमान, रे रामा! परम तेरा हनुमान,

गाँऊँ उसके गान, रे रामा! अमर तेरा हनुमान.

अमर तेरा हनुमान, रे रामा! परम तेरा हनुमान.

1

जा कर लंका, सिया खोज के, लाया शुभ पैगाम,

हो रामा! शिष्य तेरा है महान.

अमर तेरा हनुमान, रे रामा! परम तेरा हनुमान.

2

ढूँढन सीता, सेतु बाँधा, मारी एक उड़ान,

हो रामा! सेवक तेरा सुजान.

अमर तेरा हनुमान, रे रामा! परम तेरा हनुमान.

3

लखन जियायै, उड़ा हवा में, ले आया चट्टान,

हो रामा! दास तेरा बलवान.

अमर तेरा हनुमान, रे रामा! परम तेरा हनुमान.

4

दसमुख सेना काट-छाँट के, जीत लिया संग्राम,

हो रामा! जय जय जय हनुमान.

अमर तेरा हनुमान, रे रामा! परम तेरा हनुमान.

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(425)

Ramayan, Ayodhya-2, Hindi 4251

अवध पुरी, हिंदी

अवध पुरी जग से न्यारी, नर सुर ईश्वर की प्यारी.

अवध पुरी जग से न्यारी, नर सुर ईश्वर की प्यारी.

1

सरयू नद के तट पर नगरी, अमृत जल की है गगरी.

अवध पुरी जग से न्यारी, नर सुर ईश्वर की प्यारी.

2

मातु प्रेम सम मंगलकारी, जनपद की प्राण पियारी.

अवध पुरी जग से न्यारी, नर सुर ईश्वर की प्यारी.

3

राम-राज्य की नींव सुनहरी, राम जनम की अधिकारी.

अवध पुरी जग से न्यारी, नर सुर ईश्वर की प्यारी.

4

भारत माँ की प्रेम दुलारी, हम तेरे हैं बलिहारी.

अवध पुरी जग से न्यारी, नर सुर ईश्वर की प्यारी.

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(426)

Ramayan, Be Nice, Hindi 4261

सुनो रे सखे, हिंदी

सुनो कहना सखे मेरा, जमाना सिर नवाएगा.

हटाओ पाप को मन से, ये मौका फिर आएगा.

सुनो कहना सखे मेरा, जमाना सिर नवाएगा.

1

सुधारो भूल अपनी को, भुलादो बैर के कल को.

बनाओ सफल जीवन को, ये सौदा फिर आएगा.

सुनो कहना सखे मेरा, जमाना सिर नवाएगा.

2

बिसारो यार को ऐसे, जगत को जो सताता है.

बिठालो प्यार को दिल में, ये लौटा फिर आएगा.

3

मिला है आज ये मौका, दुबारा फिर आएगा.

संभालो आखरी दम तक, ये दौड़ा फिर आएगा.

सुनो कहना सखे मेरा, जमाना सिर नवाएगा.

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(427)

Ramayan, Chale Lanka Avadh Bihari, 4271

चले लंका अवध बिहारी

चले लंका अवध बिहारी, हो रामा, धनुस जटा धारी,

चले लंका अवध बिहारी, हो रामा, धनुस जटा धारी.

1

      नीर नयनन सकल नर नारी, आरती करत मनहारी,

हो रामा, धनुस जटा धारी,

चले लंका अवध बिहारी, हो रामा, धनुस जटा धारी.

2

सीता चली संग रघुवर प्यारी, अंग पे पीत वसन डारी,

हो रामा, धनुस जटा धारी,

चले लंका अवध बिहारी, हो रामा, धनुस जटा धारी.

3

पीछे लखन परम सुविचारी, राघव सिया का हितकारी,

हो रामा, धनुस जटा धारी,

चले लंका अवध बिहारी, हो रामा, धनुस जटा धारी.

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(428)

Ramayan, Child Shri Rama-1, Hindi 4281

बालक रामचंद्र

मैया! चाँद गगन से ला दो, गेंद सुहाना हमका दै दो.

मैया! चाँद गगन से ला दो, गेंद सुहाना हमका दै दो.

1

इतना रिझौना, इतना लुभौना, कोई खिलौना, नै यो - - -.

मैया! चाँद गगन से ला दो, गेंद सुहाना हमका दै दो.

2

भाग के जाओ, कूद के जाओ, उड़ कर अंबर, जैयो - - -.

मैया! चाँद गगन से ला दो, गेंद सुहाना हमका दै दो.

3

पकड़ो मेरी, उँगली मैया, साथ लखन को, लै लो - - -.

मैया! चाँद गगन से ला दो, गेंद सुहाना हमका दै दो.

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(429)

Ramayan, Child Shri Rama-2, Hindi 4291

माँ! चंदा ला दो.

नीला आसमाँ  - - -, शुभ्र चंद्रमा ..

कहे राम-मुन्ना, हमका, दै दो चंद्र, माँ!

नीला आसमाँ  - - -, शुभ्र चंद्रमा ..

1

गगन में इतना ऊँचा, गेंदवा किसने फेंका

लगता सुहाना कितना, इंदु चंद्र, माँ!

नीला आसमाँ  - - -, शुभ्र चंद्रमा ..

2

बोलो लखन को जावे, गगन से कंदुक लावे.

सारी रात हम सब खेलें, कंज चंद्र, माँ!

नीला आसमाँ  - - -, शुभ्र चंद्रमा ..

3

चंद्र बिंब दर्पण में, दिखलाया जब माता ने.

मुदित राम लेकर कर में, हँसे चंद्रमा.

नीला आसमाँ  - - -, शुभ्र चंद्रमा ..

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(430)

Ramayaniya Holy Chitrakut, 4301

चित्रकूट तीर्थक्षेत्र

चित्रकूट शुचि परम रम्य है, भूमि यहाँ की अति धन्य है.

राम! राम! रव कण कण में है, श्री राम नाम उमँग है.

राम! राम! रव कण कण में है, श्री राम नाम उमँग है.

1

चित्रकूट के वन के अंदर, आश्रम हैं मुनियन के सुंदर.

राम नाम का सुख सुर सागर, सप्त स्वरों के तरंग हैं.

राम! राम! रव कण कण में है, श्री राम नाम उमँग है.

2

चित्रकूट में स्वयं तराशा, विश्वकर्मा स्वर्ग का नक्शा.

पुष्प पर्ण फल तरु पर पंछी, जिनके विविध विध रंग हैं.

राम! राम! रव कण कण में है, श्री राम नाम उमँग है.

3

सघन विपिन में शीतल सुंदर, जल सरिता से धौत सुमंगल.

राम राम रव का रस उज्ज्वल, ये स्वर्ग का एक अंग है.

राम! राम! रव कण कण में है, श्री राम नाम उमँग है.

4

प्रति दिन ऋषि-मुनि जन सुर आते, कवि कोकिल से शुभ वर पाते.

राम नाम रस पी कर जाते, ये रामायण प्रारंभ है.

राम! राम! रव कण कण में है, श्री राम नाम उमँग है.

राम! राम! रव कण कण में है, श्री राम नाम उमँग है.

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(431)

Ramayan, Golden Deer, 4311

जौनपुरी राग

सुवर्ण मृग की कथा

मन मोहक सुनहरा हिरन रंग,

प्रांगन में मोरे क्रीड़त कूदत,

मृग लसित, करत मोरा मनवा दंग.

मन मोहक सुनहरा हिरन रंग.

1

ठुमकत फुदकत नाच नचावे, मृदु छाला मोरा चित्त लुभावे,

चंचल नैनन मन भरमाये, ताहि चाह करत मोहे तंग.

मन मोहक सुनहरा हिरन रंग.

2

मृग की माया सिय नहीं जानी, मारिची को वो मृग मानी,

दृष्टि सिय की भयी दीवानी, तिन ललचावत कंज अंग.

मन मोहक सुनहरा हिरन रंग.

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(432)

Ramayan, My Hanuman Chalisa, 4321

रत्नाकरी हनुमान चालीसा, हिंदी

सदा सहायक राम का, कर्म कुशल महावीर,

राघव दूत महाबली, विद्यु वेग सुधीर.

बाल्मिक-तुलसी की कृपा, जैसे गंगा नीर,

पाप ताप सब भागते, खुलती है तकदीर.

1

जै हनुमान ज्ञान गुण सिंधु, जै कपीश करुणा के इंदु,

2

महावीर! तुम कपि बजरंगी, रामदास हरि परम उमंगी,

3

ऋष्यमूक गिरि तोर निबासा, पम्पा सुंदर सर के पासा,

4

शब्द वेध के निपुण विधाता, विघ्न विनाशक तुम सुख दाता,

5

उड़ कर आसमान का भानू, लील्यो लाल गगन फल जानूँ,

6

तुम ज्ञानी अति चातुर बानी, पवन पुत्र अनुपम तूफानी,

7

क्षण में उड़ कर सागर लाँघा, राम-नाम लिख सेतु बाँधा,

8

अस्त्र शास्त्र श्रुति के तुम ज्ञानी, सरल मधुरतम तुमरी बानी,

9

रावण की वाटिका उजाड़ी, अहिरावण की बाँह उखाड़ी,

10

ढूँढी तुमने सीता माई, राघव को शुभ खबर सुनाई,

11

रावन को तुम बोलेभाई! लौटा दे तू सीता माई

12

अड़बंगा नहिँ तुमरी माना, पूँछ जराई वह दीवाना.

13

तुमने युद्ध बजाया डंका, फिर सोने की जारी लंका,

14

अपरंपारा तुमरी माया, जिसका पार कोई पाया,

15

संजीवन का परबत लाये, शर से आहत लखन जियाये,

16

महा प्रतापी तुम, जगदीशा! ज्ञान सिंधु संपन्न कपीशा,

17

असुर निकंदन तुम सुर त्राता, धन्य अंजनी तुमरी माता,

18

काम राम के किए तमामा, जय जय कपिवर जय बलभीमा,

19

जै हनुमान राम के दासा, राम चरन तुमरा अधिबासा,

20

कपिवर तुमरी अमृत बाणी, राम-सिया को अति हर्षाणी,

21

राम-नाम रस भीनी काया, वक्ष फाड़ कर हरि दिखलाया,

22

फोड़ फोड़ माला के मोती, राम-नाम की ढूँढी ज्योति,

23

जो तुमरी लीला का ज्ञाता, किरपा राम-सिया की पाता,

24

जो हनुमान चलीसा गाता, भवसागर को पार लँघाता,

25

काम काज जिसको उलझाता, नाद नाम का तिन सुलझाता,

26

पी कर राम रसायन प्याला, नसीब जागे खुल कर ताला,

27

केसर-नंदन व्यंकट प्यारे! असुर निकंदन राम दुलारे!

28

मुष्किल काज धरम के जेते, आतुर तुम करने को तेते,

29

तुम हो धीरज बल के दाता, आशिष दीन्हा सीता माता,

30

सुग्रीव को नृप तुमने कीन्हा, विभिषण को तुम मंतर दीन्हा,

31

निश-दिन राघव की कर सेवा, खाते परम मधुर तुम मेवा,

32

आवन जावन विद्यु गति से, राम काज करि सुकृत मति से,

33

विघ्न कष्ट संकट की वेला, तुमरा भगत रहे अकेला,

34

बिकट विषम जब विपदा आवे, तुमरे सुमिरण से कट जावे,

35

घटना घोर घटे जिस बेरी, प्रभु आने में लगे देरी,

36

क्षण में विशाल गिरिवर जैसे, क्षण में सूक्षम अणु सम ऐसे,

37

जिसमें हनुमत भक्ति जागी, उसकी सब बिध पीड़ा भागी,

38

जिसके मुख हनुमान सुनामा, होय सिद्धि वह पूरण कामा,

39

जो नर निश-दिन तुमको सुमरे, उस पर प्रेम अपारे तुमरे,

40

जिसके मुख रट हनुमत लागी, स्वर्ग दुआरे वह बड़भागी,

 

पवन तनय हनुमान जी, अंजनी सुत बलवान.

कपिदल-पति प्रभु! आपको, बारंबार प्रणाम.

आज्ञा दीजो हे प्रभो! खुले राम का द्वार.

सफल करूँ संगीत ये, होवे मम उद्धार.

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(434)

Ramayan, Lakshman Unconscious, 4341

मूर्छित लक्ष्मण

लखन भाई! तुम बिन मोहे सुख नाही,

लखन भाई! तुम बिन मोहे सुख नाही.

1

सिया बिरहा के दुःख बड़े हैं,

अंग अनुज! तव, शिथिल पड़े हैं,

तुम बिन, नाही कछु जग माही.

लखन भाई! तुम बिन मोहे सुख नाही,

2

नैन खोल अब लखन पियारे!

और सह सके मोरा जिया रे!,

मोहे छोड़, लखन! मत जाई.

लखन भाई! तुम बिन मोहे सुख नाही,

3

पहले ही जो, दुख थे भारे,

भए हैं दुगुने, अनुज दुलारे!,

व्यर्थ लगे अब, विजय भी, भाई.

लखन भाई! तुम बिन मोहे सुख नाही,

4

तुझ बिन घर सखे! कैसे मैं जाऊँ,

माता को क्या मुखड़ा दिखाऊँ,

शिव शंकर जी! पाहि मोहे पाहि.

लखन भाई! तुम बिन मोहे सुख नाही,

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(435)

Krishnayan, Madhuban, 4351

मधुबन, हिंदी

मधुबन माया आज नियारी, विपिन में आए विपिनविहारी.

मधुबन माया आज नियारी, विपिन में आए विपिनविहारी.

1

आज है वन की शोभा सुंदर, खिला विपिन में सुमन समुंदर.

भूमि पर मृदु हरी हरियाली, भ्रमर तितलियाँ डारी-डारी.

मधुबन माया आज नियारी, विपिन में आए विपिनविहारी.

2

रंग-रंग के फूल गुलाबी, लाल बैंगनी पीत गुलाली.

महक गुलों की वन में बिखरी, स्वर्ग हूबहू शोभा निखरी.

मधुबन माया आज नियारी, विपिन में आए विपिनविहारी.

3

आज विपिन में खग रव न्यारा, गुजर हरि के नाम का प्यारा.

साथ बजावे मधुर बांसुरी, मुरली मनोहर, हरि मुरारी.

मधुबन माया आज नियारी, विपिन में आए विपिनविहारी.

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(436)

Ramayan, Nishad Guh-2, Hindi 4361

गंगा तट पर, गुह निषाद

गंगा जल में नाव खड़ी, राम रमा के साथ चढ़ै.

जल नयनन से, जल में पड़ै.

गंगा जल में नाव खड़ी, राम रमा के साथ चढ़ै.

जल नयनन से, जल में पड़ै.

1

राम सिया का शोक हरै, लखन लला का, हाथ धरै.

गंगा जल में नाव खड़ी, राम रमा के साथ चढ़ै.

जल नयनन से, जल में पड़ै.

2

गिरी अवध पर विपद् की झड़ी, कैकई के मन, खुशी की लड़ी.

गंगा जल में नाव खड़ी, राम रमा के साथ चढ़ै.

जल नयनन से, जल में पड़ै.

3

कहे निषाद ये कैसी घड़ी, सतयुग में कलि युग की कड़ी.

गंगा जल में नाव खड़ी, राम रमा के साथ चढ़ै.

जल नयनन से, जल में पड़ै.

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(437)

Ramayan, Nishad Kevat, 4371

हे केवट निषाद!

नैया ठीक चलाना भैया, नाव में तेरी, राम रमैया,

नैया ठीक चलाना भैया, नाव में तेरी, राम रमैया.

1

प्रभु निकले हैं पुण्य करम को, पूरण करने क्षात्र धरम को,

छूते हरि के चरणन जल को, शाँत हो गई गंगा मैया.

नैया ठीक चलाना भैया, नाव में तेरी, राम रमैया.

2

आज सरित् के भाग्य हैं जागे, चरण प्रभु के जल को लागे,

स्वागत करने खड़े हैं आगे, नारद शंकर कृष्ण कन्हैया.

नैया ठीक चलाना भैया, नाव में तेरी, राम रमैया.

3

सुविमल नीला गंगा जल है, विशाल शुचि शीतल निर्मल है,

बीच धार में चली है नैया, देख के मनवा नाचे थैया.

नैया ठीक चलाना भैया, नाव में तेरी, राम रमैया.

4

जल पर फूल हैं लाल कमल के, रवि चमकाए रंग सलिल के,

जल में मछली नक्र कछुए, बहुत बड़े हैं, दैया दैया.

नैया ठीक चलाना भैया, नाव में तेरी, राम रमैया.

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(438)

Ramayaniya Holy Panchavati, 4381

पवित्र पंचवटी

पंचवटी अति, सुंदर है, जल धारा गिरि, कंदर हैं.

सुंदर सुमन समुंदर है, मोद विपिन के, अंदर है.

पंचवटी अति, सुंदर है, जल धारा गिरि, कंदर हैं.

1

पुष्प लताएँ, तरु पर हैं, कमल दलों पर, मधुकर हैं.

चटक चहकते, मधु रव हैं, सौरभ अनुपम, मनहर है.

मंगल रंग समुंदर है.

पंचवटी अति, सुंदर है, जल धारा गिरि, कंदर हैं.

2

गिरि मंडल पर, हरियाली, पवन शीत, प्रभाशाली.

स्वर्ग भूमि भूतल वाली, स्वयं इन्द्र जिसका माली.

सींचत धरती अंबर है.

पंचवटी अति, सुंदर है, जल धारा गिरि, कंदर हैं.

3

वीणा लेकर, नारद जी, कुबेर गणपति, शारद जी.

किन्नर सुर कोविद सारे, आते पंचवटी के द्वारे.

ब्रह्म विष्णु, शिव शंकर हैं.

पंचवटी अति, सुंदर है, जल धारा गिरि, कंदर हैं.

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(439)

Ramayan, Raja Dashrath-3, Hindi 4391

दशरथ मिथिला चले

दशरथ मिथिला चले. दशरथ मिथिला चले.

1

राम-सिया का ब्याह रचेंगे.

साथ रानियाँ, पुत्र चलेंगे, सुंदर रथ हैं सजे.

दशरथ मिथिला चले.

2

सिया-स्वयंवर जनक सजायो.

राम धनु पर बाण चढ़ायो, शिवजी किरपा करे.

दशरथ मिथिला चले.

3

विश्वमित्र मुनि काज है कीन्हा.

वसिष्ठ गुरु ने आशिष दीन्हा, रघुकुल आगे बढ़े.

दशरथ मिथिला चले.

4

सिया राम को हार पिनावे.

राम-सिया को मंगल डाले, बाहों का हार गले.

दशरथ मिथिला चले.

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(440)

Ramayan, Ram Rajya-1, Hindi 4401

रामराज्य-1

रामराज्य का नाम ही, जग में स्वर्ग का धाम.

रामराज्य का नाम ही, जग में स्वर्ग का धाम.

1

जहाँ कोई दोष रोष हो, जन-गण मन संतोष कोश हो.

हिरदय की सुख संपद् राम.

रामराज्य का नाम ही, जग में स्वर्ग का धाम.

2

श्रम आश्रम का सदा भोग हो, वैर भाव का नहीं रोग हो.

भाई हो संपूरण ग्राम.

रामराज्य का नाम ही, जग में स्वर्ग का धाम.

3

जग में नारी सजे शेरनी, युवती बाला लगे मोरनी.

घर आंगन में मंगल काम.

रामराज्य का नाम ही, जग में स्वर्ग का धाम.

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(441)

Ramayan, Rama going to Exile, 4411

वन को राम चले

वन को राम चले, सत् नाम चले, तज कर धाम चले.

वन को राम चले, सत् नाम चले, तज कर धाम चले.

1

माता कैकई ममता खोई, कुल-कलहों से नहीं घबराई.

रामलला से गादी छीनी, छल से भरत के नाम कराई.

किसी की दाल गले.

वन को राम चले, सत् नाम चले, तज कर धाम चले.

2

वचन पिता का पूर्ण कराने, वल्कल धर निकला रघुराई.

पीछे पीछे लछमन भाई, संग सिया बनवास धराई.

दिन सुख के हैं ढले.

वन को राम चले, सत् नाम चले, तज कर धाम चले.

3

अवध पुरी के दुखी नर-नारी, असुवन से सब देत विदाई.

दसरथ ने गम से दम त्यागे, माता सुमित्रा बिरहाई.

हिय सबका ही जले.

वन को राम चले, सत् नाम चले, तज कर धाम चले.

4

सबके दिल के टुकड़े टुकड़े, कैकई मन में थी हरषाई.

भरत राम का सच्चा भाई, गादी अवध की जिन ठुकराई.

फल छल के फले.

वन को राम चले, सत् नाम चले, तज कर धाम चले.

5

वाह रे राम और लछमन भाई, धन्य-धन्य तू, सीतामाई!

जाओ तुमको राखे राई, ब्रह्म विष्णु शंकर नभ से,

आशिष देत तले.

वन को राम चले, सत् नाम चले, तज कर धाम चले.

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(442)

Ramayan, Rama knows, 4421

राम की बातें राम ही जाना

सुख आना है या दुख आना, राम की बातें राम ही जाना.

तिलक लगे कल, या बनबासा, राम ही जाने राम की भासा.

राम ही जाने राम की भासा.

1

शीश मुकुट कंचन मणिवर का, पीत पीतांबर शुभ कटि पर था.

कानन कुंडल मन को भाते, हार गले के नयन लुभाते.

मुंदरी मंगल रघुनंदन की, पग में खड़ाऊँ कठ चंदन की.

राजपुत्र सजा था सुंदर, देख प्रफल्लित हुआ सुमंत्र.

हो अभिषेका या बनबासा, राम का निर्णय राम के पासा.

राम ही जाने राम की भासा.

2

सिया सजी थी राजकुमारी, केश वेश सुशोभित भारी.

सचिव संदेसा लाया माँ से, बोला सुस्मित राम, रमा से.

साथ सचिव के मैं जाता हूँ, आशिष माँ का ले आता हूँ.

द्वार तक चली पति के संगा, आओ जल्दी कही धर अंगा.

सिया खड़ी है धर मन आसा, राम ही देवे उसे दिलासा.

राम ही जाने राम की भासा.

3

जन जनपद के ऋषि-मुनि सारे, राजा अतिथि आन पधारे.

समारोह की हुई तयारी, मंडप में जन हर्षित भारी.

माता हठ पर अड़ी पड़ी है, विकट समस्या करी खड़ी है.

पिता धरा पर चित पड़े हैं, राम सामने चकित खड़े हैं.

लिखा जा रहा है इतिहासा, राम जाने कोई निरासा.

राम ही जाने राम की भासा.

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(443)

Ramayan, Rama’s anointment-1, Hindi 4431

राम का राजतिलक

आज, राम को तिलक लगेगा, सखी! आनंद आनंद होगा.

आज, राम को तिलक लगेगा, सखी! आनंद आनंद होगा.

1

सीता हमरी रानी बनेगी, सुंदर भूषण रंग सजेगी.

आज, राम-का-राज बसेगा, सखी! मंगल साज बजेगा.

आज, राम को तिलक लगेगा, सखी! आनंद आनंद होगा.

2

सबने शोभित वसन हैं डारे, जन पद सत् जन आन पधारे.

आज, ऋषि-मुनि मंत्र उचारे, सखी! कीर्तन गान सजेगा.

आज, राम को तिलक लगेगा, सखी! आनंद आनंद होगा.

3

सप्त नदी जल सिंचन होगा, कोई पुर में अकिंचन होगा.

आज, स्वर्ग बिराजा होगा, सखी! राघव राज करेगा.

आज, राम को तिलक लगेगा, सखी! आनंद आनंद होगा.

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(444)

Ramayan, Lakshman Unconscious-2, Hindi 4441

मेरे लछमन को बचा!

मेरे लछमन को बचा, शंकर गौरीनाथ!

हाथ जोड़ बिनती करूँ, बोले श्री रघुनाथ.

1

राघव बोले बंधु को, खोलो नैन तिहार.

मुख सेराम पुकार दो, लछमन! तुम इक बार.

हाथ जोड़ बिनती करूँ, बोले श्री रघुनाथ.

2

संकट में हूँ मैं पड़ा, तू मत दम को तोड़.

तेरे बिन मैं क्या करूँ, मत जा मुझको छोड़.

हाथ जोड़ बिनती करूँ, बोले श्री रघुनाथ.

3

सिया बिरह का एक था, अब ये दूजा क्लेस.

तेरे बिन मैं, हे सखे! कैसे जाऊँ देस.

हाथ जोड़ बिनती करूँ, बोले श्री रघुनाथ.

4

मातु बंधु को क्या कहूँ, कहाँ है उनका लाल.

किस मुख से बतलाउँगा, “उसे ले गया काल

हाथ जोड़ बिनती करूँ, बोले श्री रघुनाथ.

5

शक्ति बाण से क्षत हुआ, तू है पड़ा अचेत.

बूटी लाने कपि गया, आया शैल समेत.

हाथ जोड़ बिनती करूँ, बोले श्री रघुनाथ.

6

संजीवन उपचार से, बचें तुम्हारे प्राण.

और कछु मैं चाहुगा, हे शंकर भगवान!

हाथ जोड़ बिनती करूँ, बोले श्री रघुनाथ.

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(445)

Ramayan, Rama’s Return to Ayodhya, 4451

राम घर आए

आज, राघव वन से आयो, सखी! घर-घर दीप जलाओ.

सखी! घर-घर दीप जलाओ.

1

दशरथ नंदन, चरणन बंदन, कमल नयन हरि आयो.

सखी! मंजुल गीत सुनाओ.

सखी! घर-घर दीप जलाओ.

2

जनक नंदिनी, अवध की रानी, हर्ष की ज्योत जगाई.

सखी! दर्शन करने आओ.

सखी! घर-घर दीप जलाओ.

3

अंजनी नंदन, सब जग वन्दन, हनुमत लीला दिखायो.

सखी! अवध में आनंद छायो.

सखी! घर-घर दीप जलाओ.

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(446)

Ramayan, Ram-Shyam Story, 4461

राम कहानी

सुनो जी राम कहानी, सुनो जी श्याम कहानी.

दोनों समुंदर दोनों सुहानी, दोनों बड़ी पुरानी.

सुनो जी राम कहानी, सुनो जी श्याम कहानी.

1

दोनों ही नीति सिखलाती, दोनों ही प्रीति दिखलाती.

एक मथुरा, एक अवध की, गंगा जमुना पानी.

सुनो जी राम कहानी, सुनो जी श्याम कहानी.

2

बंधु लखन का प्रेम परम है, सुदामा मित्र अमर है.

सीता दीन्ही त्याग निशानी, राधा प्रेम दीवानी.

सुनो जी राम कहानी, सुनो जी श्याम कहानी.

3

एक में वीर कथाएँ बाँकी, एक में बाल-लीला की झाँकी.

आदि वाल्मीकि व्यास की बानी, लावे आँख में पानी.

सुनो जी राम कहानी, सुनो जी श्याम कहानी.

4

राम रखा हनुमत बलशाली, कृष्ण सखा अर्जुन धनुधारी.

रावण कंसन दुर्योधन को, याद दिलाई नानी.

सुनो जी राम कहानी, सुनो जी श्याम कहानी.

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(447)

Ramayan, Ram-Ravan Yuddha-1, Hindi 4471

राम रावण युद्ध

शर मेरे आज क्यों नाकाम हैं.

क्या ये माजरा, किसका ये काम है.

मरा नहीं वो नौ बाणों से, किस माया का परिणाम है.

1

एक बाण में मरी ताड़का, एक बाण में बाली.

एक बाण में गया सुबाहु, मारिच की जान निकाली.

बाण मेरे क्यों, जात हैं खाली. आज ये, कैसी इम्तहान है.

शर मेरे आज क्यों नाकाम हैं.

क्या ये माजरा, किसका ये काम है.

2

धनुर्वेद है पाया मैंने, विद्या सोलह जानी.

शस्त्र कला सब सीखी मैंने, शास्त्र गहनता देखी.

बाण मेरे क्यों, जात हैं खाली. आज ये, कैसा अज्ञान है.

शर मेरे आज क्यों नाकाम हैं.

क्या ये माजरा, किसका ये काम है.

3

शिव सायक मेरे तरकश में, इन्द्र धनुष बस मेरे.

एक कटे सिर दूजा आवे, तंतर काम आवे.

बाण मेरे क्यों, जात हैं खाली. आज ये, उलझन महान है.

शर मेरे आज क्यों नाकाम हैं.

क्या ये माजरा, किसका ये काम है.

4

नारद आये, विभीषण बन कर.

कहा उदर में, मारो तुम शर.

बाण तेरा ये, जाय खाली. आज ये, गूढ़ ज्ञान है.

शर मेरे आज क्यों नाकाम हैं.

क्या ये माजरा, किसका ये काम है.

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(448)

Ramayan, Ravan’s Regret, 4481

रावण का पछतावा

रावण बोला श्री राघव को, आयी अंतिम घड़ी हमारी,

दया करो श्री अवध बिहारी, कृपा करो, हरि सकल निहारी.

क्षमा करो अपराध हमारे, भला करो, हम शरण तिहारी.

रावण बोला श्री राघव को, आयी अंतिम घड़ी हमारी.

1

भूल हुई है मुझसे भारी, सीता की मैंने की चोरी.

सहन करो तुम, प्रभु रघुराई! दया करो, हम शरण तिहारी.

रावण बोला श्री राघव को, आयी अंतिम घड़ी हमारी,

2

रघु कुल रीति सदा चली आई, भगिनी सम हो अपर लुगाई.

सहन करो सब सीता माई, दया करो, हम शरण तिहारी.

रावण बोला श्री राघव को, आयी अंतिम घड़ी हमारी,

3

कुबेर! विभिषण मेरे भाई! जिन पर मैंने की जबराई.

सहन करो मम हाथापाई, दया करो, हम शरण तिहारी.

रावण बोला श्री राघव को, आयी अंतिम घड़ी हमारी,

4

पवन तनय! तुम परम सहाई, तुमरी मैं लाँगूल जलाई.

सहन करो अब हनुमत साई! दया करो, हम शरण तिहारी.

रावण बोला श्री राघव को, आयी अंतिम घड़ी हमारी,

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(449)

Ramayan, Search for Sita, 4491

सीता की खोज

पवन पुत्र हनुमान! तुमको विनति करत हैं राम.

जाओ पवन पुत्र हनुमान! तुमको विनति करत हैं राम.

1

सागर पार छलाँग लगाओ, आई विपदा दूर भगाओ.

कीजो हरि का काम.

जाओ पवन पुत्र हनुमान! तुमको विनति करत हैं राम.

2

ढूँढो घर-घर पुर लंका में, कहाँ है सीता अब शंका में.

खोजो रावन धाम.

जाओ पवन पुत्र हनुमान! तुमको विनति करत हैं राम.

3

मुंदरी धर कर तुम मुख माही, उड़ो गगन में, त्राहि त्राहि!

लेकर हरि का नाम.

जाओ पवन पुत्र हनुमान! तुमको विनति करत हैं राम.

4

केसरी नंदन! हे दुख भंजन! हे सुर नाई! हे सुखदाई!

राह तकत सिय राम.

जाओ पवन पुत्र हनुमान! तुमको विनति करत हैं राम.

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(450)

Ramayan, Setu Bandhan-3, Hindi 4501

राग दुर्गा, दादरा ताल

सेतु बंधन

राम लिखो, नाम लिखो, राम लिखो, नाम रे.

राम लिखो, नाम लिखो, राम लिखो, नाम रे.

1

शिला तरे, सेतु बने, स्वेद बिंदु ढार रे.

राम जपो, नाम रटो, तभी बने काम रे.

राम लिखो, नाम लिखो, राम लिखो, नाम रे.

2

जादू भरा, महा भला, राम राम-नाम रे.

काम करो, काम करो, राम को लो थाम रे.

राम लिखो, नाम लिखो, राम लिखो, नाम रे.

3

राह तके, सिया वहाँ, रात दिवस जाग के.

अँगुठी को देख देख, कहे प्रभो राम रे.

राम लिखो, नाम लिखो, राम लिखो, नाम रे.

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(451)

Ramayan, Shastradhar Shri Ram, 4511

शस्त्रधर राम

राम धरे जब, शस्त्र हाथ में, पाप कोई बचना.

बचना, साँप कोई डसना.

1

असुरों ने जब, तांडव कीन्हा, राघव ने है रक्षण दीन्हा.

अब, डर नहीं मन में बसना, बसना.

राम धरे जब, शस्त्र हाथ में, पाप कोई बचना.

बचना, साँप कोई डसना.

2

विघ्न कष्ट सब, राम उबारे, पाप ताप सब राम उतारे.

अब, राम सहारा अपना, अपना.

राम धरे जब, शस्त्र हाथ में, पाप कोई बचना.

बचना, साँप कोई डसना.

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(452)

Ramayan, Short Tempered Lakshman, 4521

कोपी लछमन

लछमन बहुत है कोपी, सीते!

लछमन बहुत है कोपी, सीते!

1

मेरा बंधु बड़ा पियारा, स्नेहिल सुहृद सखा नियारा.

दुख पल उसे भाते, सीते!

लछमन बहुत है कोपी, सीते!

2

वीर पुरुष है छत्रिय बाँका,            धीर है रण में मैंने आँकां

छल बल उसे आते, सीते!

लछमन बहुत है कोपी, सीते!

3

सीधा सादा भोला भाला, राजनीति में ढीला ढाला.

उसको कुकर्म खाते, सीते!

लछमन बहुत है कोपी, सीते!

4

लछमन मेरा अभिन्न अंगी, निश-दिन मेरा बना है संगी.

जग जन सद् गुण गाते, सीते!

लछमन बहुत है कोपी, सीते!

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(453)

Ramayan, Shravan Kumar-1, Hindi 4531

श्रवण कुमार वध

लगा रे बाण श्रावण को, बचाओ पुत्र पावन को.

लगा रे बाण श्रावण को, बचाओ पुत्र पावन को.

1

अंधी माता, पिता भी अंधे, ले कर कावड़ अपने कंधे.

बूढ़े दोनों नीर के प्यासे, रख कर उनको नदी तीर पे.

गया था, नीर लावन को.

लगा रे बाण श्रावण को, बचाओ पुत्र पावन को.

2

रात अँधेरी, शाँत किनारा, बैठा तरु पर भूप दुखारा.

शब्द सुना जब जल में नृप ने, तीर चलाया तुरंत उसने.

देखा, पुत्र भावन को.

लगा रे बाण श्रावण को, बचाओ पुत्र पावन को.

3

मातु-पिता ने, नृप को कोसा, अपशब्दों में दीन्हा दोसा.

बोले, तू भी पुत्र-बिरह में, प्राण तजेगा, विरह हृदय में.

मिला रे! शाप राजन् को.

लगा रे बाण श्रावण को, बचाओ पुत्र पावन को.

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(454)

Ramayan, Shravan Kumar-2, Hindi 4541

श्रवण कुमार माता पिता

मातु पिता कहो, कैसे जियें, अब.

तनय बिना देखो, हुए हैं अनाथ, ये.

मातु पिता कहो, कैसे जियें, अब.

तनय बिना देखो, हुए हैं अनाथ, ये.

1

पुत्र पियारा, एक सहारा.

छीन लिया तो, दैया! हुए बेसहारा, अब.

मातु-पिता कहो, कैसे जियें, अब.

तनय बिना देखो, हुए हैं अनाथ, ये.

2

अंधी माता, अंध पिता भी.

दीन बनें हैं, रामा! नहीं सुत साथ, अब.

मातु पिता कहो, कैसे जियें, अब.

तनय बिना देखो, हुए हैं अनाथ, ये.

3

लैलो शरण में, लैलो चरण में.

आर्त पुकार, सुनो! नहीं कोई नाथ, अब.

मातु पिता कहो, कैसे जियें, अब.

तनय बिना देखो, हुए हैं अनाथ, ये.

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(455)

Ramayan, Shri Rama Sat Nam, Hindi 4551

सत् नाम

राम नाम सत् नाम सुहाना, श्री राम जय राम जय जय रामा.

राम, सिया राम सिया, जय जय रामा.

1

पीत पितांबर कटि पर सोहे, छवि निरंजन मन को मोहे.

दशरथ नंदन रघुपति रामा, दास परम प्रिय कपि हनुमाना.

राम नाम सत् नाम सुहाना, श्री राम जय राम जय जय रामा.

राम, सिया राम सिया, जय जय रामा.

2

कमल लोचन सूरत प्यारी, मंगल मुख मूरतिया दुलारी.

परम पुरुष परमेश्वर रामा, सुर नर पूजित हरि अभिरामा.

राम नाम सत् नाम सुहाना, श्री राम जय राम जय जय रामा.

राम, सिया राम सिया, जय जय रामा.

3

रघुपति राघव दीन-दयाला, भगतन के अविरत प्रति पाला.

परम आतमा रूप ललामा, अंतर्यामी हिरदय धामा.

राम नाम सत् नाम सुहाना, श्री राम जय राम जय जय रामा.

राम, सिया राम सिया, जय जय रामा.

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(456)

Ramayan, Shri Rama’s Birth, 4561

श्रीराम जन्म

पायो जी आज, नृप दशरथ सुत पायो.

कौसल्या के, हिरदय में सुख आयो.

1

कमल वदन, सखी! रामचंद्र का, चार चाँद लगायो.

पायो जी आज, नृप दशरथ सुत पायो.

कौसल्या के, हिरदय में सुख आयो.

2

कौशल्या कहे, धन्य भई मैं, राम रतन मन भायो.

पायो जी आज, नृप दशरथ सुत पायो.

कौसल्या के, हिरदय में सुख आयो.

3

नारद शारद शंकर गौरी, कृष्ण कनाई है आयो.

पायो जी आज, नृप दशरथ सुत पायो.

कौसल्या के, हिरदय में सुख आयो.

4

लखन भरत कहें, राघव भ्राता, हमको नेहा लगायो.

पायो जी आज, नृप दशरथ सुत पायो.

कौसल्या के, हिरदय में सुख आयो.

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(457)

Ramayan, Sita Abducted-2, Hindi 4571

सीता अपहरण-2

चंद्र मुखी मनमोहिनी, वैदेही अभिराम.

कमल लोचना जानकी, गयी कहाँ तज राम.

कमल लोचना जानकी, गयी कहाँ तज राम.

1

शुभ वदना शुचि श्यामला, सीता मंगल नाम.

चारु चरित प्रिय दर्शिनी, गयी कहाँ तज धाम.

कमल लोचना जानकी, गयी कहाँ तज राम.

2

तुझे पुकारूँ मैथिली, उत्तर दे इक बार.

संग मेरे रहती सदा, गयी कहाँ इस बार.

कमल लोचना जानकी, गयी कहाँ तज राम.

3

मन को मेरे, हे प्रिये! देकर दारुण दाह.

नीतिनिपुण अनुगामिनी, गयी आज किस राह.

कमल लोचना जानकी, गयी कहाँ तज राम.

4

पतिव्रता सहचारिणी, आई तज अनुराग.

पति परमेश्वर धारिणी, गयी कहाँ पति त्याग.

कमल लोचना जानकी, गयी कहाँ तज राम.

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(458)

Ramayan, Sita In Dandak Van-1, Hindi 4581

दंडक वन में सिया-राम

नाथ! चलूँगी वन दंडक में, बन कर दासी रे.

साथ ले चलो कानन मोहे, मन में उदासी रे,

1

जंगल मंगल स्थान करेंगे, निर्जन भूमि स्वर्ग कहेंगे,

प्रभु! मैं तुमरी जनम जनम की, हूँ सहवासी रे.

साथ ले चलो कानन मोहे, मन में उदासी रे,

नाथ! चलूँगी वन दंडक में, बन कर दासी रे.

2

जहाँ पति है वहाँ सती हो, जहाँ राम है वहाँ सिया हो,

तुम दीपक छाया मैं तुमरी, जुग चौरासी रे.

साथ ले चलो कानन मोहे, मन में उदासी रे,

नाथ! चलूँगी वन दंडक में, बन कर दासी रे.

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(459)

Ramayan, Sita In Dandak Van-2, Hindi 4591

दंडक वन में राम-सिया

तुम चलो सामने, राम पिया! रे,

पीछे हम हैं संग तिहारे, पग पग लूँ मैं, पंथ निहारे.

1

राहों में काँटे हैं बिखरे, पशु बेशुमार डोरे डारे,

धोखा पल छिन असुर जनन से,

डगमग हैं अब भाग हमारे.

तुम चलो सामने, राम पिया! रे,

पीछे हम हैं संग तिहारे, पग पग लूँ मैं, पंथ निहारे.

2

चल कर जोजन साँझ सकारे, अवध नगर को पीछे छोरे,

आये पंचवटी के द्वारे, मनहर स्थान जो भान को हारे.

तुम चलो सामने, राम पिया! रे,

पीछे हम हैं संग तिहारे, पग पग लूँ मैं, पंथ निहारे.

3

इस थल को आवास बनाएँ, वन तापोभूमि जाना जाए,

रामायण की नींव सजाएँ, जन हित का इतिहास रचाएँ.

तुम चलो सामने, राम पिया! रे,

पीछे हम हैं संग तिहारे, पग पग लूँ मैं, पंथ निहारे.

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(460)

Ramayan, Sita in Dandak-3, Hindi 4601

सीता मैया

सिय के तन पर सादगी साजे, साँस-साँस में राम विराजे.

राघव-मुंदरी कर में सोहे, वन्यपुष्प के भूषण पाए.

सिय के तन पर सादगी साजे, साँस-साँस में राम विराजे.

1

फीका है जिन इह जग सारा, राम एक तिन नैन का तारा.

राम बिना सिय जीय घबराए, सुख दिन ना जाने कब आएँ.

सिय के तन पर सादगी साजे, साँस-साँस में राम विराजे.

2

तेरी जीवन अद्भुत गाथा, जाने तिन भव नहीं भरमाता.

पढ़ते सुनते हिय भर आए, नयनन से अँसुअन टपकाए.

सिय के तन पर सादगी साजे, साँस-साँस में राम विराजे.

3

आओ सीता के गुण गाएँ, आसावरी शुभ राग सुनाएँ.

भगत जनों के मन बहलाएँ, रामायण रस जिन कहलाए.

सिय के तन पर सादगी साजे, साँस-साँस में राम विराजे.

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(461)

Ramayan, Sita in Dandak-4, Hindi 4611

सीता वनवास गमन

पाँव मेरे कोमल, चाल मेरी नाजुक.

नाथ मेरे! चलो जी, धीरे-धीरे - - -.

पाँव मेरे कोमल, चाल मेरी नाजुक.

नाथ मेरे! चलो जी, धीरे-धीरे - - -.

1

जाना है जोजन, बिन किए भोजन.

कब तक चलेंगे, धीरे-धीरे - - -.

पाँव मेरे कोमल, चाल मेरी नाजुक.

नाथ मेरे! चलो जी, धीरे-धीरे - - -.

2

हाथ मेरा धरो जी, साथ मेरा करो जी.

बात मुझे कहो जी, धीरे-धीरे - - -.

पाँव मेरे कोमल, चाल मेरी नाजुक.

नाथ मेरे! चलो जी, धीरे-धीरे - - -.

3

वन में ही जाना है, कछु नहीं लाना है.

जल्दी भी क्या है जी? धीरे-धीरे - - -.

पाँव मेरे कोमल, चाल मेरी नाजुक.

नाथ मेरे! चलो जी, धीरे-धीरे - - -.

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(462)

Ramayan, Sita’s Lamentation-1, Hindi 4621

सीता विरह गीत-1

हरि बचाओ मुझे यहाँ से, तुरन्त आके मुझे छुड़ाओ.

हरि बचाओ मुझे यहाँ से, तुरन्त आके मुझे छुड़ाओ.

1

पतिव्रता पर बुरी नजरिया, प्रभु तुम्हें कछु नहीं खबरिया.

सर्वज्ञानी, सर्वगामी, लाँघ समुंदर लीला दिखाओ.

हरि बचाओ मुझे यहाँ से, तुरन्त आके मुझे छुड़ाओ.

2

यहाँ कोई किसी को लज्जा, साधवी का कोई लिहज्जा.

बुरे इरादे हैं साफ इनके, प्रभु जी! आके इन्हें जगाओ.

हरि बचाओ मुझे यहाँ से, तुरन्त आके मुझे छुड़ाओ.

3

जाने किस ओर, मैं कहाँ हूँ, जहाँ सज्जन कोई, वहाँ हूँ.

प्रभो! सागरिया लाँघे आओ, इन्हें समुंदर तले डुबाओ.

हरि बचाओ मुझे यहाँ से, तुरन्त आके मुझे छुड़ाओ.

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(463)

Ramayan, Sita Svayamvar-3, Hindi 4631

सीता स्वयंवर-3

हो जी मेरो, आज वो शुभ दिन आयो.

सखी री मैंने, राम रतन वर पायो.

एरी, राम बनो वर म्हारो.

1

राम धनु पर बाण चढ़ायो, तीर करजवा में, मेरे धायो.

दैया रे दैया, टूट गयो धनु म्हारो.

सखी री मैंने, राम रतन वर पायो.

एरी, राम बनो वर म्हारो.

2

दशरथ नंदन मिथिला आयो, एक नजर मोहे नेहा लगायो.

दैया रे दैया, टूट गयो प्रण म्हारो.

सखी री मैंने, राम रतन वर पायो.

एरी, राम बनो वर म्हारो.

3

का करू सजनी मैं, अवधकुमारा,

ले गयो मन म्हारो, होश भी सारा.

दैया रे दैया, छूट गयो बस म्हारो.

सखी री मैंने, राम रतन वर पायो.

एरी, राम बनो वर म्हारो.

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(464)

Ramayan, Sita Vanvas Gaman-2, Hindi 4641

केदार राग

वन चली सीता

दुल्हनिया वन चली, राम की सीता.

राज कुमारी, कोमल कलिका, रानी अवध की जानकी माता.

दुल्हनिया वन चली, राम की सीता.

1

मधुर मिलन में, देगयी असुवन, रैन सुहाग की, होगयी बैरन।

जीयो जुग जुग, जानकी माता,

दुल्हनिया वन चली, राम की सीता.

2

जल अखियन भर, रोवत लछिमन, हाथ जोर सिय, मात को वंदन,

जै जय तुमरी जानकी माता,

दुल्हनिया वन चली, राम की सीता.

3

रघुपति दशरथ, जल कर तन मन,

कोसत कैकई, रोकत क्रंदन, धन्य है तुमरी रामकी जाया,

दुल्हनिया वन चली, राम की सीता.

4

अवध पुरी के, बेबस दुखी जन,

गात हैं ब्रह्म, भवानी शंकर, जीती रहो तुम रामकी जाया,

दुल्हनिया वन चली, राम की सीता.

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(465)

Ramayan, Sita’s Final Departure, 4651

सीता महाप्रयाण

मोहे, जाने दे, भूमि सुता भूमि में जा रही.

मोहे मत रोक रे, मोहे, जाने दे.

रामा मोहे, जाने दे.

1

नन्हे तेरे लव-कुश दोनों, देखा ना तिन है जग कोनों.

माता का प्रेम दे, जाओ मत सीते.

मोहे, जाने दे, भूमि सुता भूमि में जा रही.

मोहे मत रोक रे, मोहे, जाने दे.

2

दुनिया ने तुझको दुतकारा, बिना दोष के दोष है डारा.

राघव को छोड़के, जाना मत सीते.

मोहे, जाने दे, भूमि सुता भूमि में जा रही.

मोहे मत रोक रे, मोहे, जाने दे.

3

राघव मुझको जाना होगा, राधा बन कर आना होगा.

शिव का आदेश है, श्यामा जाने दे.

मोहे, जाने दे, भूमि सुता भूमि में जा रही.

मोहे मत रोक रे, मोहे, जाने दे.

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(466)

Ramayan, Sita’s Lamentation-5, Hindi 4661

सीता विरह गीत-5

हे राघव प्राण पियारे- -, तेरी राह तकुँ मैं तू रे- -.

हे राघव प्राण पियारे- -, तेरी राह तकुँ मैं तू रे- -.

1

हाथ पड़ी मैं इस पापी के, पार सागर ले आया.

नजर बुरी रावण की मुझ पर, चाहे करन मोहे जाया.

दारा अपनी छोड़ के पापी, मुझ पर डोरे डारे.

हे राघव प्राण पियारे- -, तेरी राह तकुँ मैं तू रे- -.

2

कोई संगी यहाँ नहीं है, काटत मोहे मेरा साया.

सर्वगामी प्रभु सरबस ज्ञानी! मेरी बारी कहाँ हो.

सकल जगत के रखवारे, राघव! मोहे छुड़ा रे.

हे राघव प्राण पियारे- -, तेरी राह तकुँ मैं तू रे- -.

3

दोष हुआ है मेरे हाथों, पाई सजा ये मैंने.

उमा जली जब इसी दोष में, शिवजी उसे उबारे.

विघ्न विनाशी रामजी प्यारे, रघुवर! मुझे बचारे.

हे राघव प्राण पियारे- -, तेरी राह तकुँ मैं तू रे- -.

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(467)

Ramayan, Sita-Hanuman Dialogue, 4671

सीता-हनुमान लंका में

पवन वेग से, सुवन मेघ से, जाओ झट हनुमान,

लाँघे सागर, सेना लेकर, ले आओ तुम श्रीराम,

लाओ तुम श्रीराम.

1

रावन कहता कडवी बतियाँ, असुरी सतावे मोहे दिन रतिया,

काँपत जियरा, धड़कत छतिया, धक धक सुबहो शाम,

धक धक सुबहो शाम. लाओ तुम श्रीराम.

2

कहता, पति तव वल्कल-धारी, राघव जोगी विपिन विहारी,

कटुतर रसना, लाज बिसारी, करत मेरा अपमान,

करत मेरा अपमान. लाओ तुम श्रीराम.

3

इस पिंजर से मुझे छुड़ाओ, इस संकट से मुझे बचाओ,

रघुवर आओ, देर लगाओ, तुमको मेरी आन,

तुमको मेरी आन. लाओ तुम श्रीराम.

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(468)

Ramayan, Sita-Janak ji Dialogue, 4681

सीता जनक जी संवाद

जाओ री सीते! प्रीतम के घर जाओ.

जाओ री सीते! प्रीतम के घर जाओ.

1

सास ससुर की सेवा करना, मातु-पिता सम नेहा धरना.

उफ् कभी मुख लाओ.

जाओ री सीते! प्रीतम के घर जाओ.

2

साथ पति के निश-दिन रहना, साथ पति के सुख-दुख सहना.

राघव की होजाओ.

जाओ री सीते! प्रीतम के घर जाओ.

3

लछमन की तुम माता बहिना, भावज प्रेमल बन कर रहना.

सब पर नेह बहाओ.

जाओ री सीते! प्रीतम के घर जाओ.

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(469)

Ramayan, Tadika Vadh, 4691

ताड़का वध की कथा

ताड़िका वध को जात है रामा, संग में निकला लछमन भैया.

मैया बोली, प्यारे बच्चों, घोर विपिन में तुम मत जैंया.

ताड़िका वध को जात है रामा, संग में निकला लछमन भैया.

मैया बोली, प्यारे बच्चों, घोर विपिन में तुम मत जैंया.

1

खूँखार काया, लाल हैं आँखें, फेरत माया, दाँत हैं तीखे.

रूप भयानक, दैया रे दैया.

ताड़िका वध को जात है रामा, संग में निकला लछमन भैया.

मैया बोली, प्यारे बच्चों, घोर विपिन में तुम मत जैंया.

2

क्रंदत दशरथ, आँखों में आँसू, प्राण पियारा, जीवन जासूँ.

राम सहारा, राम रमैया.

ताड़िका वध को जात है रामा, संग में निकला लछमन भैया.

मैया बोली, प्यारे बच्चों, घोर विपिन में तुम मत जैंया.

3

विलपत रानी, कौसल माता, गुरुवर बोले, राम है त्राता.

कर्तब करने, जाने दे मैया!

ताड़िका वध को जात है रामा, संग में निकला लछमन भैया.

मैया बोली, प्यारे बच्चों, घोर विपिन में तुम मत जैंया.

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(470)

Ramayan, Two Oceans-1, Hindi 4701

सागर तट पर राम-1

दो सागर आमने सामने. एक समुंदर, एक रघुनंदन.

करिए हम दोनों को वंदन.

1

एक नीर की भरी है गागर, एक दया का करुणा सागर.

दोनों गहरे चित्त लुभाने. दो सागर आमने सामने.

एक समुंदर, एक रघुनंदन. करिए हम दोनों को वंदन.

2

एक रत्न का भरा भँडारा, एक गुणों का स्रोत अपारा.

दोनों अचल प्रतिष्ठित जाने. दो सागर आमने सामने.

एक समुंदर, एक रघुनंदन. करिए हम दोनों को वंदन.

3

एक सरोत्तम, एक नरोत्तम, एक पयोधि, एक धी निधि.

दोनों अथाह सुंदर माने. दो सागर आमने सामने.

एक समुंदर, एक रघुनंदन. करिए हम दोनों को वंदन.

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(471)

Ramayan, Two Oceans-2, Hindi 4711

सागर तट पर राम-2

दो सागर आमने सामने, साहिल उनके बीच खड़ा है.

एक समुंदर गहन वहाँ है, दूजा सागर परम यहाँ है.

हनुमत उनके बीच खड़ा है, राम प्रभु के चरण पड़ा है.

1

नीर पयोधि जल से भरा है, किरपा सागर उससे बड़ा है.

हनुमत उनके बीच खड़ा है, राम प्रभु के चरण पड़ा है.

2

जल सागर में मोती बिखरे, एक सद्गुण का मोती खरा है.

हनुमत उनके बीच खड़ा है, राम प्रभु के चरण पड़ा है.

3

एक सागर ढकी है धरा, एक धरा का भार धरा है.

हनुमत उनके बीच खड़ा है, राम प्रभु के चरण पड़ा है.

4

एक सागर जल में डुबावे, दूजा भवजल से तरावै.

हनुमत उनके बीच खड़ा है, राम प्रभु के चरण पड़ा है.

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(472)

Ramayan, Veer Jatayu-3, Hindi 4721

अमर वीर जटायु

चला जटायु स्वर्ग में, चढ़ आकाश तरंग.

पड़ा राम की गोद में, रुधिर लिप्त सब अंग.

चला जटायु स्वर्ग में, चढ़ आकाश तरंग.

1

राघव उसको गोद लिटाया, उसे सराहा, गले लगाया.

जटायु अपना शीश झुकाया, और सिया का हाल बताया.

अमर जटायु विहंग.

चला जटायु स्वर्ग में, चढ़ आकाश तरंग.

2

बोले राघव अवध बिहारी, जटायु मेरा अति उपकारी.

मेरे कारण तन है त्यागा, कटा मगर ये वीर भागा.

धैर्य कीन्हा भंग.

चला जटायु स्वर्ग में, चढ़ आकाश तरंग.

3

लड़ा जटायु वीर ये ऐसे, क्षत्रिय मरता रण में जैसे.

हाथ जोड़ लखन रघुराई, दीन्हे उसको बहुत बधाई.

श्रीधर उसके संग.

चला जटायु स्वर्ग में, चढ़ आकाश तरंग.

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(473)

Ramayan, Vibhishan-Ravan Dialogue, 4731

विभीषण-रावण संवाद

सिया, रामचंद्र की दारा है, तू उस पर अत्याचार कर.

तू, सीता को घर जाने दे.

सिया, रामचंद्र की दारा है, तू उस पर अत्याचार कर.

तू, सीता को घर जाने दे.

1

सिय, शाश्वत जग की माता है, श्री राघव उसका भर्ता है.

तू, उस देवी का हाथ धर.

सिया, रामचंद्र की दारा है, तू उस पर अत्याचार कर.

तू, सीता को घर जाने दे.

2

श्री, राघव न्याय के दाता हैं, अरु लछमन उनका भ्राता है.

तू, उनसे रण का विचार कर.

सिया, रामचंद्र की दारा है, तू उस पर अत्याचार कर.

तू, सीता को घर जाने दे.

3

श्री, राम दया के सागर हैं, शरणागत का तिन आदर है.

तू, और घिनौने पाप कर.

सिया, रामचंद्र की दारा है, तू उस पर अत्याचार कर.

तू, सीता को घर जाने दे.

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(474)

Krishnayan, Vraj Bhumi, Hindi 4741

व्रजभूमि गोकुल, हिंदी

गोकुल, ब्रज भूमि की रानी.

गोकुल, ब्रज भूमि की रानी.

1

किशन का गोकुल स्वर्ग समाना, कहीं इसका सानी.

गौवन का क्षीर, गोपी कान्हा, जमुना जी का पानी.

गोकुल, ब्रज भूमि की रानी.

2

मोर पपीहे कोयल बोले, मंजुल रव की वाणी।

ग्वाल बाल मधुबन में खेले, गोपी कृष्ण दीवानी.

गोकुल, ब्रज भूमि की रानी.

3

इन्द्र भूमि का यहाँ दर्श है, अमृत जैसा पानी.

दैवी माया यहाँ स्पर्श है, अमर यहाँ हर प्राणी.

गोकुल, ब्रज भूमि की रानी.

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(475)

Ramayan, Yogvasistha, Hindi 4751

वाल्मीकीय योगवासिष्ठ

कहा योगवासिष्ठ में, ब्रह्मज्ञान उपदेश.

प्रश्नोत्तर गुरु ने दिये, राघव के निःशेष.

1

वसिष्ठ से राघव ने पूछा, ब्रह्म शब्द का अर्थ समूचा.

आत्म ब्रह्म का, अनहद नाता, पुरुष प्राणदा, प्रकृति माता.

गुरुवर, राम को ज्ञान बतायो.

गुरुवर, राम को ज्ञान बतायो.

2

विश्व अनादि, अनंत सारा, विश्व किसी ने, नहीं बनाया.

क्र ये भौतिक, परिवर्तन का, जल सागर पर, जलतरंग सा.

गुरुवर, राम को राह बतायो.

गुरुवर, राम को ज्ञान बतायो.

3

अस्थि युक्त ये, रक्त माँस का, देह बना है, पँच भूत कां

पुरुष प्रकृति, मेल से हुआ, खेल यहाँ का, भव का पसारा.

गुरुवर, राम को शास्त्र बतायो.

गुरुवर, राम को ज्ञान बतायो.

4

ब्रह्म शून्य है, आत्म शून्य है, शून्य से निकला, सो भी शून्य है.

ब्रह्म सत्य है, सत्य पूर्ण है, पूर्ण से निकला, सो भी पूर्ण है.

गुरुवर, राम को गणित बतायो.

गुरुवर, राम को ज्ञान बतायो.

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(476)

Ramayayan, Ahlya Uddhar, Hindi 4761

रामायण, अहल्या उद्धार

तेरे चरण के छूते, मुक्ति मुझे मिली है.

श्री राम तेरी किरपा, किस्मत मेरी खिली है.

तेरे चरण के छूते, मुक्ति मुझे मिली है.

श्री राम तेरी किरपा, किस्मत मेरी खिली है.

1

पत्थर बनी पड़ी थी, मेरी घड़ी अड़ी थी.

पावन तेरे चरण से, बद किस्मती टली है.

तेरे चरण के छूते, मुक्ति मुझे मिली है.

श्री राम तेरी किरपा, किस्मत मेरी खिली है.

2

पुलकित मेरा बदन है, मंगल हुआ है जीवन.

अमृत बना हलाहल, दुष्कर घड़ी ढली है.

तेरे चरण के छूते, मुक्ति मुझे मिली है.

श्री राम तेरी किरपा, किस्मत मेरी खिली है.

3

फिर से मेरा जनम ये, निर्मल मेरे करम हैं.

कहे राम से अहल्या, करुणा तेरी भली है.

तेरे चरण के छूते, मुक्ति मुझे मिली है.

श्री राम तेरी किरपा, किस्मत मेरी खिली है.

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(477)

Ramayayan, Mandodari Devi, Hindi 4771

रामायण, देवी मंदोदरी

बोला विभीषण, सुनो मेरी भाभी, फटी आज है दसमुख की नाभि.

बोला विभीषण, सुनो मेरी भाभी, फटी आज है दसमुख की नाभि.

1

होनी मुक्ति है आज सिया की, सिया होवेगी आज पिया की.

होगा राघव ने चाहा है जो भी.

बोला विभीषण, सुनो मेरी भाभी, फटी आज है दसमुख की नाभि.

2

अब लंका में अँधेर होगा, नर निर्दोष ना तंग होगा.

कोई गुंडा होगा, लोभी.

बोला विभीषण, सुनो मेरी भाभी, फटी आज है दसमुख की नाभि.

3

कोई अबला अब दुख में रोये, बच्चा भूखा अब कोई सोये.

मिली हमको है किसमत की चाभी.

बोला विभीषण, सुनो मेरी भाभी, फटी आज है दसमुख की नाभि.

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(478)

Savan, Savan Ayo, Hindi 4781

राग भीमपलासी, तीन ताल

सावन आयो, हिंदी

गरजत बरसत सावन आयो, प्यासन दुखियन के मन भायो.

गरजत बरसत सावन आयो, प्यासन दुखियन के मन भायो.

1

सब के मन में जोश जगायो, वन में पपीहा बहु हरषायो.

मोर कोयलिया नाच नचायो.

गरजत बरसत सावन आयो, प्यासन दुखियन के मन भायो.

2

तरु बेली पर फूल खिलायो, हरी हरियाली अनूप बिछायो.

प्यासे मन की आस बुझायो.

गरजत बरसत सावन आयो, प्यासन दुखियन के मन भायो.

3.

मंगल शीतल पवन बहायो, रोम-रोम में हर्ष बढ़ायो.

नर-नारी के दुख बिसरायो.

गरजत बरसत सावन आयो, प्यासन दुखियन के मन भायो.

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(479)

Savan, Savan ke Badal-1, Hindi 4791

सावन के बादर, हिंदी ठुमरी

घिर आए सावन के, बादर कारे.

आजा री सजनीया, पपीहा पुकारे.

1

मतवारी मोरनीया, नाच दिखावे.

धुन टेर मोरवा की, मनवा रिझावे.

घिर आए सावन के, बादर कारे.

आजा री सजनीया, पपीहा पुकारे.

2

मेहा रे झरी तोरी, नेहा लगावे.

शीतल रीम झीम, मोती पसारे.

घिर आए सावन के, बादर कारे.

आजा री सजनीया, पपीहा पुकारे.

आजा री सजनीया, पपीहा पुकारे.

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(480)

Savan, Savan ke Badal-2, Hindi 4801

गौड़ मल्हार राग, तीन ताल

सावन की बादरिया, हिंदी कजरी-1

कारी बादरिया भीनी चादरिया, चादरिया मोरी भीनी साँवरीया.

कारी बादरिया भीनी चादरिया, चादरिया मोरी भीनी साँवरीया.

1

पल छिन तड़पत मोरा मनवा, गरजत बरसत कारो बदरवा.

अधीर भई मैं बाँवरिया, अधीर भई मैं बाँवरिया.

कारी बादरिया भीनी चादरिया, चादरिया मोरी भीनी साँवरीया.

2

कड़कत चमकत बैरी बिजुरिया, आजा बलमवा मोरी डगरिया.

हार गई मैं साँवरिया, हार गई मैं साँवरिया.

कारी बादरिया भीनी चादरिया, चादरिया मोरी भीनी साँवरीया.

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(481)

Savan ki Kajri, Hindi 4811

सावन की कजरी, हिंदी कजरी-2

कैसी ये सुहानी सावन की कजरिया.

शीतल रिमझिम झरियाँ. शीतल रिमझिम झरियाँ.

1

गरजत बिजुरिया, बरसत बदरिया.

गरजत बिजुरिया, बरसत बदरिया.

कान्हा रे छलकत, मोरी गगरिया.

शीतल रिमझिम झरियाँ.

2

दूर मोरी नगरिया, छोड़ मोरी डगरिया.

कान्हा रे भीग गयी, मोरी चुनरिया.

शीतल रिमझिम झरियाँ.

3

आज तोरी साँवरिया, लूँगी मैं खबरिया.

ना कर बरजोरी, मोरे कनाईया.

शीतल रिमझिम झरियाँ.

कैसी ये सुहानी सावन की कजरिया.

शीतल रिमझिम झरियाँ.

शीतल रिमझिम झरियाँ.

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(482)

Savan, Savan Ritu, Hindi 4821

ऋतु सावन, हिंदी

सावन की ऋतु, मोद बढ़ावे, मन का मोर नचावे.

हरा गलीचा तले बिछावे, तरु पर रंग रचावे.

सावन की ऋतु, मोद बढ़ावे, मन का मोर नचावे.

1

सुंदर सौरभ फूल फूल पर, तितली भ्रमर भुलावे.

मंजुल झोंका मंद पवन का, पादप बेली डुलावे.

सावन की ऋतु, मोद बढ़ावे, मन का मोर नचावे.

2

चह चह चिड़ियाँ पपीहे मैना, मनहर गान सुनावे.

आम्र वृक्ष पर काली कोयल, कूहू कूहू गावे.

सावन की ऋतु, मोद बढ़ावे, मन का मोर नचावे.

3

सात रंग ये इन्द्र धनुष के, क्षितिज को हार पिन्हावे.

पल में वर्षा पल में सूरज, बादर खेल खिलावे.

सावन की ऋतु, मोद बढ़ावे, मन का मोर नचावे.

4

मधुर फलों के गुच्छ पेड़ पर, सबका मन ललचावे.

बाल बालिका वृंद वृंद में, सावन हर्ष मनावे.

सावन की ऋतु, मोद बढ़ावे, मन का मोर नचावे.

5

चाँद सितारे नील गगन के, चाँदनी रात सुहावे.

अनूप नजारा सावन का ये, इन्द्र भी देख लजावे.

सावन की ऋतु, मोद बढ़ावे, मन का मोर नचावे.

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(483)

Shivaji, End of Afzalkhan, Hindi 4831

अफजलखान, हिंदी

सुनो, अकल बड़ी या भैंस बड़ी.

जब मुश्किल हो आन पड़ी.

कहो, अकल बड़ी या भैंस बड़ी.

जब मुश्किल हो आन पड़ी.

1

अफजल मोटा, ऊँचा तगड़ा, दिमाग मंदा, मन का खोटा.

वीर शिवाजी, चंचल बंदा, उसके आगे कद में छोटा.

बोलो, अकल बड़ी या भैंस बड़ी.

जब मुश्किल हो आन पड़ी.

2

चला शिवाजी, शूर मराठा, मिलने निहत्था, जब अफजल से.

शठ ने शिव को, जकड़ा भुज में, मारा पीठ में जब, चाकू रे!

सोचो, अकल बड़ी या भैंस बड़ी.

जब मुश्किल हो आन पड़ी.

3

सिद्ध शिवाजी था देने को, जवाब ईंट का पत्थर से.

शिव ने झट से बाघनखों से, पेट उधेड़ा राक्षस कां

जानो, अकल बड़ी या भैंस बड़ी.

जब मुश्किल हो आन पड़ी.

4

दगा! दगा! चिल्लाया पापी, गिरा धरा पर औंधा, रे!

निकल रहे थे प्राण अधम के, दे ना पाया धेखा, रे!

देखो, अकल बड़ी या भैंस बड़ी.

जब मुश्किल हो आन पड़ी.

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(484)

Shivaji, Baji Prabhu-1, Marathi 4841

वीर बाजी प्रभु देशपांडे-1, मराठी

काज सफल झाले, सुख आले.

विजयाचा ध्वनि कानीं आला.

विजयाचा ध्वनि कानीं आला.

1

भारत माते! तुझा पुत्र हा, मातृमूमि च्या कामीं आला.

विजयाचा ध्वनि कानीं आला.

काज सफल झाले, सुख आले.

विजयाचा ध्वनि कानीं आला.

2

ऐकुनी धीर कथा वीरांच्या, अज्ञानी जन ज्ञानी झाला.

विजयाचा ध्वनि कानीं आला.

काज सफल झाले, सुख आले.

विजयाचा ध्वनि कानीं आला.

3

बाजी प्रभुनी, प्राण अर्पुनी, स्वामीभक्त तो, नामी झाला.

विजयाचा ध्वनि कानीं आला.

काज सफल झाले, सुख आले.

विजयाचा ध्वनि कानीं आला.

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(485)

Shivaji, Baji Prabhu-2, Marathi-Hindi 4851

वीर बाजी प्रभु देशपांडे-2, मराठी

[Marathi-Hindi Mix]

झाला कुणी न ऐसा, होणार ही कधी वा.

बाजी प्रभु हमारा, तारों में गुलसितारा.

बाजी प्रभु हमारा, तारों में गुलसितारा.

1

है धन्य वो शिवाजी, जिसका सखा है बाजी.

आदर्श वो मराठा, सार्या जगात न्यारा.

बाजी प्रभु हमारा, तारों में गुलसितारा.

2

दोन्हीं करांनी लढला, जिंकोनी शूर, पडला.

न हजार से वो हारा, वीरों में एक हीरा.

बाजी प्रभु हमारा, तारों में गुलसितारा.

3

आया जभी दुबारासिद्दी मसूद हारा.

घायाळ बाजी लढला, सांडीत रक्त धारा.

बाजी प्रभु हमारा, तारों में गुलसितारा.

4

लाखों प्रणाम त्याला, अर्पोनी पुष्प माला.

वैकुंठ में पधारा, महाराष्ट्र का दुलारा.

बाजी प्रभु हमारा, तारों में गुलसितारा.

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(486)

Shivaji, Bhagava Flag-1, Marathi 4867

भगवा ध्वज वंदना, मराठी

भगवा झेंडा, शिवराया चा, स्वातंत्र्या चा सेतु.

भारत माते चा शुभ मंगल, पावन प्रतीक, रे तू.

1

भगव्या झेंड्या प्रणाम तुजला, आम्हाला यश दे तू.

भगवा झेंडा, शिवराया चा, स्वातंत्र्या चा सेतु.

भारत माते चा शुभ मंगल, पावन प्रतीक, रे तू.

2

तूच कपिध्वज, गरुड ध्वज तू, विजयश्री चा केतु.

भगवा झेंडा, शिवराया चा, स्वातंत्र्या चा सेतु.

भारत माते चा शुभ मंगल, पावन प्रतीक, रे तू.

3

सूर्य उगवता, रंग गेरवा, अथक स्फूर्ति चा हेतु.

भगवा झेंडा, शिवराया चा, स्वातंत्र्या चा सेतु.

भारत माते चा शुभ मंगल, पावन प्रतीक, रे तू.

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(488)

Shivaji, Bhagava Flag-3, Marathi 4881

भगवा ध्वज वंदना, मराठी

 

भगवा झेंडा श्री शिवबा चा, स्वातंत्र्या चा केतु.

भगवा झेंडा शिवराया चा, स्वातंत्र्या चा केतु.

वीर मावळ्यां चा तू बाणा, त्यांचे दैवत, रे तू.

1

भगव्या झेंड्या! वंदन तुजला, आर्यांना यश दे तू.

भगवा झेंडा शिवराया चा, स्वातंत्र्या चा केतु.

वीर मावळ्यां चा तू बाणा, त्यांचे दैवत, रे तू.

2

सूर्य उगवता रंग तुझा तो, अथक स्फूर्ति चा सेतु.

भगवा झेंडा शिवराया चा, स्वातंत्र्या चा केतु.

वीर मावळ्यां चा तू बाणा, त्यांचे दैवत, रे तू.

3

वीर मावळे तुझ्या कृपेने, रणांगणीं रणजेतु.

भगवा झेंडा शिवराया चा, स्वातंत्र्या चा केतु.

वीर मावळ्यां चा तू बाणा, त्यांचे दैवत, रे तू.

4

देशभक्ति चा केंद्र बिंदु तू, प्रणाम अमुचा घे तू.

भगवा झेंडा शिवराया चा, स्वातंत्र्या चा केतु.

वीर मावळ्यां चा तू बाणा, त्यांचे दैवत, रे तू.

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(490)

Shivaji, Bhagava Flag-5, Hindi 4901

भगवा झंडा, हिंदी

रणवीर शिवाजी राजा ने, भगवा ध्वज फहराया है.

यह लख कर भारत माता का, मन गौरव से भर आया है.

रणवीर शिवाजी राजा ने, भगवा ध्वज फहराया है.

1

कितनी सदियों से भारत माँ, अवमानित होकर बैठी थी.

पर, आज उसे इक आशा का, शुभ किरण नजर में आया है.

रणवीर शिवाजी राजा ने, भगवा ध्वज फहराया है.

2

वह नेता वीर मराठों का, जो सबको प्राण से प्यारा है.

जिन जन के खातिर लड़ता है, उनके मन का वो राया है.

रणवीर शिवाजी राजा ने, भगवा ध्वज फहराया है.

3

भगवा ध्वज को गुरुवर कहके, उसने अभियान चलाया है.

सब देशभक्त जागृत करके, क्रांति का दीप जलाया है.

रणवीर शिवाजी राजा ने, भगवा ध्वज फहराया है.

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(491)

Shivaji, Bhagava Flag-6, Marathi 4911

भगवा ध्वज, मराठी

भगवा ध्वज हा भजुनी, गरजा हर हर महादेव!

ध्वज हा भवानी ने दिला, रक्षण करण्या शिवाला.

भगवा ध्वज हा बघुनी, गरजा हर हर महादेव!

ध्वज हा भवानी ने दिला, रक्षण करण्या शिवाला.

1

गरुडध्वज हा विष्णु चा, कपिध्वज तो शुभ कीर्ति चा.

रवि सम उज्ज्वल केशरी, नमूया भगवा ध्वजाला.

भगवा ध्वज हा भजुनी, गरजा हर हर महादेव!

ध्वज हा भवानी ने दिला, रक्षण करण्या शिवाला.

2

भारत माते! हा तुझा, भगवा पावन केतु, !

प्रताप लक्ष्मीबाईला, रत्रोत स्फूर्ति चा जहाला.

भगवा ध्वज हा भजुनी, गरजा हर हर महादेव!

ध्वज हा भवानी ने दिला, रक्षण करण्या शिवाला.

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(492)

Shivaji, Bhagava Flag-7, Marathi 4921

भगवा ध्वज नमन, मराठी

भगव्या झेंड्या! नमन तुला रे! तू निष्ठेचा, दाता रे!

वीर शिवाजी तुला पूजतो, स्वातंत्र्याचा ज्ञाता रे.

भगव्या झेंड्या! नमन तुला रे! तू निष्ठेचा, दाता रे!

1

घोर संकटें आली गेली, तूच संस्कृति, त्राता रे!

भगव्या झेंड्या! नमन तुला रे! तू निष्ठेचा, दाता रे!

2

तूच कपिध्वज! गरुडध्वज तू! तुला शरण मी, आता रे!

भगव्या झेंड्या! नमन तुला रे! तू निष्ठेचा, दाता रे!

3

धन्य जाहली, तुझ्या कांति ने, पावन भारत माता रे!

भगव्या झेंड्या! नमन तुला रे! तू निष्ठेचा, दाता रे!

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(493)

Shivaji, Chhatrapati Shivaji, Marathi-Sanskrit 4931

छत्रपति श्री शिवाजी महाराज, संस्कृत-मराठी

शिवलीलामृतं हृद्यपुण्यं, इतिहासे इदं अग्रगण्यम्.

सुन्दरं मंगलं वीरकाव्यं, साकारं करोति विधाता.

अद्भुतं मोददं चित्तरम्यं, स्फूर्तिदं प्रेरकं, ज्ञानगम्यम्.

सभ्यतादं शुभं भक्तिकाव्यं, एषा सन्मानदा ज्ञानगीता.

सुन्दरं मंगलं वीरकाव्यं, साकारं करोति विधाता.

1

तुकारामांची अभंग उक्ति, रामदासांच्या श्लोकांची सूक्ति.

जिजाबाईंची स्वातंत्र्य वृत्ति, वर दिधला जो भवानी माता.

सुन्दरं मंगलं वीरकाव्यं, साकारं करोति विधाता.

2

मर्द शूरांची सुंदर कहाणी, धर्मधीरांच्या कीर्ती ची गाणीं.

कर्मवीरांची ओजस्वी वाणी, भक्तिभावांत गाऊँया आता.

सुन्दरं मंगलं वीरकाव्यं, साकारं करोति विधाता.

3

दान विद्येचे द्या गणनाथा! लिहूं शिवबाची मी दिव्य गाथा.

ऐसी झाली होणार गीता, राग-छंदांची सरगम सरिता.

सुन्दरं मंगलं वीरकाव्यं, साकारं करोति विधाता.

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(494)

Shivaji, Escape from Agra-1, Marathi-4941

आगर्याहून सुटका-1, मराठी

आला बाई! राजा शिवाजी घरी आला.

आला बाई! राजा शिवाजी घरी आला.

1

सांगे जिजाऊ माता, शिवबा शहाणा. देऊ आशिष त्याला.

आला बाई! राजा शिवाजी घरी आला.

2

लपून-छपून कसा, तिथून निघाला. देऊन त्रास जिवाला.

आला बाई! राजा शिवाजी घरी आला.

3

देऊन तुरी बाई! मुगलांच्या हातीं. बसून पेटारीं निघाला.

आला बाई! राजा शिवाजी घरी आला.

4

सुलतान त्याच्या मागे, शोधत आला. सुगाव काहींच त्याला.

आला बाई! राजा शिवाजी घरी आला.

5

अंबा भवानीचा, वरदान त्याला. ओवाळूं आरती त्याला.

आला बाई! राजा शिवाजी घरी आला.

6

अवतार तो शुभ, शिव-शंकराचा. मानाचा मुजरा ! त्याला.

आला बाई! राजा शिवाजी घरी आला.

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(495)

Shivaji, Escape from Agra-2, Marathi 4951

आगर्र्याहून सुटका-2, मराठी

चंचल रे! हा शिवाजी, पकडूँ शका ना ह्याला.

धुंडोनी मुगल हे थकले, चार ही दिशांनी ह्याला.

चंचल रे! हा शिवाजी, पकडूँ शका ना ह्याला.

1

ह्याचा सखा तान्हाजी, ह्याचा गडी तो बाजी.

ह्याचे मराठे संगी, देती कटीची लुंगी.

सर्वस्व अर्पण त्यांचे, मिटवाया संकटाला.

चंचल रे! हा शिवाजी, पकडूँ शका ना ह्याला.

2

ह्याची जिजाऊ आई, जी थोर मनाची बाई.

जाणुनी वेळ काळाची, उमजुनी उचित ती घाई.

नीतीचे गूढ जे नाना, दिधले तिने बाळाला.

चंचल रे! हा शिवाजी, पकडूँ शका ना ह्याला.

3

शिवबाची ठाम ती श्रद्धा, प्रतिकूल काळीं सुद्धा.

घोडे तूफानी त्याचे, किल्ले पहाडी त्याचे.

त्याचा गनीमी कावा, तुळणा असे ना ज्याला.

चंचल रे! हा शिवाजी, पकडूँ शका ना ह्याला.

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(496)

Shivaji, Immortal Shivaji, Marathi 4961

शिवबा मरुनी अमर झाले, मराठी

छत्रधारी, श्री शिवाजी! तुझे सखे रे! तान्हा बाजी.

मरुनी अमर जाहले, शिवबा! मरुनी अमर जाहले.

मरुनी अमर जाहले, शिवबा! मरुनी अमर जाहले.

1

त्या वीरांच्या आठवणींनी, आज अश्रु आणले.

राया! मरुनी अमर जाहले.

मरुनी अमर जाहले, शिवबा! मरुनी अमर जाहले.

2

वीरश्रीच्या अनुपम गाथा, स्मरुनी मन दाटले.

राया! मरुनी अमर जाहले.

मरुनी अमर जाहले, शिवबा! मरुनी अमर जाहले.

3

अर्पण करुनी प्राण आपुले, चार चंद्र लावले.

राया! मरुनी अमर जाहले.

4

स्वातं5याच्या इतिहासाला, स्वर्णपर्ण लागले.

राया! मरुनी अमर जाहले.

मरुनी अमर जाहले, शिवबा! मरुनी अमर जाहले.

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(497)

Shivaji, Kondhana Victory, Marathi 4971

कोंढाणा विजय, मराठी लावणी

जिरे टोप शुभ झळझळ झळके, कंगन कंठी कुण्डलें.

मंगल मुंदरी, मुकुन्द माळा, काळीं घनदाट कुन्तलें.

जिरे टोप शुभ झळझळ झळके, कंगन कंठी कुण्डलें.

मंगल मुंदरी, मुकुन्द माळा, काळीं घनदाट कुन्तलें.

1

घण घण करिती घंटा घुंगरू, सैनिक नाचात रंगले.

कौंढाण्यावर जय-शिवबाच्या, शाहिर गाण्यांत दंगले.

जिरे टोप शुभ झळझळ झळके, कंगन कंठी कुण्डलें.

मंगल मुंदरी, मुकुन्द माळा, काळीं घनदाट कुन्तलें.

2

पुष्प उधळतीं सुंदर ललना, योद्धे युद्धात जिंकले.

शिंपडतीं जल पावन ऋषि मुनि, घेउनी हातीं कमंडलें.

जिरे टोप शुभ झळझळ झळके, कंगन कंठी कुण्डलें.

मंगल मुंदरी, मुकुन्द माळा, काळीं घनदाट कुन्तलें.

3

विजयी झाले वीर मावळे, मुगलांचे राज्य संपले.

भारतमाते! तुझ्या मुलांनी, स्वप्न स्वराज्याचे गुंफले.

जिरे टोप शुभ झळझळ झळके, कंगन कंठी कुण्डलें.

मंगल मुंदरी, मुकुन्द माळा, काळीं घनदाट कुन्तलें.

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(498)

Shivaji, Maratha People-1, Hindi 4981

शिवाजी के वीर, हिंदी

वीर ये भी है, वीर वो भी हैं, वीर से मिलता सो वीर है.

करता रण पर प्राण न्योछावर, सिर पर उसके ही ताज है.

करता रण पर प्राण न्योछावर, सिर पर उसके ही ताज है.

1

वीर शिवाजी, वीर मराठे, दोनों मिल कर स्वराज्य है.

करता रण पर प्राण न्योछावर, सिर पर उसके ही ताज है.

2

वीर है राणा, वीर शिवाजी, सेना हिंदवी का राज है.

करता रण पर प्राण न्योछावर, सिर पर उसके ही ताज है.

3

वीरों ने जो, तजे प्राण हैं, अमर वे मर कर भी आज हैं.

करता रण पर प्राण न्योछावर, सिर पर उसके ही ताज है.

4

जीते हारे, ढेर होगये, हमें सभी पर ही नाज़ है.

करता रण पर प्राण न्योछावर, सिर पर उसके ही ताज है.

5.

जो वीर थे, धर्म तज गये, हमको उन पर ही लाज है.

करता रण पर प्राण न्योछावर, सिर पर उसके ही ताज है.

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(499)

Shivaji, Maratha People-2, Marathi 4991

वीर मावळे-2, मराठी

तू धीट वीर अमुचा, तू नीट वीर अमुचा.

तुजला प्रणाम अमुचा, रे मावळ्या! रे मावळ्या!

तुजला प्रणाम अमुचा, रे मावळ्या! रे मावळ्या!

1

शत्रु दुरूनी आला, त्याने विनाश केला.

गौरव देश अमुचा, सन्मान धर्म अमुचा.

तू तो खलास केला, त्यागून प्राण अपुला.

तुजला सलाम अमुचा, रे मावळ्या! रे मावळ्या!

तुजला प्रणाम अमुचा, रे मावळ्या! रे मावळ्या!

2

रक्षक महान अमुचा, आदर्श छान अमुचा.

तू देश हा मराठा, आहेस धन्य केला.

आजादी चा धनी तू, नित आमुच्या मनीं तू!

तुजलाच मान अमुचा, रे मावळ्या! रे मावळ्या!

तुजला प्रणाम अमुचा, रे मावळ्या! रे मावळ्या!

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(500)

Shivaji, Maratha People-3, Marathi 5001

वीर मराठे-3, मराठी

शूर शिवाजी चे सखे - - -, वीर मराठे - - -, मावळे.

शूर शिवाजी चे सखे - - -, वीर मराठे - - -, मावळे.

1

भोसले मालुसरे, धीट हीं लेकरें.

प्राणहि देतीं - - हसमुखें, शौर्य तयांना - - -, आवडे.

शूर शिवाजी चे सखे - - -, वीर मराठे - - -, मावळे.

2

कंक निंबाळकर, काकडे पालकर.

कष्ट सोसतीं ते सुखे, हार तयांना नावडे.

शूर शिवाजी चे सखे - - -, वीर मराठे - - -, मावळे.

3

मोहिते घोरपडे, झुंझावयाला खडे.

शिव-भवानी चें कृपें, राज्य तयांना फावले.

शूर शिवाजी चे सखे - - -, वीर मराठे - - -, मावळे.

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(501)

Shivaji, Maratha People-4, Marathi 5011

वीर मराठे लोक-4, मराठी

ह्या वीरांची अमर ही गाथा, सुवर्ण लिहीली भारती ने.

ह्या वीरांची परम ही गाथा, सुवर्ण लिहीली भारती ने.

1

ह्या शूरांनी, दीप जाळिला, अखंड अविरत, कीर्ती ने.

ह्या वीरांची अमर ही गाथा, सुवर्ण लिहीली भारती ने.

2

तान्हा, बाजी, अमर शिवाजी, ह्याच्या मंगल मूर्ती ने.

ह्या वीरांची अमर ही गाथा, सुवर्ण लिहीली भारती ने.

3

वाचुनी त्यांचे, चरित्र अमुचे, जीवन सार्थक, स्फूर्ती ने.

ह्या वीरांची अमर ही गाथा, सुवर्ण लिहीली भारती ने.

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(502)

Shivaji, Maratha People-4, Marathi 5021

वीर मावळे वंदना, मराठी

वंदना रे तुला, वीर मावळ्या! वंदना.

वंदना रे गडे, वीर मराठ्या! वंदना.

वंदना रे तुला, वीर मावळ्या! वंदना.

1

तूच आमुचा स्फूतीदाता, तूच आमुची स्पंदना,

वंदना रे तुला, वीर मावळ्या! वंदना.

2

धन्य केली तू भारतमाता, हिंदुभूमिच्यानंदना!

वंदना रे तुला, वीर मावळ्या! वंदना.

3

बाळकडू पय पाजते तुला, जिजामातुवीरांगना!

वंदना रे तुला, वीर मावळ्या! वंदना.

4

सद्धर्माचे शस्त्र धारुनी, पारतंत्र्यदुखभंजना,

वंदना रे तुला, वीर मावळ्या! वंदना.

5

सुगंध शुभमंगल दरवळला, कीर्तिसौरभचंदना,

वंदना रे तुला, वीर मावळ्या! वंदना.

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(503)

Shivaji, He Shivaji, Marathi 5031

त्रहि त्राहि शिवबा! मराठी

दुष्काळाचा काळ दुःखांचा, आज विकट आला.

या विघ्नांचा अंत कराया, कोण करुण वाली.

दुष्काळाचा काळ दुःखांचा, आज विकट आला.

या विघ्नांचा अंत कराया, कोण करुण वाली.

1

हे शिवराया! तूच आमुचा, संरक्षक स्वामी.

दाखव लीला, तू शत्रूंना, दिव्य हुनर वाली.

दुष्काळाचा काळ दुःखांचा, आज विकट आला.

या विघ्नांचा अंत कराया, कोण करुण वाली.

2

जयतु भवानी! दुर्गे अंबे! दाखव ! माया.

पाठव आता तारण करता, जय जय जय काली.

दुष्काळाचा काळ दुःखांचा, आज विकट आला.

या विघ्नांचा अंत कराया, कोण करुण वाली.

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(504)

Shivaji, Prayer to Shivaji, Marathi 5041

शिवाजी वंदना, मराठी

सुंदर मंगल स्मरण शिवाचे, आरती कीर्तन भजन तयाचे.

शूर मराठे सैनिक त्याचे.

1

स्वातंत्र्याचा तो सेनानी, स्वातंत्र्याचा तो सेनानी.

शूर मराठे सैनिक त्याचे.

2

सदाचारमय वर्तन त्याचे, आनंदें करू वर्णन त्याचे.

शूर मराठे सैनिक त्याचे.

3

परम शिवाजीची ती लीला, अकथ महा उपकार जयाचे.

शूर मराठे सैनिक त्याचे.

4

अद्भुत राजा वीर शिवाजी, प्राप्त जया वरदान शिवाचे.

शूर मराठे सैनिक त्याचे.

5

बंधु अमुचा, सखा शिवाजी, जिजाऊ माता, पिता शहाजी.

शूर मराठे सैनिक त्याचे.

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(505)

Shivaji, Raigadh Victory-1, Marathi 5051

राजगड विजय मराठी

नाम जपा, काम करा, राम म्हणा, नाम रे!

नाम जपा, काम करा, राम म्हणा, नाम रे!

1

वीट रचा, नीट रचा, धीट रचा, छान, रे!

कोट उभा तुंग करू, त्वरें करा काम, रे!

नाम जपा, काम करा, राम म्हणा, नाम रे!

2

शत्रु घातकी महा, मातृभूमि संकटे.

देश रक्षणाय करा, दुर्ग हा महान, रे!

नाम जपा, काम करा, राम म्हणा, नाम रे!

3

छत्रपतीने दिले, काम मुल्यवान, रे!

भूल मुळी नसो कुठे, असो सदा ध्यान, रे!

नाम जपा, काम करा, राम म्हणा, नाम रे!

4

राष्ट्रहितें त्याग करी, वीर अर्पण प्राण, रे!

पुण्यवान क्षात्र तोच, स्वर्ग त्यास धाम, रे!

नाम जपा, काम करा, राम म्हणा, नाम रे!

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(506)

Shivaji, Raigadh Victory-2, Marathi 5061

वीर शिवाजींचा रायगड, मराठी

वीर शिवाजी आमुचा, महा झुजारू, रे!

रायगडावर त्याचा झेंडा, उंच उभारू, रे!

धीर शिवाजी आमुचा, महा झुजारू, रे!

गडा गडा वर भगवा ध्वज हा, उंच उभारू, रे!

1

किल्ले त्याने विविध जिंकले, आणि रचले नाना.

विस्मयकारक विश्व जाहले, बघुनी गड किल्यांना.

अभिनंदन या! करू तयाचे, पोवडे गाऊँ, रे!

या! नाचूँ गाऊँ, रे!

वीर शिवाजी आमुचा, महा झुजारू, रे!

रायगडावर त्याचा झेंडा, उंच उभारू, रे!

2

देवी भवानी प्रसन्न ज्याला, शुभ वर अर्पण त्याला.

दिली तिने तलवार आपुली, आनंदाने त्याला.

अपुला नेता करू तयाला, शस्त्र उगारूँ, रे!

जुलमींना मारूँ, रे!

वीर शिवाजी आमुचा, महा झुजारू, रे!

रायगडावर त्याचा झेंडा, उंच उभारू, रे!

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(507)

Shivaji, Raja Shivaji-10, Marathi 5071

राजा शिवाजी-10, मराठी

गावें गान खुशीने त्याचे, घ्यावें नाम शिवाचे.

सुंदर मंगल लक्षण साचे, आवडत्या शिवबाचे.

गावें गान खुशीने त्याचे, घ्यावें नाम शिवाचे.

सुंदर मंगल लक्षण साचे, छत्रपति शिवबाचे.

1

स्वातंत्र्याचा जो सेनानी, जन सेवा सुख ज्याचे.

तन मन अर्पण करुनी करतो, रक्षण जो देशाचे.

नारी-आदर सद्गुण ज्याचा, अवगुण दूर जयाचे.

गावें गान खुशीने त्याचे, घ्यावें नाम शिवाचे.

सुंदर मंगल लक्षण साचे, आवडत्या शिवबाचे.

2

वीरांचा रणवीर खरा जो, चरित्र रोचक ज्याचे.

शूर बहादुर संगी ज्याचे, देशभक्त रक्ताचे.

पूज्य नरोत्तम पावन ऐशा, आदरणीय शिवाचे.

गावें गान खुशीने त्याचे, घ्यावें नाम शिवाचे.

सुंदर मंगल लक्षण साचे, आवडत्या शिवबाचे.

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(508)

Shivaji, Raja Shivaji-1, Marathi 5081

शिवाजी राजा झाला, मराठी

झनक झनक झन् मंगल वाजे, वीणेची झनकार.

छम् छम् घुंगरूँचा रव ताल, ! वाजे वीणेची झनकार.

1

आज शिवाजी राजा झाला, उत्सव हा रंगदार, बाई!

फूल मोगरा चाफा उधळूं, घालूँ गुलाब हार !

गाऊँ त्याचा जय जयकार, ! वाजे वीणेची झनकार.

2

गीत लावण्या अन् पोवाडे, वाजत डफ दमदार, बाई!

ललना गाती सुंदर गीतें, ताल जयां रसदार, !

कवि शाहिर गातीं दणकट, छत्रपति जयकार,

! वीणेची झनकार.

3

राजा सजला श्री शिवराया, इन्द्र जसा सुकुमार, बाई!

देश देशचे नृपवर आले, इंग्रज ही सरकार, !

बाधा मुळीं घालूँ शकले, सुलतानी सरदार,

! वीणेची झनकार.

4

विजय पताका किल्ले सजले, सजले पहरेदार, बाई!

आशिष देतीं गुरुजन सगळे, काशी-पंडित चार, !

कधी झाला असा सोहळा, महाराष्ट्र खुश फार,

! वीणेची झनकार.

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(509)

Shivaji, Raja Shivaji-2, Marathi 5091

शिवाजी राजे छत्रपति, मराठी

क्षण हा आनंदाचा, शिवबा आज छत्रपति.

पहिला भूप मराठा, रे दादा! आज हर्ष अति.

क्षण हा आनंदाचा, शिवबा आज छत्रपति.

1

आज घरो-घरी गुढी उभारा, आज घरो-घरी गुढी उभारा.

जय जय शिवबा!” करा पुकारा, गडे! आज हर्ष अति.

क्षण हा आनंदाचा, शिवबा आज छत्रपति.

2

विजयश्रीचे गा पोवाडे, विजयश्रीचे गा पोवाडे.

उडवा दरूकाम फटाके, रे भाऊ! आज हर्ष अति.

क्षण हा आनंदाचा, शिवबा आज छत्रपति.

3

ध्वजा-पताका तोरण लावा, ध्वजा-पताका तोरण लावा.

वाटा पेढे लाडू मेवा, सखी! आज हर्ष अति.

क्षण हा आनंदाचा, शिवबा आज छत्रपति.

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(510)

Shivaji, Raja Shivaji-3, Marathi 5101

शिवाजी राजा झाला, मराठी

आज शिवाजी राजा झाला, अभिनन्दन द्या मंगल त्याला.

आज शिवाजी राजा झाला, अभिनन्दन द्या मंगल त्याला.

1

देश स्वतंत्र जयाने केला, घालूँ तयाला चंपक माला.

आज शिवाजी राजा झाला, अभिनन्दन द्या मंगल त्याला.

2

धर्म परायण शीलवान हा, राजा ऐसा कधी झाला.

आज शिवाजी राजा झाला, अभिनन्दन द्या मंगल त्याला.

3

गातीं स्तोत्रें त्याच्या स्तुति ची, नर नारी जन बालक बाला.

आज शिवाजी राजा झाला, अभिनन्दन द्या मंगल त्याला.

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(511)

Shivaji, King Shivaji-4, Marathi 5111

शिवाजी राज्याभिषेक, मराठी

आज शिवाजी राजा झाला, अभिनंदन द्या हार्दिक त्याला.

हो! जी जी- - - जी, जी जी- - - जी जी- -, जी- -.

हो! जी जी- - - जी, जी जी- - - जी जी- -, जी- -.

1

धन्य जिजाबाई मातोश्री, छत्रपति सुत ज्यांचा झाला.

आज शिवाजी राजा झाला, अभिनंदन द्या हार्दिक त्याला.

हो! जी जी- - - जी, जी जी- - - जी जी- -, जी- -.

हो! जी जी- - - जी, जी जी- - - जी जी- -, जी- -.

2

वीर प्रताप राणा संगाचा, ध्वज उज्ज्वळ भगवा ज्याला.

आज शिवाजी राजा झाला, अभिनंदन द्या हार्दिक त्याला.

हो! जी जी- - - जी, जी जी- - - जी जी- -, जी- -.

हो! जी जी- - - जी, जी जी- - - जी जी- -, जी- -.

3

कर तान्हाजी-बाजी ज्याचे, वंदन लाख करावे त्याला.

आज शिवाजी राजा झाला, अभिनंदन द्या हार्दिक त्याला.

हो! जी जी- - - जी, जी जी- - - जी जी- -, जी- -.

हो! जी जी- - - जी, जी जी- - - जी जी- -, जी- -.

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(512)

Shivaji, King Shivaji-5, Marathi 5121

जाणता शिवाजी राजा, मराठी

सदा ओळखोनी उचित काळ वेळ.

शिवाजी गनीमी करी युद्ध खेळ.

सदा ओळखोनी उचित काळ वेळ.

शिवाजी गनीमी करी युद्ध खेळ.

1

धरी धैर्य ध्यानी-मनी ताळमेळ.

अटळ धैर्य अंगी कधी ना अवेळ.

सदा ओळखोनी उचित काळ वेळ.

शिवाजी गनीमी करी युद्ध खेळ.

2

शिवाजी मराठा जरी वीर योद्धा.

सदा सभ्य सुकृत जनीं तो कृपाळ.

सदा ओळखोनी उचित काळ वेळ.

शिवाजी गनीमी करी युद्ध खेळ.

3

जयाने घडविला शुभ पुन्हा सुकाळ.

जिजा मातुचा श्री शिवा तोच बाळ.

सदा ओळखोनी उचित काळ वेळ.

शिवाजी गनीमी करी युद्ध खेळ.

4

शिवाजी नृपाने परम पेरले बी.

तयाते उगविली सुखाची सकाळ.

सदा ओळखोनी उचित काळ वेळ.

शिवाजी गनीमी करी युद्ध खेळ.

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(513)

Shivaji, King Shivaji-6, Marathi 5131

शिवाजी राज्याभिषेक, मराठी

पैंजण खण खण वाजत पायीं, कंगण रुण झुण करतीं हातीं.

सुंदर ललना गातीं.

पैंजण खण खण वाजत पायीं, कंगण रुण झुण करतीं हातीं.

सुंदर ललना गातीं.

1

गंभीर रव हे रणशिंगांचे, गूँजत गूँजत कानीं पडती.

पैंजण खण खण वाजत पायीं, कंगण रुण झुण करतीं हातीं.

सुंदर ललना गातीं.

2

आनंदोत्सव मंगलकारी, भट वीरांची फुगली छाती.

पैंजण खण खण वाजत पायीं, कंगण रुण झुण करतीं हातीं.

सुंदर ललना गातीं.

3

शंकर भोला, देवी भवानी, करती सदा दुष्टांची माती.

पैंजण खण खण वाजत पायीं, कंगण रुण झुण करतीं हातीं.

सुंदर ललना गातीं.

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(516)

Shivaji, King Shivaji-9, Marathi 5161

जाणता शिवाजी-3, मराठी

जया दंभ नाही, तमो छंद नाही.

असा एक जाणा, शिवाजीच राजा.

जया गर्व नाही, जया दर्प नाही.

असा एक जाणा, शिवाजीच राजा.

1

मरोनी उरे जो, जगी धन्य राया.

शिवाची जयाला, अलौकीक माया.

सदा ही तयाचा, सखाभाव ताजा.

जया दंभ नाही, तमो छंद नाही.

असा एक जाणा, शिवाजीच राजा.

2

सदा जो शहाणा, सदा जाणता जो.

सदा जो सहारा, सदा आसरा जो.

समाधान देतो, सदा तो समाजा.

जया दंभ नाही, तमो छंद नाही.

असा एक जाणा, शिवाजीच राजा.

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(517)

Shivaji, Rani Jijabai-1, Marathi 5171

राजमाता वीरांगना जिजाबाई

मराठी लावणी

1

ती जिजा बाई वाघीण, जहरी नागीण, हाती संगीण, मराठा जात,

जी- - जी- , जी- जी- - जी जी- - जी जी- -  जी जी- - जी- -.

ती जिजा बाई वाघीण, जहरी नागीण, हाती संगीण, मराठा जात,

जी- - जी- जी- जी- - जी जी- - जी जी- -  जी जी- - जी- -.

2

ती नार पक्या बांध्याची, अच्छ्या खांद्यांची, कच्या कांद्यांशीं, भाकरी खात.

जी- - जी- , जी- जी- - जी जी- - जी जी- -  जी जी- - जी- -.

ती जिजा बाई वाघीण, जहरी नागीण, हाती संगीण, मराठा जात,

जी- - जी- जी- जी- - जी जी- - जी जी- -  जी जी- - जी- -.

3

तू तिला देऊँ नको आट, लाऊँ नको नाट, लावेल तुझी वाट, करील ती घात.

जी- - जी- , जी- जी- - जी जी- - जी जी- -  जी जी- - जी- -.

ती जिजा बाई वाघीण, जहरी नागीण, हाती संगीण, मराठा जात,

जी- - जी- जी- जी- - जी जी- - जी जी- -  जी जी- - जी- -.

4

अरे गड्या, शहाजींची दार, धोरणी नार, लढा लढणार, शिवाजींची मात.

जी- - जी- , जी- जी- - जी जी- - जी जी- -  जी जी- - जी- -.

ती जिजा बाई वाघीण, जहरी नागीण, हाती संगीण, मराठा जात,

जी- - जी- जी- जी- - जी जी- - जी जी- -  जी जी- - जी- -.

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(518)

Shivaji, Rani Jijabai-2, Marathi 5181

जिजा माता, मराठी

माता म्हणा, म्हणा आई, मैया म्हणा, तिला माई.

अंबा म्हणा, म्हणा अम्मा, जननी म्हणा, ती पुण्याई.

1

केला पुत्र तिने राजा, गाउनी मंगल अंगाई.

माता पूज्य मराठ्यांची, देवी तीच जिजाबाई.

माता म्हणा, म्हणा आई, मैया म्हणा, तिला माई.

अंबा म्हणा, म्हणा अम्मा, जननी म्हणा, ती पुण्याई.

2

अगम अगाध तिची माया, प्रेमळ सदा सुखी छाया.

जननी कुणास ती आजी, पत्नी सुता सखी ताई.

माता म्हणा, म्हणा आई, मैया म्हणा, तिला माई.

अंबा म्हणा, म्हणा अम्मा, जननी म्हणा, ती पुण्याई.

3

गौरी कौसल्या सीता, यशोमती भारतमाता.

झाशीची राणी लक्ष्मी, धन्य धन्य पन्नादाई.

माता म्हणा, म्हणा आई, मैया म्हणा, तिला माई.

अंबा म्हणा, म्हणा अम्मा, जननी म्हणा, ती पुण्याई.

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(519)

Shivaji, Rani Saibai, Marathi 5191

वीरांगना सईबाई, मराठी भावगीत

बाळपणी ती जुळली नाती, नवी संपदा आली हाती.

जन्मोजन्मी माझी होती, ह्या जन्मीही इथे पुन्हा ती.

ह्याला नशीब म्हणती. ह्याला नशीब म्हणती.

ह्याला नशीब म्हणती.

1

दैवाची ही किमया भारी, तीच घडविते माया सारी.

फलदायी ती सुखकारी, चैतन्याला उजळविणारी.

देवा पुढची पणती. ह्याला नशीब म्हणती.

ह्याला नशीब म्हणती.

2

मंद ज्योत ती स्वतः जळते, मंगळ आभा ती झळझळते.

दर्शन प्रभुचे ज्याने फळते, ती प्रियदर्शिनी हे मग कळते.

भाग्यलक्ष्मी कण-कण ती. ह्याला नशीब म्हणती.

ह्याला नशीब म्हणती.

3

ती राधा ती सीता गौरी, ती मीता ती सजणी नौरी.

सौभाग्यवती ती अर्धांगिनी, ऋद्धि-सिद्धि डुलवित चौरी.

स्तुति-स्तोत्र गुणगुणती. ह्याला नशीब म्हणती.

ह्याला नशीब म्हणती.

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(520)

Shivaji, Righteous King Shivaji, Marathi 5201

खानाची सून प्रकरण, मराठी लावणी

स्वभाव सुंदर, प्रभाव मंगल, तुझा शिवाजी, अनन्य !

असा जाणता, तथा शहाणा, महान राजा, अन्य !

स्वभाव सुंदर, प्रभाव मंगल, तुझा शिवाजी, अनन्य !

तुझा शिवाजी, अनन्य !

1

परस्त्री ज्याला, सुवंद्य माता, तुझा शिवाजी सुगण्य !

परम धुरंधर तुझा पुत्र हा, जिजाऊ माते तू धन्य !

स्वभाव सुंदर, प्रभाव मंगल, तुझा शिवाजी, अनन्य !

असा जाणता, तथा शहाणा, महान राजा, अन्य !

स्वभाव सुंदर, प्रभाव मंगल, तुझा शिवाजी, अनन्य !

तुझा शिवाजी, अनन्य !

अंरात-2

अगम्य लीला, अनेक ज्याच्या, चरित्र त्याचे, सुरम्य !

स्वदेश ज्याने स्वतंत्र केला, तया भवानी प्रसन्न !

स्वभाव सुंदर, प्रभाव मंगल, तुझा शिवाजी, अनन्य !

असा जाणता, तथा शहाणा, महान राजा, अन्य !

स्वभाव सुंदर, प्रभाव मंगल, तुझा शिवाजी, अनन्य !

तुझा शिवाजी, अनन्य !

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(521)

Shivaji, Shiva Leelamrit-3, Marathi 5211

शिव लीलामृत-3, मराठी

शिवलीले ची अमर कहाणी, गाऊँया मधु वाणी, रे!

शिवरायाची ऐकुनी गाणीं, झाली रयत शहाणी, रे!

शिवलीले ची परम कहाणी, गाऊँया मधु वाणी, रे!

1

दिली शिवजीला माते ने, स्वातंत्र्या ची किल्ली, रे!

वीर मराठ्यां ची मग सेना, शिवबा ने ती केली, रे!

शिवलीले ची अमर कहाणी, गाऊँया मधु वाणी, रे!

2

लागोपाठ सर किल्ले केले, नवीन रचले भारी, रे!

जगात विश्रुत ते गड त्याचे, चढतां येई ग्लानि, रे!

शिवलीले ची अमर कहाणी, गाऊँया मधु वाणी, रे!

3

अफजुल, सिद्दी, शाहिस्ते खाँ, हार मानले वैरी, रे!

शत्रुदलांवर गनिमी हल्ले, सूरत वर ही स्वारी, रे!

शिवलीले ची अमर कहाणी, गाऊँया मधु वाणी, रे!

4

किल्लों-किल्लीं फिरतो चंचल, पकडूँ शके , कोणीं रे!

अद्भुत सुटका आगर्या वरुनी, लीला अनुपम, दैवी रे!

शिवलीले ची अमर कहाणी, गाऊँया मधु वाणी, रे!

5

सदाचार हा ज्याचा बाणा, परस्त्री माता मानी, रे.

असा जाणता राजा जगती, कोण भला नृप दानी, रे.

शिवलीले ची अमर कहाणी, गाऊँया मधु वाणी, रे!

6

कथा ऐकाता, नयनीं येई, आनंदाश्रु पाणी, रे !

भारत देशा! लेकरें तुझीं, प्रताप झाशी-राणी, रे!

शिवलीले ची अमर कहाणी, गाऊँया मधु वाणी, रे!

शिवलीले ची परम कहाणी, गाऊँया मधु वाणी, रे!

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(622)

Shivaji, Shiva Leelamrit-4, Marathi 6221

शिवाची लीला, मराठी

बोले तैसी चाल ज्याला, नांव शिवाजी त्याला.

वंदावी ती पाउलें, वहावी फूलमाला.

बोले तैसी चाल ज्याला, नांव शिवाजी त्याला.

1

तान्हाजी ज्याचा छावा, विजय त्याचा व्हावा.

कोंढाणा हाती यावा, पण सिंह आला.

बोले तैसी चाल ज्याला, नांव शिवाजी त्याला.

2

बाजीप्रभु सारखा, लाभला ज्याला सखा.

वियन परका, त्या शिवाजी नृपाला.

बोले तैसी चाल ज्याला, नांव शिवाजी त्याला.

3

हिरोजी पाठराखा, त्याचा होईना वाखा.

त्याच्या सुदृढ शाखा, हिरवा गार पाला.

बोले तैसी चाल ज्याला, नांव शिवाजी त्याला.

4

हेर बहिर्जी जैसा, त्यास कमी पैसा.

तुटवडा कैसा, त्या श्रीमान राजाला.

बोले तैसी चाल ज्याला, नांव शिवाजी त्याला.

5

कोणी शकेना धरूँ, कैद शकेना करूँ.

भय शकेना धरू, त्या धीमान वीराला.

बोले तैसी चाल ज्याला, नांव शिवाजी त्याला.

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(522)

Bharat Gaurav Chhatrapati Shivaji, 5221

शिवलीलामृत-1, हिंदी

सुना रहा हूँ गायन सुंदर, शिवलीला का कथा समुंदर.

सुना रहा हूँ गायन सुंदर, शिवलीला का कथा समुंदर.

1

जन्म शिवा का शिव अवतारा, मातु-जिजा का सु-मंत्र न्यारा.

स्वतंत्रता का अद्भुत नारा, महाराष्ट्र में पहिला नंबर.

सुना रहा हूँ गायन सुंदर, शिवलीला का कथा समुंदर.

2

श्रीगणेश है विजय-तोरणा, जीते और रचे गढ़ नाना.

अमर-कहानी जय-कोंढाणा, हर्ष से खिले धरती-अंबर.

सुना रहा हूँ गायन सुंदर, शिवलीला का कथा समुंदर.

3

ढेर किये अरि जाने-माने, दिल्लीपति को चकमे दीन्हे.

सुलतानों के मुश्किल जीने, कूटनीति से कीन्हे संगर.

सुना रहा हूँ गायन सुंदर, शिवलीला का कथा समुंदर.

4

पर-नारी को माँ का आदर, भूप शिवाजी सद्गुण आगर.

सुन कर अमर काथा का सागर, आनंदित हैं भवानी-शंकर.

सुना रहा हूँ गायन सुंदर, शिवलीला का कथा समुंदर.

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(523)

Shivaji, Shiva Leelamrit-2, Marathi 5231

शिवलीलामृत-2, मराठी

ऐका सुंदर संगीत सागर, शिवलीलांच्या कथांचा आगर.

ऐका सुंदर संगीत सागर, शिवलीलांच्या कथांचा आगर.

1

देवी भवानीने वर दिधला, परम-सुताचा जिजाबाईला.

जन्म शिवाचा शिवनेरीवर, नर-रूपें अवतरला शंकर.

ऐका सुंदर संगीत सागर, शिवलीलांच्या कथांचा आगर.

2

मातेने पढवुनि पुत्राला, स्वातंत्र्याचा पाया रचला.

कर्म शिवाजीं चे अजरामर, इतिहासें जे पहिला नंबर.

ऐका सुंदर संगीत सागर, शिवलीलांच्या कथांचा आगर.

3

विजय-तोरणा प्रमाण पहिले, गड सर केले, अनेक रचले.

रोमांचक जय सिंहगडावर, हर्षित झाले भवानी-शंकर.

ऐका सुंदर संगीत सागर, शिवलीलांच्या कथांचा आगर.

4

नामांकित अरि सर्व नमविले, दिल्लीपतिला छान चकविले.

सुलातानांना केले जर्जर, गनिमी-काव्यांचे ते संगर.

ऐका सुंदर संगीत सागर, शिवलीलांच्या कथांचा आगर.

5

पर-नारी माते सम आदर, भूप शिवाजी सद्गुण आगर.

ऐकुनि दिव्य कथांचा सागर, गदगद झाले धरती अंबर.

ऐका सुंदर संगीत सागर, शिवलीलांच्या कथांचा आगर.

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(524)

Prayer, Shankar Aarti, Marathi 5241

शंकर भोले! मराठी

आज चला या कीर्तन गाऊँ, शिव नामें शुभ मंगल सारी.

शरण शिवाला आपण जाऊँ, तोच आपुले संकट तारी.

भजन चला या आपण गाऊँ, चाल देउनी सुंदर भारी.

शरण शिवाला आपण जाऊँ, तोच आपुले संकट तारी.

1

भोला शंकर, सबदुखहारी, मंगल पावन गंगाधारी.

आज चला या कीर्तन गाऊँ, शिव नामें शुभ मंगल सारी.

शरण शिवाला आपण जाऊँ, तोच आपुले संकट तारी.

2

शंभु सदाशिव, त्रिशूलधारी, सर्वांचा प्रभु सबसुखकारी.

आज चला या कीर्तन गाऊँ, शिव नामें शुभ मंगल सारी.

शरण शिवाला आपण जाऊँ, तोच आपुले संकट तारी.

3

रुद्र महेश्वर, भवभयहारी, तूच नाथ वैकुण्ठविहारी.

आज चला या कीर्तन गाऊँ, शिव नामें शुभ मंगल सारी.

शरण शिवाला आपण जाऊँ, तोच आपुले संकट तारी.

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(525)

Shivaji, Shivaji Bhav Geet, Marathi 5251

शिवराया, मराठी भावगीत

आवडीचा माझा, तृप शिवराया.

ज्याने सिद्ध केले, स्वातंत्र्य स्वप्न.

आवडीचा माझा, तृप शिवराया.

ज्याने सिद्ध केले, स्वातंत्र्य स्वप्न.

1

ज्याने जुळवीले, महावीर नाना.

तोचि एक माझा, वीरश्री रत्न.

आवडीचा माझा, तृप शिवराया.

ज्याने सिद्ध केले, स्वातंत्र्य स्वप्न.

2

किल्ले ज्याचे हाती, तीनशे-साठ.

नित्य केले त्याने, भीष्म प्रयत्न.

आवडीचा माझा, तृप शिवराया.

ज्याने सिद्ध केले, स्वातंत्र्य स्वप्न.

3

हरले अनेक, ज्यासी महा विघ्न.

हरविले त्याने, नाना सपत्न.

आवडीचा माझा, तृप शिवराया.

ज्याने सिद्ध केले, स्वातंत्र्य स्वप्न.

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(526)

Shivaji, Shivaji Chalisa, Marathi 5261

शिवाजी चाळीसा, मराठी

1

गणाधीश जो पुत्र दुर्गा-शिवाचा, करी दान जो ज्ञान विद्या सुवाचा.

करू मान सत्कार मा-शारदा चा, शिवाजी औतार श्रीशंकराचा.

2

गणेशा! तुला मागणे हेचि नाथा! म्हणूँ मी शिवा ची मुखे पूर्ण गाथा.

उमा-पार्वती-अम्बिके पूज्य माता! शिवा-शंकरा! द्या मला ज्ञान आता.

3

समर्था! तुझे फार आभार देवा! तुझे श्लोक माझा महाज्ञान ठेवा.

शिवा! तो शिवाजी-स्वरूपें नमूँ मी, रचोनी शिवा-श्लोक मोदें रमूँ मी.

4

यदा ही अधर्मास येतो उकाळा, उभारावयाला फिरोनी सु-काळा.

जगी ईश घेतो पुन्हा जन्म नक्की, करायास आस्था सदिच्छेत पक्की.

5

शिवाजी जसा जाणता थोर राजा, सदाचार आदर्श ज्याचा समाजा.

भूतो भूयो भवेद्वा पुनर्वै, झाला, होईल, ऐसा पुन्हा ही.

6

भवानी प्रसन्ना सदा ती जयाला, दिली दिव्य संगीन श्रीने तयाला.

असा सद्गुणी आवडे जो जगाला, जगी धन्य राजा शिवाजी जहाला.

7

जगी निंद्य ते सर्व सोडून राही, जनीं वंद्य ते जो करी सर्व काहीं.

असा कोण राजा जगीं या जहाला, नमस्कार माझा शिवाजी नृपाला.

8

मनी वासना दुष्ट नाही जयाच्या, मनी बुद्धि पापिष्ट नाही जयाच्या.

कधीही जो नीति सोडून जातो, महाभाग राजा शहाणा शिवा तो.

9

मनी पाप-संकल्पना ज्यास नाही, मनी सत्य-संकल्पना ज्यास राही.

मनी वासना ज्यास ना त्रास देतीं, जनीं त्या, शिवाजी असे नांव देती.

10

जयाचे मनी ना कधी क्रो भारी, जयाचे मनी खेद नाही विकारी.

जयाचे मनी मत्सरा वाव नाही, जगी त्या शिवाला सदा मान राही.

11

मनी श्रेष्ठ धारिष्ट हे लक्ष्य ज्याचे, जनीं हीण-शब्दांस दुर्लक्ष त्याचे.

स्वयें सर्वदा नम्र वाचा वदे जो, जनीं तो शिवा सर्वदा मोद देतो.

12

जया स्वार्थ नाही, परार्थी खरा जो, वांच्छा करी दूसर्यांचे जरा जो.

रुजे ना जयाला कधी कर्म खोटे, रुते ते शिवाच्या मनीं दुःख मोठे.

13

सदा सर्वदा प्रीत ज्याला शिवाची, नसे त्यास पर्वा कधीही जिवाची.

सुखें सर्व दुःखें सदा तुल्य ज्याला, समाबुद्धियोगे खरे मुल्य त्याला.

14

सुखें सर्व ज्याला असोनी हि प्राप्त, मनीं जोचि स्वातंत्र्य उत्साह व्याप्त.

तया पुण्य ते पूर्वजन्मींच प्राप्त, शिवा तो करी सर्व चिंता समाप्त.

15

मनी मानसी-यातना जो जाणी, कधी शोक-चिंता मनी तो आणी.

तितीक्षा तया विग्रहे पूर्ण पृक्त, असा तो शिवाजी तदाकार उक्त.

16

प्रजेची सुरक्षा केली कदाही, तयाची अरीनेच केली तबाही.

कळे सत्य ऐसे जया सर्वकाही, शिवाजीस त्या काळ देतो गवाही.

17

विना वासना जो करी कर्म सारे, उरे कर्मयोगी मरोनी तथा, रे!

जसा जन्मतां मृत्यु नक्कीच येतो, तसा तो मरोनी पुन्हा जन्म घेतो.

18

जगी जन्म घेतीं मरोनीच सारे, तरी, मृत्यु नाही जया कीर्ति तारे.

जगी कीर्ति पावोनि जो नित्य झाला, शिवाजी असे नांव मृत्युंजयाला.

19

महावीर कित्येक आले नि गेले, उरें तेचि जे कीर्तिरूपी मेले.

जसे कृष्ण-रामादि जे मर्त्य नाही, तसा तो शिवाजी सदा स्तुत्य राही.

20

जया शास्त्रवाणीवरी भक्ति राहे, तया आत्मविश्वस ही शक्ति आहे.

मनी ज्यास देवावरी भाव पक्का, जनीं त्यास कोणीहि मारे क्का.

21

जयाला सदा सत्य हे देव आहे, तयाला मिथ्याचिये भेव राहे.

शिवं सुंदरं हे जया तत्त्व आहे, शिवा हीच संज्ञा तया विश्व वाहे.

22

जगी जन्म-जन्मीं सदा कीर्ति ज्याची, मनीं सर्वकाळीं वसे स्फूर्ति त्याची.

झिजोनी शिवा चंदनाचे परी तो, जनीं पावना धी सुगंधे करी तो.

23

जिजाऊ जया लाभली पूज्य आई, तयाचे मुखी यातना शब्द नाही.

सदा मायभूमीवरी गर्व ज्याला, इथेची मिळाला खरा स्वर्ग त्याला.

24

जपे सर्वदा नाम जो वेळ सारा, तया सर्व वेळीं प्रभूचा सहारा.

मनीं पार्वती-शंकराचा पहारा, मिळे मोक्ष त्याला, चुके येरझारा.

25

जयाचे मनीं ईश्वरी भाव राहे, कृपेने तया श्रीशिवा नित्य पाहे.

मृतात्म्यास त्या कोणता मार्ग राहे, जया द्वार नक्की खुले स्वर्ग आहे.

26

शिवाचे कृपेने असे साध्य सर्व, तरी कां धरावा मनी व्यर्थ गर्व.

सदा सर्वदा नाम त्याचे म्हणावे, भजावे रटावे वाचे वदावे.

27

कधी वीट वाटू नये गायनाचा, विना नाम-उच्चार वाचाळ वाचा.

सुखाने घडी लोटते नाम घेता, सदा नाम आहे मुखी तोच जेता.

28

करे नाम रक्षा, टळे विघ्न सारे, विना नाम त्याला व्यथा तिग्म मारे.

करोनी सदा अर्चना शंकराची, टळे आपदा सर्व ही त्या नराची.

29

भये जो भ्याला, असा तो शिवाजी, भवानी सदा छत्र त्याच्या जिवाची.

शिवा सारखा राखणारा जयाला, बळें कोण मारील दैवी शिवाला.

30

दिनानाथ ज्याचा महादेव आहे, तया काळ ही सर्वदा दूर राहे.

जया काळभैरो स्वयं राखणारा, तया काय चिंता करे कोंडमारा.

31

सदा सर्वदा देव सर्वत्र आहे, तुझ्या आंतल्या गुप्त आत्म्यास पाहे.

बघोनी तयाला कृपादृष्टि-भावे, तुझी पूर्ण चिंता सदा त्यास राहे.

32

यथा सांगतीं सर्व शास्त्रें पुराणें, यथासांग अंगी समाधान बाणे.

तरी तू चलावे तयांचे प्रमाणे, सदा सांगती हे, मनीषी शहाणे.

33

करी भ्रष्ट अंधार आदित्य जैसा, करी नष्ट विघ्नें तुझी शंभु तैसा.

तरी तू शिवाला सश्रद्धा भजावे, सदा नाम त्याचे मनी गात जावे.

34

कुठे चांगले काय तो बोध घ्यावा, स्वयं आपला लाभ नीत्या करावा.

करावे सदा कृत्य नांवें शिवाचे, वदावे सदा सर्वदा गोड वाचे.

35

असे अंतरी भाव भक्तास जैसा, वसे अंतरी तो महादेव तैसा.

तरी नित्य सांभाळुनी बा मनाला, करी कार्य,” हे तो शिवाजी म्हणाला.

36

शिवाने जसे कार्य संपन्न केले, जसे मातृभूमीस ह्या धन्य केले.

तयाचे असो नित्य ध्यानी प्रमाण, करोनी तया गान देवासमान.

37

गडांच्या शिरीं उच्च बांधोनि किल्ले, महाराष्ट्र-स्वातंत्र्य आपन्न केले.

अकस्मात मारोनि छापे झणाणें, चिरंजीव केली प्रथा ती शिवाने.

38

हनूमान औतार श्री शंकराचा, करी नष्ट तो दंभ लंकेश्वराचा.

शिवाजी तसा दूसरा तो शिवाचा, करी नाश पापाचरी दानवांचा.

39

महेशाचिया सेवका क्र पाहे, असा ह्या जगी वीर बा कोण आहे.

यथासांग लीला तया ह्याच ग्रंथी, बघोनी असो तुष्ट तो एकदंती.

40

मरोनी उरे कीर्ति ज्याची जगात, सरोनी उरे प्रीति त्याची जनांत.

जगी जन्म ज्याने दिला ह्या शिवाला, नमस्कार माझा सदा त्या शिवाला.

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(527)

Shivaji, Shivaji Chaupai, Marathi 5271

शिवाजींची चौपाई, मराठी

हानिं कुर्वन्ति धर्मस्य पापाचारा यदा यदा.

दुष्कृतानां विनाशाय हरः सृजति वै तदा.

शिव अवतरले कलियुगे, पुत्र-जिजाऊ स्वरूप.

नष्ट कराया भ्रष्टता, रूप मराठा भूप.

मंगल शुभ मुखमंडल ज्याचे, नाम सुमंगल शिवबा त्याचे.

शिव ओम् जय ओम् जय जय शिव ओम्.

जय ओम् शिव ओम्, जय जय जय ओम्.

1

सत् आचरणी, अद्भुत नृप जो, विश्रुत धर्मी तीन-जगीं तो.

झाला जगती कुठे ऐसा, भूप महात्मा, शिवबा जैसा.

शिव ओम् जय ओम् जय जय शिव ओम्.

जय ओम् शिव ओम्, जय जय जय ओम्

2

वीर बहादुर तो रणजेता, स्वातंत्र्याचा धीट प्रणेता.

त्याने शत्रु अधम वध केले, बहुत अपेशी वापस गेले.

शिव ओम् जय ओम् जय जय शिव ओम्.

जय ओम् शिव ओम्, जय जय जय ओम्

3

अचाट किल्ले रचले ज्याने, अनेक गड सर केले त्याने.

किल्लो-किल्ली चंचल फिरतो, म्हणतीं, पहाडी जणूँ उंदीर तो.

शिव ओम् जय ओम् जय जय शिव ओम्.

जय ओम् शिव ओम्, जय जय जय ओम्

4

एक अनेकांशीं तो लढतो, गनिमी-कावे करुनी बढतो.

अश्वरोह कुशल लढवय्या, रण मैदान तयाची शय्या.

शिव ओम् जय ओम् जय जय शिव ओम्.

जय ओम् शिव ओम्, जय जय जय ओम्

5

जिरें-टोप तो मनांत ठसतो, रुतबा ज्याचा चित्तीं बसतो.

स्थापन केले राज्य-हिंदवी, दैवत द्यावी तयास पदवी.

शिव ओम् जय ओम् जय जय शिव ओम्.

जय ओम् शिव ओम्, जय जय जय ओम्

6

धन्य! धन्य! तू जिजामाता! अमर करो तो तुला विधाता.

वाह! वाह! तू भारत माते! जिजा-शिवाचे केले नाते.

शिव ओम् जय ओम् जय जय शिव ओम्.

जय ओम् शिव ओम्, जय जय जय ओम्

शिवबा तू शाबास रे! दान तुझे अति खास.

तुझ्या विना अपुरा, गडे! भारतीय इतिहास.

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(528)

Shivaji, Shivaji the Great, Marathi 5281

महान राजा शिवाजी, मराठी

 

शिवाजी जैसा महान राजा, कुणीं या जगी तसा झाला.

अनेक आले नि पार झाले, कर्मयोगी असा बा मिळाला.

जसा शिवाजी महान राजा, तैसा कुणीं या जगी झाला.

बहुत आले नि नष्ट झाले, कधी कर्मयोगी असा ना मिळाला.

शिवाजी जैसा महान राजा, कुणीं या जगी तसा झाला.

1

कुणीं क्रू शठ अत्याचारी, नास्तिक दंभी कुणीं पुढारी.

कुणीं लालची लंपट भारी, नारी पूजा गंध ज्याला.

शिवाजी जैसा महान राजा, कुणीं या जगी तसा झाला.

अनेक आले नि पार झाले, कर्मयोगी असा बा मिळाला.

2

मातृभूमिसी प्रीति ज्याला, सत्ताधारण धोरण ज्याला.

कुणीं कृपण, कुणीं लोभी झाला, मोह-वासना अनंत ज्याला.

शिवाजी जैसा महान राजा, कुणीं या जगी तसा झाला.

अनेक आले नि पार झाले, कर्मयोगी असा बा मिळाला.

3

कुणीं तोडतो मंदिर मूर्ति, “धर्म-अंधळा कुणास कीर्ति.

स्वार्थ्य-हिताची जयास स्फूर्ति, सर्व-हिताची खंत त्याला.

शिवाजी जैसा महान राजा, कुणीं या जगी तसा झाला.

अनेक आले नि पार झाले, कर्मयोगी असा बा मिळाला.

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(529)

Shivaji, Shivaji Vandana, Marathi 5291

श्री शिवाजी वंदना, मराठी

शिवबा अमुचा त्राता, रे! माता पिता अन् भ्राता, रे!

तूच गुरु अन् तूच सखा, स्वातंत्र्याचा दाता, रे !

शिवबा अमुचा त्राता, रे! माता पिता अन् भ्राता, रे!

तूच गुरु अन् तूच सखा, स्वातंत्र्याचा दाता, रे !

1

गिरि शिखरांवर तू चढला, क्रमकांशीं तू लढला.

ध्वज किल्यांवर फडफडला, धन्य जिजाऊ माता, रे!

शिवबा अमुचा त्राता, रे! माता पिता अन् भ्राता, रे!

तूच गुरु अन् तूच सखा, स्वातंत्र्याचा दाता, रे !

2

मित्र तुझे बाजी ताना, शत्रु हरविले तू नाना.

वाटे, बघुनि तुझ्या लीला, गोकुळचा तू कान्हा, रे!

शिवबा अमुचा त्राता, रे! माता पिता अन् भ्राता, रे!

तूच गुरु अन् तूच सखा, स्वातंत्र्याचा दाता, रे !

3

अवतार शंकराचा न्यारा, सुत भारतमाते चा प्यारा.

गातो स्तुति तव, जग सारा, अमुचा तूच विधाता, रे!

शिवबा अमुचा त्राता, रे! माता पिता अन् भ्राता, रे!

तूच गुरु अन् तूच सखा, स्वातंत्र्याचा दाता, रे !

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(530)

Shivaji, Shivaji’s Birth-1, Marathi 5301

शिवाजी जन्म-1, मराठी

शुभ मंगल जेव्हां क्षण आला, पुत्र जिजामातेला झाला.

शुभ मंगल जेव्हां क्षण आला, पुत्र जिजामातेला झाला.

1

नाकी-डोळीं सुघड देखणा, लाऊँ तीट ! त्याला.

शुभ मंगल जेव्हां क्षण आला, पुत्र जिजामातेला झाला.

2

गुरुवर म्हणतीं, भाग्यवान हा, करील ह्या देशाला.

शुभ मंगल जेव्हां क्षण आला, पुत्र जिजामातेला झाला.

3

देवी भवानीच्या मायेने, शिव-अवतार ! आला.

शुभ मंगल जेव्हां क्षण आला, पुत्र जिजामातेला झाला.

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(531)

Shivaji, Shivaji’s Birth-2, Marathi 5311

शिवाजी जन्म-2, मराठी

यदा यदा हि धर्मस्य हानिर्भवति सज्जनाः

अभ्युत्थानमधर्मस्य पृथिव्यां जायते शिवः

गडे! आला जन्मी राज कुमार, भासे जैसा शिव-अवतार.

मुख-मंडल त्याचे दमदार, काम सुमंगल तो करणार.

गडे! आला जन्मी राज कुमार, भासे जैसा शिव-अवतार.

1

सुंदर त्याचा रंग सांवळा, जैसा शिव-शंकर तो नीळा.

लोचन त्याचे मोहक फार, त्याचे अंगीं गुण बेसुमार.

गडे! आला जन्मी राज कुमार, भासे जैसा शिव-अवतार.

2

होईल मोठा वीर मराठा, वर ऐसा दे, पंढरीनाथा!

स्वप्न करोनी तो साकार, राज्य हिंदवी हे करणार.

गडे! आला जन्मी राज कुमार, भासे जैसा शिव-अवतार.

3

हस्तीं त्याच्या रेखा मंगल, भाग्य ललाटीं त्याचे उज्ज्वळ.

योजुनि शूर गुणीं सरदार, होइल त्याचे शुभ सरकार.

गडे! आला जन्मी राज कुमार, भासे जैसा शिव-अवतार.

4

सद्गुण हा ची त्याचा ठेवा, वर ऐसा तू दे गा, देवा!

अश्व सवारी तो करणार, रण जिंके त्याची तलवार.

गडे! आला जन्मी राज कुमार, भासे जैसा शिव-अवतार.

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(532)

Shivaji, Shivaji’s Birth-3, Marathi 5321

शिवबा अंगाई गीत, मराठी

बा, शिवबा रे! नीज गडे शिवराया!

तुज वरी भवानी छाया.

बा, शिवबा रे! नीज गडे शिवराया!

तुज वरी भवानी छाया.

1

पातक मोंगल करिती, अपुल्या भूमीवर फिरती.

विषभरी तयांची काया, तुजवरी शिवाची माया.

बा, शिवबा रे! नीज गडे शिवराया!

तुज वरी भवानी छाया.

2.

हा देश स्वतंत्र असावा, जुलमींचा पाश नसावा.

दणदणीत व्हावे योद्धा, शत्रूंना नष्ट कराया.

बा, शिवबा रे! नीज गडे शिवराया!

तुज वरी भवानी छाया.

3.

होउनी जाणता राजा, तू करशिल मुक्त समाजा.

बघ, सगळे जग आतुर हे, तव अद्भुत शौर्य पहाया.

बा, शिवबा रे! नीज गडे शिवराया!

तुज वरी भवानी छाया.

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(533)

Shivaji, Simhagadh, Marathi-5331

गड आला पण सिंह आला, मराठी

सिंहगडाला जातो लढाया.

खरा कर्मयोगी, स्वामीनिष्ठ ताना.

सिंहगडावर ध्वज फडफडला, गड आला पण आला न ताना.

सिंहगडावर ध्वज शिवबाचा, गड आला पण सिंह आला.

1

आज हसूं की रडूँ कळे ना, हर्ष मुखावर, आग जिवाला.

सिंहगडावर ध्वज शिवबाचा, गड आला पण सिंह आला.

2

तान्हाजीने लगिन सोडुनी, कर्तव्याचा विडा उचलला.

सिंहगडावर ध्वज शिवबाचा, गड आला पण सिंह आला.

3

हळद लावुनी अपुल्या माथी, प्राण अर्पुनी, बघा निघाला.

सिंहगडावर ध्वज शिवबाचा, गड आला पण सिंह आला.

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(534)

Bharat Gaurav, Righteous King Shivaji, 5341

आदर्श शासक शिवाजी राजा, हिंदी

वीर शिवाजी, हैं सुख दाता, नीति परायण शासक हैं.

दीनन बंधु, किरपा सिंधु, विपदा शत्रु विनाशक हैं.

वीर शिवाजी, हैं सुख दाता, नीति परायण शासक हैं.

दीनन बंधु, किरपा सिंधु, विपदा शत्रु विनाशक हैं.

1

कर्म अनेक महान किये हैं, संकट विघ्न निवारक हैं.

सत्य सहायक अनुपम सज्जन, योगी तापस साधक हैं.

वीर शिवाजी, हैं सुख दाता, नीति परायण शासक हैं.

दीनन बंधु, किरपा सिंधु, विपदा शत्रु विनाशक हैं.

2

पुत्र बहादुर भारत माँ का, धर्मध्वजा का पूजक है.

राज्य हिंदवी स्वराज्य स्थापक, शिव अवतार शुभंकर है.

वीर शिवाजी, हैं सुख दाता, नीति परायण शासक हैं.

दीनन बंधु, किरपा सिंधु, विपदा शत्रु विनाशक हैं.

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(535)

Shivaji, Wise King Shivaji, Marathi 5351

जाणता राजा, मराठी अभंग

जाणता जो राजा, रक्षितो समाजा.

मालोजी ज्याचा आजा, शिवाजी तो.

1

पुत्र शहाजींचा, बाळ जिजाऊँचा.

नृप मराठ्यांचा, शिवाजी तो.

जाणता जो राजा, रक्षितो समाजा.

मालोजी ज्याचा आजा, शिवाजी तो.

2

जीव मावळ्यांचा, कोणी नाही ज्यांचा.

प्रिय सखा त्यांचा, शिवाजी तो.

जाणता जो राजा, रक्षितो समाजा.

मालोजी ज्याचा आजा, शिवाजी तो.

3

बघोनी अशांति, केली ज्याने क्रांति.

दया क्षमा शांति, शिवाजी तो.

जाणता जो राजा, रक्षितो समाजा.

मालोजी ज्याचा आजा, शिवाजी तो.

4

तान्हा बाजी ज्याचे, वीर संगी साचे.

पुढे सिद्धि नाचे, शिवाजी तो.

जाणता जो राजा, रक्षितो समाजा.

मालोजी ज्याचा आजा, शिवाजी तो.

5

सदाचार राशी, सदा ज्याचे पाशी.

शिष्य रामदासी, शिवाजी तो.

जाणता जो राजा, रक्षितो समाजा.

मालोजी ज्याचा आजा, शिवाजी तो.

6

तुकोबाने ज्याला, दिली रुद्रमाला.

धन्य धन्य झाला, शिवाजी तो.

जाणता जो राजा, रक्षितो समाजा.

मालोजी ज्याचा आजा, शिवाजी तो.

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(539)

Savan, Savan Arrival, Hindi 5391

सावन आगमन

लाल पीले फूल खिले, पंछी सुंदर चहक रहे.

कलरव सुन कर नन्हे मुन्ने, भागे-भागे आते हैं.

सावन की ऋतु आते ही, नई उमंगें लाता है.

1

मंगल मौसम फूलों का, मंजुल झूला झूलों का,

मंद गुलाबी शीतल सावन, तन में सिहरन भरता है.

सावन की ऋतु आते ही, नई उमंगें लाता है.

2

रंग बसंती छाया है, बाग में ईश्वर आया है.

हरा हरा सा बिछा गलीचा, उसका स्वागत करता है.

सावन की ऋतु आते ही, नई उमंगें लाता है.

3

मोर पपीहा नाचे रे, कोयल कूहू बोले है.

हरा हरा सा शावक तोता, मिट्ठू मीया कहता है.

सावन की ऋतु आते ही, नई उमंगें लाता है.

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(540)

Savan, Basant Barkha, Hindi 5401

बसंत राग, तीन ताल

बसंत बरखा

रंग गुलों की शोभा न्यारी, गंध सुगंधित हिरदय हारी.

रंग गुलों की शोभा न्यारी, गंध सुगंधित हिरदय हारी.

1

बसंत बरखा बरसत रिमझिम.मंजुल रंगों की फुलवारी.

रंग गुलों की शोभा न्यारी, गंध सुगंधित हिरदय हारी.

2

मोर पपीहा कोयल कारी. कूजत कूहु कूहु बारी-बारी.

रंग गुलों की शोभा न्यारी, गंध सुगंधित हिरदय हारी.

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(541)

Sarita, Ganga Maai, Hindi-5411

गंगा सरिता

गंगा माई तू मंगल है माता, तेरा अंचल है सुंदर सुहाना.

तेरी मौजों में है गुनगुनाता, मैया! संगीत सरगम तराना.

गंगा माई तू मंगल है माता, तेरा अंचल है सुंदर सुहाना.

1

निकली शंकर की काली जटा से, तुझको भगिरथ ने लाया धरा पे.

तुझको जन्हू की कन्या है माना, तेरा इतिहास पावन पुराना.

गंगा माई तू मंगल है माता, तेरा अंचल है सुंदर सुहाना.

2

तेरे जल में हिमालय की माया, तुझमें जमुना का पानी समाया.

शरयु को भी गले से लगाया, तूने उनको भी दीनी गरिमा.

गंगा माई तू मंगल है माता, तेरा अंचल है सुंदर सुहाना.

3

तेरा तीरथ है लीला जगाता, सारे पापों से मुक्ति दिलाता.

सारी नदियों में तू भागवाना, इसी कारण तू सबकी बड़ी मां.

गंगा माई तू मंगल है माता, तेरा अंचल है सुंदर सुहाना.

तेरी मौजों में है गुनगुनाता, मैया! संगीत सरगम तराना.

गंगा माई तू मंगल है माता

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(623)

Sanskrit, Sanskrit Vani Ashtakam, 6231

गीर्वाणभारती

भाषा सुमधुरा दिव्या, रम्या गीर्वाणभारती,

सर्वोत्तमा च श्रेष्ठा च, देववाणी च या मता.

2

देशवैदेशिकानां च भाषाणां जननी शुभा,

दोषविकारशून्या सा व्याकरणसुमंडिता.

3

गिरा समाधिमास्थाय साक्षात्कृता महर्षिभिः,

आशासिता गणेशेन गीर्देव्या विश्वकर्मणा.

4

ज्ञानविज्ञानसंयुक्ता छंदस्सङ्गीतसंयुता,

गेया ज्ञेया च स्मर्तव्या, वन्द्या हृद्या मनोरमा.

5

न कठिना न क्लिष्टा च ना न्यूना नानियंत्रिता,

सुरसा च सुबोधा च ललिता सरला तथा.

6

अमृता मञ्जुला पुण्या मनोज्ञा विश्ववन्दिता,

गीता वेदेषु शास्त्रेषु रामायणे च भारते.

7

विरचिता गणेशेन सरस्वत्या च निर्मिता,

वाल्मीकिना च व्यासेन, कालिदासेन गुम्फिता.

8

संगीतगीतपद्यैश्च चरित्रं रामकृष्णयोः,

छन्दोरागेषु वृत्तेषु रत्नाकरेण प्रस्तुतम्.

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(624)

Sanskrit, Vande Bharat Mataram, 6241

वन्दे भारतमातरम्

वामे च दक्षिणे यस्या, रत्नाकरोस्ति पादयोः,

हिमाद्रिर्मुकुटो शुभ्रो, वन्दे भारतमातरम्.

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्

1

राधा सीता सुकन्यासु कालीन्दिर्जाह्नवी तथा,

नर्मदा ब्रह्मपुत्रा च, वन्दे भारतमातरम्.

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्

2

रामकृष्णौ सुपुत्रेषु भीमार्जुनौ च मारुतिः,

वाल्मीकिः पाणिनिर्व्यासो, वन्दे भारतमातरम्.

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्

3

परस्त्री मातृवद्यत्र परकन्या स्वकन्यका,

आत्मवच्च परा जामिः, वन्दे भारतमातरम्.

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्

4

यत्र पत्नी महालक्ष्मी पतिश्च परमेश्वरः,

सुता रत्नं सुतः सिंहः, वन्दे भारतमातरम्.

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्.

5

वाङ्मये वेदवेदांगे रामायणं च भारतम्,

पञ्चतन्त्रं निघण्टुश्च, वन्दे भारतमातरम्.

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्,

6

भूमिः स्वर्णमया यत्र जलममृतवत्तथा,

वायौ च सौरभं यस्याः, वन्दे भारतमातरम्.

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्

7

कर्मभूमिं, धर्मभूमिं, रणभूमिं, तपोधराम्,

पुण्यभूमिं, मातृभूमिं, वन्दे भारतमातरम्.

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्

वन्दे भारतमातरम्, वन्दे मातरम्

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(625)

Sanskrit, Krishna Sakha, 6251

बिलावल राग

कृष्ण सखे

ब्रह्मा त्वमेव, विष्णुस्त्वमेव, शम्भुस्त्वमेव, कृष्ण सखे!

सर्गस्त्वमेव, स्वर्गस्त्वमेव, सर्वं त्वमेव, कृष्ण हरे!

1

ब्रह्मस्वरूपम्, अव्यक्तरूपम्, अचिन्तनीयं, क्लिष्टतरम्.

कथनातीतं, स्मरणातीतं, सुगमं सुलभं कृष्ण न ते.

2

विष्णुस्वरूपं, मानवरूपं, दृष्टिगोचरं, हर्षकरम्.

लोचनकमलं, निर्मलविमलं, सर्वसुन्दरं, लक्ष्मीपते.

3

देवकीनन्दं, नन्दनन्दनं, राधारमणं, करुणपरम्.

तिलकचन्दनं, जगद्वन्दनम्, भज गोविन्दं, हरे हरे.

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(626)

Sanskrit, Ishaya Namah-6261

ईशाय नमः

ईशाय, विघ्नेश्वराय, जगदीश्वराय, सत् ओम्.

दैवाय, विश्वंकराय, भुवनेश्वराय, सत् ओम्.

1

रुद्राय, शिवशंकराय, दुखभंजनाय, हर ओम्.

भद्राय, गंगाधराय, श्री त्र्यंबकाय, हर ओम्.

2

रामाय, रघुनंदनाय, मधुचंदनाय, हरि ओम्.

रामाय, सीतावराय, पुरुषोत्तमाय, हरि ओम्.

3

श्यामाय, बंसीधराय, पीतांबराय, जय ओम्.

कृष्णाय, राधावराय, दामोदराय, जय ओम्.

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(627)

Sanskrit, Sharada Smaraniya, 6271

शारदा स्मरणीया

शारदा सदा स्मरणीया, स्वरदा वरदा स्मरणीया,

शारदा सदा स्मरणीया, स्वरदा वरदा स्तवनीया.

1

अनुकम्पा हृदि धरणीया, सेवा मनसा करणीया,

भारतजननी नमनीया, संस्कृतवाणी स्तवनीया.

शारदा सदा स्मरणीया, स्वरदा वरदा स्मरणीया

2

नहि सुखशय्या शयनीया, न नीचचिन्ता चयनीया,

 रजःकामना शमनीया, तमोवासना दमनीया.

शारदा सदा स्मरणीया, स्वरदा वरदा स्मरणीया

3

सततसुबुद्धिर्धरणीया, मानसशुद्धिर्वरणीया,

शुभा सरणिरनुसरणीया, सत्सङ्गतिरभिलषणीया.

शारदा सदा स्मरणीया, स्वरदा वरदा स्मरणीया

4

जातिकुप्रथा त्यजनीया, बन्धुभावना भजनीया,

अखिलसङ्घता करणीया, विश्वे समता भरणीया.

शारदा सदा स्मरणीया, स्वरदा वरदा स्मरणीया

5

प्रमत्तकुमतिर्दहनीया,       आगतहानिस्सहनीया,

प्रजाप्रतिष्ठा वहनीया, मया प्रतिज्ञा ग्रहणीया.

शारदा सदा स्मरणीया, स्वरदा वरदा स्मरणीया

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(628)

Sanskrit, Surya-Navagraha-6281

बिलावन राग

सूर्य-नवग्रह वंदना

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं च बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं च राहुं च केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

1

आदित्यं भास्वरं भानुं रविं सूर्यं प्रभाकरम्.

अरुणं मिहिरं मित्रं पूर्णभक्त्या नमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं च बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं च राहुं च केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

2

तमोरिं तारकानाथं पापघ्नं रात्रिभूषणम्.

इन्दुं चन्द्रं विधुं सोमं दण्डवत्प्रणमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं च बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं च राहुं च केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

3

मङ्गलाङ्गं महाकायं ग्रहराजं ग्रहाधिपम्.

अङ्गारकं महाभागं साष्टाङ्गः प्रणमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं च बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं च राहुं च केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

4

बुद्धिमतां बुधं श्रेष्ठं नक्षत्रेशं मनोहरम्.

बुद्धिदं पुण्डरीकाक्षं कृताञ्जलिर्नमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं च बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं च राहुं च केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

5

सौम्यमूर्तिं ग्रहाधीशं पीताम्बरं बृहस्पतिम्.

तारापतिं सुराचार्यं प्रणिपातो नमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं च बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं च राहुं च केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

6

भार्गवं वृष्टिकर्तारं स्वभासाभासिताम्बरम्.

प्रकाशं शङ्करं शुक्रं सायं प्रातो नमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं च बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं च राहुं च केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

7

विघ्नराजं यमं रौद्रं सर्वपापविनाशकम्.

शनीश्वरं शिवं शुभ्रं शतशः प्रणमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं च बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं च राहुं च केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

8

विप्रचित्तिसुतं राहुं रक्ताक्षमर्धविग्रहम्.

सिंहिकानन्दनं दैत्यं पुनः पुनो नमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं च बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं च राहुं च केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

9

रुद्रप्रियग्रहं कालं धूम्रकेतुं विवर्णकम्.

लोककेतुं महाकेतुं मुहुर्मुहुर्नमाम्यहम्.

नमामि भास्करं चन्द्रं मङ्गलं च बुधं गुरुम्.

शुक्रं शनिं च राहुं च केतुयुक्तान्नवग्रहान्.

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(629)

Sanskrit, Vande Ganeshvaram, 6291

वन्दे गणेश्वरम्

शतवारमहं वन्दे लम्बतुण्डिं गणेश्वरम्.

एकदन्तं च हेरम्बं चारुकर्णं गजाननम्.

1

गं गं गं गं गणेशं श्रीं चतुर्बाहुं महोदरम्.

विश्वमूर्तिं महाबुद्धिं वरेण्यं गिरिजासुतम्.

2.

गणपतिं परब्रह्म शूर्पकर्णं करीमुखम्.

पशुपतिमुमापुत्रं लम्बोदरं गणाधिपम्.

3.

हस्तिमुखं महाकायं ढुण्ढिं सिद्धिविनायकम्.

वक्रतुण्डं चिदानन्दम्आम्बिकेयं द्विमातृजम्.

4

.महाहनुं विरूपाक्षं ह्रस्वनेत्रं शशिप्रभम्.

पीताम्बरं शिवानन्दं देवदेवं शुभाननम्.

5

सर्वमङ्गलमाङ्गल्यं प्रभुं मूषकवाहनम्.

ऋद्धिसिद्धिप्रदातारं विघ्नहरं विनायकम्.

6

.जगदीशं शिवापुत्रम् आदिनाथं क्षमाकरम्.

अनन्तं निर्गुणं वन्द्यं यशस्करं परात्परम्.

7

गौरीपुत्रं गणाधीशं गजवक्त्रं कृपाकरम्.

भालचन्द्रं शिवानन्दं पार्वतीनन्दनं भजे.

8

आदिपूज्यं शुभारम्भं ज्ञानेशं मोदकप्रियम्.

प्रातः सायमहं वन्दे गणेशं च सरस्वतीम्.

9

प्राप्तुं ज्ञानं युवाभ्याञ्च विद्यां भाग्यं शुभान्वरान्.

नमस्कृत्य कृताञ्जलिः रत्नाकरो भजाम्यहम्.

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(630)

Sanskrit, Self Deciplene-6301

योगानुशासनम्

चित्तवृत्तिनिरोधो हि, ज्ञातं योगानुसाधनम्,

स्वरूपसमवस्थानम्, अथ योगानुशासनम्,

1

निर्ममता च निष्कामो, निग्रहश्च तटस्थता,

क्लेशो न क्लिष्टकार्येषु, न प्रीतिः प्रियकर्मसु,

इति योगस्य पालनम्, मतं योगानुशासनम्.

2

समं सुखञ्च दुःखञ्च, लाभालाभौ जयाजयौ,

समत्वं शत्रुमित्रेषु, तथा मानापमानयोः,

इति योगस्य लक्षणम्, मतं योगानुशासनम्.

3

प्रीतिदयाक्षमायुक्तः, क्रोधलोभविवर्जितः,

यस्मान्नोद्विजते कोपि, किञ्चिन्नोद्विजते च यम्,

इति योगस्य धारणम्, मतं योगानुशासनम्.

4

निस्स्पृहो निर्ममो युक्तो, निर्विषादो निरामयः,

विहीनः कर्तृभावेन, निष्ठो भक्तो विना रजः,

इति योगस्य साधनम्, मतं योगानुशासनम्.

5

निर्मलो निरहङ्कारः, शोकदोषविवर्जितः,

आत्मयुक्तो घृणामुक्तः, स्थिरमतिर्मनोबलः,

इति योगस्य चालनम्, मतं योगानुशासनम्.

6

अनिकेतो ब्रह्मचारी, निरासक्तो निरङ्कुशः,

संयतात्मा मिताहारी, निर्दुःखः शान्तमानसः,

इति योगस्य वाहनम्, मतं योगानुशासनम्.

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(631)

 Self Discipline, Hindi 6311

नाम इसी का योग है,

नाम इसी का योग, है नाम इसी का योग,

तू जान इसी को योग.

1

तन निर्मल हो, मन निश्चल हो,

दूर हों सुख के भोग, है नाम इसी का योग,

2

नर निर्भय हो, दृढ़ निश्चय हो,

संयम का उपयोग, है नाम इसी का योग,

3

स्थल प्रशांत हो, चित नितांत हो,

सत् जन का संजोग, है नाम इसी का योग,

4

कोई न अपना, ना ही पराया,

सम जाने सब लोग, है नाम इसी का योग,

5

पूर्ण अहिंसा, तन मन वच से,

कोह रहे ना सोग, है नाम इसी का योग,

6

फल की कामना, विषय वासना,

ना हों ये सब रोग, है नाम इसी का योग.

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(632)

Self Discipline, Sanskrit 6321

योग, संस्कृत

विद्धि त्वम्, एवं खलु योगम्, त्वम् जा निहि यो गम् ।

विद्धि त्वम्, एवं खलु योगम्, त्वम् जा निहि यो गम् ।

1

निर्मलतनुषा, निश्चलमनसा ।

विग्रहनिग्रहणम्, त्वम् जानीहि योगम्।

विद्धि त्वम्, एवं खलु योगम्, त्वम् जा निहि यो गम् ।

2

निर्भयभवनं, निश्चयकरणम् ।

सुखबन्धनत्यजनम्, त्वम् जानीहि योगम्।

विद्धि त्वम्, एवं खलु योगम्, त्वम् जा निहि यो गम् ।

3

प्रशान्तस्थानं, नितान्तध्यानम् ।

सज्जनसंयोगम्, त्वम् जानीहि योगम्।

                                    विद्धि त्वम्, एवं खलु योगम्, त्वम् जा निहि यो गम् ।

4

परजनभजनं, यद्वत् स्वजनम् ।

जनगणपरिचरणम्, त्वम् जानीहि योगम्।

विद्धि त्वम्, एवं खलु योगम्, त्वम् जा निहि यो गम् ।

5

न विषयग्रहणं, धनसंग्रहणम् ।

न क्रोधरागमदम्, त्वम् जानीहि योगम्।

विद्धि त्वम्, एवं खलु योगम्, त्वम् जा निहि यो गम् ।

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(633)

Self Discipline, Marathi 6331

644

Ignorance, Hindi 6441

अज्ञान

[Female Voice]

मैं ही एक सयानी, बाकी, दुनिया पानी पानी,

कौन कहां पर क्या करता है, रखती मैं निगरानी.

1

मैं हूं गोरी चांद चकोरी, सब के हृदय लुभानी,

दुनिया मेरे पद के नीचे, मैं हूं सब की रानी.

2

मुझ में ब्यूटी, मैं हूं क्यूटी, मैं दुनिया में सब से झूटी,

कोई मेरा भेद जाने, मैं हूं सब की नानी.

3

[Male Voice]

मंद बुद्धि ये क्यों हैं आते, नारी जग पर कलंक देते,

इन को प्रभु जी दो सद्बुद्धि, या दो काला पानी.

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634

Rashtra Gaan, Marathi 6341

दादरा ताल

भारत-राष्ट्रगीत

[Group Singing]

भारतं सुंदरं स्वर्णभूमि, आम्हां सर्वांची ही सर्गभूमि.

कर्मवीरांची ही कर्मभूमि, हिला शतवार वन्दे नमामि.

1

राष्ट्र हे कीर्ति सम्पन्न भारी, टोप ह्याचा महत्तम हिमाद्रि.

शीत सरितांचे पावन पाणी, पूज्य संतांची ही पुण्यभूमि.

2

इथे वायूत सौरभ सुगंधी, इथे आकाशपाताळ संधि.

चंद्रसूर्याची कुडलें कानीं, पृथ्वीच्या पाठी ही स्वर्गभूमि.

3

मृग शार्दूल गज उंट प्राणी, मोर कोकीळ मिट्ठूची गाणीं.

हर्ष सौंदर्य श्रावण मासीं, अशी भूमि निसर्गाची राणी.

4

पर दारा इथे वन्द्य माता, पर दादा इथे बंधु तात्या.

सभ्यता नम्रता सर्व अंगी, सौख्य शांति अहिंसा ईमानी.

5

नर नारी इथे वीर ज्ञानी, भक्त योगी कलाकार दानी.

स्नेह सेवा इथे खानदानी, दिव्य तत्त्वांची ही हिंदुभूमि.

माते जय जय तुझी तन-मनानी,

मुलें मंगल तुझी सर्व आम्हीं.

जय हो जय हो, तुझी जय हो जय हो,

जय हो जय हो, सदा जय हो जय हो.

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636

Yoga, Marathi

जाण तू, ह्यास म्हणावे योग

तू, जाण ह्यास रे, योग. तू, जाण ह्यास ग, योग.

जाण तू, ह्यास म्हणावे योग. तू, जाण ह्यास रे, योग

तू, जाण ह्यास ग, योग.

1

तन निर्मळ , मन निश्चळ हो,

दूर असों सुख भोग. तू, जाण ह्यास रे, योग्

तू, जाण ह्यास ग, योग.

2

नर निर्भय व, दृढ़ निश्चय हो,

संयमाचा उपयोग,

तू, जाण ह्यास रे, योग. तू, जाण ह्यास ग, योग.

3

स्थळ प्रशांत व, मन नितांत हो,

सज्जनांचा संयोग,

तू, जाण ह्यास रे, योग. तू, जाण ह्यास ग, योग.

4

कुणी न आपला, कुणी न मापला,

समान सगळे लोक,

तू, जाण ह्यास रे, योग तू, जाण ह्यास ग, योग.

5

पूर्ण अहिंसा, तन मन वाणी,

क्रोध नसो, न च शोक,

तू, जाण ह्यास रे, योग. तू, जाण ह्यास ग, योग.

6

फळद कामना, विषय वासना,

नसोत असले रोग,

तू, जाण ह्यास रे, योग, तू, जाण ह्यास ग, योग.

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(635)

Bharat Rashtra Gaan, Sanskrit-6351

दादरा ताल

भारत-राष्ट्रगीतम्

[Group Singing]

वामे दक्षिणे यस्या रत्नाकरोस्ति पादयोः,

हिमाद्रिर्मुकुटो शुभ्रो, वन्दे भारतमातरम्.

भारतं कर्मभूमिरस्माकं, भारतं स्वर्गभूमिरस्माकम्.

1

अस्ति राष्ट्रं समृद्धं सुवर्णं, यस्य तुङ्गो हिमाद्रिः किरीटम्,

पीयूषं हि नदीषु नीरम्, पावनं पादयोः सिन्धुतोयम्.

2

देवभूमिः शुचिरीश्वरस्य, दिव्यशांन्तेर्निधानं नरस्य,

वसुधैव कुटुंबं पवित्रम्, विश्वे अर्पयति पुण्यं निधानम्.

3

रविरश्मिः प्रभा यस्य उक्ता, कुण्डले तारका यस्य मुक्ता,

दर्शनम् अस्य देशस्य रम्यम्, वर्णनं सुन्दरं ज्ञानगम्यम्.

4

यत्र सिंहा हरिणा अटन्ति, शुकाः पिका मयूरा रटन्ति,

सर्वभूतेषु प्रीतिश्च सख्यम्, प्रकृतेः रक्षणं कर्म मुख्यम्.

5

परनारी मता यत्र माता, परपुमान् तथा स्वस्य भ्राता,

यत्र शांतिरहिंसा नरत्वम्, अनुकम्पा सदाचारतत्त्वम्.

6

यस्य पुत्राश्च कन्याश्च वीराः, ज्ञानक्षेत्रे रणे ये धीराः,

वेदवाक्यं मतं यत्र मन्त्रम्, वाङ्मये भारतं पञ्चतन्त्रम्.

भारतं कर्मभूमिरस्माकं, भारतं स्वर्गभूमिरस्माकम्.

 

नमो नमो नमो मातृभूमे, नमो नमो नमो दातृभूमे.

नमो नमो नमः पुण्यभूमे, नमो नमो नमः पूज्यभूमे.

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643

Sarita, Godavari Devi, Hindi-6431

दादरा ताल

देवी गोदावरी की कथा

स्थायी

गीत स्वरदा ने मंजुल है गाया, साज रद मुनि ने बजाया

रत्नाकर से है मंगल रचाया, रामायण को है सुंदर सजाया ।।

 1

नौ नदियों में मानी पुरानी, नद गोदावरी सबकी रानी

नीर इसका है तीरथ कहाया, मठ तट पर मुनि ने बनाया ।।

 2

विंध्या वन से मुनि जब था धाया, तट गोदावरी पर था आया

पाँच वट की जहाँ पर थी छाया, पंचवटी का वो तीरथ बसाया ।।

3

नीर इसका है अमृत की धारा, जिसका दैवी महा गुण है भारा

इसका तीरथ, चलाय कर माया, पूज्य दक्षिण की गंगा कहाया

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Sarita, Godavari Devi, Hindi-6421

बालानंद छन्द

नर्मदा देवी

अमृत कहता जग सारा, नदी नर्मदा की धारा ।

विंध्या गिरिवर से निकली, सातपुड़ा से फिर उछली ।

aम राम का तू कहती, पश्चिम दिश को है बहती ।

राम चरण से, aम स्मरण से ।

पवित्र जल का फव्वारा, महान नदिया की धारा ।। 1

 

तीरथ तेरा है न्यारा, देव देवता का प्यारा ।

निर्मल ये नीला पानी, जिसका नa कोई सानी ।

तू नदिया शुभ है गहरी, स्वर्गगंग सी तू नहरी ।

राम चरण से, aम स्मरण से ।

पावन कहता जग सारा, मंगल सरिता की धारा ।। 2

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Sarita, Yamuna Rani, Hindi-6401

यमुनाराणी

जमुनारानी पवित्रपानी, राधाकृष्णविलासधरा,

पापहारिणी तापहारिणी, व्रजवासीजनचित्तहरा.

1

गिरिविहारिणी हृदयमोहिनी, गोकुलभीतिविनाशकरा,

शुभसुहासिनी मधुरभाषिणी, धेनुवत्समनमोदभरा.

2

विमलवारिणी कमलधारिणी, सीताराघववरग्रहिणी,

मंगलवदनी चंचलरमणी, पूज्यनीरगंगाभगिनी.

3

अघटनाशिनी अघनिषूदिनी, स्वर्गसेउतरी सुरतटिनी,

गोपमोहिनी गोपिमोदिनी, मधुबनदूबहरितकरिणी.

4

सुंदरललना मंजुलबैना, नरपशुतरुआह्लादखरा,

गहरापानी अनहदवाणी, कर्णमधुरसुरनादभरा.

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